Oral Health Library · 10 min read · हिन्दी
चबाते समय चेहरे में करंट जैसा दर्द
चबाते समय चेहरे में करंट जैसा दर्द ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का संकेत हो सकता है। यह चेहरे की संवेदना पहुंचाने वाली नस से जुड़ी परेशानी है। दांत की समस्या भी तेज दर्द कर सकती है। दर्द बार-बार हो तो डॉक्टर के पास जाकर चेकअप कराएं। दांत का या कोई दूसरा ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले वजह पहचानना जरूरी है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-09-27
Key points
- चबाने से थोड़ी देर के लिए करंट जैसे झटके आना ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का संकेत हो सकता है। लेकिन दांत और जबड़े की वजहों पर भी विचार जरूरी है।
- बार-बार या बिना साफ वजह के दर्द के झटके हों तो डॉक्टर के पास जाकर चेकअप कराएं।
- दांत की परेशानी का सबूत मिले बिना ऐसा डेंटल ट्रीटमेंट न कराएं जिसे बाद में वापस नहीं किया जा सकता।
- सांस लेने में दिक्कत, अपनी लार न निगल पाना या अचानक चेहरे का लटकना, कमजोरी और बोलने में दिक्कत जैसे स्ट्रोक के लक्षण हों तो तुरंत इमरजेंसी जाएं। स्ट्रोक दिमाग में खून की सप्लाई रुकने या खून बहने की इमरजेंसी है।
- ट्रीटमेंट वजह के हिसाब से होता है। इसमें डेंटल केयर, नस के दर्द के लिए स्पेशलिस्ट की देखभाल या चुनिंदा मामलों में प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।
चेहरे में करंट जैसा दर्द कैसा महसूस होता है?
लोग इस दर्द को गाल, जबड़े, होंठ या दांत में अचानक करंट लगने, चुभने या तेज झटका लगने जैसा बताते हैं। यह खाने का पहला निवाला लेते ही शुरू हो सकता है। बात करने या ब्रश करने जैसे रोज के कामों में भी हो सकता है। कभी-कभी हल्का छूने से भी दर्द शुरू हो जाता है।
दर्द कहां होता है, इसके साथ यह जानना भी जरूरी है कि वह किस तरह आता-जाता है। थोड़ी देर के झटके और उनके बीच साफ तौर पर दर्द न होना, लगातार दुखते दांत या देर तक चबाने के बाद दुखते जबड़े से अलग परेशानी का संकेत हो सकता है।
कभी दर्द किसी खास दांत से आता हुआ लगता है, जबकि वह दांत ठीक होता है। केवल दर्द के बारे में सुनकर वजह पक्की नहीं की जा सकती। इसलिए बार-बार होने वाले या बिना साफ वजह के दर्द की जांच जरूरी है।
- ध्यान दें कि दर्द चेहरे की एक तरफ होता है या दोनों तरफ।
- लिखें कि हर बार दर्द कुछ सेकंड, कुछ मिनट या उससे ज्यादा रहता है।
- बताएं कि दो बार दर्द होने के बीच पूरा आराम मिलता है या हल्का दर्द बना रहता है।
- काटने, हल्का छूने, ठंडी हवा, निगलने या ब्रश करने से दर्द शुरू होता है तो बताएं।
क्या यह ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया हो सकता है?
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में चेहरे की नस में बार-बार दर्द के झटके आते हैं। ट्राइजेमिनल नस चेहरे, दांत और मुंह के बड़े हिस्से से छूने और दर्द जैसी संवेदनाएं दिमाग तक पहुंचाती है। इसकी शाखाएं माथे, गाल और निचले जबड़े तक जाती हैं।
इसमें आमतौर पर चेहरे की एक तरफ बहुत तेज, करंट जैसा दर्द होता है। हर झटका अक्सर एक सेकंड से भी कम समय से लेकर करीब दो मिनट तक रहता है। लेकिन लगातार कई झटके आने पर दर्द ज्यादा देर तक चलता हुआ लग सकता है। कुछ लोगों में झटकों के बीच भी हल्का दर्द रहता है।
कुछ मामलों में दिमाग के पास खून की कोई नली इस नस पर दबाव डालती है। इससे नस की सुरक्षा करने वाली परत पर असर पड़ता है। कम मामलों में नस को प्रभावित करने वाली कोई दूसरी बीमारी वजह होती है। कभी-कभी कोई साफ वजह नहीं मिलती।
चबाने का मतलब यह नहीं कि उससे नस को नुकसान हो रहा है। असल में, बहुत संवेदनशील हो चुकी नस में सामान्य हरकत या छूने से भी दर्द शुरू हो सकता है। इससे व्यक्ति खाने, बोलने या चेहरा धोने से डरने लग सकता है।
- चबाना, बात करना, ब्रश करना और चेहरे को हल्का छूना आम तौर पर दर्द शुरू कर सकते हैं।
- बार-बार आने वाला दर्द आमतौर पर लगभग उसी हिस्से में होता है।
- लगातार सुन्नपन या नस से जुड़े दूसरे नए लक्षणों को केवल सामान्य नस का दर्द मानकर न छोड़ें। इनकी आगे जांच जरूरी है।
चबाते समय तेज दर्द की और क्या वजह हो सकती है?
हर करंट जैसा या चुभने वाला दर्द ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया नहीं होता। खराब दांत, इन्फेक्शन या चेहरे के दर्द की दूसरी परेशानियों में भी मिलते-जुलते लक्षण हो सकते हैं। ध्यान से चेकअप करने पर इनमें फर्क समझने में मदद मिलती है।
दर्द की जगह से कुछ संकेत मिलते हैं, लेकिन यह हमेशा सही वजह नहीं बताती। दर्द अपनी असली जगह से दूर भी महसूस हो सकता है। इसलिए जिस हिस्से में दर्द हो, वहां के दांत को बिना जांच के खराब मानकर ट्रीटमेंट नहीं करना चाहिए।
- दांत में क्रैक: दांत से काटते समय या काटने के बाद दबाव छोड़ते समय दर्द हो सकता है। गर्म या ठंडा खाने से भी परेशानी हो सकती है।
- दांत में सड़न या उसके अंदर सूजन: इससे ठंडा-गर्म लगना, देर तक दर्द बने रहना या अपने आप दर्द उठना हो सकता है। कभी दर्द बहुत तेज भी लग सकता है।
- दांत का इन्फेक्शन: दर्द के साथ सूजन, छूने पर दर्द, बुखार या मुंह में खराब स्वाद हो सकता है। जल्द डेंटल चेकअप जरूरी है।
- जबड़े के जोड़ या चबाने वाली मांसपेशियों की परेशानी: इनमें अक्सर कान के पास दर्द, अकड़न या जबड़ा हिलाने पर दर्द होता है। क्लिक की आवाज भी आ सकती है। लेकिन केवल क्लिक की आवाज से करंट जैसे दर्द की वजह नहीं समझाई जा सकती।
- नस का दूसरा दर्द: चेहरे पर चोट, पहले हुए ट्रीटमेंट या कुछ बीमारियों के बाद जलन, अचानक तेज दर्द या संवेदना में बदलाव हो सकता है।
- लार बनाने वाली ग्रंथियों की परेशानी: इन ग्रंथियों में खाने के आसपास दर्द या सूजन हो सकती है। यह अक्सर जबड़े के नीचे या कान के पास होती है।
- मुख्य रूप से निगलने पर दर्द: गले के अंदर, जीभ के पीछे या कान में दर्द किसी दूसरी नस से जुड़ा हो सकता है। इसकी जांच जरूरी है।
चेहरे के दर्द में कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
नया या बार-बार होने वाला करंट जैसा दर्द हो तो डॉक्टर के पास जाकर चेकअप कराएं, भले ही झटकों के बीच दर्द गायब हो जाए। दर्द बढ़ रहा हो, नींद खराब कर रहा हो या खाने में परेशानी हो रही हो तो जल्द जांच कराएं। चेकअप कराने के लिए दिखाई देने वाली सूजन का इंतजार न करें।
कुछ लक्षणों में ज्यादा जल्दी मदद चाहिए। नीचे दिए खतरे के संकेत किसी एक बीमारी की पुष्टि नहीं करते। लेकिन इनमें केवल ऑनलाइन सलाह के भरोसे नहीं रहना चाहिए।
- चेहरे का एक हिस्सा अचानक लटक जाए, हाथ या पैर में कमजोरी आए, बोलने में दिक्कत हो, अचानक दिखना बंद हो या असामान्य रूप से तेज सिरदर्द हो तो तुरंत इमरजेंसी जाएं।
- सांस लेने में दिक्कत, चेहरे या गर्दन की तेजी से बढ़ती सूजन या अपनी लार भी न निगल पाना हो तो तुरंत इमरजेंसी जाएं।
- दर्द की वजह से पानी न पी पा रहे हों, या सूजन के साथ बुखार अथवा बहुत खराब तबीयत हो तो तुरंत मेडिकल मदद लें।
- चेहरे में नया या लगातार सुन्नपन, कमजोरी, सुनने में बदलाव या आंख के आसपास दर्द हो तो जल्द जांच कराएं।
- मुंह का अल्सर, यानी छाला, दो हफ्ते से ज्यादा समय में न भरे तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं।
- गांठ, बिना साफ वजह खून आना, मुंह खोलने में दिक्कत या निगलने में परेशानी हो तो जल्द चेकअप कराएं।
- बिना वजह वजन घटे या ऊपर-नीचे के दांतों के मिलने के तरीके में लगातार बदलाव रहे तो डॉक्टर को बताएं।
चेहरे में करंट जैसे दर्द के लिए किस डॉक्टर को दिखाएं?
दांतों के डॉक्टर दांत, गम्स यानी मसूड़ों और जबड़े से जुड़ी वजहों की जांच कर सकते हैं। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट ऐसे दांतों के डॉक्टर होते हैं जिन्हें मुंह की बीमारियों और चेहरे के दर्द की जांच की खास ट्रेनिंग होती है। वजह साफ न हो तो वे मदद कर सकते हैं। जनरल फिजिशियन भी लक्षण देखकर जरूरत के हिसाब से दूसरे स्पेशलिस्ट के पास भेज सकते हैं।
दर्द का तरीका ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया या नस की दूसरी परेशानी जैसा लगे तो न्यूरोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ सकती है। न्यूरोलॉजिस्ट दिमाग, रीढ़ के अंदर की नसों के मुख्य रास्ते और शरीर की नसों की बीमारियों के डॉक्टर होते हैं। कभी दांत और नसों, दोनों की जांच जरूरी होती है। एक जांच दूसरी की जगह नहीं लेती।
दांत ठीक दिख रहा हो और चेकअप से दर्द की वजह समझ न आए तो ऐसा डेंटल ट्रीटमेंट कराने से पहले आगे जांच जरूरी है जिसे बाद में वापस नहीं किया जा सकता। स्वस्थ दांतों पर बार-बार ट्रीटमेंट कराने से नस का दर्द जरूरी नहीं कि ठीक हो।
- पुराने डेंटल एक्स-रे, स्कैन रिपोर्ट और पहले हुए ट्रीटमेंट की जानकारी साथ लाएं।
- बताएं कि दर्द किसी डेंटल ट्रीटमेंट से पहले शुरू हुआ था या बाद में।
- चेहरे की चोट, दाने या चकत्ते, महसूस करने में बदलाव और दूसरी बीमारियों के बारे में बताएं।
- मुंबई और आसपास के ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर और उल्हासनगर जैसे इलाकों में चेहरे के बिना साफ वजह वाले दर्द के लिए ओरल मेडिसिन का अपॉइंटमेंट जांच की शुरुआत हो सकता है।
चेहरे के दर्द के चेकअप में क्या होता है?
डॉक्टर आपसे अपने शब्दों में दर्द बताने को कहेंगे। वे आमतौर पर पूछेंगे कि दर्द कहां शुरू होता है, एक झटका कितनी देर रहता है, किससे शुरू होता है और क्या बीच में दर्द बिल्कुल नहीं होता। दर्द दिखाने के लिए जानबूझकर तेज झटका शुरू करने की जरूरत नहीं है।
चेकअप में दांत, गम्स, मुंह की अंदरूनी परत, जबड़े की हरकत और चबाने वाली मांसपेशियां देखी जा सकती हैं। डॉक्टर हल्के टेस्ट से अलग-अलग दांतों की प्रतिक्रिया जांच सकते हैं। वे चेहरे की दोनों तरफ महसूस करने की क्षमता की तुलना भी कर सकते हैं और नसों के काम में बदलाव देख सकते हैं।
दांत या हड्डी की परेशानी का शक हो तो डेंटल एक्स-रे मदद कर सकते हैं। उनसे ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की पुष्टि नहीं होती। नस की परेशानी का शक हो तो डॉक्टर एमआरआई करा सकते हैं। यह एक स्कैन है जो चुंबक की मदद से दिमाग और नसों के आसपास के हिस्सों की तस्वीरें बनाता है।
स्कैन संभावित वजहों की जांच में मदद करता है। वह दर्द की पूरी जानकारी और चेकअप की जगह नहीं लेता। मुंह में लंबे समय से घाव, बदला हुआ हिस्सा या गांठ हो तो उसकी अलग जांच जरूरी हो सकती है। कभी इसमें बायोप्सी की जरूरत होती है। बायोप्सी में उस हिस्से से छोटा सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है।
चेहरे में करंट जैसे दर्द का ट्रीटमेंट कैसे होता है?
देखभाल इस बात पर निर्भर करती है कि जांच में वजह क्या मिली है। क्रैक वाले या खराब दांत का ट्रीटमेंट उसी दांत की परेशानी के हिसाब से होता है। जबड़े की मांसपेशी या जोड़ की परेशानी में डॉक्टर की देखरेख में एक्सरसाइज, फिजियोथेरेपी और जबड़े पर जोर डालने वाली आदतों में बदलाव शामिल हो सकते हैं।
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में आमतौर पर डॉक्टर नस का दर्द कम करने के लिए ट्रीटमेंट तय करते हैं। फॉलो-अप यानी दोबारा चेकअप में देखा जाता है कि दर्द के झटके कम बार या कम तेज हो रहे हैं या नहीं। ट्रीटमेंट से कोई अनचाहा असर तो नहीं हो रहा, यह भी जांचा जाता है। यह देखना भी जरूरी है कि व्यक्ति खा-पी पा रहा है और रोज के काम कर पा रहा है या नहीं।
दर्द काबू में न आए या शुरुआती ट्रीटमेंट सही न बैठे तो स्पेशलिस्ट नस पर की जाने वाली प्रक्रियाओं या कुछ चुने हुए मामलों में सर्जरी पर बात कर सकते हैं। चुनाव दर्द के तरीके, स्कैन की रिपोर्ट, बाकी सेहत और व्यक्ति की पसंद पर निर्भर करता है।
इन प्रक्रियाओं के जोखिम भी हो सकते हैं, जैसे चेहरे में महसूस करने की क्षमता बदलना। कभी दर्द वापस भी आ सकता है। स्पेशलिस्ट को संभावित फायदे और सीमाएं समझानी चाहिए। दांत निकालना ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का ट्रीटमेंट नहीं है। दांत तभी निकाला जाता है जब उसमें अलग से ऐसी डेंटल परेशानी हो जिसके लिए निकालना जरूरी हो।
अपॉइंटमेंट तक चेहरे के दर्द में क्या मदद कर सकता है?
चेकअप का इंतजाम होने तक छोटे बदलाव खाने और मुंह साफ करने में कुछ आराम दे सकते हैं। इनसे बीमारी की पुष्टि नहीं होती और न ही नस की अंदरूनी परेशानी का ट्रीटमेंट होता है। पर्याप्त खाना या पानी नहीं ले पा रहे हों तो तुरंत मेडिकल मदद लें।
घर के लोग लक्षण लिखने और नियमित खाना खाने में साथ देकर मदद कर सकते हैं। चेहरे का तेज दर्द बहुत थकाने वाला और डराने वाला हो सकता है, भले ही चेहरे पर कुछ अलग दिखाई न दे।
- सख्त खाना दर्द शुरू करता हो तो नरम चीजें चुनें जिन्हें कम चबाना पड़े।
- छोटे निवाले लें। बहुत गर्म या ठंडी चीजों से दर्द होता हो तो उनसे बचें।
- जितना सहन हो, मुंह की सफाई हल्के हाथ से जारी रखें। सफाई पूरी तरह बंद न करें।
- दर्द शुरू करने वाली जगह को बार-बार छूकर या दबाकर टेस्ट न करें।
- सीधी ठंडी हवा से दर्द शुरू होता हो तो चेहरे को उससे बचाएं।
- दर्द की जगह, कितनी देर रहता है, किससे शुरू होता है और खाने पर क्या असर पड़ता है, इसकी छोटी डायरी रखें।
- किसी और का प्रिस्क्रिप्शन इस्तेमाल न करें। दांत या गम्स पर जलन या नुकसान करने वाले घरेलू नुस्खे न लगाएं।
- केवल उस जगह से दर्द आता हुआ लगने पर दांत निकलवाने के लिए हां न कहें। पूछें कि चेकअप में ऐसा क्या मिला है जिससे दांत निकालना जरूरी लगता है।
समय के साथ चेहरे के दर्द में क्या बदलाव हो सकते हैं?
चेहरे के दर्द की कुछ परेशानियां घटती-बढ़ती रहती हैं। कुछ समय आराम रहने के बाद फिर झटके आ सकते हैं। एक हफ्ता दर्द न होने का मतलब हमेशा यह नहीं कि वजह खत्म हो गई है। दर्द लौटे, उसका तरीका बदले या दूसरी जगह होने लगे तो दोबारा चेकअप कराना उपयोगी है।
छोटे झटकों की जगह लगातार दर्द होने लगे, सुन्नपन आए या खाने में परेशानी हो तो दोबारा जांच खास तौर पर जरूरी है। इन बदलावों का मतलब अपने आप कोई गंभीर बीमारी नहीं है। लेकिन दर्द की वजह पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।
ऑनलाइन कंसल्टेशन से दर्द की जानकारी समझने और अगला कदम तय करने में मदद मिल सकती है। लेकिन वह दांतों के टेस्ट, मुंह के चेकअप या नसों की पूरी जांच की जगह नहीं ले सकता। लक्ष्य दर्द की असली वजह पहचानना, गैरजरूरी ट्रीटमेंट से बचना और रोज के काम आराम से करने में मदद देना है।
Questions people ask
क्या करंट जैसा दर्द हमेशा ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया होता है?
नहीं। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया एक संभावित वजह है, खासकर जब चेहरे की एक तरफ थोड़ी देर के झटके हल्का छूने या चबाने से शुरू हों। दांत में क्रैक और दूसरी परेशानियां भी तेज दर्द कर सकती हैं। चेकअप जरूरी है।
क्या नस का दर्द दांत से आता हुआ लग सकता है?
हां। चेहरे की यही नस दांतों और आसपास के हिस्सों की संवेदना पहुंचाती है। इसलिए नस का दर्द दांत का दर्द लग सकता है, भले ही दांत की कोई बीमारी इन लक्षणों की वजह न हो।
पहले दांतों के डॉक्टर को दिखाएं या न्यूरोलॉजिस्ट को?
दांतों के डॉक्टर या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट दांत से जुड़ी संभावित वजहों की जांच कर सकते हैं और जरूरत पर दूसरे स्पेशलिस्ट के पास भेज सकते हैं। नस की परेशानी का शक हो तो न्यूरोलॉजिस्ट की जरूरत हो सकती है। इमरजेंसी वाले खतरे के संकेत हों तो इसके बजाय तुरंत अस्पताल जाएं।
कभी नरम खाना खाने से भी दर्द क्यों होता है?
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में हल्की हरकत या छूने से भी संवेदनशील नस में दर्द शुरू हो सकता है। वजह जरूरी नहीं कि खाने का सख्त होना हो। अपॉइंटमेंट पर डॉक्टर को इस बारे में जरूर बताएं।
क्या दर्द वाला दांत निकलवाने से आराम मिलेगा?
केवल तभी, जब जांच में दांत की ऐसी परेशानी मिली हो जिसके लिए उसे निकालना जरूरी हो। स्वस्थ दांत निकालना ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का ट्रीटमेंट नहीं है। ऐसा कोई भी ट्रीटमेंट कराने से पहले, जिसे वापस नहीं किया जा सकता, डॉक्टर से जांच में मिली वजह समझें।
क्या चेहरे में करंट जैसे दर्द के लिए एमआरआई जरूरी है?
चबाते समय दर्द होने वाले हर व्यक्ति को एमआरआई की जरूरत नहीं होती। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया या नस की दूसरी परेशानी का शक होने पर अक्सर इस पर विचार किया जाता है। डॉक्टर लक्षणों की जानकारी और चेकअप के आधार पर फैसला करते हैं।
क्या चेहरे में करंट जैसा दर्द कैंसर का संकेत है?
केवल इस लक्षण से कैंसर की पुष्टि नहीं होती। लेकिन दो हफ्ते से ज्यादा समय तक न भरने वाला अल्सर, गांठ, बिना वजह खून आना, सुन्नपन, मुंह खोलने में दिक्कत या निगलने में परेशानी हो तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराना जरूरी है।
दर्द के झटके बंद हो गए हों तो क्या इंतजार कर सकते हैं?
झटके बार-बार आए थे या उनकी वजह साफ नहीं थी तो अब आराम होने पर भी चेकअप कराएं। दर्द लौटे, खाने-पीने में रुकावट बने या साथ में सूजन, सुन्नपन अथवा दूसरे खतरे के संकेत हों तो और जल्दी मदद लें।
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