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जबड़े के जोड़ में दर्द क्यों होता है और चेकअप कब कराएं?

टीएमजे का दर्द कान के ठीक आगे, जबड़े के जोड़ या जबड़ा चलाने वाली मांसपेशियों में होता है। इससे चबाते समय दर्द, अकड़न, क्लिक की आवाज या जबड़ा लॉक होने की परेशानी हो सकती है। दर्द बना रहे, मुंह कम खुले, सूजन हो या ऊपर-नीचे के दांत पहले की तरह न मिलें, तो डेंटिस्ट के पास जाकर चेकअप कराना जरूरी है।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-09-25

Key points

  • टीएमजे का दर्द जबड़े के जोड़ या आसपास की मांसपेशियों से आ सकता है। ऐसा ही दर्द दांत, कान या दूसरी परेशानियों से भी हो सकता है।
  • लगातार दर्द, जबड़ा लॉक होना, मुंह कम खुलना और दांतों के मिलने में नया बदलाव हो, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं।
  • दो हफ्ते से ज्यादा समय तक न भरने वाला अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना वजह खून आना या निगलने में परेशानी हो, तो जल्द जांच जरूरी है।
  • देखभाल आमतौर पर ऐसे तरीकों से शुरू होती है जो दांतों या जोड़ को स्थायी रूप से नहीं बदलते। स्कैन, डेंटल उपकरण और प्रोसीजर जांच के अनुसार चुने जाते हैं।
  • दर्द की वजह साफ हुए बिना जोर लगाकर जबड़े की एक्सरसाइज या दांतों के मिलने के तरीके में हमेशा के लिए बदलाव कराने से बचें।

टीएमजे का दर्द क्या होता है?

टीएमजे का पूरा नाम टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट है। यह जोड़ निचले जबड़े को खोपड़ी से जोड़ता है। दोनों कानों के ठीक आगे एक-एक जोड़ होता है। ये जोड़ आसपास की मांसपेशियों के साथ मिलकर चबाने, बोलने और जम्हाई लेने में मदद करते हैं।

हर जोड़ के अंदर हिलने वाली सतहों के बीच एक छोटी डिस्क होती है, जो कुशन का काम करती है। दर्द जोड़, उसके आसपास के टिश्यू यानी शरीर के ऊतकों या चबाने वाली मांसपेशियों से आ सकता है। इन परेशानियों को मिलाकर टेम्पोरोमैंडिबुलर डिसऑर्डर्स या टीएमडी कहा जाता है।

लोग अक्सर जबड़े के दर्द को ही ‘टीएमजे’ कहते हैं। लेकिन टीएमजे जोड़ का नाम है, किसी बीमारी की पहचान नहीं। कान के पास दर्द हमेशा जबड़े के जोड़ की वजह से नहीं होता। दांत की परेशानी, कान की बीमारी या चेहरे के दर्द की कोई दूसरी वजह भी ऐसा दर्द दे सकती है।

  • दर्द एक तरफ या दोनों तरफ हो सकता है।
  • कुछ लोगों में मुख्य परेशानी मांसपेशियों का दर्द होती है। दूसरों में जोड़ का दर्द या जबड़ा कम हिलने की परेशानी होती है।
  • अगर क्लिक की आवाज हो, लेकिन दर्द न हो और जबड़ा ठीक से हिलता हो, तो सिर्फ आवाज के कारण ट्रीटमेंट जरूरी नहीं होता।

टीएमजे की परेशानी में क्या लक्षण होते हैं?

जबड़ा हिलाने पर लक्षण अक्सर बदलते हैं। सख्त खाना चबाने, मुंह ज्यादा खोलने या देर तक बोलने से तकलीफ हो सकती है। कुछ लोगों को सुबह उठने पर दर्द महसूस होता है, जबकि दूसरों को दिन में बाद में होता है।

जबड़े की मांसपेशियों के दर्द के साथ कनपटी, यानी सिर के दोनों तरफ कानों के आगे के हिस्से में सिरदर्द भी हो सकता है। लेकिन सिरदर्द, कान की तकलीफ और चेहरे के दर्द की दूसरी वजहें भी होती हैं। चेकअप से पता लगाने में मदद मिलती है कि इनका संबंध जबड़े से है या नहीं।

  • कान के आगे, गाल या निचले जबड़े के आसपास दर्द या छूने पर दर्द होना।
  • चबाने वाली मांसपेशियों में अकड़न या थकान।
  • जबड़ा हिलाते समय क्लिक, चटकने की आवाज या खुरदुरी रगड़ महसूस होना।
  • आराम से मुंह खोलने या जबड़ा दाएं-बाएं हिलाने में परेशानी।
  • मुंह खोलते या बंद करते समय जबड़ा अटकना या लॉक होना।
  • अचानक ऐसा लगना कि ऊपर और नीचे के दांत पहले की तरह नहीं मिल रहे।
  • कान के आसपास तकलीफ, जिसकी कोई साफ वजह नजर न आए।

जबड़े के जोड़ में दर्द क्यों होता है?

अक्सर एक से ज्यादा वजहें मिलकर दर्द पैदा करती हैं। मांसपेशियों में बार-बार तनाव, जोड़ पर जोर और जोड़ के अंदर बदलाव साथ में असर डाल सकते हैं। कभी-कभी कोई एक साफ वजह नहीं मिलती।

स्ट्रेस से दांत भींचना और मांसपेशियों का तनाव बढ़ सकता है। नींद ठीक न होने पर दर्द संभालना भी मुश्किल हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि दर्द सिर्फ मन का वहम है। स्ट्रेस का असर दिखने पर भी शरीर के लक्षणों की जांच जरूरी है।

दांतों का बराबर न मिलना अपने आप में जबड़े के दर्द की वजह नहीं माना जा सकता। सिर्फ लक्षणों के आधार पर स्वस्थ दांत घिसना या दांतों के मिलने का तरीका हमेशा के लिए बदलने वाला ट्रीटमेंट शुरू करना ठीक नहीं है।

  • दांत भींचना या पीसना: दांतों को जोर से दबाना या आपस में रगड़ना। यह नींद में भी हो सकता है।
  • बार-बार जोर पड़ना: अक्सर च्यूइंग गम चबाना, बहुत सख्त खाना चबाना या जबड़े को कसकर रखना।
  • चोट: जबड़े पर चोट लगना या एक बार में बहुत ज्यादा खिंचाव पड़ना।
  • डिस्क खिसकना: जोड़ में कुशन का काम करने वाली डिस्क की जगह बदलना।
  • आर्थराइटिस: जोड़ों की ऐसी बीमारी जिसमें दर्द, अकड़न या जोड़ की बनावट में बदलाव हो सकता है।
  • दर्द के प्रति संवेदनशीलता: नसों और दिमाग के दर्द के संकेतों को समझने के तरीके में बदलाव भी लंबे समय तक रहने वाले दर्द में भूमिका निभा सकता है।

जबड़े के दर्द में तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएं?

जबड़े की हर परेशानी को टीएमजे का दर्द न मानें। दर्द बना रहे, बार-बार लौटे या खाने, सोने या सामान्य तरह से मुंह खोलने में असर डाले, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। दांतों के मिलने के तरीके में नया बदलाव भी जांच की वजह है।

जबड़े की तकलीफ के साथ सीने में दबाव, सांस फूलना, पसीना या बेहोशी जैसा लगना मेडिकल इमरजेंसी हो सकता है, खासकर शारीरिक मेहनत के दौरान। डेंटल अपॉइंटमेंट का इंतजार करने के बजाय इमरजेंसी मेडिकल मदद लें। कभी-कभी ये लक्षण दिल की परेशानी से होते हैं।

नीचे दिए गए हर संकेत का मतलब गंभीर बीमारी होना नहीं है। लेकिन इनमें जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

  • सांस लेने में परेशानी, चेहरे या गर्दन की तेजी से बढ़ती सूजन या लार भी न निगल पाने पर तुरंत इमरजेंसी में जाएं।
  • जबड़ा खुली या बंद स्थिति में फंस जाए, खासकर पानी पीने में परेशानी हो, तो उसी दिन तुरंत जांच कराएं।
  • जबड़े की सूजन के साथ बुखार, ज्यादा चोट या चोट के बाद दांतों के मिलने में अचानक बदलाव हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लें।
  • मुंह का अल्सर यानी छाला या घाव दो हफ्ते से ज्यादा समय में भी न भरे, गांठ हो, सुन्नपन हो या बिना साफ वजह खून आए, तो जल्द जांच कराएं।
  • मुंह खोलने या निगलने में नई या बढ़ती परेशानी, बिना वजह वजन घटना या एक तरफ लगातार दर्द हो, तो जांच कराएं।

क्या जबड़े का दर्द किसी और वजह से हो सकता है?

दांत का दर्द कान या जबड़े की मांसपेशियों तक फैल सकता है। खराब दांत, गम्स यानी मसूड़ों का इन्फेक्शन या अक्ल दाढ़ के आसपास की परेशानी जोड़ के दर्द जैसी लग सकती है। कान की बीमारी और लार बनाने वाली ग्रंथि में सूजन भी इसी जगह तकलीफ कर सकती है।

चेहरे में थोड़ी देर के लिए बिजली के झटके जैसा तेज दर्द, सामान्य जबड़े की मांसपेशियों की परेशानी के बजाय नसों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। लगातार ऐसा दर्द जो जबड़ा हिलाने से साफ तौर पर न बदले, उसकी दूसरी वजहों की जांच भी जरूरी हो सकती है।

भारत में सुपारी या गुटखा चबाने वाले किसी व्यक्ति का मुंह कम खुलने लगे, तो इस पर खास ध्यान देना जरूरी है। ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें मुंह की अंदरूनी परत में सख्त रेशेदार टिश्यू बनता है और वह कसने लगती है। इससे मुंह कम खुल सकता है। यह टीएमजे के दर्द से अलग है और इसमें मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ा होता है।

  • दांत में ठंडा-गरम लगना, गम्स की सूजन, कान से पानी या पस आना या खाना खाते समय सूजन होना डॉक्टर को बताएं।
  • तंबाकू, सुपारी और इनसे जुड़ी चीजें चबाने की आदत के बारे में डॉक्टर को बताएं।
  • मुंह में कसाव या लगातार बने रहने वाले अल्सर को सिर्फ जबड़े के जोड़ की परेशानी न मानें।

टीएमजे के चेकअप में क्या होता है?

डॉक्टर पूछते हैं कि दर्द कहां है, कब शुरू हुआ और किन बातों से घटता-बढ़ता है। वे जबड़ा लॉक होने, चोट, नींद, स्ट्रेस, चबाने की आदतों और दूसरे जोड़ों में दर्द के बारे में भी पूछ सकते हैं। यह बताना मददगार है कि परेशानी खाने, बोलने या काम पर कितना असर डालती है।

चेकअप में आमतौर पर दांत, गम्स, मुंह की अंदरूनी परत, चबाने की मांसपेशियां और जबड़े के जोड़ देखे जाते हैं। डॉक्टर जांचते हैं कि जबड़ा कितना और कितनी आसानी से हिलता है। वे यह भी देखते हैं कि हिलाने से वही दर्द होता है जिसकी आपको शिकायत है, और दांत आपस में कैसे मिलते हैं।

जबड़े में दर्द या क्लिक की आवाज वाले हर व्यक्ति को एक्स-रे या स्कैन की जरूरत नहीं होती। चोट के बाद, जबड़ा बहुत कम हिलने पर या जांच में जोड़ की बनावट की परेशानी का शक होने पर एक्स-रे या दूसरा स्कैन किया जा सकता है। अलग-अलग स्कैन से अलग जानकारी मिलती है।

एमआरआई, यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग, जोड़ की डिस्क और दूसरे मुलायम टिश्यू दिखा सकती है। सीटी, यानी कम्प्यूटेड टोमोग्राफी, हड्डियों की बारीक तस्वीरें देती है। डॉक्टर स्कैन तभी चुनते हैं जब उससे परेशानी की पहचान या देखभाल का फैसला करने में मदद मिलने की उम्मीद हो।

  • पुराने डेंटल रिकॉर्ड या स्कैन रिपोर्ट हों, तो साथ लाएं।
  • जबड़ा कभी अटका या लॉक हुआ हो, तो बताएं, भले ही चेकअप के समय वह सामान्य तरह से हिल रहा हो।
  • दांतों के मिलने में हाल का कोई बदलाव और पहले से मौजूद जोड़ों की बीमारी के बारे में बताएं।

टीएमजे के दर्द का ट्रीटमेंट कैसे होता है?

देखभाल इस बात पर निर्भर करती है कि मुख्य परेशानी मांसपेशियों में है, जोड़ में है या दर्द किसी और जगह से आ रहा है। जबड़े की मांसपेशियों और जोड़ की कई परेशानियों में शुरुआत ऐसे तरीकों से की जाती है जो दांतों या जोड़ को हमेशा के लिए नहीं बदलते। इन्हें कंजर्वेटिव केयर कहते हैं। सुधार धीरे-धीरे हो सकता है और लक्षण कभी कम, कभी ज्यादा हो सकते हैं।

मकसद जबड़े का आराम से हिलना और रोज के काम सामान्य तरह से कर पाना है। जोड़ की हर आवाज खत्म करना जरूरी नहीं। चबाना और मुंह खोलना आरामदायक होने के बाद भी बिना दर्द वाली क्लिक रह सकती है। फॉलो-अप से सुधार का पता चलता है और जरूरत पड़ने पर दर्द की वजह दोबारा जांची जा सकती है।

  • जानकारी और आदतों पर ध्यान: दांत भींचना, बार-बार जोर पड़ना और दर्द बढ़ाने वाली हरकतों को पहचानना।
  • फिजियोथेरेपी: जांच के अनुसार जबड़ा हिलाने और मांसपेशियों के काम करने में सुधार के लिए गाइडेंस के साथ अभ्यास।
  • नींद और स्ट्रेस में मदद: उन बातों पर काम करना जो मांसपेशियों का तनाव या लगातार दर्द बढ़ा सकती हैं।
  • ठीक फिट होने वाला डेंटल उपकरण: कुछ मरीजों में दांतों की सुरक्षा या लक्षण संभालने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पक्का इलाज नहीं है।
  • डॉक्टर की देखरेख में दर्द संभालना: दर्द की वजह, पूरी सेहत और व्यक्ति के अपने जोखिमों के अनुसार विकल्प चुने जाते हैं।
  • स्पेशलिस्ट के प्रोसीजर: जोड़ की कुछ खास परेशानियों में साफ जरूरत होने पर ही विचार किया जाता है। सर्जरी आमतौर पर नियमित ट्रीटमेंट का हिस्सा नहीं होती।

रोज की कौन-सी आदतें जबड़े पर जोर कम कर सकती हैं?

चेकअप की व्यवस्था करते समय कुछ छोटे बदलाव दर्द वाले जबड़े पर बेवजह जोर कम कर सकते हैं। लेकिन दर्द बना रहने, मुंह कम खुलने या खतरे के संकेत होने पर ये उपाय जांच की जगह नहीं ले सकते।

एक्सरसाइज असली परेशानी के अनुसार होनी चाहिए। जोर लगाकर खींचना, बार-बार जोड़ से क्लिक की आवाज निकालने की कोशिश करना या लॉक हुए जबड़े को धक्का देकर वापस बैठाना लक्षण बिगाड़ सकता है। जांच के बाद डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट सही तरीके से जबड़ा हिलाना समझा सकते हैं।

लंबे समय तक जबड़े की सामान्य हरकत से बचना मकसद नहीं है। लक्षण कम होने पर देखभाल का ध्यान आमतौर पर रोज के काम आराम से दोबारा कर पाने पर होता है।

  • दर्द बढ़ने के दौरान कम चबाने वाला खाना चुनें, लेकिन खाने में पोषण का संतुलन बनाए रखें।
  • च्यूइंग गम और बहुत सख्त या ज्यादा चबाने वाली चीजों से दर्द बढ़े, तो उनसे बचें।
  • छोटे निवाले लें और मुंह को जोर लगाकर बहुत ज्यादा न खोलें।
  • दिन में दांत भींचने की आदत पर ध्यान दें। आराम की स्थिति में दांतों को आपस में दबाकर रखने की जरूरत नहीं होती।
  • आवाज जांचने या मुंह कितना ज्यादा खुलता है यह देखने के लिए बार-बार जबड़ा न चलाएं।
  • कोई डेंटल उपकरण दर्द करे या दांतों के मिलने का तरीका बदले, तो बिना चेक कराए उसका इस्तेमाल न करें।

टीएमजे के दर्द के लिए किस डॉक्टर को दिखाएं?

डेंटिस्ट दांतों, मुंह के टिश्यू और जबड़े की हरकत की जांच कर सकते हैं। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट ऐसे डेंटिस्ट होते हैं जिन्हें मुंह की बीमारियों और चेहरे के दर्द की जांच की ट्रेनिंग होती है। दर्द बना रहने या वजह साफ न होने पर वे मदद कर सकते हैं। जांच के अनुसार जबड़े के सर्जन, फिजियोथेरेपिस्ट, कान के स्पेशलिस्ट या फिजिशियन के पास भेजा जा सकता है।

डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय मुंबई के सायन स्थित के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्पेशल डेंटल ओपीडी और अंबरनाथ के रीजनेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं। ठाणे, बदलापुर या उल्हासनगर से आने वाले मरीज अपॉइंटमेंट की जानकारी पक्की करने के लिए क्लिनिक से संपर्क कर सकते हैं।

टेलीकंसल्टेशन, यानी फोन या वीडियो पर डॉक्टर से सलाह, लक्षण समझने और अगला कदम तय करने में मदद कर सकता है। लेकिन यह दांतों, मुंह और जबड़े की सामने बैठकर होने वाली जांच की जगह नहीं ले सकता। जबड़ा लॉक होना, सूजन, चोट, लगातार दर्द या कोई भी खतरे का संकेत हो, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूरी है।

  • लक्षण बिगड़ें या तय की गई देखभाल से सुधार न हो, तो दोबारा चेकअप कराएं।
  • पूछें कि दर्द की संभावित वजह क्या है और जांच में ऐसा क्या मिला जो इस वजह की ओर इशारा करता है।
  • दांतों में ऐसा बदलाव जिसे वापस न किया जा सके या कोई प्रोसीजर कराने से पहले पूछें कि इसकी जरूरत क्यों है और दूसरे विकल्प क्या हैं।

Questions people ask

क्या टीएमजे का दर्द गंभीर होता है?

कई मामलों में वजह मांसपेशियों पर जोर या जोड़ की ऐसी परेशानी होती है जिसे संभाला जा सकता है। लेकिन लगातार दर्द, जबड़ा लॉक होना, सूजन या दांतों के मिलने में बदलाव की जांच जरूरी है। सीने से जुड़े लक्षण, सांस लेने में परेशानी या लार न निगल पाना हो, तो इमरजेंसी मदद लें।

क्या टीएमजे का दर्द अपने आप ठीक हो सकता है?

कुछ हल्की परेशानियां जबड़े पर जोर कम होने से ठीक हो सकती हैं। लेकिन लक्षण बार-बार लौटें, खाने पर असर डालें या मुंह कम खुले, तो अपने आप ठीक होने की उम्मीद में न छोड़ें। जांच कराएं। सुधार दर्द की वजह पर निर्भर करता है।

क्या जबड़े से क्लिक की आवाज आने का मतलब जोड़ खराब है?

जरूरी नहीं। बिना दर्द, लॉक होने या हरकत कम होने के क्लिक की आवाज में अक्सर ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती। नई क्लिक के साथ दर्द हो या जबड़ा अटकता लगे, तो जांच कराएं।

क्या टीएमजे से कान में दर्द या सिरदर्द हो सकता है?

जबड़े की मांसपेशियों और जोड़ का दर्द कान या कनपटी के पास महसूस हो सकता है। कान की बीमारी और सिरदर्द की दूसरी वजहें भी ऐसे लक्षण दे सकती हैं। इसलिए लक्षण बने रहें, तो खुद वजह तय करने के बजाय जांच कराएं।

क्या टीएमजे के दर्द में हर किसी को एमआरआई चाहिए?

नहीं। परेशानी की जानकारी और चेकअप से अक्सर शुरुआती देखभाल तय हो जाती है। एमआरआई या दूसरा स्कैन तब चुना जाता है जब जोड़ से जुड़ा कोई खास सवाल साफ करना हो या रिपोर्ट से ट्रीटमेंट का फैसला बदल सकता हो।

क्या नाइट गार्ड से जबड़े का दर्द ठीक हो जाएगा?

नाइट गार्ड, यानी रात में दांतों पर पहनने वाला फिट किया गया डेंटल उपकरण, कुछ मरीजों में मदद कर सकता है। लेकिन यह जबड़े के दर्द की हर वजह का इलाज नहीं है। डॉक्टर को इसके मकसद, फिटिंग और लक्षणों पर असर की समीक्षा करनी चाहिए।

जबड़ा लॉक हो जाए तो क्या सर्जरी करानी पड़ेगी?

लॉक हुए जबड़े की जल्द जांच जरूरी है, लेकिन सर्जरी हर बार जरूरी नहीं होती। ट्रीटमेंट वजह और जबड़े की हरकत कितनी रुकी है, इस पर निर्भर करता है। जबड़े को जबरदस्ती न खोलें और खुद वापस बैठाने की कोशिश न करें।

क्या बच्चों और टीनएजर्स को भी टीएमजे का दर्द हो सकता है?

हां। बच्चों और टीनएजर्स में भी जबड़े की मांसपेशियों या जोड़ की परेशानी हो सकती है। लगातार दर्द, मुंह कम खुलना, चेहरे पर सूजन या दांतों के मिलने में बदलाव हो, तो जांच जरूरी है, खासकर चोट के बाद।

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