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गर्दन में बिना दर्द की गांठ: क्या यह मुंह का कैंसर हो सकता है?

गर्दन में बिना दर्द की गांठ कभी-कभी मुंह या गले के कैंसर का संकेत हो सकती है। लेकिन इन्फेक्शन और कैंसर के अलावा दूसरी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। सिर्फ दर्द होने या न होने से यह पता नहीं चलता कि गांठ गंभीर है या नहीं। डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं, खासकर अगर गांठ बढ़ रही है, उसकी वजह साफ नहीं है या उसे दो हफ्ते हो चुके हैं।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-11-04

Key points

  • गर्दन में बिना दर्द की गांठ की वजह कैंसर या कैंसर के अलावा दूसरी समस्या हो सकती है। सिर्फ दर्द से इनमें फर्क नहीं किया जा सकता।
  • गांठ की वजह साफ न हो तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं, खासकर अगर वह बढ़ रही हो या दो हफ्ते से मौजूद हो।
  • मुंह का अल्सर ठीक न हो, सुन्नपन हो, बिना साफ वजह खून आए या मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो तो जल्द जांच जरूरी है।
  • सांस लेने में दिक्कत, अपनी लार न निगल पाना या तेजी से बढ़ती सूजन होने पर इमरजेंसी में जाना जरूरी है।
  • बताए गए टेस्ट पूरे कराएं और अगले चेकअप की साफ योजना रखें।

मुंह के कैंसर से गर्दन में गांठ कैसे हो सकती है?

गर्दन में लिम्फ नोड्स होते हैं। ये शरीर के छोटे हिस्से हैं जो इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं। मुंह, दांत, गले या शरीर के किसी दूसरे हिस्से की समस्या के कारण ये बड़े हो सकते हैं।

मुंह का कैंसर तब शुरू होता है जब मुंह की कोशिकाएं, यानी शरीर बनाने वाली छोटी इकाइयां, बेकाबू होकर बढ़ने लगती हैं। यह जीभ, गाल के अंदर, गम्स यानी मसूड़ों या जीभ के नीचे मुंह के हिस्से में हो सकता है। कैंसर की कोशिकाएं कभी-कभी गर्दन के पास वाले लिम्फ नोड्स तक फैलकर उन्हें बड़ा कर सकती हैं।

मुंह में बदलाव दिखने से पहले किसी व्यक्ति को गर्दन में गांठ नजर आ सकती है। कुछ कैंसर गले में पीछे की तरफ शुरू होते हैं, जहां आईने में आसानी से नहीं दिखता। इसलिए जांच में मुंह और गला, दोनों देखना जरूरी हो सकता है।

लेकिन लिम्फ नोड का बढ़ना अपने-आप में कैंसर होने का मतलब नहीं है। गांठ की जगह, फोटो या घर पर उसे छूकर उसकी वजह पक्की नहीं की जा सकती।

गर्दन में बिना दर्द की गांठ की और क्या वजहें हो सकती हैं?

कई समस्याओं में गर्दन में बिना दर्द की गांठ हो सकती है। कुछ लिम्फ नोड्स से जुड़ी होती हैं। दूसरी समस्याएं ग्रंथियों, यानी शरीर में खास तरल या हार्मोन बनाने वाले हिस्सों, त्वचा या उसके नीचे के हिस्सों से जुड़ी हो सकती हैं।

हाल में हुआ इन्फेक्शन लिम्फ नोड की सूजन की वजह हो सकता है। लेकिन गांठ बनी रहे या बढ़े तो इस वजह की भी जांच जरूरी है। बड़ों में गर्दन की नई, तरल से भरी गांठ को बिना जांच के नुकसान न करने वाली गांठ नहीं मान लेना चाहिए।

  • हाल में हुआ इन्फेक्शन: सर्दी-जुकाम, गले का इन्फेक्शन या दांत का इन्फेक्शन पास के लिम्फ नोड्स को बड़ा कर सकता है। छूने पर दर्द होना जरूरी नहीं है।
  • टीबी: यह एक इन्फेक्शन है जो गर्दन के लिम्फ नोड्स को भी प्रभावित कर सकता है। खांसी न हो, तब भी जांच की जरूरत हो सकती है।
  • लार बनाने वाली ग्रंथियों की समस्या: इनमें रुकावट, सूजन या कोई गांठ होने से सूजन आ सकती है। कुछ सूजन खाने के समय बढ़ती या घटती है।
  • थायरॉइड की समस्या: थायरॉइड गर्दन के सामने, निचले हिस्से में मौजूद एक ग्रंथि है। इसका बढ़ना या इसके अंदर छोटी गांठ बनना गर्दन में गांठ की वजह हो सकता है।
  • सिस्ट या चर्बी की गांठ: सिस्ट तरल या दूसरे पदार्थ से भरी थैली होती है। सिस्ट और चर्बी की गांठ में कैंसर नहीं भी हो सकता है, लेकिन यह पता करना जरूरी है कि गांठ असल में क्या है।
  • दूसरे कैंसर: गर्दन में गांठ गले के कैंसर, थायरॉइड कैंसर या लिम्फैटिक सिस्टम के कैंसर से भी हो सकती है। लिम्फैटिक सिस्टम शरीर में लिम्फ नोड्स और उनसे जुड़ी नलियों का जाल है।

गांठ में दर्द नहीं है, छोटी है या हिलती है तो क्या खतरा नहीं है?

नहीं। बिना दर्द की गांठ का मतलब यह नहीं कि उससे कोई खतरा नहीं है। उसी तरह दर्द वाली गांठ का मतलब अपने-आप कैंसर नहीं है। दर्द जांच का सिर्फ एक हिस्सा है।

डॉक्टर देखते हैं कि गांठ कब से है, बढ़ रही है या नहीं और दूसरे लक्षण हैं या नहीं। वे उसकी जगह, सख्ती और हिलने-डुलने को भी जांचते हैं। सख्त गांठ जो अंदर के हिस्सों से चिपकी लगे, चिंता की वजह हो सकती है। लेकिन नरम या हिलने वाली गांठ की भी जांच जरूरी हो सकती है।

सिर्फ आकार देखकर घर पर फैसला करने का कोई भरोसेमंद नियम नहीं है। छोटी गांठ की जांच जरूरी हो सकती है, जबकि बड़ी गांठ की वजह कैंसर के अलावा कुछ और हो सकती है। बार-बार दबाने से वजह पता नहीं चलेगी और उस जगह दर्द हो सकता है।

उम्र और पहले तंबाकू या शराब का इस्तेमाल जांच की दिशा तय करने में मदद करते हैं। लेकिन सिर्फ इनसे नतीजा तय नहीं होता। मुंह और गले का कैंसर उन लोगों को भी हो सकता है जिन्होंने कभी तंबाकू इस्तेमाल नहीं किया।

किन लक्षणों पर जल्दी चेकअप या इमरजेंसी में जाना चाहिए?

गर्दन में ऐसी कोई भी गांठ जिसकी वजह साफ न हो, उसके लिए जल्द डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। बड़ों में दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से मौजूद गांठ की समय पर जांच जरूरी है। यह भी जरूरी है अगर पता नहीं कि गांठ कब से है। दर्द शुरू होने का इंतजार न करें।

अगर गांठ बढ़ रही है या खतरे के दूसरे संकेत हैं, तो दो हफ्ते तक इंतजार नहीं करना है। गांठ के साथ मुंह में कोई बदलाव लगातार बना है तो जांच जरूरी है, भले ही खाने और रोज के कामों में परेशानी न हो।

  • मुंह का अल्सर यानी छाला या घाव, जो दो हफ्ते से ज्यादा समय में भी ठीक न हुआ हो।
  • मुंह में, जबड़े के नीचे या गर्दन में कहीं भी नई गांठ।
  • मुंह में लगातार बना लाल या सफेद धब्बा, या कोई हिस्सा मोटा लगना।
  • मुंह से बिना साफ वजह के खून आना।
  • जीभ, निचले होंठ, ठुड्डी या चेहरे के किसी दूसरे हिस्से में सुन्नपन।
  • मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत।
  • आवाज में लगातार बदलाव, एक तरफ कान में दर्द या गले में कुछ अटका हुआ लगना।
  • बिना साफ वजह वजन कम होना, लगातार बुखार या रात में इतना पसीना आना कि कपड़े भीग जाएं।
  • इमरजेंसी के संकेत: सांस लेने में दिक्कत, अपनी लार भी न निगल पाना, तेजी से बढ़ती सूजन या बहुत ज्यादा खून आना जो रुक न रहा हो। तुरंत इमरजेंसी में जाएं।

गर्दन की गांठ किस डॉक्टर को दिखाएं और वे क्या जांचेंगे?

गर्दन की ऐसी गांठ जिसकी वजह साफ न हो, उसकी जांच जनरल फिजिशियन यानी सामान्य बीमारियों के डॉक्टर या ईएनटी स्पेशलिस्ट यानी कान, नाक और गले के डॉक्टर कर सकते हैं। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट ऐसे दांतों के डॉक्टर होते हैं जिन्हें मुंह और उससे जुड़े हिस्सों की बीमारियों की जांच की ट्रेनिंग होती है। वे साथ में मौजूद मुंह के बदलाव जांच सकते हैं और जरूरत पर दूसरे स्पेशलिस्ट के पास भेज सकते हैं।

डॉक्टर पूछेंगे कि गांठ कब दिखी और उसमें कोई बदलाव हुआ है या नहीं। वे हाल की बीमारी, दांतों की समस्या, निगलने, आवाज में बदलाव, बुखार, वजन कम होने, पहले हुए ट्रीटमेंट और तंबाकू या शराब के इस्तेमाल के बारे में पूछ सकते हैं। गुटखा, खैनी और सुपारी जैसी चबाने वाली चीजों के बारे में भी बताएं। सुपारी से भी कैंसर का खतरा होता है।

जांच में आम तौर पर गर्दन, होंठ, गाल, गम्स, जीभ और जीभ के नीचे का हिस्सा देखा जाता है। जांच में जो मिले, उसके आधार पर ईएनटी स्पेशलिस्ट गले के अंदर के हिस्से देखने के लिए एक पतले उपकरण का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑनलाइन सलाह से लक्षण समझने और अगला कदम तय करने में मदद मिल सकती है। लेकिन यह गांठ को छूकर जांचने और फोटो में न दिखने वाले हिस्सों की जांच की जगह नहीं ले सकती।

गर्दन की गांठ के लिए कौन से टेस्ट हो सकते हैं?

हर व्यक्ति को हर टेस्ट की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर जांच और सूजन की संभावित वजह के हिसाब से टेस्ट चुनते हैं। अलग-अलग टेस्ट से अलग जानकारी मिलती है। सिर्फ स्कैन से वजह पक्की नहीं हो सकती।

बढ़े हुए लिम्फ नोड की वजह साफ न हो तो अक्सर सुई से सैंपल लेने पर विचार किया जाता है। सैंपल से साफ जवाब न मिले तो दोबारा या किसी दूसरे तरीके से सैंपल लेने, या स्पेशलिस्ट की जांच की जरूरत हो सकती है। रिपोर्ट साफ न होने का मतलब यह नहीं कि गांठ को नजरअंदाज किया जा सकता है।

  • अल्ट्रासाउंड: इसमें आवाज की तरंगों से गांठ और आसपास के हिस्से देखे जाते हैं। सैंपल लेने के लिए सुई को सही जगह पहुंचाने में भी इससे मदद मिल सकती है।
  • फाइन-नीडल एस्पिरेशन: पतली सुई से कोशिकाओं या तरल का सैंपल लेकर लैब में जांचा जाता है। इसे एफएनए या एफएनएसी भी कहते हैं।
  • बायोप्सी: शरीर के किसी हिस्से का छोटा टुकड़ा यानी टिशू सैंपल लेकर लैब में जांचा जाता है। मुंह की किसी संदिग्ध जगह से या चुनिंदा मामलों में गर्दन की गांठ से यह सैंपल लेना जरूरी हो सकता है।
  • सीटी या एमआरआई: ये स्कैन गर्दन के अंदर के हिस्सों की साफ और विस्तृत तस्वीर देते हैं। इनमें से किसी की जरूरत है या नहीं, यह डॉक्टर तय करते हैं।
  • जरूरत के हिसाब से खून या इन्फेक्शन के टेस्ट: इनसे कुछ वजहों की जांच में मदद मिल सकती है। लेकिन सिर्फ सामान्य ब्लड टेस्ट से यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि मुंह या गले का कैंसर नहीं है।

वजह पता चलने के बाद ट्रीटमेंट कैसे होता है?

देखभाल और ट्रीटमेंट गांठ की वजह पर निर्भर करते हैं, सिर्फ इस पर नहीं कि दर्द है या नहीं। अगर इन्फेक्शन या दांत की समस्या वजह है, तो उसी का ट्रीटमेंट किया जाता है। बाद के चेकअप यानी फॉलो-अप में देखा जाता है कि सूजन उम्मीद के मुताबिक कम हो रही है या नहीं।

कुछ गांठों में कैंसर न होने की पुष्टि के बाद नियमित जांच के साथ उन पर नजर रखी जा सकती है। कुछ में बढ़ने, लक्षण पैदा करने या वजह साफ न होने के कारण कोई प्रक्रिया करने की जरूरत होती है। नजर रखने के साथ अगला चेकअप कब होगा, इसकी साफ योजना होनी चाहिए। सिर्फ बिना समय तय किए इंतजार करने की सलाह काफी नहीं है।

कैंसर की पुष्टि हो तो सिर और गर्दन के कैंसर की टीम के पास भेजा जाता है। आगे की जांच से पता चलता है कि कैंसर कितना फैला है। इसे स्टेज कहते हैं। सिर्फ गर्दन की गांठ से स्टेज पता नहीं चलती और इसका मतलब यह भी नहीं कि ट्रीटमेंट संभव नहीं है।

कैंसर की देखभाल में सर्जरी यानी ऑपरेशन, रेडिएशन ट्रीटमेंट यानी खास जगह पर केंद्रित ऊर्जा से कैंसर का इलाज, या स्पेशलिस्ट के दूसरे कैंसर ट्रीटमेंट शामिल हो सकते हैं। योजना कैंसर की जगह, उसके फैलाव और व्यक्ति की कुल सेहत के हिसाब से बनती है। खाने, बोलने, निगलने और दांतों की सेहत से जुड़ी मदद भी देखभाल का हिस्सा हो सकती है।

अपॉइंटमेंट का इंतजार करते समय मरीज और परिवार क्या करें?

अगला उपयोगी कदम जांच की तैयारी करना है, न कि बार-बार गांठ छूकर खुद उसकी पहचान करने की कोशिश करना। गांठ को दबाकर निचोड़ें नहीं, उसमें छेद न करें और ऐसी कोई चीज न लगाएं जिससे जलन हो।

वजह पता किए बिना घरेलू नुस्खों या बार-बार ट्रीटमेंट आजमाने पर भरोसा न करें। गांठ बढ़े, कोई नया लक्षण आए या तय अपॉइंटमेंट में देरी हो तो क्लिनिक या अस्पताल से फिर संपर्क करें और बताएं कि क्या बदला है।

  • लिख लें कि गांठ पहली बार कब दिखी और उसमें कोई बदलाव हुआ है या नहीं।
  • मुंह में अल्सर, खून आना, सुन्नपन, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव, बुखार या वजन कम होने जैसे लक्षण नोट करें।
  • पुराने स्कैन की रिपोर्ट, लैब रिपोर्ट और अभी चल रहे ट्रीटमेंट की लिस्ट साथ लाएं।
  • तंबाकू, सुपारी और शराब के इस्तेमाल के बारे में खुलकर बताएं। इससे जांच में मदद मिलती है; यह दोष देने की बात नहीं है।
  • तंबाकू और सुपारी से बचें। छोड़ने में जरूरत हो तो मदद लें। इन्हें छोड़ देना पहले से मौजूद गांठ की जांच का विकल्प नहीं है।
  • पूछें कि रिपोर्ट कब तक मिलेगी, उसे कौन समझाएगा और गांठ बनी रहे तो क्या करना है।

मुंबई या आसपास गर्दन की गांठ की जांच कहां कराएं?

मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर में रहने वाले लोग पास के फिजिशियन या ईएनटी सेवा से शुरुआत कर सकते हैं। साथ में मुंह के लक्षण हों तो ओरल मेडिसिन सेवा से भी जांच करा सकते हैं। अगर दूसरी जगह जल्दी जांच हो सकती है तो किसी खास क्लिनिक का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय, सायन, मुंबई के के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्पेशल डेंटल ओपीडी और अंबरनाथ के रीजनेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं। ओरल मेडिसिन चेकअप में मुंह के बदलावों की जांच हो सकती है। इससे यह तय करने में भी मदद मिलती है कि कब ईएनटी या दूसरे स्पेशलिस्ट के पास जाना जरूरी है।

अपॉइंटमेंट लेते समय समस्या साफ बताएं: गर्दन में बिना दर्द की गांठ है, कब से है और साथ में खतरे का कोई संकेत है या नहीं। सांस लेने में दिक्कत या अपनी लार भी न निगल पाने पर सामान्य क्लिनिक अपॉइंटमेंट के बजाय इमरजेंसी में जाना जरूरी है।

Questions people ask

क्या मुंह में अल्सर न होने पर भी कैंसर से गर्दन में गांठ हो सकती है?

हां। मुंह का बदलाव छोटा हो सकता है या आसानी से न दिखे। गले के अंदर का कैंसर ऐसा अल्सर नहीं भी बना सकता जो बाहर से दिखे। घर पर मुंह सामान्य दिखने पर भी गर्दन की ऐसी गांठ की जांच जरूरी है जिसकी वजह साफ न हो।

गर्दन में बिना दर्द की गांठ हो तो चेकअप से पहले कितना इंतजार करें?

वजह साफ नहीं है तो जल्द जांच कराएं। बड़ों में दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से मौजूद गांठ की समय पर जांच जरूरी है। गांठ बढ़ रही हो या साथ में मुंह में बदलाव, सुन्नपन, खून आना या निगलने में दिक्कत हो तो इतना इंतजार भी न करें।

क्या दांत के इन्फेक्शन से गर्दन में बिना दर्द की गांठ हो सकती है?

हां। दांत के इन्फेक्शन से पास के लिम्फ नोड्स बड़े हो सकते हैं और उनमें हमेशा दर्द नहीं होता। दांतों के चेकअप से वजह की जांच हो सकती है। बनी रहने वाली गांठ को बिना जांच और फॉलो-अप के सिर्फ दांत की समस्या न मानें।

मैं सिगरेट नहीं पीता और तंबाकू नहीं चबाता। क्या फिर भी कैंसर हो सकता है?

हां, हालांकि तंबाकू कैंसर का खतरा बढ़ाने वाली एक अहम वजह है। तंबाकू इस्तेमाल किए बिना भी कैंसर हो सकता है। बिना तंबाकू वाली सुपारी से भी खतरा होता है। लगातार बनी गांठ की जांच जरूरी है, चाहे कोई खास आदत हो या न हो।

गांठ उंगलियों के नीचे हिलती है तो क्या कैंसर नहीं है?

नहीं। गांठ का हिलना, नरम होना या उसमें दर्द न होना भरोसे से यह नहीं बता सकता कि कैंसर नहीं है। डॉक्टर इन बातों के साथ लक्षणों की जानकारी, पूरी जांच और जरूरत के टेस्ट देखते हैं।

ब्लड टेस्ट नॉर्मल है तो क्या मुंह का कैंसर नहीं है?

नहीं। सामान्य ब्लड टेस्ट से भरोसे के साथ यह नहीं कहा जा सकता कि मुंह या गले का कैंसर नहीं है। वजह पता करने के लिए डॉक्टर की जांच और जरूरत होने पर कोशिकाओं या टिशू के सैंपल की जांच जरूरी होती है।

डॉक्टर ने बायोप्सी कही है तो क्या कैंसर पक्का है?

नहीं। बायोप्सी कैंसर और दूसरी समस्याओं के बीच फर्क करने में मदद करती है। सैंपल मांगने का मतलब है कि डॉक्टर को और जानकारी चाहिए। यह अपने-आप कैंसर की पुष्टि नहीं है।

गांठ छोटी हो रही है तो क्या अपॉइंटमेंट कैंसल कर सकते हैं?

गांठ का छोटा होना राहत की बात हो सकती है, लेकिन इससे उसकी वजह हमेशा साफ नहीं होती। योजना बदलने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें। यह खास तौर पर जरूरी है अगर गांठ अभी भी है, दोबारा आ गई है या उसके साथ मुंह या गले के खतरे वाले लक्षण थे।

This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.