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मुंबई में मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच
मुंबई में मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच (Oral cancer screening) में डॉक्टर के पास जाकर मुंह और गर्दन की जांच कराई जाती है। इसमें ऐसे बदलाव देखे जाते हैं जिन पर संदेह हो। इससे उन हिस्सों का पता चल सकता है जिनकी आगे जांच जरूरी है, लेकिन केवल इससे कैंसर की पुष्टि नहीं हो सकती। दो हफ्ते से ज्यादा रहने वाला मुंह का छाला, गांठ, सुन्नपन या बिना स्पष्ट कारण खून आना हो, तो जल्द जांच जरूरी है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-09-24
Key points
- मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग में संदिग्ध बदलाव खोजे जाते हैं। इससे हर कैंसर की पुष्टि नहीं होती और हर कैंसर की संभावना खारिज भी नहीं होती।
- दो हफ्ते से ज्यादा रहने वाले मुंह के छाले के लिए डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूरी है।
- गांठ, सुन्नपन, बिना स्पष्ट कारण खून आना या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो, तो जल्द जांच जरूरी है।
- किसी संदिग्ध बदलाव का कारण पता करने के लिए बायोप्सी जरूरी हो सकती है।
- दोबारा जांच की स्पष्ट योजना और तंबाकू या सुपारी छोड़ने में सहायता देखभाल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच किसे करानी चाहिए?
मुंह का कैंसर (Oral cancer) होंठ, जीभ, गालों के अंदर, मसूड़ों या जीभ के नीचे के हिस्से जैसे स्थानों को प्रभावित करता है। शुरुआती जांच यानी स्क्रीनिंग (Screening) का मतलब है लक्षण महसूस होने से पहले बीमारी के संकेत खोजना। अगर आपको पहले से कोई लक्षण है, तो केवल स्क्रीनिंग नहीं, बल्कि उस समस्या की जांच जरूरी है।
तंबाकू या सुपारी का इस्तेमाल करने वालों के लिए मुंह की जांच खास तौर पर जरूरी है। हालांकि, मुंह का कैंसर उन लोगों को भी हो सकता है जिन्होंने कभी इन चीजों का इस्तेमाल नहीं किया। कोई ज्ञात जोखिम न होने पर भी मुंह में लगातार बने बदलाव को नजरअंदाज करना सुरक्षित नहीं है।
- सिगरेट, बीड़ी या अन्य तंबाकू उत्पादों का धुआं पीने वाले लोग।
- चबाने वाला तंबाकू, गुटखा, खैनी या तंबाकू वाला पान खाने वाले लोग।
- सुपारी चबाने वाले लोग, जिनमें बिना तंबाकू बिकने वाले सुपारी उत्पाद इस्तेमाल करने वाले भी शामिल हैं।
- शराब पीने वाले लोग, खासकर वे जो साथ में तंबाकू भी इस्तेमाल करते हैं।
- वे लोग जिन्हें पहले मुंह का कैंसर हो चुका है या मुंह की ऐसी समस्या है जिसमें कैंसर के जोखिम की निगरानी जरूरी है।
- कोई भी व्यक्ति जिसके मुंह में लगातार छाला, धब्बा, गांठ या बिना स्पष्ट कारण कोई बदलाव बना हुआ है।
मुंह के किन लक्षणों की जल्द जांच जरूरी है?
डॉक्टर को दिखाने के लिए दर्द होने का इंतजार न करें। मुंह के कुछ चिंताजनक बदलाव शुरुआत में बहुत कम तकलीफ देते हैं या बिल्कुल तकलीफ नहीं देते। वहीं, कई छाले और धब्बे कैंसर नहीं होते। इसलिए केवल देखकर अनुमान लगाने के बजाय जांच जरूरी है।
मुंह का छाला दो हफ्ते बाद भी न भरे, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराना जरूरी है। हर लक्षण के लिए दो हफ्ते इंतजार नहीं करना चाहिए। गांठ, सुन्नपन, बिना स्पष्ट कारण खून आना या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो, तो जल्द जांच कराएं।
बहुत ज्यादा खून आना, सांस लेने में परेशानी या तरल पदार्थ भी न निगल पाना हो, तो तुरंत अस्पताल में आपातकालीन देखभाल लें। ऑनलाइन फोटो भेजने या सामान्य अपॉइंटमेंट मांगने के कारण आपातकालीन जांच में देरी नहीं होनी चाहिए।
- दो हफ्ते से ज्यादा समय तक न भरने वाला छाला।
- मुंह या गर्दन में नई गांठ या लगातार बनी हुई गांठ।
- लगातार बना हुआ लाल, सफेद या लाल-सफेद मिला हुआ धब्बा।
- मुंह से बिना स्पष्ट कारण खून आना।
- जीभ, होंठ या मुंह के किसी अन्य हिस्से में सुन्नपन।
- मुंह खोलने में नई या बढ़ती हुई परेशानी।
- निगलने में परेशानी या लगातार कुछ अटका हुआ महसूस होना।
मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच के दौरान क्या होता है?
डॉक्टर पहले आपके लक्षणों, सामान्य सेहत और तंबाकू, सुपारी व शराब के इस्तेमाल के बारे में पूछते हैं। वे पूछ सकते हैं कि बदलाव कब से है और क्या वह बढ़ा है, उससे खून आया है या उसमें दर्द हुआ है। ये सवाल जांच की दिशा तय करने में मदद करते हैं। इनका मकसद आपकी आदतों को सही या गलत ठहराना नहीं है।
जांच में आम तौर पर रोशनी में मुंह के अंदर देखा जाता है। डॉक्टर दस्ताने पहनकर संबंधित हिस्सों को हल्के हाथ से छूकर भी जांचते हैं। होंठ, गाल, मसूड़े, जीभ, जीभ के नीचे का हिस्सा और तालू देखा जाता है। निकालने योग्य कृत्रिम दांत (Dentures) हटाने पड़ सकते हैं, ताकि उनके नीचे के ऊतक यानी शरीर की परत और हिस्से देखे जा सकें।
गर्दन में बढ़ी हुई लसीका गांठों (Lymph nodes) की भी जांच हो सकती है। ये छोटी संरचनाएं शरीर को बीमारी से बचाने में मदद करती हैं। इनके बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं। केवल इनका बढ़ना कैंसर होने का मतलब नहीं है।
- डॉक्टर बदलाव का आकार, रंग, सतह और स्थान दर्ज कर सकते हैं।
- आपकी सहमति से जांच की तस्वीरें ली जा सकती हैं, ताकि बाद में तुलना की जा सके।
- आपको जांच में मिली बातों और दोबारा जांच, किसी परीक्षण या दूसरे विशेषज्ञ के पास भेजने की जरूरत के बारे में बताया जाना चाहिए।
क्या हर संदिग्ध धब्बे की बायोप्सी जरूरी है?
मुंह के हर छाले या धब्बे की बायोप्सी जरूरी नहीं होती। ऊतक की नमूना जांच यानी बायोप्सी (Biopsy) में शरीर के उस हिस्से से छोटा नमूना लेकर सूक्ष्मदर्शी से जांच की जाती है। इसकी जरूरत बदलाव के दिखने, छूने पर महसूस होने, अवधि, स्थान और जांच में मिली अन्य बातों पर निर्भर करती है।
कुछ बदलावों में रगड़ या जलन का कोई स्पष्ट कारण दिखता है। उस कारण को दूर करने के बाद दोबारा जांच की जा सकती है। किसी संदिग्ध बदलाव में बिना इंतजार किए बायोप्सी या विशेषज्ञ की राय जरूरी हो सकती है। डॉक्टर को बताना चाहिए कि कौन-सा तरीका क्यों सुझाया जा रहा है और आगे कब जांच जरूरी है।
कैंसर का संदेह होने पर रोग की पुष्टि के लिए आम तौर पर ऊतक की बायोप्सी जरूरी होती है। ऊतक के नमूनों की जांच करने वाले डॉक्टर, जिन्हें पैथोलॉजिस्ट (Pathologist) कहते हैं, रिपोर्ट तैयार करते हैं। बायोप्सी की सलाह मिलने का मतलब यह नहीं कि कैंसर की पुष्टि हो चुकी है।
- पूछें कि बायोप्स्सी पर विचार क्यों किया जा रहा है और यह कहां होगी।
- पूछें कि तकलीफ को कैसे नियंत्रित किया जाएगा और इसके संभावित जोखिम क्या हैं।
- पूछें कि रिपोर्ट कब और कैसे मिलेगी।
- सुनिश्चित करें कि केवल रिपोर्ट लेने की नहीं, बल्कि उसके नतीजे पर डॉक्टर से चर्चा करने की भी योजना हो।
शुरुआती जांच से क्या पता चल सकता है और इसकी सीमाएं क्या हैं?
ध्यान से की गई जांच में दिखने वाले या छूने पर महसूस होने वाले ऐसे बदलाव मिल सकते हैं जिनकी आगे जांच जरूरी हो। इनमें छाले, धब्बे, मोटे हुए हिस्से या मुंह कम खुलना शामिल हैं। इनमें से कुछ को संभावित रूप से कैंसर में बदल सकने वाली स्थितियां (Potentially malignant disorders) कहते हैं। इनका संबंध कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से होता है, हालांकि हर प्रभावित व्यक्ति को कैंसर नहीं होता।
केवल देखकर स्क्रीनिंग भरोसेमंद तरीके से यह नहीं बता सकती कि कोई बदलाव कैंसर है या नहीं। इससे यह गारंटी भी नहीं मिलती कि हर बीमारी का पता चल गया है या बाद में कैंसर नहीं होगा। आज की जांच सामान्य होने पर भी नए या लगातार बने लक्षण की जांच जरूरी रहती है।
कभी-कभी रोशनी पर आधारित उपकरण, विशेष रंग और ब्रश से नमूना लेने वाली जांच सहायक तरीकों के रूप में उपलब्ध होती हैं। ये ध्यान से की गई जांच या जरूरत पड़ने पर ऊतक की बायोप्सी की जगह नहीं ले सकतीं। पूछें कि अतिरिक्त जांच से क्या पता चलेगा और उसके नतीजे से आपकी देखभाल में क्या बदलाव होगा।
- दांतों के सामान्य एक्स-रे (X-rays) मुंह के मुलायम ऊतकों की जांच का विकल्प नहीं हैं।
- कुछ खास निष्कर्षों के आधार पर स्कैन (Scans), यानी शरीर के अंदर की तस्वीरें लेने वाली जांच, कराई जा सकती है। इसकी जरूरत हर किसी को नहीं होती।
- स्क्रीनिंग का नतीजा आगे के फैसलों का शुरुआती आधार है। इससे अकेले रोग की पुष्टि नहीं होती।
अपॉइंटमेंट के लिए कैसे तैयारी करें?
मुंह को देखकर की जाने वाली जांच के लिए आम तौर पर खास तैयारी की जरूरत नहीं होती। अगर कोई प्रक्रिया तय है, तो क्लिनिक को उसके लिए अलग निर्देश देने चाहिए। जब तक इलाज करने वाली टीम ने खास तौर पर न कहा हो, अपनी लिखी हुई दवाएं न बदलें और खाली पेट न रहें।
ऐसी जानकारी साथ लाएं जिससे डॉक्टर समझ सकें कि समस्या में समय के साथ क्या बदलाव आया है। पुरानी फोटो मददगार हो सकती है, लेकिन वह आज की जांच की जगह नहीं लेती। अगर आप मदद चाहते हैं, तो परिवार का कोई सदस्य आपकी सेहत की जानकारी बताने या जरूरी बातें लिखने में सहायता कर सकता है।
- पुराने दंत रिकॉर्ड, बायोप्सी रिपोर्ट, स्कैन रिपोर्ट और संबंधित स्वास्थ्य रिकॉर्ड साथ लाएं।
- अभी ली जा रही दवाओं, एलर्जी (Allergies), यानी कुछ चीजों से शरीर की असामान्य प्रतिक्रिया, और प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की सूची लाएं।
- लिख लें कि लक्षण कब शुरू हुआ और उसके आकार या दिखने में कोई बदलाव आया है या नहीं।
- बताएं कि आप कौन-से तंबाकू या सुपारी उत्पाद इस्तेमाल करते हैं, कितनी बार और कब से।
- मुंह की किसी पिछली सर्जरी, कैंसर के इलाज या मुंह खोलने में परेशानी के बारे में बताएं।
- पूछें कि परामर्श, जांच, बायोप्सी और प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अलग-अलग शुल्क हैं या नहीं। शुल्क की पुष्टि सीधे क्लिनिक से करें।
स्क्रीनिंग या दोबारा जांच कितनी बार जरूरी है?
स्क्रीनिंग के बीच एक ही समय-अंतराल सभी के लिए सही नहीं होता। समय जोखिम बढ़ाने वाली बातों, लक्षणों, जांच के निष्कर्षों और मुंह की पिछली बीमारियों पर निर्भर करता है। जिन लोगों को कैंसर के जोखिम से जुड़ी कोई ज्ञात समस्या है, उनकी दोबारा जांच का समय दूसरों से अलग हो सकता है।
अगर डॉक्टर किसी छाले या धब्बे की दोबारा जांच की सलाह दें, तो उस अपॉइंटमेंट का महत्वपूर्ण मकसद है। इससे पता चलता है कि वह हिस्सा ठीक हुआ है या उसमें बदलाव आया है। दर्द कम होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि ऊतक सामान्य हो गए हैं।
आगे की तय तारीख के कारण बिगड़ते लक्षणों की जांच में देरी नहीं होनी चाहिए। नया सुन्नपन, खून आना, गांठ या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो, तो इलाज करने वाली टीम से तय तारीख से पहले संपर्क करें।
- दोबारा जांच की स्पष्ट तारीख और उसका कारण पूछें।
- पूछें कि किन बदलावों पर तय समय से पहले आना चाहिए।
- जहां उपलब्ध हों, रिपोर्ट और तस्वीरों की प्रतियां संभालकर रखें।
- दोबारा जांच की तारीख छूट जाए, तो नया अपॉइंटमेंट लें। यह न मान लें कि अब आगे देखभाल की जरूरत नहीं है।
मुंबई या अंबरनाथ में जांच के लिए कहां जा सकते हैं?
मुख रोग विशेषज्ञ (Oral medicine specialist) मुंह और आसपास के ऊतकों की बीमारियों की जांच करते हैं। जांच में मिली बातों के अनुसार, आगे की देखभाल में मुख शल्य चिकित्सक (Oral surgeon), यानी मुंह की सर्जरी करने वाले विशेषज्ञ, या सिर और गर्दन के कैंसर की टीम शामिल हो सकती है। दूसरी राय या बायोप्सी के लिए भेजना जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है, कैंसर का प्रमाण नहीं।
डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय ने मुख रोग चिकित्सा और रेडियोलॉजी (Oral Medicine and Radiology), यानी मुंह की बीमारियों और एक्स-रे जैसी तस्वीरों से जांच के विषय में एमडीएस किया है। वे पीएचडी शोधार्थी हैं। उनका डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया पंजीकरण A-13123 है। वे मुंबई के सायन स्थित के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्पेशल डेंटल ओपीडी और अंबरनाथ के रीजनेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में सेवाएं देते हैं।
ठाणे, बदलापुर या उल्हासनगर से आने वाले मरीज यात्रा से पहले परामर्श की जगह की पुष्टि कर सकते हैं। अपॉइंटमेंट की उपलब्धता और किसी भी जांच की व्यवस्था के बारे में सीधे पूछें।
- अपॉइंटमेंट लेते समय लगातार बने छाले, गांठ, खून आने, सुन्नपन या निगलने में परेशानी के बारे में बताएं।
- पते, अपॉइंटमेंट के समय और साथ लाने वाले दस्तावेजों की पुष्टि करें।
- पूछें कि सुझाई गई बायोप्सी के लिए अलग से आना होगा या किसी अन्य विशेषज्ञ के पास जाना होगा।
शुरुआती जांच के बाद क्या होता है?
अगला कदम जांच में मिली बातों पर निर्भर करता है। आपको आश्वस्त करने के साथ दोबारा जांच की योजना दी जा सकती है। कैंसर के अलावा किसी दूसरी समस्या की आगे जांच या बायोप्सी की सलाह भी मिल सकती है। कैंसर की पुष्टि होने पर विशेषज्ञों की टीम आगे की जांच और इलाज के विकल्पों पर चर्चा करेगी।
नतीजा कुछ भी हो, जोखिम कम करना उपयोगी रहता है। तंबाकू और सुपारी महत्वपूर्ण जोखिम हैं जिनसे बचा जा सकता है। बिना तंबाकू वाली सुपारी सुरक्षित विकल्प नहीं है। स्क्रीनिंग कराने से इनका इस्तेमाल जारी रखने के जोखिम खत्म नहीं होते।
पुरानी आदत बदलना मुश्किल हो सकता है। तंबाकू या सुपारी छोड़ने के लिए पेशेवर सहायता के बारे में पूछें। खुद मुंह देखकर जांच करना अपॉइंटमेंट के बीच बदलाव पहचानने में मदद कर सकता है। लेकिन इससे यह तय नहीं किया जा सकता कि कैंसर नहीं है, और यह डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है।
- जाने से पहले स्पष्ट रूप से समझ लें कि जांच में क्या मिला और अगला कदम क्या है।
- जान लें कि जांच का नतीजा कौन बताएगा और दोबारा जांच की व्यवस्था कौन करेगा।
- तंबाकू, सुपारी और शराब से जुड़ी चिंताओं के लिए सहायता मांगें।
- जांच में चिंता की बात न मिलने पर भी लगातार बने या नए लक्षणों की जानकारी देते रहें।
Questions people ask
क्या मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच में दर्द होता है?
मुंह और गर्दन को देखकर और हल्के हाथ से छूकर की जाने वाली जांच आम तौर पर आसानी से सहन हो जाती है। पहले से मौजूद छाले या दर्द वाले हिस्से में तकलीफ हो सकती है। कहीं दर्द हो, तो डॉक्टर को बताएं। बायोप्सी एक अलग प्रक्रिया है। इससे पहले दर्द को नियंत्रित करने के बारे में चर्चा होनी चाहिए।
क्या कोई लक्षण न होने पर भी मैं स्क्रीनिंग करा सकता हूं?
हां। स्क्रीनिंग में लक्षण महसूस होने से पहले बदलाव खोजे जाते हैं। यह खास तौर पर उपयोगी है अगर आप तंबाकू या सुपारी इस्तेमाल करते हैं, या पहले मुंह की कोई ऐसी समस्या रही है जिसका संबंध कैंसर के जोखिम से है। डॉक्टर दोबारा जांच के उचित समय पर चर्चा कर सकते हैं।
क्या दो हफ्ते तक रहने वाला मुंह का छाला कैंसर होता है?
नहीं। लगातार बने छालों के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन दो हफ्ते बाद भी छाला न भरे, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूरी है। उसका दिखना, छूने पर महसूस होना, पिछली जानकारी और कभी-कभी बायोप्सी कारण पता करने में मदद करते हैं।
क्या तंबाकू इस्तेमाल किए बिना भी मुंह का कैंसर हो सकता है?
हां। तंबाकू एक महत्वपूर्ण जोखिम है, लेकिन इसके बिना भी मुंह का कैंसर हो सकता है। लगातार बने लक्षणों की जांच फिर भी जरूरी है। सुपारी, जिसमें बिना तंबाकू वाली सुपारी भी शामिल है, मुंह के कैंसर का जोखिम बढ़ाती है।
क्या फोटो या वीडियो परामर्श से तय हो सकता है कि मुंह का कैंसर नहीं है?
नहीं। फोटो आपकी चिंता समझाने में मदद कर सकती है। लेकिन उसमें मुंह की हर सतह नहीं दिख सकती। उससे डॉक्टर गांठ को छूकर या गर्दन की लसीका गांठों की जांच भी नहीं कर सकते। संदिग्ध या लगातार बने लक्षणों के लिए डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूरी है।
क्या मुंह के कैंसर की जांच के लिए खून की जांच पर्याप्त है?
खून की कोई सामान्य जांच मुंह की जांच का विकल्प नहीं है। इससे यह भी तय नहीं किया जा सकता कि मुंह का कैंसर नहीं है। किसी हिस्से पर संदेह हो, तो ऊतक की जांच जरूरी हो सकती है। अन्य जांच डॉक्टर को मिली बातों के अनुसार चुनी जाती हैं।
मुंबई में मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच का कितना खर्च आता है?
शुल्क अस्पताल या क्लिनिक और जरूरी जांच पर निर्भर करता है। परामर्श, बायोप्सी, प्रयोगशाला की रिपोर्ट और स्कैन के अलग-अलग शुल्क हो सकते हैं। बुकिंग से पहले क्लिनिक से मौजूदा शुल्क और उसमें शामिल सेवाओं के बारे में पूछें।
अगर मेरी स्क्रीनिंग सामान्य है, तो क्या मैं बने हुए धब्बे को नजरअंदाज कर सकता हूं?
नहीं। लगातार बने या बदलते धब्बे की दोबारा जांच जरूरी है, भले ही पिछली जांच में चिंता की बात न मिली हो। सुझाई गई दोबारा जांच के लिए जाएं। नया खून आना, सुन्नपन, गांठ या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो, तो जल्द जांच जरूरी है।
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