Oral Health Library · 10 min read · हिन्दी
ओपीजी डेंटल एक्स-रे क्या है और कैसे होता है?
ओपीजी डेंटल एक्स-रे एक पैनोरमिक यानी चौड़े हिस्से की तस्वीर है, जिसमें दोनों जबड़े और सभी दांत एक साथ दिखते हैं। दांतों के डॉक्टर इससे अक्ल दाढ़, दांतों के विकास, जबड़े में बदलाव और कुछ ट्रीटमेंट की जरूरत का आकलन करते हैं। यह जल्दी हो जाता है और आम तौर पर दर्द नहीं होता। लेकिन यह मुंह के चेकअप या जरूरत पड़ने पर लिए जाने वाले ज्यादा डिटेल वाले एक्स-रे की जगह नहीं लेता।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-10-31
Key points
- ओपीजी दोनों जबड़ों और दांतों की एक चौड़ी तस्वीर देता है। इससे अकेले बीमारी की पूरी पहचान नहीं होती।
- एक्स-रे की जरूरत आपके लक्षणों, चेकअप और ट्रीटमेंट से जुड़े सवाल के आधार पर तय होनी चाहिए।
- टीम को प्रेग्नेंसी, पुराने एक्स-रे और सही पोजिशन में रहने की किसी भी परेशानी के बारे में बताएं।
- ओपीजी नॉर्मल होने से मुंह की अंदरूनी परत की गंभीर समस्याएं खारिज नहीं होतीं।
- लगातार बना अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना वजह खून आना या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से मिलकर चेकअप जरूरी है।
ओपीजी डेंटल एक्स-रे क्या होता है?
ओपीजी का पूरा नाम ऑर्थोपैंटोमोग्राम है। इसे पैनोरमिक डेंटल एक्स-रे भी कहते हैं। मशीन आपके सिर के चारों ओर घूमकर दांतों, ऊपरी जबड़े और निचले जबड़े की एक चौड़ी तस्वीर बनाती है।
छोटे डेंटल एक्स-रे के उलट, ओपीजी में आम तौर पर मुंह के अंदर तस्वीर लेने वाला सेंसर रखने की जरूरत नहीं होती। आप ठुड्डी को एक सपोर्ट पर टिकाते हैं और सही पोजिशन बनाए रखने वाले गाइड को दांतों से हल्के से पकड़ते हैं। इस दौरान मशीन घूमती है।
तस्वीर में दांतों की जड़ें, दांतों को सहारा देने वाली हड्डी और जबड़े के जोड़ों के कुछ हिस्से दिखते हैं। ऊपर के पीछे वाले दांतों के ऊपर हवा से भरी जगहों के कुछ हिस्से भी दिख सकते हैं। इन्हें मैक्सिलरी साइनस कहते हैं। लेकिन इससे साइनस या जबड़े के जोड़ों की पूरी जांच नहीं होती।
ओपीजी एक टू-डायमेंशनल यानी सपाट तस्वीर है, जबकि जबड़े की बनावट घुमावदार होती है। कुछ हिस्से एक-दूसरे के ऊपर दिख सकते हैं। उनका आकार या बनावट भी थोड़ी बदली हुई लग सकती है।
दांतों के डॉक्टर ओपीजी कराने को क्यों कहते हैं?
जब किसी खास सवाल का जवाब पाने के लिए बड़े हिस्से की तस्वीर चाहिए, तब डॉक्टर ओपीजी लिख सकते हैं। यह फैसला आपके लक्षणों, पुरानी बीमारियों की जानकारी और चेकअप के आधार पर होना चाहिए। हर विजिट पर अपने-आप ओपीजी कराना जरूरी नहीं है।
दर्द, सूजन या कोई दांत न दिखने के कई कारण हो सकते हैं। ओपीजी से समस्या की जगह पहचानने में मदद मिल सकती है, लेकिन अकेले इससे हर लक्षण का कारण पता नहीं चलता।
- अक्ल दाढ़: ऐसे दांत की स्थिति देखने के लिए जो गम्स यानी मसूड़ों से पूरी तरह बाहर नहीं आया हो या जबड़े में फंसा हो।
- दांतों का विकास: चेकअप में कोई वजह मिलने पर ऐसे दांतों की जांच के लिए जो अभी निकले नहीं हैं, गायब हैं या संख्या में ज्यादा हैं।
- जबड़े की सूजन: हड्डी में बदलाव देखने के लिए। इनमें सिस्ट भी हो सकती है, जो थैली जैसी खाली जगह होती है।
- चोट: जबड़े की हड्डी टूटने का शक होने पर कुछ तरह के फ्रैक्चर की जांच में मदद के लिए। हालांकि दूसरे स्कैन भी जरूरी हो सकते हैं।
- ट्रीटमेंट की प्लानिंग: कुछ मामलों में दांत सीधे करने, सर्जरी या गायब दांत की जगह नया दांत लगाने से पहले पूरे हिस्से की स्थिति देखने के लिए।
- दांतों की जड़ों के आसपास बदलाव: ऐसे संकेत देखने के लिए जो इन्फेक्शन या हड्डी की दूसरी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
- दांतों को सहारा देने वाली हड्डी: दांतों के आसपास हड्डी की कमी का मोटा अंदाजा पाने के लिए। इसके साथ आम तौर पर गम्स का चेकअप और ज्यादा डिटेल वाले एक्स-रे भी किए जाते हैं।
ओपीजी में क्या दिखता है और क्या छूट सकता है?
ओपीजी से पूरे हिस्से की उपयोगी तस्वीर मिलती है, लेकिन छोटी बातें साफ नहीं दिख सकतीं। दांतों का एक-दूसरे के ऊपर दिखना, हिलना या सही पोजिशन में न होना बदलावों को छिपा सकता है या ऐसी परछाइयां बना सकता है जो गलतफहमी पैदा करें।
शुरुआती सड़न और जड़ों के आसपास छोटी समस्याओं के लिए उस खास हिस्से का डेंटल एक्स-रे जरूरी हो सकता है। डॉक्टर को दांत की जांच, गम्स का चेकअप या यह भी देखना पड़ सकता है कि मुंह बंद करने पर दांत कैसे मिलते हैं।
मुंह की अंदरूनी परत, जीभ और गाल नरम टिशू यानी शरीर के नरम हिस्से हैं। ओपीजी से इनकी भरोसेमंद जांच नहीं होती। इसलिए ओपीजी नॉर्मल होने का मतलब यह नहीं कि मुंह के अल्सर यानी छाले से जुड़ी समस्या, शुरुआती मुंह का कैंसर या चेहरे के दर्द के सभी कारण खारिज हो गए हैं।
ओपीजी में कोई असामान्य हिस्सा दिखने का मतलब अपने-आप कैंसर नहीं होता। उसका मतलब उसकी बनावट, जगह, लक्षणों और चेकअप में मिली जानकारी पर निर्भर करता है। कभी-कभी दूसरे स्कैन या बायोप्सी की जरूरत होती है। बायोप्सी में टिशू का छोटा सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है।
- यह लंबे समय से बने अल्सर, लाल पैच या सफेद पैच को सीधे देखकर किए जाने वाले चेकअप की जगह नहीं लेता।
- इम्प्लांट की प्लानिंग के लिए इससे जबड़े की हड्डी की सही चौड़ाई भरोसेमंद तरीके से नहीं पता चलती।
- इसमें जबड़े के जोड़ के अंदर गद्दी का काम करने वाली नरम डिस्क साफ नहीं दिखती।
- डॉक्टर के चेकअप के बिना इससे हर काले या सफेद दिखने वाले हिस्से का कारण पक्का नहीं किया जा सकता।
ओपीजी से पहले क्या तैयारी करें और एक्स-रे कैसे होता है?
आम तौर पर खास तैयारी की जरूरत नहीं होती। आप सामान्य तरीके से खा-पी सकते हैं, जब तक सेंटर ने किसी अलग प्रक्रिया के लिए निर्देश न दिए हों। डॉक्टर की रेफरल पर्ची, पुराने डेंटल एक्स-रे और संबंधित रिपोर्ट साथ लाएं।
अगर आप प्रेग्नेंट हैं या प्रेग्नेंसी की संभावना है, तो स्टाफ को बताएं। खड़े रहने, बिना हिले रहने, सपोर्ट को दांतों से पकड़ने या मुंह खोलने में परेशानी हो तो वह भी बताएं। इससे टीम तय कर सकेगी कि मशीन और जरूरी पोजिशन आपके लिए ठीक हैं या नहीं।
स्टाफ आपसे कान की बालियां, चेन, चश्मा, निकाले जा सकने वाले नकली दांत या तस्वीर पर असर डालने वाली दूसरी चीजें हटाने को कह सकता है। वे सिर को सही पोजिशन में रखेंगे, ठुड्डी को सपोर्ट देंगे और बताएंगे कि जीभ कहां रखनी है।
मशीन सिर के चारों ओर घूमती है और आपको बिना हिले रहना होता है। इसमें त्वचा को काटा या छेदा नहीं जाता। एक्स-रे की किरणें महसूस नहीं होतीं। अगर पोजिशन में रहने से दर्द या परेशानी हो, तो जबड़े पर जोर डालने के बजाय ऑपरेटर को बताएं।
- होंठ बंद रखने और जीभ सही जगह रखने के बारे में ऑपरेटर के निर्देश मानें।
- तस्वीर लेते समय हिलें या बात न करें।
- संतुलन बनाने में परेशानी हो या बैठने के लिए सपोर्ट चाहिए, तो स्टाफ को पहले बताएं।
- जांच लें कि तस्वीर पर आपका नाम और पहचान से जुड़ी बाकी जानकारी सही है।
क्या ओपीजी बड़ों, बच्चों और प्रेग्नेंसी में सेफ है?
ओपीजी में थोड़ी मात्रा में आयनाइजिंग रेडिएशन इस्तेमाल होता है। यह एक तरह की ऊर्जा है जिससे एक्स-रे की तस्वीर बनती है। रेडिएशन कम होता है, लेकिन बिल्कुल शून्य नहीं होता। यह जांच तभी करानी चाहिए जब इससे मिलने वाली जानकारी देखभाल या ट्रीटमेंट में मदद करेगी।
बच्चों में डॉक्टर को लक्षण, दांतों का विकास और बच्चे की निर्देश मानने की क्षमता देखनी चाहिए। मशीन की सेटिंग और एक्स-रे का चुनाव बच्चे के हिसाब से होना चाहिए। सिर्फ किसी खास उम्र में पहुंच जाने से ओपीजी जरूरी नहीं हो जाता।
प्रेग्नेंसी होने का मतलब यह नहीं कि जरूरी डेंटल एक्स-रे नहीं हो सकता। एक्स-रे लिखने वाले डॉक्टर और सेंटर के स्टाफ को बताएं, ताकि वे जरूरत का आकलन करें और सही सावधानियां बरतें। प्रेग्नेंसी की वजह से ज्यादा दर्द या सूजन का चेकअप न टालें।
दोबारा एक्स-रे कराने की कोई वजह होनी चाहिए। पुराने, इस्तेमाल लायक एक्स-रे दिखाने से बिना जरूरत वही जांच दोबारा कराने से बच सकते हैं। हालांकि स्थिति बदल गई हो या पुरानी तस्वीर साफ न हो, तो नया एक्स-रे जरूरी हो सकता है।
- पूछें कि इस एक्स-रे से किस सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद है।
- हाल में कहीं और डेंटल एक्स-रे कराया हो, तो डॉक्टर को बताएं।
- रेडिएशन सेफ्टी और सही पोजिशन के बारे में सेंटर के निर्देश मानें।
- याद रखें, डिजिटल मशीन में भी एक्स-रे किरणें इस्तेमाल होती हैं।
ओपीजी, छोटे डेंटल एक्स-रे और सीबीसीटी में क्या फर्क है?
अलग-अलग तरह की तस्वीरों से अलग सवालों के जवाब मिलते हैं। सिर्फ एक दांत की समस्या में बड़े हिस्से का एक्स-रे हमेशा सही विकल्प नहीं होता।
सीबीसीटी का पूरा नाम कोन बीम कम्प्यूटेड टोमोग्राफी है। इससे दांतों और हड्डी की थ्री-डायमेंशनल यानी तीन आयामों वाली तस्वीर मिलती है। ओपीजी के बाद सीबीसीटी कराना अपने-आप अगला कदम नहीं है। यह तभी होना चाहिए जब ज्यादा डिटेल से देखभाल या ट्रीटमेंट का फैसला बदलने की संभावना हो।
रेडिएशन की मात्रा मशीन, सेटिंग और जांच किए जाने वाले हिस्से पर निर्भर करती है। सीबीसीटी में अक्सर ओपीजी से ज्यादा रेडिएशन होता है। इसलिए इसकी जरूरत पर ध्यान से विचार करना चाहिए।
- छोटा डेंटल एक्स-रे: छोटे हिस्से को ज्यादा डिटेल में दिखाता है। इससे सड़न, दांत की जड़ या पास की हड्डी की जांच में मदद मिल सकती है।
- ओपीजी: दोनों जबड़े और दांत एक साथ दिखाता है। पूरे हिस्से की स्थिति देखने में उपयोगी है, लेकिन हिस्से एक-दूसरे के ऊपर दिख सकते हैं और आकार थोड़ा बदला लग सकता है।
- सीबीसीटी: हिस्सों को तीन आयामों में दिखाता है। कुछ सर्जरी की प्लानिंग, दांतों की जटिल पोजिशन या जबड़े में बदलाव के लिए इसकी जरूरत हो सकती है।
- दूसरे स्कैन: कुछ चोटों, नरम टिशू की समस्याओं या जबड़े के जोड़ की बीमारियों में जरूरी हो सकते हैं।
ओपीजी की तस्वीर और रिपोर्ट का क्या मतलब होता है?
दांत और घनी हड्डी आम तौर पर तस्वीर में ज्यादा सफेद दिखते हैं। हवा वाली जगहें और कम घनापन वाले हिस्से गहरे या काले दिखते हैं। कई जगहों पर यह फर्क सामान्य होता है। इसलिए सिर्फ कोई हिस्सा काला दिखने का मतलब इन्फेक्शन या कैंसर नहीं है।
रिपोर्ट में इम्पैक्टेड दांत लिखा हो सकता है। इसका मतलब ऐसा दांत है जो सामान्य तरीके से बाहर नहीं आ पा रहा। रिपोर्ट में रेडियोल्यूसेंसी शब्द भी आ सकता है। इसका मतलब ऐसा हिस्सा है जो गहरा दिखता है, क्योंकि वहां से ज्यादा एक्स-रे किरणें गुजरती हैं। यह सिर्फ तस्वीर में दिखने वाली बात का वर्णन है, किसी बीमारी का पक्का नाम नहीं।
डॉक्टर तस्वीर को आपके लक्षणों और मुंह के चेकअप के साथ मिलाकर देखते हैं। जो जानकारी मिले, उसके हिसाब से निगरानी, दांत की मरम्मत, गम्स की देखभाल, समस्या वाले दांत को निकालना या स्पेशलिस्ट का चेकअप शामिल हो सकता है।
पूछें कि किन बातों पर अभी कुछ करना जरूरी है और किन पर नजर रखी जा सकती है। आगे की विजिट के लिए साफ डिजिटल कॉपी और लिखित रिपोर्ट संभालकर रखें। फोन से ली गई फोटो या स्क्रीनशॉट में डिटेल कम हो सकती है। असली डिजिटल तस्वीर उपलब्ध हो, तो उसकी जगह फोटो या स्क्रीनशॉट न दें।
किन लक्षणों में डॉक्टर से मिलकर चेकअप जरूरी है?
किसी लक्षण का चेकअप कराने के बदले सिर्फ ओपीजी बुक न करें। पहले डॉक्टर को तय करना होता है कि समस्या दांत, गम्स, जबड़े की हड्डी, मुंह की अंदरूनी परत या किसी और हिस्से से जुड़ी है।
लक्षण बने रहें, तो ओपीजी नॉर्मल आने पर भी जांच बंद नहीं होनी चाहिए। मुंह की कुछ गंभीर समस्याओं में इस तस्वीर पर बहुत कम बदलाव दिख सकता है या कोई बदलाव नहीं दिखता।
- मुंह का अल्सर दो हफ्ते से ज्यादा समय में भी ठीक न हो, तो डॉक्टर से मिलकर चेकअप जरूरी है।
- मुंह, जबड़े या गर्दन में नई गांठ हो या गांठ बनी रहे, तो जांच जरूरी है।
- बिना साफ वजह निचला होंठ, ठुड्डी, जीभ या चेहरे का कोई हिस्सा सुन्न हो, तो जल्द चेकअप कराएं।
- बिना साफ वजह खून आए, खासकर बार-बार आए, तो जांच कराएं।
- मुंह खोलने या निगलने में नई परेशानी हो या परेशानी बढ़ रही हो, तो जल्द जांच जरूरी है।
- लगातार दर्द, सूजन या बदलते हुए लाल या सफेद पैच को नजरअंदाज न करें।
- चेहरे या गर्दन की सूजन तेजी से बढ़े, सांस लेने में परेशानी हो या लार भी न निगल पाएं, तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं।
ओपीजी कैसे बुक करें और खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?
पहले दांतों का चेकअप कराएं या ऐसी रेफरल पर्ची लें जिसमें एक्स-रे की वजह लिखी हो। बुकिंग से पहले पूछ लें कि चलने-फिरने या सही पोजिशन में रहने से जुड़ी आपकी जरूरतों के लिए सेंटर में सुविधा है या नहीं।
फीस सेंटर, रिपोर्ट बनाने की व्यवस्था और शामिल सुविधाओं पर निर्भर कर सकती है। पूछें कि बताई गई फीस में डिजिटल तस्वीर, लिखित रिपोर्ट और प्रिंट शामिल हैं या नहीं। डॉक्टर की सलाह या अतिरिक्त एक्स-रे और स्कैन का खर्च अलग हो सकता है।
अगर आप देखभाल के लिए मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर के बीच आते-जाते हैं, तो पुराने एक्स-रे और रिपोर्ट साथ रखें। यह भी पक्का कर लें कि सेंटर जिस फाइल फॉर्मेट में तस्वीर देगा, उसे आपके ट्रीटमेंट करने वाले डॉक्टर खोल पाएंगे।
ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी स्पेशलिस्ट मुंह की समस्याओं की जांच करते हैं और डेंटल एक्स-रे व स्कैन को समझते हैं। डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय स्पेशल डेंटल ओपीडी, के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सायन, मुंबई और रीज़नेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक, अंबरनाथ में प्रैक्टिस करते हैं। मिलने की व्यवस्था और सलाह दिया गया एक्स-रे या स्कैन कहां होगा, यह जानने के लिए क्लिनिक से संपर्क करें।
Questions people ask
क्या ओपीजी और पूरे मुंह का डेंटल एक्स-रे एक ही हैं?
लोग कभी-कभी इन शब्दों को एक ही मतलब में बोल देते हैं। ओपीजी एक पैनोरमिक तस्वीर होती है। फुल-माउथ सीरीज का मतलब आम तौर पर मुंह के अंदर लिए गए कई छोटे एक्स-रे होता है। दोनों से अलग जानकारी मिलती है। इसलिए पक्का कर लें कि डॉक्टर ने कौन-सी जांच लिखी है।
क्या ओपीजी डेंटल एक्स-रे में दर्द होता है?
एक्स-रे खुद दर्द नहीं करता। जबड़े में दर्द हो, तो सिर स्थिर रखने या गाइड को दांतों से पकड़ने में परेशानी हो सकती है। पोजिशन तय करने से पहले ऑपरेटर को दर्द या मुंह कम खुलने के बारे में बताएं।
क्या ओपीजी से पहले खाना खा सकते हैं?
सामान्य ओपीजी से पहले आप आम तौर पर खा-पी सकते हैं। खाली पेट रहना जरूरी नहीं होता। अगर उसी विजिट में कोई दूसरी प्रक्रिया भी होनी है, तो उसके लिए दिए गए अलग निर्देश मानें।
क्या ओपीजी में दांतों की हर कैविटी दिख जाती है?
नहीं। छोटी कैविटी यानी सड़न से बना छेद और दांतों के बीच की सड़न छूट सकती है। इसकी वजह हिस्सों का एक-दूसरे के ऊपर दिखना या कम डिटेल होना है। सड़न जांचने के लिए डॉक्टर मुंह का चेकअप करते हैं और जरूरत पड़ने पर खास हिस्से के डेंटल एक्स-रे लेते हैं।
क्या ओपीजी से मुंह का कैंसर पता चलता है?
जबड़े की हड्डी पर असर पड़ा हो, तो इसमें कुछ बदलाव दिख सकते हैं। लेकिन ओपीजी से भरोसेमंद तरीके से मुंह के कैंसर का पता लगाना या उसे खारिज करना संभव नहीं है। लगातार बना अल्सर, गांठ, बिना वजह खून आना या सुन्नपन हो, तो डॉक्टर से मिलकर चेकअप जरूरी है, भले ही ओपीजी नॉर्मल दिखे।
ओपीजी कितने समय बाद कराना चाहिए?
सभी के लिए कोई तय समय नहीं है। जरूरत लक्षणों, चेकअप में मिली जानकारी, पुराने एक्स-रे और होने वाले ट्रीटमेंट पर निर्भर करती है। जांच या ट्रीटमेंट से जुड़ी वजह के बिना बार-बार एक्स-रे कराने से बचना चाहिए।
ब्रेसेस या डेंटल इम्प्लांट लगे हों तो क्या ओपीजी हो सकता है?
आम तौर पर हां। दांतों पर लगी स्थायी चीजों से परछाइयां बन सकती हैं या पास की डिटेल छिप सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि एक्स-रे नहीं हो सकता। निकाली जा सकने वाली चीजें स्टाफ के निर्देश के अनुसार हटानी पड़ सकती हैं।
ओपीजी में कुछ असामान्य दिखे तो क्या ट्रीटमेंट जरूरी है?
हमेशा नहीं। कुछ बातों पर सिर्फ नजर रखनी होती है। कुछ के लिए आगे जांच या ट्रीटमेंट जरूरी होता है। देखभाल की सलाह देने से पहले डॉक्टर को बताना चाहिए कि तस्वीर में क्या दिखा है और उसका आपके चेकअप से क्या संबंध है।
This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.