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ठाणे के पास मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग कराने से पहले क्या जानें?

ठाणे के पास मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग में दांतों के डॉक्टर या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट के पास जाकर मुंह और गर्दन की जांच कराई जाती है। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट मुंह की बीमारियों की जांच में खास ट्रेनिंग वाले दांतों के डॉक्टर होते हैं। इस चेकअप में अल्सर यानी घाव, धब्बे और गांठ जैसे बदलाव देखे जाते हैं, जिनकी आगे जांच जरूरी हो सकती है। दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न होने वाला अल्सर, बिना साफ वजह खून आना, सुन्नपन या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो तो जल्द डॉक्टर को दिखाएं।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-10-26

Key points

  • मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग डॉक्टर के पास जाकर होने वाला चेकअप है। इससे कैंसर की पक्की पुष्टि नहीं होती।
  • दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न होने वाले अल्सर की जांच जरूरी है, भले ही दर्द न हो।
  • गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह खून आना और मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो तो जल्द जांच कराएं।
  • तंबाकू और सुपारी से जोखिम बढ़ता है, लेकिन ये आदतें न होने पर भी मुंह का कैंसर हो सकता है।
  • शक वाले बदलाव में बायोप्सी, स्पेशलिस्ट की जांच और फॉलो-अप की साफ योजना जरूरी हो सकती है।

मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग क्या होती है?

मुंह का कैंसर जीभ, गम्स यानी मसूड़ों, गालों के अंदर, होंठों और जीभ के नीचे के हिस्से में हो सकता है। स्क्रीनिंग का मतलब है लक्षण महसूस होने से पहले ऐसे बदलावों का चेकअप करना, जिनकी आगे जांच जरूरी हो सकती है। अगर पहले से घाव, धब्बा या गांठ है, तो डॉक्टर उस समस्या की जांच करते हैं। यह सिर्फ रूटीन स्क्रीनिंग नहीं होती।

डॉक्टर मुंह को देखते हैं और मुंह व गर्दन के जरूरी हिस्सों को छूकर जांचते हैं। इससे ऐसे बदलाव पता चल सकते हैं जिनकी अधिक जांच, दोबारा चेकअप या टिशू की जांच जरूरी हो। टिशू शरीर के किसी हिस्से को बनाने वाली कोशिकाओं का समूह है। स्क्रीनिंग से कैंसर की पुष्टि नहीं होती। नॉर्मल चेकअप भी यह गारंटी नहीं देता कि आगे कभी कैंसर नहीं होगा।

मुंह में कई बदलाव कैंसर के अलावा चोट, इन्फेक्शन या सूजन की वजह से होते हैं। लेकिन सिर्फ देखकर इनका फर्क हमेशा पता नहीं चलता। चेकअप का मकसद यह तय करना है कि किस बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है, न कि हर अलग दिखने वाले हिस्से को कैंसर मान लेना।

ठाणे के पास मुंह के कैंसर का चेकअप कहां कराएं?

दांतों के डॉक्टर मुंह की शुरुआती जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे स्पेशलिस्ट के पास भेज सकते हैं। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट को मुंह और उससे जुड़े हिस्सों की बीमारियां जांचने की खास ट्रेनिंग होती है। अस्पताल के डेंटल विभाग और सिर व गर्दन की बीमारियों का इलाज करने वाले विभाग भी ऐसे बदलावों की जांच कर सकते हैं।

डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय मुंबई के सायन में के. जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्पेशल डेंटल ओपीडी और अंबरनाथ के रीजनबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं। उन्होंने ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी में एमडीएस किया है और वे पीएचडी स्कॉलर हैं। उनका डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया रजिस्ट्रेशन A-13123 है।

ठाणे, बदलापुर या उल्हासनगर के परिवारों के लिए सही जगह चुनना आने-जाने की सुविधा, अपॉइंटमेंट मिलने और आगे की जांच की सुविधा पर निर्भर करता है। यहां बताई गई प्रैक्टिस की जगहें सायन और अंबरनाथ में हैं, ठाणे शहर में नहीं। निकलने से पहले जगह और अपॉइंटमेंट की उपलब्धता पक्की कर लें। किसी चिंताजनक लक्षण की जांच सिर्फ पसंद का अपॉइंटमेंट मिलने के इंतजार में न टालें।

  • पूछें कि चेकअप में मुंह की अंदरूनी परत और गर्दन की जांच भी होगी या नहीं।
  • अपॉइंटमेंट लेते समय अल्सर, धब्बे, गांठ, खून आने या निगलने की परेशानी के बारे में बताएं।
  • पूछें कि जरूरत पड़ने पर बायोप्सी यानी टिशू का छोटा सैंपल लेकर जांच या अस्पताल भेजने का इंतजाम कैसे होगा।
  • कंसल्टेशन और जांच का खर्च सीधे पूछें। आगे के टेस्ट का खर्च अलग हो सकता है।

मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग किसे करानी चाहिए और कैंसर क्यों होता है?

कैंसर तब बनता है जब कोशिकाओं में बदलाव के कारण वे सामान्य नियंत्रण के बिना बढ़ने लगती हैं। तंबाकू और सुपारी मुंह के कैंसर की ऐसी अहम वजहें हैं जिनसे बचा जा सकता है। सुपारी में तंबाकू न मिला हो, तब भी वह नुकसान पहुंचा सकती है।

शराब से भी जोखिम बढ़ता है, खासकर जब साथ में तंबाकू का इस्तेमाल होता है। लेकिन मुंह का कैंसर उन लोगों को भी हो सकता है जिन्होंने कभी इनका इस्तेमाल नहीं किया। ऐसी आदतें न होने पर भी मुंह में लगातार बने बदलाव को अनदेखा न करें।

जिन लोगों को पहले मुंह का कैंसर हो चुका है या मुंह की कुछ लंबे समय से चल रही बीमारियां हैं, उन्हें तय समय पर दोबारा चेकअप की जरूरत हो सकती है। कितने अंतर पर चेकअप होगा, यह पुरानी मेडिकल जानकारी और जांच में मिली बातों पर निर्भर करता है। सबके लिए स्क्रीनिंग का एक ही शेड्यूल सही नहीं होता।

  • डॉक्टर को धूम्रपान और तंबाकू चबाने के बारे में बताएं, भले ही अब छोड़ चुके हों।
  • गुटखा, खैनी, तंबाकू वाला पान और किसी भी तरह की सुपारी के इस्तेमाल का जिक्र करें।
  • पहले मुंह में धब्बे रहे हों, मुंह कम खुलता हो या पहले बायोप्सी हुई हो, तो बताएं और रिपोर्ट दिखाएं।
  • बिना झिझक तंबाकू और सुपारी छोड़ने के लिए मदद मांगें।

मुंह के किन लक्षणों में डॉक्टर के पास जाकर जांच कराना जरूरी है?

मुंह का अल्सर दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न हो, तो डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। लगातार बना लाल, सफेद या लाल-सफेद मिला हुआ धब्बा भी दिखाना जरूरी है। शुरुआती चिंताजनक बदलावों में दर्द नहीं भी हो सकता है। इसलिए डॉक्टर को दिखाने के लिए दर्द शुरू होने का इंतजार करना सुरक्षित नहीं है।

हर लक्षण में दो हफ्ते इंतजार नहीं करना चाहिए। नई गांठ, बिना साफ वजह सुन्नपन, खून आना या मुंह खोलने या निगलने में परेशानी हो तो जल्द जांच कराएं। इन लक्षणों की कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, लेकिन डॉक्टर का जांच करना जरूरी है।

सांस लेने में परेशानी, अपनी लार भी न निगल पाना, मुंह या गर्दन में तेजी से बढ़ती सूजन, या बहुत ज्यादा खून आना जो रुक नहीं रहा हो—इनमें तुरंत इमरजेंसी में जाएं। रूटीन डेंटल अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें।

  • अल्सर या घाव जो दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न हो।
  • मुंह के अंदर लगातार बना लाल, सफेद या दोनों रंगों वाला धब्बा।
  • मुंह या गर्दन में गांठ, मोटा महसूस होने वाला हिस्सा या सूजन।
  • जीभ, होंठ या ठुड्डी में नया सुन्नपन जिसकी वजह साफ न हो।
  • बिना साफ वजह खून आना।
  • मुंह खोलने, चबाने या निगलने में बढ़ती परेशानी।
  • बिना साफ वजह वजन घटना या बोलने में लगातार बदलाव, खासकर मुंह के किसी लक्षण के साथ।

मुंह के कैंसर के चेकअप में क्या होता है?

डॉक्टर आम तौर पर पहले आपके लक्षणों, सेहत और आदतों के बारे में पूछते हैं। वे पूछ सकते हैं कि बदलाव कब दिखा, क्या वह बढ़ा है और खाने या बोलने पर असर पड़ता है या नहीं। सही जानकारी से देखभाल तय करने में मदद मिलती है। तंबाकू या सुपारी का इस्तेमाल छिपाने की जरूरत नहीं है।

जांच में होंठ, गालों के अंदर, गम्स, जीभ, जीभ के नीचे का हिस्सा और तालू देखा जाता है। डॉक्टर आपको जीभ हिलाने या निकालकर लगाए जाने वाले नकली दांत हटाने को कह सकते हैं। वे बदले हुए हिस्से को धीरे से छूकर जांच सकते हैं। गर्दन में बढ़े हुए लिम्फ नोड्स भी देख सकते हैं। ये शरीर की बीमारी से बचाव करने वाली व्यवस्था का हिस्सा हैं और छोटी गांठों जैसे होते हैं।

डॉक्टर यह भी देखते हैं कि मुंह कितना खुलता है और कहीं दांत या नकली दांत से रगड़ या चोट तो नहीं लग रही। आपकी सहमति से बदलाव की फोटो ली जा सकती है, ताकि आगे तुलना हो सके। देखकर और छूकर किया जाने वाला रूटीन चेकअप आम तौर पर दर्दनाक नहीं होता। हालांकि, पहले से घाव हो तो वहां छूने पर दर्द हो सकता है।

  • पुराने डेंटल रिकॉर्ड, बायोप्सी रिपोर्ट और संबंधित स्कैन रिपोर्ट साथ लाएं।
  • चल रहे ट्रीटमेंट की लिस्ट और एलर्जी या दूसरी बीमारियों की जानकारी साथ लाएं।
  • नोट करें कि लक्षण कब शुरू हुआ और आकार, रंग या महसूस होने में क्या बदलाव आया है।
  • बातचीत याद रखने में मदद चाहिए तो परिवार के किसी सदस्य को साथ ला सकते हैं।

जांच में शक वाला बदलाव मिले तो क्या वह कैंसर है?

नहीं। इसका मतलब है कि आगे जांच किए बिना उस बदलाव को सुरक्षित रूप से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चोट, इन्फेक्शन और सूजन वाली कुछ बीमारियां कभी-कभी कैंसर जैसी दिख सकती हैं। कुछ बदलावों में आगे कैंसर बनने का जोखिम होता है। इन्हें पोटेंशियली मैलिग्नेंट डिसऑर्डर कहते हैं। इनका मिलना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं है।

लगातार बने या शक वाले हिस्से की पहचान के लिए बायोप्सी जरूरी हो सकती है। इसमें टिशू का एक छोटा सैंपल निकालकर माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है। आपकी सहमति लेने से पहले डॉक्टर प्रक्रिया, तकलीफ कम रखने के तरीकों, संभावित जोखिमों और बाद की देखभाल के बारे में बताते हैं।

हर किसी को बायोप्सी या स्कैन की जरूरत नहीं होती। अंदर के गहरे हिस्सों या गर्दन की गांठ को जांचने के लिए इमेजिंग, यानी स्कैन जैसी जांच की सलाह मिल सकती है। खास लाइट और स्क्रीनिंग के दूसरे अतिरिक्त उपकरण अकेले कैंसर की पुष्टि नहीं कर सकते और न ही उसे पूरी तरह खारिज कर सकते हैं। जरूरत होने पर ये बायोप्सी की जगह नहीं ले सकते।

  • पूछें कि बदलाव की संभावित वजहें क्या हैं और टेस्ट क्यों सुझाया गया है।
  • पता करें कि टेस्ट कहां होगा और रिपोर्ट आपको कैसे मिलेगी।
  • सलाह के अनुसार दोबारा चेकअप कराएं। कोई खबर न मिलने को नॉर्मल रिपोर्ट न मानें।
  • टेस्ट या अगले चेकअप का इंतजार करते समय लक्षण बढ़ें तो डॉक्टर को बताएं।

स्क्रीनिंग के बाद क्या ट्रीटमेंट हो सकता है?

आगे की देखभाल चेकअप और टेस्ट की रिपोर्ट पर निर्भर करती है। अगर दांत के नुकीले किनारे या नकली दांत से चोट लग रही है, तो डॉक्टर उस वजह को ठीक करके देख सकते हैं कि घाव भर रहा है या नहीं। शक वाले बदलाव को बिना साफ वजह या आगे की जांच की योजना के बार-बार सिर्फ देखते रहना ठीक नहीं है।

ऐसे बदलाव जिनमें आगे कैंसर बनने का जोखिम है, उनमें नुकसान पहुंचाने वाली आदतें छोड़ने में मदद, तय समय पर चेकअप, दोबारा टिशू की जांच या कुछ मामलों में बदले हुए हिस्से को हटाने की जरूरत हो सकती है। तरीका बदलाव के प्रकार और उसके जोखिम पर निर्भर करता है। ये सभी बदलाव कैंसर नहीं बनते, फिर भी फॉलो-अप यानी तय समय पर दोबारा जांच जरूरी है।

कैंसर की पुष्टि होने पर सिर और गर्दन के कैंसर की देखभाल में अनुभवी टीम के पास भेजा जाता है। कैंसर कहां है और कितना फैला है, उसके अनुसार सर्जरी, रेडिएशन ट्रीटमेंट यानी खास किरणों से इलाज या दूसरे कैंसर ट्रीटमेंट हो सकते हैं। पोषण, बोलने, निगलने और दांतों की सेहत के लिए मदद भी देखभाल का हिस्सा हो सकती है।

क्या घर पर मुंह देखना या ऑनलाइन सलाह लेना स्क्रीनिंग की जगह ले सकता है?

अपने मुंह के अंदर देखने से नया घाव, धब्बा या सूजन नजर आ सकती है। लेकिन घर पर देखने से सभी हिस्सों की जांच या हर चिंताजनक बदलाव की पहचान नहीं हो सकती। किसी धब्बे को बार-बार छूने या खुरचने से चोट लग सकती है। इससे यह पता नहीं चलता कि वह कैंसर है या नहीं।

ऑनलाइन कंसल्टेशन से लक्षण समझने और सही जगह जांच कराने की सलाह मिल सकती है। यह पूरे चेकअप की जगह नहीं ले सकता। ऑनलाइन डॉक्टर गांठ छू नहीं सकते, टिशू की सख्ती जांच नहीं सकते और गर्दन की पूरी जांच नहीं कर सकते। साफ फोटो जानकारी देने में मदद करती है, लेकिन उससे बीमारी की पक्की पहचान नहीं होती।

अगर घाव गाल कटने, नुकीले दांत या नकली दांत की वजह से लगता हो, तब भी दो हफ्ते से ज्यादा बना रहे तो जांच जरूरी है। गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह खून आने या निगलने में परेशानी हो तो घरेलू नुस्खे आजमाने के चक्कर में जांच न टालें।

अपॉइंटमेंट खत्म होने से पहले डॉक्टर से क्या पूछें?

अपॉइंटमेंट के आखिर में आगे का कदम साफ होना चाहिए। आपको समझ आना चाहिए कि जांच में चिंता की कोई बात नहीं मिली, तय समय पर दोबारा चेकअप चाहिए या आगे टेस्ट जरूरी हैं। जिस भाषा में आप सहज हों, उसी में समझाने के लिए कहें।

रिपोर्ट की कॉपी संभालकर रखें और तकलीफ कम हो जाए तब भी सलाह के अनुसार फॉलो-अप कराएं। दर्द कम होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि बदला हुआ हिस्सा ठीक हो गया है। नॉर्मल स्क्रीनिंग के बाद कोई नया चेतावनी वाला लक्षण आए, तो अगले रूटीन चेकअप का इंतजार करने के बजाय फिर से जांच कराएं।

  • जांच में क्या पता चला?
  • क्या मुझे बायोप्सी, स्कैन या किसी स्पेशलिस्ट को दिखाने की जरूरत है?
  • दोबारा कब आना चाहिए और कौन-सा बदलाव हो तो उससे पहले आना चाहिए?
  • मेरी टेस्ट रिपोर्ट कौन समझाएगा?
  • तंबाकू या सुपारी छोड़ने के लिए मदद कहां मिलेगी?

Questions people ask

मुंह में दर्द नहीं है, तब भी क्या चेकअप करा सकते हैं?

हां। स्क्रीनिंग का मकसद बिना लक्षणों के भी बदलाव ढूंढना है। कुछ चिंताजनक धब्बों और अल्सर में दर्द नहीं होता। दांतों के डॉक्टर को अपनी आदतों और पुरानी मेडिकल जानकारी के बारे में बताएं, ताकि सही जांच और फॉलो-अप तय हो सके।

दांतों के डॉक्टर को दिखाएं या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट को?

दांतों के डॉक्टर शुरुआती जांच कर सकते हैं। ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट ऐसे अल्सर, धब्बों और मुंह के दूसरे बदलावों की अधिक गहराई से जांच कर सकते हैं जिनकी वजह साफ नहीं है। शक वाला बदलाव मिलने पर सिर और गर्दन की बीमारियों के विभाग में भेजना जरूरी हो सकता है।

क्या मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग में दर्द होता है?

देखकर और छूकर की जाने वाली सामान्य जांच में आम तौर पर दर्द नहीं होता। पहले से अल्सर हो तो वहां छूने पर तकलीफ हो सकती है। बायोप्सी की जरूरत हो तो वह अलग प्रक्रिया है। डॉक्टर तकलीफ कम रखने के तरीके और बाद की देखभाल समझाएंगे।

क्या ब्लड टेस्ट से मुंह के कैंसर का पता चल सकता है?

रूटीन ब्लड टेस्ट मुंह के कैंसर की पुष्टि नहीं कर सकता और न ही उसे पूरी तरह खारिज कर सकता है। बीमारी की पहचान के लिए आम तौर पर मुंह की जांच और शक वाले हिस्से की टिशू बायोप्सी जरूरी होती है। ब्लड टेस्ट सामान्य सेहत जांचने के लिए किए जा सकते हैं।

मैं बिना तंबाकू की सुपारी खाता हूं। क्या डॉक्टर को बताना चाहिए?

हां। सुपारी बिना तंबाकू के भी नुकसान पहुंचाती है। इसका संबंध मुंह के कैंसर और मुंह के अंदर दाग जैसे सख्त टिशू बनने से है, जिससे मुंह कम खुल सकता है। अभी इस्तेमाल करते हों या पहले करते थे, डॉक्टर को बताएं।

मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग कितने अंतर पर करानी चाहिए?

यह आपकी आदतों, जांच में मिली बातों और पुरानी मेडिकल जानकारी पर निर्भर करता है। डॉक्टर बता सकते हैं कि दोबारा चेकअप कब कराना है। नए लक्षण आएं तो उसी समय जांच कराएं। तय स्क्रीनिंग अपॉइंटमेंट तक न रुकें।

क्या मुंह का सफेद धब्बा हमेशा कैंसर होता है?

नहीं। सफेद धब्बे की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे रगड़ या मुंह की दूसरी बीमारियां। लगातार बने धब्बे की जांच जरूरी है और कुछ में बायोप्सी करनी पड़ती है। उसे खुरचें नहीं और दर्द न होने के कारण उसे नुकसानरहित न मानें।

क्या डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय का क्लिनिक ठाणे शहर में है?

उनकी बताई गई प्रैक्टिस की जगहें सायन, मुंबई और अंबरनाथ में हैं। ठाणे से आने वाले मरीज निकलने से पहले अपॉइंटमेंट की उपलब्धता और जगह पक्की कर सकते हैं। चिंताजनक लक्षण हो तो ऐसी जगह जल्द जांच कराएं जहां पहुंचना संभव हो।

This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.