Oral Health Library · 10 min read · हिन्दी
मेरा मुंह हमेशा सूखा क्यों रहता है?
मुंह हमेशा सूखा रहने की वजह शरीर में पानी की कमी, मुंह से सांस लेना, दवाएं, तंबाकू या लार पर असर डालने वाली कोई बीमारी हो सकती है। सूखापन लगातार बना रहे तो डेंटिस्ट या डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। खासकर जब खाने, बोलने या नींद पर असर पड़ रहा हो। देखभाल का मकसद कारण पता करना और दांतों व मुंह को नुकसान से बचाना है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-10-03
Key points
- लगातार मुंह सूखने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें शरीर में पानी की कमी, मुंह से सांस लेना, दवाएं और लार कम बनना शामिल हैं।
- लक्षण बने रहें या बार-बार लौटें तो डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूरी है। खासकर जब खाने, बोलने या नींद पर असर हो।
- डॉक्टर का बताया ट्रीटमेंट खुद से बंद न करें। उसे लिखने वाले डॉक्टर से रिव्यू कराएं।
- लार कम होने से दांतों में सड़न, मुंह में दर्द और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
- दो हफ्ते बाद भी ठीक न होने वाला अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना वजह खून आना या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो, तो जल्द जांच कराएं।
मुंह सूखने का क्या मतलब है?
मुंह सूखने का मतलब है कि मुंह में जितनी नमी होनी चाहिए, उससे कम महसूस होती है। मेडिकल भाषा में इसे ज़ेरोस्टोमिया कहते हैं। ऐसा तब हो सकता है जब लार बनाने वाली ग्रंथियां कम लार बनाएं। हालांकि कुछ लोगों को लार का बहाव सामान्य लगने पर भी सूखापन महसूस होता है।
लार सिर्फ मुंह गीला नहीं रखती। यह खाना चबाने, निगलने, स्वाद पहचानने और बोलने में मदद करती है। यह खाने के छोटे टुकड़े साफ करती है, दांतों को एसिड से बचाती है और मुंह की अंदर की परत को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
पसीना आने या मुंह खोलकर सोने के बाद थोड़ी देर का सूखापन, बार-बार होने वाले सूखेपन से अलग है। अगर बोलने या खाना निगलने के लिए अक्सर पानी चाहिए, तो इसे सिर्फ प्यास न समझें। जांच कराएं।
- मुंह के अंदर चिपचिपापन या गाढ़ी, धागे जैसी लार।
- जीभ सूखी, खुरदरी लगना या उसमें जलन होना।
- होंठ फटना या मुंह के कोनों में दर्द और छिलन होना।
- बिस्कुट या रोटी जैसी सूखी चीजें खाने में परेशानी।
- स्वाद बदलना, मुंह से बदबू आना या नकली दांतों का गम्स यानी मसूड़ों से रगड़ खाना।
- मुंह सूखने की वजह से रात में नींद खुलना।
रोजमर्रा की किन वजहों से मुंह सूख सकता है?
डिहाइड्रेशन का मतलब है शरीर में पानी और तरल की कमी। गर्मी, पसीना, बुखार, उल्टी या दस्त इसकी वजह बन सकते हैं। मुंबई के उमस भरे मौसम में पसीने से कितना पानी निकल गया, इसका अंदाजा कई बार नहीं लगता।
मुंह से सांस लेने पर उसकी नमी कम होती है। नाक बंद होना, खर्राटे या मुंह खोलकर सोना, सुबह उठते ही होने वाले सूखेपन की वजह हो सकते हैं। एसी वाले कमरे में सूखापन ज्यादा महसूस हो सकता है।
घबराहट से भी कुछ समय के लिए मुंह सूख सकता है। लेकिन सूखापन बना रहे तो दूसरे कारणों की जांच किए बिना इसे सिर्फ तनाव न मानें।
- लंबे समय तक पानी न पीना, जैसे सफर या व्रत के दौरान।
- तंबाकू का इस्तेमाल, चाहे धूम्रपान हो या चबाने वाला तंबाकू।
- शराब पीना, जिससे शरीर में पानी की कमी और मुंह में जलन बढ़ सकती है।
- बार-बार चाय या कॉफी पीना, जिससे कुछ लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
- नाक बंद होने के कारण अक्सर मुंह से सांस लेना।
- गुटखा या सुपारी खाना। ये मुंह को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लार बढ़ाने के लिए इनका इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
क्या दवाओं या किसी बीमारी से मुंह लगातार सूख सकता है?
डॉक्टर की लिखी हुई और बिना पर्चे के ली जाने वाली कई दवाएं लार कम कर सकती हैं या मुंह सूखा महसूस करा सकती हैं। सूखापन कब शुरू हुआ, यह जानना जरूरी है। यह किसी दवा के शुरू होने या बदलने के बाद हो सकता है। डॉक्टर के बताए ट्रीटमेंट को खुद से बंद या न बदलें। उसे लिखने वाले डॉक्टर से रिव्यू कराएं।
कुछ बीमारियां शरीर में पानी के संतुलन या लार बनने पर असर डालती हैं। सिर्फ मुंह सूखने से इनमें से किसी बीमारी का पता नहीं चलता। दूसरे लक्षण और जांच में मिली जानकारी के आधार पर तय होता है कि टेस्ट की जरूरत है या नहीं।
बुजुर्गों में कई कारण एक साथ हो सकते हैं। जैसे कई दवाएं लेना, कम पानी पीना और दूसरी बीमारियां। लगातार सूखेपन को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर न छोड़ें।
- डायबिटीज में प्यास और सूखापन हो सकता है, खासकर जब ब्लड शुगर ज्यादा हो। बार-बार पेशाब आना, थकान या बिना वजह वजन घटना भी डॉक्टर को दिखाने की वजह हैं।
- शोग्रेन बीमारी में शरीर का बचाव करने वाला इम्यून सिस्टम गलती से नमी बनाने वाली ग्रंथियों पर हमला करता है। इसमें आंखों और मुंह में एक साथ सूखापन हो सकता है।
- लार बनाने वाली ग्रंथियों की समस्या से लार का बहाव बदल सकता है। गाल के पास या जबड़े के नीचे दर्द या सूजन हो, खासकर खाते समय, तो जांच जरूरी है।
- सिर या गर्दन के रेडिएशन ट्रीटमेंट से लार बनाने वाली ग्रंथियों को नुकसान हो सकता है। यह ट्रीटमेंट करवा चुके लोगों को मुंह की लगातार देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।
- जिन बीमारियों में पीना या निगलना मुश्किल हो, उनमें पानी कम लिया जा सकता है और सूखापन बढ़ सकता है।
मुंह किस समय सूखता है, इससे क्या पता चलता है?
सूखापन किस तरह और कब होता है, इससे उपयोगी सुराग मिलते हैं। लेकिन इससे कारण पक्का नहीं होता। ध्यान दें कि मुंह सिर्फ सुबह उठने पर सूखता है, पूरे दिन या मुख्य रूप से खाते समय। यह भी देखें कि परेशानी अचानक शुरू हुई या धीरे-धीरे बढ़ी।
सुबह का सूखापन मुंह से सांस लेने से जुड़ा हो सकता है। पूरे दिन के सूखेपन के कई कारण हो सकते हैं। अगर सूखे मुंह के कारण बार-बार नींद खुले और तेज खर्राटे आते हों, तो जांच कराएं। खासकर अगर किसी ने सोते समय आपकी सांस रुकते देखी हो।
स्लीप एप्निया में सोते समय सांस बार-बार कुछ देर के लिए रुकती है। खर्राटों के साथ नींद में दम घुटने जैसा लगे या दिन में बहुत ज्यादा नींद आए, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
- सूखेपन के साथ ज्यादा प्यास और बार-बार पेशाब आए: डॉक्टर से ब्लड शुगर की जांच के बारे में बात करें।
- सूखेपन के साथ आंखों में किरकिराहट या दर्द हो: एक ही विजिट में दोनों लक्षण बताएं।
- खाने के समय सूजन हो: ठीक कौन-सी जगह सूजती है, यह दिखाएं।
- डॉक्टर के बताए ट्रीटमेंट में बदलाव के बाद सूखापन शुरू हो: अभी ली जा रही सभी दवाओं की लिस्ट लाएं।
- सूखेपन के साथ जलन या सफेद पैच हों: खुद ट्रीटमेंट करने के बजाय मुंह की जांच कराएं।
लगातार सूखे मुंह पर ध्यान देना क्यों जरूरी है?
लार कम होने पर दांतों की प्राकृतिक सुरक्षा भी कम हो जाती है। दांतों में सड़न आसानी से हो सकती है। इसमें पुरानी फिलिंग के आसपास या गम्स के किनारे की सड़न भी शामिल है। पानी पीने से आराम मिल सकता है, लेकिन वह लार के सभी सुरक्षा वाले काम नहीं कर सकता।
सूखे मुंह में दर्द या जलन हो सकती है और फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। फंगल इन्फेक्शन तब होता है जब मुंह में सामान्य रूप से रहने वाली फंगस जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए। जलन, लालपन या सफेद पैच के कई कारण हो सकते हैं। इनकी जांच जरूरी है।
सूखापन रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर डाल सकता है। खाने में ज्यादा समय लग सकता है, नकली दांत तकलीफ दे सकते हैं और नींद टूट सकती है। खाना मुश्किल होने पर लोग अनजाने में जरूरी पोषण वाली चीजें खाना कम कर सकते हैं या उनका वजन घट सकता है।
ये मदद लेने की वजहें हैं, घबराने की नहीं। कारणों का पता लगाने और दांतों को नुकसान से बचाने वाली देखभाल से आगे की परेशानियां कम हो सकती हैं।
मुंह सूखने पर कब जांच कराएं और खतरे के संकेत क्या हैं?
सूखापन बना रहे, बार-बार लौटे या खाने, बोलने या नींद पर असर डाले, तो डेंटिस्ट या डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। दर्द शुरू होने का इंतजार जरूरी नहीं है। दांतों में नई सड़न, मुंह में दर्द या नकली दांतों से परेशानी हो तो भी विजिट बुक करें।
नीचे दिए गए खतरे के संकेतों की जल्द जांच जरूरी है। इनका मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। लेकिन इन्हें सामान्य सूखापन कहकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सांस लेने में परेशानी, मुंह या गर्दन में तेजी से बढ़ती सूजन, या पानी और अपनी लार भी न निगल पाने पर तुरंत मेडिकल मदद लें। बहुत तेज प्यास के साथ उलझन, बेहोशी या बहुत कम पेशाब आना शरीर में पानी की गंभीर कमी का संकेत हो सकता है।
- मुंह का अल्सर यानी छाला जो दो हफ्ते बाद भी ठीक न हुआ हो।
- मुंह, जबड़े या गर्दन में नई गांठ या ऐसी गांठ जो बनी रहे।
- बिना वजह होंठ, जीभ या चेहरे में सुन्नपन।
- बिना वजह मुंह से खून आना।
- मुंह खोलने में नई या बढ़ती परेशानी।
- निगलने में परेशानी, निगलते समय दर्द या खाना बार-बार अटकना।
- लाल या सफेद पैच जो बना रहे, या बिना वजह वजन घटना।
- लार बनाने वाली ग्रंथि के पास दर्द वाली सूजन, खासकर बुखार के साथ।
मुंह के सूखेपन की जांच कैसे होती है?
डेंटिस्ट या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट आपके लक्षणों, सेहत, चल रहे ट्रीटमेंट, नींद और रोज की आदतों के बारे में पूछेंगे। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट ऐसे डेंटिस्ट होते हैं जिन्हें मुंह की अंदर की परत, लार और उनसे जुड़े हिस्सों की समस्याओं की जांच की ट्रेनिंग होती है।
आमतौर पर दांत, गम्स, जीभ, मुंह की अंदर की परत और उन रास्तों के मुहाने देखे जाते हैं जिनसे लार मुंह में आती है। डॉक्टर ग्रंथियों और गर्दन के आसपास सूजन या छूने पर दर्द की जांच भी कर सकते हैं।
आगे के टेस्ट जांच में मिली जानकारी पर निर्भर करते हैं। इनमें लार का बहाव मापना, जरूरत के मुताबिक ब्लड टेस्ट या सूजी हुई ग्रंथि को देखने के लिए स्कैन शामिल हो सकते हैं। बायोप्सी में शरीर के प्रभावित हिस्से से छोटा-सा सैंपल लेकर लैब में जांच होती है। इसकी जरूरत कुछ खास स्थितियों में ही पड़ती है, हर सूखे मुंह की शिकायत में नहीं।
- डॉक्टर की लिखी दवाओं, बिना पर्चे के लिए जाने वाले प्रोडक्ट और सप्लीमेंट की लिस्ट लाएं।
- बताएं कि सूखापन कब शुरू हुआ और क्या किसी खास समय ज्यादा होता है।
- आंखों में सूखापन, बार-बार पेशाब, जोड़ों की परेशानी, खर्राटे या ग्रंथियों में सूजन के बारे में बताएं।
- पहले सिर या गर्दन के कैंसर का ट्रीटमेंट हुआ हो तो बताएं।
- तंबाकू, गुटखा, सुपारी और शराब के इस्तेमाल के बारे में डॉक्टर को बताएं।
- दिल या किडनी की बीमारी के कारण पानी और दूसरे तरल कम लेने की सलाह मिली हो तो जरूर बताएं।
मुंह के सूखेपन की देखभाल और ट्रीटमेंट में क्या होता है?
देखभाल कारण पर निर्भर करती है। इसमें शरीर में पानी की कमी दूर करना, बंद नाक या नींद में सांस की समस्या की जांच, चल रहे ट्रीटमेंट का रिव्यू या किसी बीमारी का इलाज शामिल हो सकता है। कभी-कभी कई कारणों पर एक साथ ध्यान देना पड़ता है।
दांतों की देखभाल का मकसद आराम देना और सड़न, गम्स की परेशानी व इन्फेक्शन से बचाना है। विकल्पों में मुंह की नमी बढ़ाने के उपाय, ग्रंथियों की बची हुई लार बनाने की क्षमता को सहारा देना और नुकसान के ज्यादा खतरे वाले दांतों की सुरक्षा शामिल हो सकते हैं। किसी इन्फेक्शन या शक वाले पैच की अलग से जांच जरूरी है।
कुछ कारणों में वजह दूर होने पर सूखापन बेहतर हो जाता है। ग्रंथियों को लंबे समय तक रहने वाला नुकसान हो, तो लगातार देखभाल और फॉलो-अप की जरूरत पड़ सकती है। मकसद खाना और बोलना आसान करना और ऐसे नुकसान को रोकना है जिससे बचा जा सकता है।
- संबंधित डेंटिस्ट या डॉक्टर के साथ संभावित कारणों का रिव्यू।
- दांतों और लार की स्थिति के मुताबिक नुकसान से बचाने वाली डेंटल केयर।
- खाने की चीजें चुनने, तंबाकू छोड़ने और रोज मुंह की देखभाल की सलाह।
- रगड़ खाने वाले या तकलीफ देने वाले नकली दांतों की जांच।
- जरूरत होने पर सामान्य सेहत, आंखों, नींद या लार बनाने वाली ग्रंथियों की जांच के लिए संबंधित स्पेशलिस्ट के पास भेजना।
चेकअप कराने तक कौन-सी रोज की आदतें मदद कर सकती हैं?
कुछ आसान आदतों से तकलीफ कम हो सकती है। लेकिन लक्षण बने रहें तो ये जांच की जगह नहीं ले सकतीं। सूखेपन का कारण जाने बिना कई तरह के माउथ प्रोडक्ट या घरेलू उपाय न आजमाएं।
पानी पीने से आराम मिल सकता है। लेकिन दिल या किडनी की बीमारी के कारण डॉक्टर ने पानी और दूसरे तरल सीमित रखने को कहा है, तो खुद से मात्रा बढ़ाने के बजाय वही सलाह मानें।
लगातार सूखेपन के लिए पास के डेंटिस्ट या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट के पास जाकर जांच कराई जा सकती है। मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर में रहने वाले परिवारों के लिए आसानी से पहुंच सकने वाली जगह चुनने से फॉलो-अप आसान हो सकता है। टेलीकंसल्टेशन यानी फोन या वीडियो पर सलाह से शुरुआती मार्गदर्शन मिल सकता है। लेकिन इससे मुंह या लार बनाने वाली ग्रंथियों की पूरी जांच नहीं हो सकती।
- आराम के लिए पानी के छोटे घूंट लें और खाने के साथ पानी पास रखें।
- सूखी चीजें निगलने में तकलीफ हो तो नरम और नमी वाला खाना चुनें।
- अगर चबाना और निगलना सुरक्षित है और जबड़े में तकलीफ नहीं है, तो शुगर-फ्री च्यूइंग गम लार का बहाव बढ़ाने में मदद कर सकती है।
- मुलायम टूथब्रश से हल्के हाथ से ब्रश करें और दांतों के बीच सफाई करें।
- बार-बार मीठे ड्रिंक, मिठाइयां और चिपकने वाले स्नैक्स लेने से बचें।
- सूखापन दूर करने के लिए नींबू, खट्टी टॉफी या एसिड वाले ड्रिंक न लें। ये दांतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और दर्द वाले मुंह में जलन बढ़ा सकते हैं।
- तंबाकू, गुटखा और सुपारी से बचें। इन्हें छोड़ने के लिए मदद लें।
- जिन खाने-पीने की चीजों से जलन या सूखापन साफ तौर पर बढ़ता हो, उन्हें कम करें।
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खूब पानी पीने के बाद भी मेरा मुंह सूखा क्यों रहता है?
पानी मुंह गीला कर सकता है, लेकिन लार कम होने की हर वजह ठीक नहीं कर सकता। मुंह से सांस लेना, दवाएं, लार बनाने वाली ग्रंथियों की समस्या या कोई बीमारी फिर भी सूखापन पैदा कर सकती है। लक्षण बने रहें तो सिर्फ ज्यादा पानी पीने के बजाय जांच कराएं।
क्या मुंह सूखने का मतलब मुझे डायबिटीज है?
नहीं। मुंह सूखने के कई कारण होते हैं। डायबिटीज उनमें से एक हो सकती है, खासकर अगर साथ में ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, थकान या बिना वजह वजन घटना हो। डॉक्टर तय कर सकते हैं कि ब्लड शुगर टेस्ट की जरूरत है या नहीं।
सुबह उठते ही मेरा मुंह बहुत सूखा क्यों होता है?
नींद में लार का बहाव स्वाभाविक रूप से कम होता है। मुंह से सांस लेना, नाक बंद होना, खर्राटे और कुछ दवाएं सूखापन बढ़ा सकती हैं। तेज खर्राटों के साथ सांस रुकना, दम घुटना या दिन में नींद आना हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
क्या तनाव से पूरे दिन मुंह सूखा रह सकता है?
तनाव और घबराहट से सूखापन हो सकता है या ज्यादा महसूस हो सकता है। लेकिन पूरे दिन या बार-बार होने वाले सूखेपन को अपने आप तनाव की वजह से हुआ न मानें। जांच से दूसरे कारणों का पता लगाया जा सकता है।
अगर किसी दवा से मुंह सूखता लगे तो क्या उसे बंद कर दूं?
नहीं। डॉक्टर का बताया ट्रीटमेंट खुद से बंद या न बदलें। उसे लिखने वाले डॉक्टर को बताएं कि सूखापन कब शुरू हुआ और उससे क्या परेशानी हो रही है। वे संभावित कारणों का रिव्यू करके तय कर सकते हैं कि किसी बदलाव की जरूरत है या नहीं।
क्या मुंह सूखने से बदबू और दांतों में कैविटी हो सकती है?
हां। लार कम होने से खाने के टुकड़े और बैक्टीरिया मुंह में ज्यादा आसानी से रह जाते हैं। दांतों की सड़न से सुरक्षा भी कम होती है। इससे कैविटी यानी सड़न से बने छेद हो सकते हैं। बदबू के दूसरे कारण भी होते हैं। इसलिए लगातार बदबू और सूखापन हो तो डेंटल चेकअप कराएं।
क्या मुंह सूखना मुंह के कैंसर का संकेत है?
सिर्फ मुंह सूखना मुंह के कैंसर का खास संकेत नहीं है। लेकिन दो हफ्ते से ज्यादा रहने वाला अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना वजह खून आना या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो, तो जल्द डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं।
पहले डेंटिस्ट को दिखाऊं या जनरल डॉक्टर को?
दोनों में से किसी से शुरुआत कर सकते हैं। डेंटिस्ट या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट मुंह और लार की जांच कर सकते हैं। सूखेपन के साथ पूरे शरीर से जुड़े लक्षण हों, जैसे बार-बार पेशाब, बहुत ज्यादा प्यास या लंबे समय से बीमारी, तो जनरल डॉक्टर से जांच जरूरी है।
This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.