Oral Health Library · 9 min read · हिन्दी
अंबरनाथ में ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट
ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट मुंह के छाले, लाल या सफेद धब्बे, जलन, सूखापन, जबड़े के दर्द और मुंह से जुड़ी दूसरी परेशानियों की जांच करते हैं। डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय अंबरनाथ के रीज़नेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं। दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न होने वाला छाला, गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह के खून आना या मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराना जरूरी है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-10-01
Key points
- ओरल मेडिसिन में मुंह के लगातार बने छाले, धब्बे, जलन, सूखापन और जबड़े या चेहरे से जुड़े लक्षणों की जांच होती है।
- डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय अंबरनाथ के रीज़नेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं।
- दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न होने वाला छाला, गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह के खून आना या मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूरी है।
- टेस्ट और ट्रीटमेंट चेकअप में मिली बातों पर निर्भर करते हैं। हर मरीज को स्कैन या बायोप्सी की जरूरत नहीं होती।
- वीडियो कंसल्टेशन जांच में मदद कर सकता है, लेकिन मुंह के चिंताजनक बदलाव को सामने से देखकर जांचने की जगह नहीं ले सकता।
ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट क्या करते हैं?
ओरल मेडिसिन दांतों की देखभाल से जुड़ी एक स्पेशलिटी है। इसमें मुंह की अंदरूनी परत, जीभ, होंठ, लार बनाने वाली ग्रंथियों और चेहरे व जबड़े के जुड़े हिस्सों की परेशानियां देखी जाती हैं। इसमें यह भी देखा जाता है कि शरीर की दूसरी बीमारियों का मुंह पर क्या असर पड़ रहा है।
कई लोगों को लगता है कि डेंटल केयर सिर्फ दांतों और गम्स के लिए है। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट बार-बार होने वाले छाले, बिना साफ वजह की जलन या चेहरे के ऐसे दर्द की भी जांच करते हैं जो शायद किसी दांत से न आ रहा हो।
मकसद है संभावित वजह समझना, यह तय करना कि टेस्ट चाहिए या नहीं, और देखभाल के विकल्प बताना। कुछ परेशानियां बिना सर्जरी के संभाली जा सकती हैं। कुछ में डेंटिस्ट, सर्जन या दूसरे मेडिकल स्पेशलिस्ट के साथ मिलकर देखभाल की जरूरत होती है।
- मुंह के छाले जो ठीक नहीं हो रहे या बार-बार लौटते हैं।
- मुंह के अंदर लाल, सफेद या मिले-जुले रंग के धब्बे।
- जलन, दर्द, अजीब एहसास या लगातार सूखापन।
- जबड़े के जोड़ के आसपास दर्द या जबड़ा हिलाने में दिक्कत।
- शरीर की किसी बीमारी या पहले से चल रहे ट्रीटमेंट के कारण मुंह में बदलाव।
डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय कहां प्रैक्टिस करते हैं?
डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय अंबरनाथ के रीज़नेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं। उन्होंने ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी में एमडीएस किया है। यह डेंटल की पोस्टग्रेजुएट डिग्री है, जिसमें मुंह की बीमारियों और एक्स-रे व स्कैन से उनकी जांच पर ध्यान दिया जाता है। वे पीएचडी स्कॉलर भी हैं। उनका डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया रजिस्ट्रेशन A-13123 है।
वे सायन, मुंबई के के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्पेशल डेंटल ओपीडी में भी प्रैक्टिस करते हैं। अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर के मरीज और परिवार आने से पहले वेबसाइट के कॉन्टैक्ट पेज से क्लिनिक की जगह, अपॉइंटमेंट की मौजूदा व्यवस्था और उपलब्धता कन्फर्म कर सकते हैं।
अपॉइंटमेंट लेते समय मुख्य परेशानी और वह कितने समय से है, यह बताएं। अगर छाला ठीक नहीं हो रहा, सूजन, सुन्नपन, खून आना या निगलने में दिक्कत है, तो साफ बताएं। इसे सिर्फ रूटीन डेंटल चेकअप न कहें।
किन लक्षणों के लिए ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट को दिखाएं?
मुंह की कोई परेशानी बार-बार लौटे, उसकी वजह समझ न आए या उम्मीद के मुताबिक ठीक न हो, तो जांच मदद कर सकती है। मुंह में दिखने वाला बदलाव बिना दर्द के भी ध्यान देने लायक हो सकता है। इसी तरह, मुंह सामान्य दिखने पर भी दर्द या जलन की परेशानी असली हो सकती है।
नीचे दिए गए हर लक्षण की वजह गंभीर नहीं होती। लेकिन सिर्फ देखकर, खासकर फोटो से, परेशानी की सही पहचान नहीं की जा सकती। जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि वजह रगड़ या चोट है, इन्फेक्शन है, सूजन है या ऐसी कोई स्थिति है जिसमें आगे जांच चाहिए।
दांतों और गम्स की आम वजहों की जांच करने के बाद डेंटिस्ट ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट के पास भेज सकते हैं। मुंह की लगातार बनी परेशानी के लिए मरीज खुद भी जांच करवा सकते हैं। पहले खुद बीमारी का नाम तय करना जरूरी नहीं है।
- ऐसा छाला जो ठीक नहीं हो रहा या ऐसे छाले जिनसे खाने में दिक्कत हो।
- जीभ, गाल के अंदर, गम्स या तालू पर लगातार बना लाल या सफेद धब्बा।
- जीभ या मुंह में जलन, चाहे कोई बदलाव दिखे या नहीं।
- ऐसा सूखापन जिससे बोलने, चबाने या निगलने में दिक्कत हो।
- जबड़े में दर्द, जबड़े का अटकना या मुंह कम खुलना।
- बिना साफ वजह के चेहरे में दर्द, एहसास में बदलाव या होंठ या जीभ का सुन्न होना।
- नई गांठ, लगातार सूजन या बिना साफ वजह के खून आना।
मुंह और जबड़े की परेशानियां क्यों होती हैं?
अलग-अलग परेशानियों के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। गाल कटने, दांत की तेज धार या नकली दांतों की रगड़ से छाला हो सकता है। बार-बार छाले होने की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, जैसे सूजन, पोषण की कमी या शरीर की कोई बीमारी।
मुंह सूखने का संबंध शरीर में पानी की कमी, चल रहे ट्रीटमेंट या लार बनाने वाली ग्रंथियों की परेशानी से हो सकता है। जलन की वजह रगड़ या इरिटेशन, इन्फेक्शन या पोषण की कमी हो सकती है। कभी-कभी कोई वजह दिखाई नहीं देती। ऐसे में बीमारी का नाम तय करने से पहले ध्यान से जांच जरूरी है।
जबड़े की परेशानी चबाने वाली मांसपेशियों या टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट से जुड़ी हो सकती है। यह वह जोड़ है जो निचले जबड़े को खोपड़ी से जोड़ता है। दांत भींचना, चोट या जोड़ की परेशानी इसकी वजह हो सकती है। तनाव दर्द और आदतों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन हर लक्षण को तनाव की वजह से हुआ नहीं मानना चाहिए।
- तंबाकू और सुपारी मुंह की अंदरूनी परत और दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- बिना तंबाकू वाली सुपारी भी मुंह के अंदर की परत को सख्त कर सकती है, जिससे मुंह कम खुलता है।
- शरीर की दूसरी बीमारियां मुंह पर असर डाल सकती हैं और ठीक होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
- लगातार बने धब्बे या छाले पर बार-बार घरेलू उपाय करने के बजाय जांच कराएं।
किन लक्षणों में जल्दी जांच या इमरजेंसी केयर चाहिए?
मुंह का छाला दो हफ्ते से ज्यादा समय में भी ठीक न हुआ हो, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। दर्द होने का इंतजार न करें। लंबे समय से बना ऐसा बदलाव जिसमें दर्द न हो, उसकी भी जांच जरूरी हो सकती है।
गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह के खून आना, मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो, तो भी जल्दी जांच कराएं। इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। लेकिन इनकी वजह जानने में बेवजह देर नहीं करनी चाहिए।
छालों के लिए दो हफ्ते की चेतावनी का मतलब यह नहीं है कि गंभीर या बढ़ते लक्षणों में भी इंतजार करें। अचानक शुरू हुई या तेजी से बढ़ती परेशानी में रूटीन क्लिनिक अपॉइंटमेंट के बजाय तुरंत हॉस्पिटल में देखभाल की जरूरत हो सकती है।
- लगातार बना लाल या सफेद धब्बा, गर्दन में गांठ या बिना साफ वजह के वजन कम होना हो, तो जल्दी जांच कराएं।
- बुखार के साथ चेहरे पर सूजन हो, या दर्द तेजी से बढ़ रहा हो और मुंह कम खुल रहा हो, तो तुरंत जांच कराएं।
- सांस लेने में दिक्कत, मुंह या गर्दन में तेजी से बढ़ती सूजन या अपनी लार भी न निगल पाना हो, तो इमरजेंसी विभाग जाएं।
- बहुत ज्यादा खून बह रहा हो और रुक न रहा हो, तो भी इमरजेंसी केयर चाहिए।
पहले अपॉइंटमेंट में क्या होता है?
आमतौर पर शुरुआत आपकी परेशानी के बारे में बात करने से होती है। डॉक्टर पूछते हैं कि यह कब शुरू हुई, इसमें बदलाव आता है या नहीं और खाने, बोलने या सोने पर क्या असर पड़ता है। पहले भी ऐसा हुआ है या पहले कोई ट्रीटमेंट लिया है, यह भी जरूरी जानकारी है।
चेकअप में होंठ, जीभ, गाल के अंदर, गम्स, तालू, दांत और जीभ के नीचे के हिस्से को देखा जा सकता है। डॉक्टर प्रभावित जगह को हल्के हाथ से छूकर जांच सकते हैं। गर्दन में बढ़ी हुई ग्रंथियां या गांठें भी देखी जा सकती हैं। जरूरत होने पर जबड़े की हरकत और चबाने वाली मांसपेशियों की जांच होती है।
तंबाकू, सुपारी, शराब, दूसरी बीमारियों और चल रहे ट्रीटमेंट के बारे में सवाल वजह समझने में मदद करते हैं। ये सवाल आपकी देखभाल के लिए हैं, आपको जज करने के लिए नहीं। डॉक्टर को जांच में मिली बातों और आगे टेस्ट या दूसरे स्पेशलिस्ट की जरूरत के बारे में समझाना चाहिए।
- पुराने डेंटल रिकॉर्ड, स्कैन रिपोर्ट, ब्लड टेस्ट और बायोप्सी रिपोर्ट उपलब्ध हों, तो साथ लाएं।
- चल रहे ट्रीटमेंट, बीमारियों और एलर्जी की लिस्ट लाएं।
- नोट करें कि परेशानी कब शुरू हुई और उसमें क्या बदलाव हुआ है।
- बार-बार आने वाला बदलाव अपॉइंटमेंट के दिन न दिख रहा हो, तो तारीख वाली फोटो साथ लाएं।
- खाने में दिक्कत, वजन में बदलाव या नींद खराब होने के बारे में बताएं।
क्या स्कैन, ब्लड टेस्ट या बायोप्सी की जरूरत पड़ेगी?
हर किसी को टेस्ट की जरूरत नहीं होती। यह आपकी परेशानी की जानकारी, चेकअप और इस बात पर निर्भर करता है कि टेस्ट से वजह समझने या देखभाल का प्लान तय करने में मदद मिलेगी या नहीं। स्कैन मुंह के हिस्सों को देखकर और छूकर की जाने वाली जांच की जगह नहीं ले सकता।
लक्षण पोषण की कमी या शरीर की किसी बीमारी की ओर इशारा करें, तो ब्लड टेस्ट पर विचार किया जा सकता है। दांत, हड्डी, जबड़े के जोड़ की कुछ परेशानियों या कुछ तरह की सूजन की जांच में डेंटल एक्स-रे या दूसरे स्कैन मदद कर सकते हैं।
बायोप्सी में प्रभावित हिस्से से छोटा-सा सैंपल लेकर माइक्रोस्कोप में जांच की जाती है। बिना साफ वजह के लगातार बने छाले, ऐसे धब्बे जिसमें गंभीर परेशानी का शक हो या गांठ के लिए इसकी सलाह दी जा सकती है। बायोप्सी की सलाह का मतलब यह नहीं है कि कैंसर की पुष्टि हो चुकी है।
- पूछें कि सुझाए गए टेस्ट से क्या पता लगाना है।
- पूछें कि रिपोर्ट से आगे की देखभाल कैसे बदल सकती है।
- बायोप्सी के लिए पूछें कि प्रक्रिया कैसे होती है और ठीक होने के दौरान क्या उम्मीद रखें।
- कन्फर्म करें कि रिपोर्ट कैसे समझाई जाएगी और दोबारा चेकअप के लिए आना होगा या नहीं।
मुंह और जबड़े की परेशानी का ट्रीटमेंट कैसे होता है?
देखभाल वजह के हिसाब से होती है, सिर्फ लक्षण के दिखने के तरीके से नहीं। रगड़ या चोट की वजह हो, तो दांत की तेज धार या ठीक से फिट न होने वाले नकली दांतों को ठीक करना पड़ सकता है। दूसरी परेशानियों में डॉक्टर की सलाह वाला ट्रीटमेंट, सूखापन कम करने की देखभाल या शरीर की किसी बीमारी की जांच जरूरी हो सकती है।
जबड़े की मांसपेशियों और जोड़ की परेशानी में आदतों में बदलाव, निगरानी में फिजियोथेरेपी या जरूरत के हिसाब से दांतों पर लगाने वाला उपकरण शामिल हो सकता है। मुंह की परत में चिंताजनक बदलाव हो, तो बायोप्सी या सर्जन या कैंसर केयर टीम के पास भेजने की जरूरत हो सकती है। कुछ लंबे समय की परेशानियों में लक्षण सुधरने के बाद भी नियमित चेकअप चाहिए।
डॉक्टर को समझाना चाहिए कि परेशानी आगे कैसे बदल सकती है, सुधार कैसा दिखेगा और किन बदलावों पर तय समय से पहले वापस आना है। सिर्फ दर्द कम होने से यह साबित नहीं होता कि लगातार बना छाला या धब्बा ठीक हो गया है।
- तंबाकू और सुपारी छोड़ने में मदद देखभाल का हिस्सा हो सकती है।
- दर्द वाली जगह की जांच के दौरान ऐसा खाना चुनना जिसे आराम से खा सकें और मुंह की हल्के हाथ से सफाई करना मदद कर सकता है।
- छालों या धब्बों पर तेज या जलन पैदा करने वाली चीजें न लगाएं।
- मुंह में हुए बदलाव को घर पर खुरचें, जलाएं या काटें नहीं।
- जांच के बिना जबड़े को जोर लगाकर खींचने या खोलने की एक्सरसाइज न करें।
- सलाह के मुताबिक फॉलो-अप चेकअप कराएं, ताकि ठीक होने या बने हुए बदलावों की जांच हो सके।
क्या वीडियो कंसल्टेशन से मदद मिल सकती है?
वीडियो कंसल्टेशन में लक्षणों पर बात करने, उपलब्ध रिकॉर्ड देखने और किस तरह का अपॉइंटमेंट चाहिए यह तय करने में मदद मिल सकती है। आसपास के इलाकों से आने की तैयारी कर रहे परिवारों या पुरानी रिपोर्ट समझना चाहने वालों के लिए यह उपयोगी हो सकता है।
लेकिन फोटो या वीडियो में सब कुछ नहीं दिखता। इससे भरोसेमंद तरीके से यह नहीं पता चलता कि कोई हिस्सा कितना सख्त है, गहरी सूजन कैसी है या मुंह के सभी हिस्सों में क्या हो रहा है। इससे मुंह का कैंसर न होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। जरूरत होने पर यह बायोप्सी की जगह भी नहीं ले सकता।
दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न होने वाला छाला, गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह के खून आना या मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। सांस लेने में दिक्कत या तेजी से बढ़ती सूजन हो, तो ऑनलाइन कंसल्टेशन का इंतजार करने के बजाय इमरजेंसी केयर लें।
Questions people ask
क्या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डेंटिस्ट होते हैं?
हां। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट ऐसे डेंटिस्ट होते हैं जिन्होंने मुंह की परेशानियों और उनसे जुड़े चेहरे व जबड़े के लक्षणों की जांच में पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग ली होती है। उनके काम में वजह पहचानना, बिना सर्जरी की देखभाल और दूसरे तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत होने पर सही स्पेशलिस्ट के पास भेजना शामिल है।
अंबरनाथ में डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय को कहां दिखा सकते हैं?
वे अंबरनाथ के रीज़नेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं। आने से पहले वेबसाइट के कॉन्टैक्ट पेज से जगह और अपॉइंटमेंट की व्यवस्था कन्फर्म करें। अपॉइंटमेंट लेते समय लगातार बने छाले, गांठ, खून आने, सुन्नपन या निगलने में दिक्कत के बारे में जरूर बताएं।
मुंह के धब्बे में दर्द नहीं है, तो भी जांच कराएं?
हां। लगातार बने लाल या सफेद धब्बे की जांच करानी चाहिए, भले ही दर्द न हो। दर्द से भरोसेमंद तरीके से यह नहीं पता चलता कि मुंह का बदलाव गंभीर है या नहीं। चेकअप से तय करने में मदद मिलती है कि निगरानी, टेस्ट या बायोप्सी में से क्या जरूरी है।
मुंह का छाला दो हफ्ते रहे तो क्या वह कैंसर है?
नहीं। कैंसर के अलावा भी कई परेशानियों से छाले लंबे समय तक रह सकते हैं। लेकिन दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न होने वाले छाले की डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूरी है। सिर्फ देखकर या बार-बार घरेलू उपाय करके यह न मानें कि उसमें कोई खतरा नहीं है।
सुपारी खाने से मुंह कम खुल रहा है, तो क्या डॉक्टर को दिखाएं?
हां। सुपारी मुंह की अंदरूनी परत को सख्त कर सकती है, जिससे मुंह खुलना कम हो सकता है। यह मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ाती है, भले ही इसके साथ तंबाकू न लिया जाए। मुंह कम खुल रहा हो, तो जांच और सुपारी छोड़ने में मदद लेना जरूरी है।
मुंह सामान्य दिखता है लेकिन जलन होती है, क्या ओरल मेडिसिन से मदद मिलेगी?
हां। साफ दिखाई देने वाले बदलाव के बिना भी जलन हो सकती है। जांच में सूखापन, रगड़ या इरिटेशन, पोषण की कमी, चल रहे ट्रीटमेंट और दूसरी वजहों पर ध्यान दिया जा सकता है। इसे सिर्फ तनाव की वजह से हुआ मानने के बजाय सही चेकअप के बाद वजह तय करनी चाहिए।
क्या पहली विजिट में ही बायोप्सी होगी?
जरूरी नहीं। कई लक्षणों की शुरुआती जांच परेशानी की जानकारी लेने और चेकअप से हो सकती है। मुंह के किसी हिस्से में बदलाव की वजह समझ न आए या वह चिंताजनक लगे, तो बायोप्सी की सलाह दी जा सकती है। डॉक्टर को समझाना चाहिए कि इसकी जरूरत क्यों है और इसमें क्या होगा।
निगलने में दिक्कत बढ़ रही है, तो क्या अपॉइंटमेंट तक इंतजार कर सकते हैं?
निगलने में बढ़ती दिक्कत के लिए जल्दी डॉक्टर के पास जाकर जांच कराना जरूरी है। अपनी लार भी न निगल पाना, सांस लेने में दिक्कत या मुंह या गर्दन की तेजी से बढ़ती सूजन में इमरजेंसी केयर चाहिए। इन लक्षणों में रूटीन अपॉइंटमेंट का इंतजार करके देर न करें।
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