Oral Health Library · 10 min read · हिन्दी
गम्स काले क्यों होते हैं और कब ट्रीटमेंट जरूरी है?
काले गम्स का ट्रीटमेंट उनके कारण पर निर्भर करता है। नैचुरली भूरे या काले गम्स अक्सर हेल्दी होते हैं और उन्हें ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती। कोई नया, बदलता हुआ या असमान काला पैच हो, तो रंग बदलवाने वाले कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले डेंटिस्ट को सामने से दिखाना जरूरी है। देखभाल में गम्स की बीमारी का ट्रीटमेंट, तंबाकू छोड़ने में मदद या अपनी पसंद से नैचुरल रंग कम करवाने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-11-02
Key points
- नैचुरली काले गम्स अक्सर हेल्दी होते हैं और उन्हें ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती।
- नया, बदलता हुआ या बिना साफ कारण का पैच हो, तो कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले सामने से चेकअप जरूरी है।
- ट्रीटमेंट कारण पर निर्भर करता है। सफाई और कॉस्मेटिक तरीके से पिगमेंट कम करने के मकसद अलग हैं।
- कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं में खतरे होते हैं और पिगमेंट वापस आ सकता है।
- दो हफ्ते से ज्यादा रहने वाला अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना साफ कारण खून या मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो, तो जांच जरूरी है।
क्या काले गम्स नॉर्मल होते हैं?
हेल्दी गम्स का गुलाबी होना जरूरी नहीं है। वे गुलाबी, भूरे, गहरे भूरे या कई रंगों के मिले-जुले हो सकते हैं। मेलेनिन, यानी शरीर का नैचुरल रंग देने वाला तत्व, स्किन के साथ गम्स को भी रंग देता है।
गम्स में नैचुरल पिगमेंटेशन का मतलब है गम्स के टिशू, यानी उनके बने हुए हिस्से में मौजूद रंग देने वाले तत्व से रंग आना। यह गहरे रंग की स्किन वाले लोगों में आम है। यह ऊपर और नीचे, दोनों गम्स में हो सकता है। रंग बड़े हिस्से में फैला हो सकता है या अलग-अलग पैच में दिख सकता है।
जो रंग कई सालों से एक जैसा हो और उसके साथ दर्द, सूजन या खून न आता हो, वह अक्सर नॉर्मल होता है। लेकिन सिर्फ देखकर कारण पक्का नहीं किया जा सकता। कोई भी नया बदलाव या ऐसा बदलाव जिसका कारण पता न हो, डेंटिस्ट को दिखाएं, भले ही दर्द न हो।
- सिर्फ काला रंग होने का मतलब खराब सफाई या गम्स की बीमारी नहीं है।
- हेल्दी काले गम्स को सेहत के लिए गुलाबी करवाना जरूरी नहीं है।
- गम्स नैचुरली गुलाबी हैं या भूरे, इससे ज्यादा जरूरी है खून, सूजन, घाव और रंग में बदलाव पर ध्यान देना।
गम्स काले होने के क्या कारण हो सकते हैं?
अलग-अलग कारणों से गम्स काले दिख सकते हैं। कभी रंग गम्स के अंदर होता है। कभी दांत पर जमी काली परत या क्राउन, यानी दांत पर लगी कैप के पास की छाया से ऐसा लगता है।
रंग किस तरह फैला है और कब से है, इससे डेंटिस्ट को कारण समझने में मदद मिलती है। एक नए धब्बे की जांच, बचपन से मौजूद बड़े रंगीन हिस्सों की जांच से अलग होती है।
- नैचुरल रंग: परिवार में गम्स का रंग और स्किन का रंग तय कर सकते हैं कि गम्स में कितना पिगमेंट होगा।
- तंबाकू: स्मोकिंग से गम्स में पिगमेंट बढ़ सकता है। तंबाकू चबाने से भी मुंह के टिशू को नुकसान और दूसरे बदलाव हो सकते हैं, जिनकी जांच जरूरी है।
- गम्स की सूजन: सूजे हुए और जलन वाले गम्स गहरे लाल या बैंगनी दिख सकते हैं। चोट के बाद टिशू के अंदर खून जमा होने से भी कुछ समय के लिए काला हिस्सा दिख सकता है।
- दांत पर जमा मैल या डेंटल काम: दांत पर जमी सख्त परत को टार्टर कहते हैं। यह गम्स के किनारे काली दिख सकती है। दांत के ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाले मटीरियल से कभी-कभी पास के टिशू पर छोटा स्लेटी पैच बन सकता है।
- सेहत से जुड़े कारण: डॉक्टर के बताए कुछ ट्रीटमेंट और शरीर की कुछ बीमारियां मुंह के रंग में बदलाव ला सकती हैं।
- किसी एक जगह रंग वाली बढ़त: कई छोटे धब्बे नुकसानदेह नहीं होते, लेकिन कुछ की पहचान पक्की करने के लिए टेस्ट जरूरी होते हैं।
किन संकेतों पर डॉक्टर को सामने से दिखाना जरूरी है?
नया काला धब्बा, बढ़ता हुआ पैच या गम्स के रंग में बिना पता चले बदलाव हो, तो डेंटल चेकअप करवाएं। दर्द शुरू होने का इंतजार न करें। फोटो या ऑनलाइन बातचीत से भरोसे के साथ यह तय नहीं हो सकता कि रंग नैचुरल है या किसी ऐसी समस्या का संकेत है जिसकी जांच जरूरी है।
जिस पैच का किनारा टेढ़ा-मेढ़ा हो, जिसमें कई रंग हों या जिसकी सतह बदल रही हो, उसे जल्द दिखाएं। इन संकेतों का मतलब अपने-आप कैंसर नहीं होता। बहुत कम मामलों में मुंह का काला पैच या घाव गंभीर बीमारी हो सकता है। इसलिए बिना कारण पता चले बदलाव को सिर्फ लुक की समस्या मानकर ट्रीटमेंट नहीं करना चाहिए।
- मुंह का अल्सर, यानी छाला या घाव, जो दो हफ्ते बाद भी ठीक न हो।
- गम्स, मुंह के किसी दूसरे हिस्से या गर्दन में गांठ।
- गम्स, होंठ, ठुड्डी या मुंह के किसी हिस्से में सुन्नपन।
- बिना साफ कारण खून आना, खासकर बिना ब्रश किए या चोट लगे।
- मुंह खोलने या निगलने में नई परेशानी या बढ़ती दिक्कत।
- तेजी से सूजन बढ़ना, तेज दर्द, बुखार या टिशू का अचानक काला और खराब दिखना।
काले गम्स के चेकअप में क्या होता है?
डेंटिस्ट पूछते हैं कि रंग कब दिखा और क्या उसमें बदलाव आया है। वे तंबाकू या सुपारी के इस्तेमाल, दांतों के पिछले ट्रीटमेंट, चोट, बाकी सेहत और अभी चल रहे डॉक्टर के बताए ट्रीटमेंट के बारे में पूछ सकते हैं। पुरानी फोटो कभी-कभी यह समझने में मदद करती हैं कि रंग लंबे समय से ऐसा ही है या नहीं।
चेकअप में गम्स, दांत, जीभ, गालों के अंदर और मुंह के दूसरे हिस्से देखे जाते हैं। डेंटिस्ट खून, सूजन, जमी परत और हिलते दांतों की जांच करते हैं। वे गर्दन की जांच और किसी असामान्य हिस्से को छूकर भी देख सकते हैं।
हर किसी को स्कैन या ब्लड टेस्ट की जरूरत नहीं होती। चेकअप में दांत या शरीर की सेहत से जुड़ा कोई कारण लगने पर ही उसके हिसाब से टेस्ट चुने जाते हैं। जिस पैच का कारण साफ न हो या जो शक वाला लगे, उसकी बायोप्सी की सलाह मिल सकती है। बायोप्सी में टिशू का छोटा सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है।
ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट मुंह की बीमारियों की जांच करते हैं। डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय मुंबई के सायन में के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्पेशल डेंटल ओपीडी और अंबरनाथ के रीज़नेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में मरीज देखते हैं। जरूरत होने पर गम्स के स्पेशलिस्ट या दूसरे डॉक्टर के पास भेजा जा सकता है।
काले गम्स का ट्रीटमेंट कैसे तय होता है?
ट्रीटमेंट गम्स के रंग से नहीं, जांच में मिले कारण से तय होता है। रंग नैचुरल हो और गम्स हेल्दी हों, तो सिर्फ यह समझाना काफी हो सकता है कि चिंता की जरूरत नहीं है। हेल्दी गम्स का रंग न बदलवाना भी पूरी तरह ठीक विकल्प है।
अगर वजह कोई दूसरी समस्या है, तो पहले उस पर ध्यान दिया जाता है। जिस पैच का कारण पता नहीं है, उसकी सही जांच से पहले उसे कॉस्मेटिक प्रक्रिया से ढकना या हटाना नहीं चाहिए।
- गम्स की बीमारी में प्रोफेशनल सफाई, रोज की सफाई में सुधार और जरूरत के हिसाब से आगे का गम्स ट्रीटमेंट शामिल हो सकता है।
- तंबाकू से जुड़े बदलावों में तंबाकू छोड़ने की मदद और उससे हुए दूसरे नुकसान की जांच शामिल है। समय के साथ रंग हल्का पड़ सकता है, लेकिन इसकी गारंटी नहीं है।
- जलन या दांत की फिलिंग या क्राउन जैसी किसी चीज से समस्या हो, तो डेंटिस्ट देखते हैं कि उसके कारण को ठीक करने की जरूरत है या नहीं।
- शरीर की किसी बीमारी का शक हो, तो मेडिकल चेकअप सही हो सकता है। डॉक्टर से बात किए बिना उनका बताया ट्रीटमेंट न बदलें।
- शक वाले धब्बे में पहले कारण की पहचान और जरूरत पर स्पेशलिस्ट को दिखाना जरूरी है। कॉस्मेटिक देखभाल बाद में आती है।
- रंग नैचुरल होने की पुष्टि के बाद और गम्स की सेहत जांचने के बाद, चाहें तो कॉस्मेटिक विकल्पों पर बात कर सकते हैं।
गम्स का नैचुरल काला रंग कम करने के क्या विकल्प हैं?
गम डिपिगमेंटेशन एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, जिसमें गम्स की सतह पर दिखने वाला पिगमेंट कम किया जाता है। इससे पहले से हेल्दी गम्स की सेहत बेहतर नहीं होती। इसका मकसद लुक बदलना है, किसी बीमारी का ट्रीटमेंट करना नहीं।
इसके दो मुख्य तरीके हैं: लेजर ट्रीटमेंट और छोटी सर्जरी। लेजर में एक जगह केंद्रित रोशनी से रंग वाली सतह पर काम किया जाता है। सर्जरी में डॉक्टर पिगमेंट वाली ऊपरी पतली परत सावधानी से हटाते हैं।
कौन-सा तरीका ठीक रहेगा, यह गम्स की मोटाई, कितने हिस्से में रंग है, पहले से गम्स की बीमारी है या नहीं और मुस्कुराने पर कितने गम्स दिखते हैं, इन बातों पर निर्भर करता है। गम्स के स्पेशलिस्ट समझा सकते हैं कि कौन-से विकल्प सही हैं और उनसे आपकी उम्मीद के मुताबिक बदलाव हो सकता है या नहीं।
कोई एक तरीका सभी के लिए सही नहीं होता। गम्स हर जगह एक जैसे गुलाबी हों, यह जरूरी नहीं। सिर्फ फोटो देखकर नतीजा नहीं बताया जा सकता। बच्चों और टीनएजर्स में रंग को लेकर चिंता हो, तो पहले सेहत के नजरिए से जांच होनी चाहिए। इसे सीधे कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं मानना चाहिए।
- पूछें कि क्या रंग नैचुरल पिगमेंट का ही है, इसकी पुष्टि हो गई है।
- पूछें कि आपके गम्स में वास्तव में कितना बदलाव हो सकता है।
- खतरों, ठीक होने की प्रक्रिया, फॉलो-अप और रंग वापस आने की संभावना के बारे में पूछें।
गम्स के कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के बाद क्या उम्मीद रखें?
कॉस्मेटिक गम्स ट्रीटमेंट के बाद सतह को भरने और ठीक होने का समय चाहिए। कुछ समय तक दर्द, छूने पर तकलीफ, हल्का खून या सेंसिटिविटी हो सकती है। ट्रीटमेंट करने वाले डॉक्टर प्रक्रिया और आपकी सेहत के हिसाब से आराम के उपाय और बाद की देखभाल समझाते हैं।
सतह ठीक होने के दौरान रंग बदल सकता है। इसलिए शुरुआत में दिखने वाला रंग आखिरी नतीजा नहीं होता। ठीक होने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि कितने हिस्से का ट्रीटमेंट हुआ, कौन-सा तरीका इस्तेमाल हुआ, तंबाकू का इस्तेमाल है या नहीं और गम्स की हालत कैसी है।
संभावित समस्याओं में इन्फेक्शन, असमान रंग, निशान पड़ना और गम्स पीछे हटना शामिल हैं। गम्स पीछे हटने का मतलब है कि गम्स का किनारा दांत से दूर खिसकता है और दांत का ज्यादा हिस्सा दिखने लगता है। पिगमेंट वापस आ सकता है, क्योंकि शरीर में रंग बनाने वाली नैचुरल कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं या उस जगह फिर आ जाती हैं।
फॉलो-अप में डॉक्टर देख सकते हैं कि गम्स ठीक हो रहे हैं या नहीं और नतीजे पर बात कर सकते हैं। दर्द या सूजन बढ़े, पस आए, बुखार हो या खून बंद न हो, तो जल्द चेकअप करवाएं। सांस लेने में दिक्कत, अपनी लार भी न निगल पाना या तेजी से फैलती सूजन हो, तो इमरजेंसी में जाएं।
क्या घरेलू उपायों से काले गम्स गुलाबी हो सकते हैं?
घरेलू उपाय गम्स का नैचुरल पिगमेंट भरोसेमंद या सुरक्षित तरीके से नहीं हटा सकते। रगड़ने, खुरचने या खट्टी, घिसने वाली या ब्लीच करने वाली चीजें लगाने से जलने जैसे घाव और अल्सर हो सकते हैं। दांत या स्किन का रंग हल्का करने वाले प्रोडक्ट गम्स पर न लगाएं।
मुंह की अच्छी सफाई गम्स को हेल्दी रखने में मदद करती है, लेकिन नैचुरल पिगमेंट नहीं बदलती। जोर से ब्रश करने से काले गम्स ज्यादा हेल्दी नहीं होंगे। उल्टा चोट लग सकती है। मकसद साफ, आरामदायक और बिना सूजन वाले गम्स होना चाहिए, चाहे उनका नैचुरल रंग कुछ भी हो।
- मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश से हल्के हाथ से ब्रश करें। दांतों के बीच की सफाई अपने मुंह के लिए सही तरीके से करें।
- तंबाकू और सुपारी वाले प्रोडक्ट, जिनमें गुटखा भी शामिल है, से बचें। छोड़ने में मुश्किल हो, तो डॉक्टर से मदद मांगें।
- लगातार खून, मुंह की बदबू या सूजन हो, तो ज्यादा रगड़कर साफ करने के बजाय जांच करवाएं।
- यह देखने के लिए काला पैच न खुरचें कि रंग उतरता है या नहीं।
- नए या बदलते पैच के ट्रीटमेंट के लिए घरेलू उपायों या ऑनलाइन मिलने वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट पर भरोसा न करें।
कैसे तय करें कि गम्स का कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट करवाना चाहिए?
पहले यह अलग करें कि चिंता सेहत की है या सिर्फ लुक की पसंद की। हेल्दी भूरे गम्स कोई खराबी नहीं हैं। अगर रंग आपको परेशान करता है, तो कंसल्टेशन में समझ सकते हैं कि कितना बदलाव संभव है। इसका मतलब यह नहीं कि हर किसी के गम्स गुलाबी होने चाहिए।
खर्च इस पर निर्भर करता है कि कितने हिस्से का ट्रीटमेंट होगा, कौन-सा तरीका चुना जाएगा, क्या गम्स की दूसरी देखभाल भी चाहिए और कितने फॉलो-अप जरूरी होंगे। आपके लिए खर्च का अनुमान चेकअप के बाद मिलना चाहिए। सिर्फ बताई गई कीमत से यह नहीं पता चलता कि प्रक्रिया आपके लिए सही है या उसमें क्या-क्या शामिल है।
ठाणे, बदलापुर या उल्हासनगर से आने वाले लोग अपनी पसंद से करवाई जाने वाली प्रक्रिया से पहले फॉलो-अप की व्यवस्था पर भी बात कर सकते हैं। दोबारा चेकअप की योजना रखें। कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट को एक ही विजिट में हमेशा के लिए पक्का नतीजा देने वाला काम न समझें।
- क्या मेरे गम्स के रंग का ट्रीटमेंट करने की कोई मेडिकल वजह है?
- क्या मेरे गम्स कॉस्मेटिक प्रक्रिया के लिए पर्याप्त हेल्दी हैं?
- संभावित फायदे, खतरे और सीमाएं क्या हैं?
- क्या पिगमेंट वापस आ सकता है और क्या दोबारा ट्रीटमेंट करवाना मेरी पसंद होगा?
- खर्च के अनुमान में कौन-सी देखभाल और फॉलो-अप शामिल हैं?
Questions people ask
क्या काले गम्स अपने-आप गुलाबी हो सकते हैं?
गम्स का नैचुरल पिगमेंट आमतौर पर आपके नॉर्मल रंग का हिस्सा बना रहता है। सूजन या तंबाकू के कारण बदला रंग, कारण पर काम करने से बदल सकता है। कोई घरेलू तरीका नैचुरली गुलाबी गम्स की गारंटी नहीं दे सकता।
क्या काले गम्स का मतलब गम्स की बीमारी है?
जरूरी नहीं। नैचुरली काले गम्स हेल्दी हो सकते हैं। गम्स की बीमारी की जांच खून, सूजन, जमी परत और दांतों को सहारा देने वाले हिस्सों के कमजोर होने जैसे संकेतों से होती है, सिर्फ रंग से नहीं।
क्या डेंटिस्ट से सफाई करवाने पर गम्स का काला रंग हट जाता है?
सफाई से प्लाक, यानी दांतों पर बैक्टीरिया की मुलायम परत, और सख्त जमा मैल हटता है। इससे सूजन कम हो सकती है, लेकिन गम्स के टिशू में मौजूद नैचुरल पिगमेंट नहीं हटता।
क्या काले गम्स का लेजर ट्रीटमेंट हमेशा के लिए असर करता है?
हमेशा के लिए नतीजे की गारंटी नहीं दी जा सकती। लेजर या सर्जरी के बाद पिगमेंट वापस आ सकता है। कितना रंग लौटेगा और कब लौटेगा, यह अलग-अलग होता है। दोबारा ट्रीटमेंट जरूरी हो, ऐसा नहीं है।
क्या गम डिपिगमेंटेशन में दर्द होता है?
डॉक्टर समझाते हैं कि प्रक्रिया के दौरान तकलीफ कम रखने के लिए क्या किया जाएगा। ठीक होने के दौरान दर्द और सेंसिटिविटी हो सकती है। अनुभव इस पर निर्भर करता है कि कितने हिस्से का ट्रीटमेंट हुआ, कौन-सा तरीका अपनाया गया और आपका शरीर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
गम्स पर एक नया काला धब्बा दिखे तो क्या चिंता करनी चाहिए?
नया धब्बा हो और कारण पता न हो, तो डॉक्टर को सामने से दिखाना जरूरी है, भले ही दर्द न हो। कुछ कारण नुकसानदेह नहीं होते। लेकिन धब्बा बदल रहा हो, उभरा हुआ हो, उसके किनारे टेढ़े-मेढ़े हों या खून आता हो, तो आगे की जांच या बायोप्सी की जरूरत हो सकती है।
क्या बच्चों के गम्स नैचुरली काले हो सकते हैं?
हां। बच्चों के गम्स में नैचुरल पिगमेंट हो सकता है, खासकर जब परिवार में भी गम्स का रंग ऐसा हो। नया पैच, सूजन, दर्द या खून आने पर डेंटिस्ट से जांच करवानी चाहिए।
काले गम्स के लिए किस डेंटिस्ट को दिखाएं?
शुरुआती चेकअप जनरल डेंटिस्ट कर सकते हैं। बिना साफ कारण रंग बदल रहा हो, तो ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट उसकी जांच कर सकते हैं। पीरियोडॉन्टिस्ट, यानी गम्स और दांतों को सहारा देने वाले टिशू के स्पेशलिस्ट, गम्स की बीमारी और कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं पर सलाह दे सकते हैं।
This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.