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खाना खाते समय मेरे जबड़े से क्लिक की आवाज़ क्यों आती है?

खाना खाते समय जबड़े से क्लिक की आवाज़ इसलिए आ सकती है क्योंकि उसके जोड़ के अंदर कुशन जैसी छोटी डिस्क, यानी नरम परत, अपनी जगह से खिसकती है। अगर दर्द नहीं है और जबड़ा सामान्य तरीके से हिलता है, तो अक्सर ट्रीटमेंट की ज़रूरत नहीं होती। क्लिक के साथ दर्द, जबड़ा अटकना, सूजन या मुंह खोलने में दिक्कत हो, तो डेंटिस्ट से सामने जाकर जांच करवाना ज़रूरी है।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-10-27

Key points

  • जबड़े में क्लिक अक्सर जोड़ के अंदर कुशन का काम करने वाली डिस्क की हलचल से होता है।
  • बिना दर्द वाले क्लिक और सामान्य हरकत में अक्सर किसी खास ट्रीटमेंट की ज़रूरत नहीं होती।
  • दर्द, जबड़ा अटकना, सूजन या मुंह कम खुलना हो, तो सामने जाकर जांच करवाना ज़रूरी है।
  • दो हफ्ते से ज़्यादा समय तक न भरने वाला अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह खून आना या निगलने में दिक्कत को नज़रअंदाज़ न करें।
  • देखभाल का मकसद आराम से खाना और जबड़ा हिलाना है, सिर्फ आवाज़ खत्म करना नहीं।

जबड़े से क्लिक की आवाज़ कैसे आती है?

चेहरे के दोनों तरफ, कान के ठीक आगे, जबड़े का एक-एक जोड़ होता है। इसे टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट या टीएमजे कहते हैं। ये जोड़ चबाते, बोलते या जम्हाई लेते समय निचले जबड़े को खोलने, बंद करने और आगे-पीछे सरकाने में मदद करते हैं।

हर जोड़ के अंदर एक छोटी डिस्क होती है। यह हड्डियों के बीच कुशन का काम करती है। अगर डिस्क अपनी सही जगह से थोड़ी खिसकी हुई हो, तो मुंह खोलते समय वापस जगह पर आ सकती है। इसी हलचल से क्लिक की आवाज़ आ सकती है। कभी-कभी मुंह बंद करते समय भी एक और क्लिक सुनाई देता है।

यह एक आम वजह है, लेकिन सिर्फ आवाज़ से पता नहीं चलता कि जोड़ के अंदर ठीक क्या हो रहा है। क्लिक एक तरफ या दोनों तरफ हो सकता है। खाते समय यह ज़्यादा महसूस हो सकता है क्योंकि चबाने से जोड़ बार-बार हिलते हैं और उन पर दबाव पड़ता है।

  • क्लिक या पॉप आम तौर पर एक छोटी, अलग से सुनाई देने वाली आवाज़ होती है।
  • रगड़ने या चरचराने जैसी आवाज़ जोड़ में किसी दूसरे बदलाव का संकेत हो सकती है। अगर यह नई है या साथ में दर्द है, तो जांच करवाएं।
  • कान के पास दर्द जबड़े के जोड़ से हो सकता है, लेकिन कान या दांत की परेशानी भी वहां दर्द कर सकती है।

जबड़े में क्लिक शुरू क्यों होता है या ज़्यादा महसूस क्यों होने लगता है?

कभी-कभी इसकी शुरुआत की कोई साफ वजह नहीं मिलती। डिस्क की जगह में छोटे बदलाव के साथ जोड़ तालमेल बिठा सकता है, बिना दर्द या हिलने में रुकावट के। कुछ लोगों को दबाव पड़ने, चोट लगने या कुछ समय तक मांसपेशियों में ज़्यादा तनाव रहने के बाद क्लिक महसूस होता है।

कुछ आदतों और घटनाओं से जबड़े पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे पहले से मौजूद जोड़ की परेशानी ज़्यादा महसूस हो सकती है। लेकिन इनसे यह साबित नहीं होता कि किसी व्यक्ति के जबड़े में क्लिक की असली वजह क्या है।

स्ट्रेस में दांत भींचने की आदत बढ़ सकती है, खासकर ध्यान लगाकर काम करते या सोते समय। इसका मतलब यह नहीं कि लक्षण सिर्फ मन का वहम हैं। डेंटिस्ट जोड़, मांसपेशियों, दांतों और आदतों को साथ में देखते हैं। वे सिर्फ स्ट्रेस या दांतों के आपस में मिलने के तरीके को वजह नहीं मान लेते।

  • दांत भींचना या नींद में दांत पीसना।
  • बार-बार च्यूइंग गम चबाना या बहुत सख्त चीज़ें खाना।
  • मुंह बहुत ज़्यादा खोलना, जैसे बड़ी जम्हाई लेते समय।
  • लंबे डेंटल अपॉइंटमेंट के दौरान मुंह खुला रखना।
  • चेहरे या जबड़े पर चोट लगना।
  • जोड़ में सूजन या आर्थराइटिस, यानी जोड़ को प्रभावित करने वाली बीमारी।

बिना दर्द के जबड़े में क्लिक होना क्या खतरनाक है?

अगर क्लिक के साथ दर्द नहीं है, चबाना आरामदायक है और मुंह सामान्य तरीके से खुलता है, तो अक्सर यह गंभीर परेशानी नहीं होती। सिर्फ आवाज़ आने का मतलब यह नहीं कि जोड़ खराब हो रहा है। इसका यह मतलब भी नहीं कि आगे आर्थराइटिस होगा या सर्जरी की ज़रूरत पड़ेगी।

कई लोगों के जोड़ से आवाज़ आती है, लेकिन उन्हें किसी खास ट्रीटमेंट की ज़रूरत नहीं होती। अगर क्लिक लंबे समय से एक जैसा है और दर्द नहीं है, तो अपने रूटीन डेंटल चेकअप पर बताएं। अगर आवाज़ नई है और लगातार बनी हुई है, बदल रही है या आपको चिंता हो रही है, तो पहले ही सामने जाकर जांच करवाएं।

ज़रूरी बात सिर्फ यह नहीं है कि जबड़ा आवाज़ करता है या नहीं। यह भी देखें कि आप आराम से खा, बोल और मुंह खोल पा रहे हैं या नहीं। क्लिक बंद हो जाना हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं है। अगर क्लिक बंद होने के साथ अचानक मुंह कम खुलने लगे, तो जोड़ की हरकत में रुकावट आ सकती है।

आवाज़ जांचने के लिए बार-बार मुंह पूरा न खोलें। इससे मांसपेशियों में दर्द हो सकता है और बिना नुकसान वाली आवाज़ भी बार-बार चिंता की वजह बन सकती है।

किन लक्षणों में सामने जाकर जांच करवानी चाहिए?

क्लिक के साथ दर्द, बार-बार जबड़ा अटकना, दांत पहले की तरह आपस में न मिलना या मुंह खोलने में दिक्कत हो, तो डेंटिस्ट या ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट से जांच करवाएं। ओरल मेडिसिन डेंटिस्ट्री की वह शाखा है जिसमें मुंह की बीमारियों और जबड़े व चेहरे के दर्द की कई वजहों की जांच की जाती है। लक्षणों से खाना खाने या नींद में परेशानी हो, तो भी जांच ज़रूरी है।

कुछ चेतावनी के संकेत साधारण जबड़े के क्लिक में आम नहीं हैं। बिना जांच के इन्हें सिर्फ जोड़ की परेशानी मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

अगर जबड़ा खुला ही अटक जाए, अचानक इतना भी न खुले कि आप खा-पी सकें, या बड़ी चोट के बाद जबड़े में बदलाव आए, तो उसी दिन तुरंत देखभाल लें। सांस लेने में परेशानी, चेहरे या गर्दन की तेज़ी से बढ़ती सूजन, या अपनी लार भी न निगल पाना इमरजेंसी है।

  • मुंह का अल्सर, यानी छाला, जो दो हफ्ते से ज़्यादा समय में भी ठीक न हुआ हो।
  • मुंह, चेहरे या गर्दन में नई या बढ़ती हुई गांठ।
  • होंठ, ठुड्डी, जीभ या चेहरे में नया या लगातार बना हुआ सुन्नपन।
  • मुंह से बिना साफ वजह खून आना।
  • मुंह खोलने या निगलने में बढ़ती दिक्कत।
  • चेहरे की सूजन के साथ बुखार, बढ़ता दर्द या बहुत बीमार महसूस होना।

क्या परेशानी जबड़े के जोड़ के अलावा कुछ और भी हो सकती है?

हां। दांत में सड़न, दरार या इन्फेक्शन से चबाते समय दर्द हो सकता है। जबड़े की मांसपेशियों में तकलीफ भी दर्द कर सकती है, भले ही जोड़ मुख्य वजह न हो। जांच से इन वजहों में फर्क समझने में मदद मिलती है।

कान के लक्षणों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। कान में दर्द के साथ पानी या मवाद निकलना, बुखार या सुनने में बदलाव हो, तो इसे जबड़े की वजह से हुआ न मानें। डॉक्टर को कान की जांच करनी पड़ सकती है।

भारत में सुपारी या गुटखा चबाने वाले व्यक्ति का मुंह कम खुलना खास ध्यान देने वाली बात है। इन आदतों से मुंह की अंदरूनी परत में निशान जैसा सख्त टिश्यू बन सकता है और परत कस सकती है। इसे ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस कहते हैं। इस बीमारी में मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ता है। यह सामान्य जोड़ के क्लिक से अलग है।

सिर्फ बिना दर्द वाला क्लिक मुंह के कैंसर का आम संकेत नहीं है। लेकिन लगातार बना रहने वाला अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह खून आना या निगलने में दिक्कत हो, तो जांच ज़रूरी है—चाहे जबड़े में क्लिक हो या न हो।

डेंटिस्ट क्या जांचेंगे और क्या स्कैन करवाना पड़ेगा?

डेंटिस्ट पूछेंगे कि क्लिक कब शुरू हुआ और क्या दर्द, जबड़ा अटकने, चोट या चबाने में परेशानी है। वे दांत भींचने, नींद, सिरदर्द, चबाने की आदतों और शरीर के दूसरे जोड़ों की परेशानी के बारे में भी पूछ सकते हैं।

जांच के दौरान आप धीरे-धीरे मुंह खोलेंगे और बंद करेंगे। इस समय डेंटिस्ट आम तौर पर जबड़े के जोड़ और चबाने वाली मांसपेशियों को छूकर जांचते हैं। वे जबड़े की हरकत, छूने पर दर्द, दांत और मुंह की अंदरूनी परत देखते हैं। कोई भी हरकत दर्द करे तो बताएं। दर्द के बावजूद जबड़े को ज़बरदस्ती न हिलाएं।

हर क्लिक के लिए स्कैन ज़रूरी नहीं होता। एक्स-रे या स्कैन पर तब विचार किया जाता है जब जांच में चोट, हड्डी में बदलाव, लगातार जबड़ा अटकने या ऐसी दूसरी परेशानी का शक हो जिससे देखभाल का तरीका बदल सकता है।

  • डेंटल एक्स-रे से दांत और जबड़े की हड्डियों के कुछ हिस्से जांचने में मदद मिल सकती है।
  • मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग या एमआरआई एक स्कैन है। ज़रूरत होने पर यह जोड़ की डिस्क और दूसरे नरम टिश्यू दिखा सकता है।
  • कम्प्यूटेड टोमोग्राफी या सीटी स्कैन हड्डियों की बारीक तस्वीरें देता है। इसका इस्तेमाल कुछ खास समस्याओं में होता है।
  • पुरानी रिपोर्ट और स्कैन काम आ सकते हैं। खुद से नए टेस्ट करवाने के बजाय उन्हें साथ लाएं।

रोज़ की कौन-सी आदतें जबड़े पर दबाव कम कर सकती हैं?

जबड़े में दर्द हो, तो जांच का इंतज़ाम करते समय बेवजह दबाव कम करने से खाना थोड़ा आराम से खाया जा सकता है। इन उपायों से बीमारी की पुष्टि नहीं होती और न ही क्लिक बंद होने की गारंटी मिलती है।

ऐसा खाना चुनें जिसे आराम से चबा सकें, लेकिन खाने की चीज़ें बहुत ज़्यादा सीमित न करें। मुलायम चावल, दाल, इडली या अच्छी तरह पकी सब्ज़ियां, सख्त या ज़्यादा चबाने वाली चीज़ों से आसान हो सकती हैं। अगर मुलायम खाना खाने या पानी पीने में भी दिक्कत है, तो तुरंत देखभाल लें।

ज़ोर लगाकर जबड़े की एक्सरसाइज़ न करें और क्लिक करने वाले जोड़ को धक्का देकर जगह पर बैठाने की कोशिश न करें। एक तरह की जबड़े की परेशानी में मदद करने वाली एक्सरसाइज़ दूसरी परेशानी के लिए सही नहीं हो सकती।

  • मुंह बहुत चौड़ा खोलने के बजाय छोटे कौर लें।
  • च्यूइंग गम चबाने और पेन, नाखून या बहुत सख्त चीज़ें काटने से बचें।
  • दिन में दांत भींचने पर ध्यान दें। जब खाना नहीं खा रहे हों, तो दांतों को आपस में दबाने के बजाय थोड़ा अलग और आराम की स्थिति में रखें।
  • जांचने के लिए जानबूझकर जबड़े से क्लिक न करवाएं।
  • दर्द वाली तरफ ज़बरदस्ती न चबाएं। अगर आप लगातार उस तरफ चबाने से बच रहे हैं, तो डेंटिस्ट को बताएं।
  • ज़ोर लगाकर खींचने के बजाय जबड़े को हल्के और आरामदायक तरीके से ही हिलाएं।

जबड़े में क्लिक का ट्रीटमेंट कैसे होता है?

देखभाल इस बात पर निर्भर करती है कि वजह क्या है और लक्षण रोज़ की ज़िंदगी पर कितना असर डालते हैं। बिना दर्द वाले क्लिक और सामान्य हरकत में सिर्फ परेशानी को समझाना और उस पर नज़र रखना काफी हो सकता है। ट्रीटमेंट का मकसद आराम और जबड़े का काम बेहतर करना है, हर आवाज़ को खत्म करना ज़रूरी नहीं।

दर्द या मुंह खोलने में रुकावट हो, तो देखभाल अक्सर ऐसे तरीकों से शुरू होती है जो दांतों या जबड़े में स्थायी बदलाव नहीं करते। सुधार का मतलब है खाना आसान होना, दर्द कम होना और जबड़ा आराम से हिलना। इन चीज़ों में सुधार के बाद भी क्लिक रह सकता है।

सिर्फ जबड़े से क्लिक आने पर यह नहीं मानना चाहिए कि दांतों के मिलने का तरीका हमेशा के लिए बदलना, दांत घिसकर उनका आकार बदलना या दांतों की जगह बदलना ज़रूरी है। जबड़ा लगातार अटके या जांच में जोड़ की कोई खास समस्या मिले, तो स्पेशलिस्ट की जांच चाहिए हो सकती है। सिर्फ क्लिक होने पर सर्जरी आम तौर पर पहला कदम नहीं होती।

  • परेशानी को समझना और जबड़े पर दबाव डालने वाली आदतों में बदलाव करना।
  • गाइडेड फिजियोथेरेपी, यानी जांच के हिसाब से सिखाई गई एक्सरसाइज़ और जबड़ा हिलाने के तरीके।
  • ज़रूरत के हिसाब से दांत भींचने की आदत, नींद की परेशानी या स्ट्रेस के लिए मदद लेना।
  • कुछ मरीजों में डॉक्टर से ठीक फिट करवाया गया ओरल अप्लायंस, यानी मुंह में पहनने वाला उपकरण, और बाद में नियमित चेकअप।
  • जांच में दांत की कोई परेशानी मिले तो उसका ट्रीटमेंट।
  • कुछ खास समस्याओं में जबड़े के जोड़ के स्पेशलिस्ट या ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन, यानी मुंह, जबड़े और चेहरे की सर्जरी के स्पेशलिस्ट, के पास रेफर करना।

जबड़े में क्लिक के लिए किस डॉक्टर को दिखाएं और क्या तैयारी करें?

जबड़े में क्लिक के लिए पहले डेंटिस्ट से मिलना ठीक रहता है। क्लिक के साथ चेहरे में दर्द, बार-बार जबड़ा अटकना, मुंह कम खुलना या वजह साफ न हो, तो ओरल मेडिसिन स्पेशलिस्ट मदद कर सकते हैं। ऑनलाइन सलाह, सामने बैठकर जबड़े की हरकत और मुंह की जांच की जगह नहीं ले सकती।

मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर और उल्हासनगर के आसपास रहने वालों के लिए पास में जांच की सुविधा होने से चेकअप और फॉलो-अप आसान हो सकते हैं। डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय, सायन, मुंबई के के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्पेशल डेंटल ओपीडी और अंबरनाथ के रीज़नेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं।

  • नोट करें कि क्लिक कब शुरू हुआ और किस तरफ होता है।
  • बताएं कि जबड़ा बीच में अटकता है, लॉक हो जाता है, दर्द करता है या पहले से कम खुलता है।
  • हाल की चोट, डेंटल ट्रीटमेंट, चबाने की आदतों और दूसरे जोड़ों के लक्षणों के बारे में बताएं।
  • पुराने डेंटल रिकॉर्ड और स्कैन हों तो साथ लाएं।
  • रिकॉर्ड करने या डॉक्टर को दिखाने के लिए बार-बार जानबूझकर क्लिक न करवाएं।

Questions people ask

मेरे जबड़े की सिर्फ एक तरफ क्लिक क्यों होता है?

जबड़े के दोनों जोड़ साथ काम करते हैं, लेकिन उनकी डिस्क और हरकत में फर्क हो सकता है। एक जोड़ क्लिक कर सकता है और दूसरा नहीं। सिर्फ किस तरफ आवाज़ आती है, इससे परेशानी की गंभीरता पता नहीं चलती। दर्द, अटकना और जबड़े की हरकत ज़्यादा मायने रखते हैं।

क्या जबड़े का क्लिक अपने आप ठीक हो सकता है?

कभी-कभी आवाज़ कम महसूस होने लगती है या बंद हो जाती है। यह बिना नुकसान पहुंचाए बनी भी रह सकती है। अगर क्लिक बंद हो जाए लेकिन मुंह कम खुलने लगे, तो इसे ठीक होना मानने के बजाय जांच करवाएं।

क्या जबड़े में क्लिक का मतलब टीएमजे की बीमारी है?

टीएमजे जोड़ का नाम है, किसी बीमारी का नहीं। टेम्पोरोमैंडिबुलर डिसऑर्डर उन परेशानियों को कहते हैं जो जबड़े के जोड़ या चबाने वाली मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं। सिर्फ बिना दर्द वाले क्लिक में ट्रीटमेंट ज़रूरी नहीं हो सकता। जांच से पता चलता है कि देखभाल की ज़रूरत वाली कोई परेशानी है या नहीं।

जबड़े में क्लिक हो लेकिन दर्द न हो, तो क्या चिंता करनी चाहिए?

अगर जबड़ा सामान्य तरीके से हिलता है और खाने में दिक्कत नहीं है, तो आम तौर पर घबराने की ज़रूरत नहीं होती। रूटीन डेंटल चेकअप में इसके बारे में बताएं। अगर क्लिक नया है और लगातार बना है, या दर्द, अटकना, सूजन या मुंह कम खुलना शुरू हो जाए, तो पहले ही जांच करवाएं।

क्या स्ट्रेस से जबड़े में क्लिक हो सकता है?

स्ट्रेस से दांत भींचना और मांसपेशियों का तनाव बढ़ सकता है। इससे जबड़े के लक्षण ज़्यादा महसूस हो सकते हैं। लेकिन यही अकेली संभव वजह नहीं है। दर्द या मुंह खोलने में रुकावट को सिर्फ स्ट्रेस मानने के बजाय जांच करवाना ज़रूरी है।

क्या जबड़े के क्लिक के लिए माउथगार्ड खरीदना चाहिए?

अपने आप नहीं। माउथगार्ड या मुंह में पहना जाने वाला उपकरण कुछ मरीजों की मदद कर सकता है, लेकिन उससे क्लिक खत्म होना तय नहीं है। इसकी सलाह देने से पहले डेंटिस्ट को वजह और फिट जांचना चाहिए। बाद के चेकअप में आराम और दांतों के आपस में मिलने के तरीके में किसी बदलाव को भी देखना ज़रूरी है।

क्या जबड़े को दबाकर वापस जगह पर बैठाना सुरक्षित है?

जबड़े को क्लिक करवाने के लिए ज़ोर न लगाएं, मोड़ें नहीं और धक्का न दें। इससे दर्द या चोट बढ़ सकती है। जबड़ा खुला अटक जाए या अचानक इतना न खुले कि खा-पी सकें, तो उसी दिन तुरंत देखभाल लें।

क्या जबड़े में क्लिक के लिए सर्जरी करवानी पड़ेगी?

सिर्फ क्लिक होने पर आम तौर पर सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती। देखभाल अक्सर परेशानी को समझाने, आदतें बदलने और ज़रूरत पड़ने पर बिना सर्जरी वाले विकल्पों से शुरू होती है। लगातार जबड़ा अटकने या जोड़ की किसी खास समस्या में आगे के ट्रीटमेंट पर विचार करने से पहले स्पेशलिस्ट की जांच ज़रूरी हो सकती है।

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