Oral Medicine for Doctors · 12 min read · हिन्दी
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया और दांत के दर्द में फर्क कैसे करें?
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में आमतौर पर चेहरे के एक तरफ थोड़ी देर के लिए बिजली के झटके जैसा तेज दर्द होता है। हल्का छूना, बोलना या चबाना इसे शुरू कर सकता है। दांत के दर्द में अक्सर किसी दांत से जुड़ी वजह मिलती है, जिसकी पुष्टि चेकअप और चुने हुए टेस्ट से होती है। फर्क समझने के लिए हर अटैक का समय, दर्द शुरू करने वाली चीजें, दांतों की जांच और नसों की जांच देखें। न्यूराल्जिया का शक हो तो स्पेशलिस्ट की जांच और एमआरआई जरूरी है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-10-28
Key points
- एक अटैक का पैटर्न पहचानें: थोड़ी देर का, एक तरफ का, ट्रिगर से शुरू होने वाला बिजली के झटके जैसा दर्द ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का संकेत है।
- दर्द को दांत से जोड़ने से पहले हिस्ट्री, चेकअप और चुने हुए टेस्ट का मेल जरूरी है।
- ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का शक हो तो स्पेशलिस्ट की जांच और एमआरआई चाहिए, भले ही रूटीन नसों की जांच सामान्य हो।
- एहसास कम होना, मुंह के घाव, सूजन और निगलने की दिक्कत से रेफरल की प्राथमिकता बदलती है।
- निदान आजमाने के लिए ऐसा डेंटल ट्रीटमेंट न करें जिसे वापस नहीं किया जा सकता।
किस तरह का दर्द ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का संकेत देता है?
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया चेहरे के दर्द की एक समस्या है। यह ट्राइजेमिनल नर्व से जुड़ी होती है, जो चेहरे और मुंह में छूने, दर्द और तापमान का एहसास पहुंचाती है। इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेडेक डिसऑर्डर्स के तीसरे संस्करण के अनुसार, इसमें चेहरे के एक तरफ बार-बार दर्द के अटैक होते हैं। हर अटैक सेकंड के एक छोटे हिस्से से दो मिनट तक रह सकता है। दर्द तेज, बिजली के झटके जैसा, चुभता हुआ या अचानक दौड़ता हुआ होता है। ऐसी हल्की छुअन भी इसे शुरू कर सकती है जिससे सामान्यतः दर्द नहीं होता।
दर्द ट्राइजेमिनल नर्व की एक या ज्यादा शाखाओं के हिस्से में होता है। ऑप्थैल्मिक शाखा माथे और आंख के आसपास का हिस्सा संभालती है। मैक्सिलरी शाखा चेहरे के बीच के हिस्से और ऊपर के दांतों से जुड़ी है। मैंडिबुलर शाखा चेहरे के निचले हिस्से और नीचे के दांतों से जुड़ी है। इसलिए ऊपर या नीचे के जबड़े में होने वाले अटैक को मरीज दांत का दर्द बता सकता है।
समय के साथ कुछ अटैक ज्यादा देर तक रह सकते हैं। कुछ मरीजों को अटैक के बीच भी लगातार दर्द रहता है। इसलिए बीच में दर्द रहने से न्यूराल्जिया की संभावना खत्म नहीं होती। पहचान का मुख्य आधार वही खास, किसी ट्रिगर से शुरू होने वाले तेज दर्द के अटैक हैं। ट्रिगर यानी वह चीज या गतिविधि जिससे दर्द शुरू होता है।
- न्यूराल्जिया की तरफ इशारा: दर्द अचानक शुरू और बंद होना, हर बार एक जैसे झटके, हल्के छूने से दर्द और बीच में तेज दर्द न होना।
- दांत की वजह की तरफ इशारा: लक्षण, उस दांत के टेस्ट और दांत में मिली समस्या का आपस में मेल होना।
- सिर्फ दर्द की तीव्रता, चबाने से दर्द या मरीज का एक दांत की तरफ इशारा करना फर्क तय करने के लिए काफी नहीं है।
- दांत की बीमारी और ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया साथ भी हो सकते हैं। एक मिलने से दूसरी संभावना अपने-आप खत्म नहीं होती।
दर्द की हिस्ट्री लेते समय पहले क्या पूछें?
पूरे दर्द वाले दौर की बात करने से पहले मरीज से एक अटैक के बारे में पूछें। मरीज कई घंटे दर्द रहने की बात कह सकता है, जबकि उसका मतलब कई घंटों में बार-बार आने वाले कुछ सेकंड के झटकों से हो। एक अटैक की अवधि और पूरे लक्षण वाले दौर की अवधि, दोनों नोट करें।
दर्द कहां शुरू होता है, कहां फैलता है और किससे शुरू होता है, इसका नक्शा बनाएं। पूछें कि ब्रश करने, चेहरा धोने, शेविंग, बोलने या हल्की हवा से भी क्या चबाने जैसा दर्द होता है। अटैक के बाद थोड़े समय तक वही ट्रिगर दोबारा दर्द न पैदा करे तो यह न्यूराल्जिया के पक्ष में हो सकता है। लेकिन ऐसा अंतराल न होने से न्यूराल्जिया खारिज नहीं होता।
- समय: पहली बार कब हुआ, अचानक या धीरे शुरू हुआ, एक अटैक कितनी देर रहता है, कितनी बार होता है और बीच में दर्द रहता है या नहीं।
- दांत से संबंध: ठंडा, गरम, मीठा, काटना, काटने का दबाव छोड़ना, हाल में हुई फिलिंग या दूसरी मरम्मत और पहले के डेंटल ट्रीटमेंट।
- दर्द का इलाका: एक तरफ या दोनों तरफ, एक दांत या बड़ा हिस्सा, और क्या दर्द ट्राइजेमिनल नर्व के इलाके से बाहर भी फैलता है।
- साथ के लक्षण: सुन्नपन, कमजोरी, सुनने में बदलाव, संतुलन बिगड़ना, नजर की परेशानी, रैश, बुखार, सूजन या वजन घटना।
- रोजमर्रा पर असर: क्या दर्द से खाना, पीना, सोना, मुंह की सफाई या मुंह खोलना मुश्किल होता है।
- पहले का इलाज: जिस दांत को वजह माना गया था, उसके ट्रीटमेंट के बाद भी क्या दर्द वैसा ही रहा।
दांतों का चेकअप किस क्रम में करें?
पहले चेहरे और मुंह के बाहर का हिस्सा, सूजन और मुंह कितना खुलता है, देखें। मुंह के अंदर की नरम परत और दूसरे मुलायम हिस्सों की पूरी जांच करें। फिर संदिग्ध दांत और पास के दांतों में सड़न, खराब फिलिंग या मरम्मत, दरार, गम्स की बीमारी और छूने पर दर्द देखें। सिर्फ इसलिए ऐसा ट्रीटमेंट शुरू न करें जिसे वापस नहीं किया जा सकता, क्योंकि मरीज एक दांत की तरफ इशारा कर रहा है।
डेंटल पल्प सेंसिबिलिटी टेस्ट करें। ये दांत के अंदर के नरम हिस्से, यानी पल्प की नसों की प्रतिक्रिया जांचते हैं। साथ में हल्का थपथपाना, दबाकर जांचना, दांत के आसपास गम्स की जेब की गहराई जांचना और जरूरत के अनुसार काटने का टेस्ट करें। तुलना के लिए उपयुक्त दूसरे दांत भी जांचें। हर टेस्ट समझाएं और बार-बार तेज अटैक पैदा करने से बचें।
सभी टेस्ट के नतीजों को साथ देखकर समझें। सेंसिबिलिटी टेस्ट पल्प में खून की सप्लाई सीधे नहीं मापते। कभी प्रतिक्रिया मिलने या न मिलने, दोनों से गलत निष्कर्ष निकल सकता है। एक्स-रे सामान्य दिखने पर भी पल्प में शुरुआती सूजन या दांत में दरार हो सकती है।
- ठंडे या मीठे से थोड़ी देर दर्द होना और वह चीज हटाते ही दर्द बंद होना, दांत की अंदरूनी परत डेंटिन के खुल जाने या पल्प में हल्की जलन से मेल खा सकता है।
- गरम या ठंडे के बाद देर तक दर्द रहना या अपने-आप दर्द होना पल्प की सूजन के पक्ष में हो सकता है। लेकिन मरीज सही दांत नहीं बता पाए, ऐसा भी संभव है।
- थपथपाने या काटने पर दर्द जड़ के आसपास सूजन, दरार या दांत को सहारा देने वाले गम्स और हड्डी की बीमारी का संकेत हो सकता है। अकेले इससे वजह तय नहीं होती।
- किसी एक जगह सूजन, पस, गम्स में एक अलग गहरी जेब या एक्स-रे में लक्षणों से मेल खाती खराबी मिले तो दांत की वजह मजबूत होती है।
- नतीजे आपस में मेल न खाएं तो दोबारा आकलन करें। एक के बाद एक पास के दांतों का ट्रीटमेंट शुरू न करें।
नसों, सिर और गर्दन की जांच में क्या देखें?
ट्राइजेमिनल नर्व की तीनों शाखाओं के इलाके में चेहरे के दोनों तरफ महसूस करने की क्षमता की तुलना करें। जबड़े की हरकत और चबाने वाली मांसपेशियों का काम देखें। जांच करने वाले की ट्रेनिंग और क्षमता के अनुसार, सिर से निकलने वाली दूसरी नसों का काम भी जांचें। इनमें आंखों की हरकत, चेहरे की हरकत और सुनना शामिल है। जरूरत हो तो पूरी न्यूरोलॉजिकल जांच, यानी नसों और नर्वस सिस्टम की जांच के लिए रेफर करें।
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में सामान्य जांच पर चेहरे की महसूस करने की क्षमता अक्सर ठीक मिलती है। स्पष्ट रूप से एहसास कम होना, बढ़ता सुन्नपन, मांसपेशियों की कमजोरी या दूसरी नसों से जुड़े संकेत किसी दूसरी बीमारी या अंदरूनी बनावट की समस्या का शक बढ़ाते हैं।
मुंह की अंदरूनी परत, लार बनाने वाली ग्रंथियां, गर्दन की लिम्फ नोड्स यानी छोटी प्रतिरक्षा ग्रंथियां, जबड़े के जोड़ और चबाने वाली मांसपेशियां जांचें। जबड़े को हिलाने या मांसपेशियों को दबाने से मरीज का जाना-पहचाना दर्द पैदा हो तो मांसपेशियों या जोड़ की भूमिका हो सकती है। लेकिन इससे साथ में न्यूराल्जिया होने की संभावना खत्म नहीं होती।
- दोनों तरफ लक्षण, कम उम्र में शुरुआत, लगातार बढ़ते लक्षण या जांच में स्पष्ट नसों की गड़बड़ी मिले तो आगे की जांच जल्दी कराएं।
- निचले होंठ या ठुड्डी का सुन्नपन ध्यान से दर्ज करें। बिना जांच इसे सामान्य दांत के दर्द से न जोड़ें।
- सिर्फ निदान दिखाने के लिए दर्द शुरू करने वाली जगह को बार-बार न छुएं।
- ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का शक हो तो सामान्य जांच मिलने पर भी इमेजिंग की जरूरत खत्म नहीं होती। इमेजिंग में शरीर के अंदर की तस्वीरें लेकर जांच की जाती है।
चेहरे या दांत जैसे दर्द की और कौन-सी वजहें हो सकती हैं?
डिफरेंशियल डायग्नोसिस का मतलब है लक्षणों की दूसरी संभव वजहों पर विचार करना। नसों के दर्द को दांत की बीमारी, जबड़े की मांसपेशियों के दर्द, सिरदर्द की समस्याओं और अंदरूनी बनावट से जुड़ी बीमारियों से अलग करें। खास ट्रिगर वाले अटैक के बिना सिर्फ लगातार दर्द हो तो उसे सीधे न्यूराल्जिया न मानें। ज्यादा व्यापक जांच करें।
- पल्प या जड़ से जुड़ी दांत की बीमारी: हिस्ट्री, दांत के टेस्ट और इमेजिंग में मेल देखें।
- दांत में दरार: काटने या दबाव छोड़ने पर दर्द मददगार संकेत हो सकता है। सामान्य एक्स-रे में दरार नहीं भी दिख सकती है।
- टेम्पोरोमैंडिबुलर डिसऑर्डर्स यानी जबड़े के जोड़ या चबाने वाली मांसपेशियों की समस्या: जाना-पहचाना दर्द अक्सर जबड़े के इस्तेमाल से बदलता है और जांच में दोबारा पैदा होता है।
- दर्द वाली ट्राइजेमिनल न्यूरोपैथी यानी ट्राइजेमिनल नर्व में चोट या बीमारी से होने वाला दर्द: चोट, डेंटल प्रक्रिया या पहले चेहरे पर छालों वाले रैश के बाद जलन, लगातार दर्द और एहसास में बदलाव हो सकता है।
- लगातार रहने वाला चेहरे या दांत के इलाके का दर्द जिसकी वजह स्पष्ट न हो: दूसरी वजहों को सावधानी से जांचकर बाहर करना जरूरी है। अक्सर अलग-अलग स्पेशलिस्ट की संयुक्त जांच चाहिए।
- कम समय वाले सिरदर्द के सिंड्रोम यानी लक्षणों के खास समूह: एक तरफ थोड़ी देर के दर्द के साथ आंख बहुत लाल होना, पानी आना या नाक के लक्षण हों तो न्यूरोलॉजी जांच चाहिए। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में भी आंख से थोड़ा पानी आ सकता है।
- साइनस या लार की ग्रंथि की बीमारी: नाक के लक्षण, संबंधित हिस्से में जांच के संकेत या खाने के समय सूजन के आधार पर जरूरी जांच चुनें।
- नर्वस सिस्टम की अंदरूनी बनावट से जुड़ी बीमारी: किसी गांठ से नस दबना या नस की सुरक्षात्मक परत की बीमारी, न्यूराल्जिया जैसे अटैक पैदा कर सकती है।
- दूसरी जरूरी वजहें: मेहनत करने पर जबड़े का दर्द और साथ में छाती के लक्षण, या कनपटी में नया सिरदर्द, चबाने पर जबड़े की थकान और नजर की परेशानी हो तो तुरंत मेडिकल जांच चाहिए।
दांत का एक्स-रे या एमआरआई कब कराएं?
हिस्ट्री और चेकअप दांत की वजह की ओर इशारा करें तो संबंधित दांतों के एक्स-रे लें। पूरे जबड़े की ज्यादा व्यापक इमेजिंग किसी स्पष्ट सवाल का जवाब पाने के लिए होनी चाहिए। कोन-बीम कंप्यूटेड टोमोग्राफी, यानी सीबीसीटी, दांतों और हड्डी की तीन आयामों वाली तस्वीरें देती है। बिना स्पष्ट वजह वाले चेहरे के दर्द में यह रूटीन जांच नहीं है और दिमाग की एमआरआई की जगह नहीं ले सकती।
यूरोपियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की गाइडलाइन ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की जांच में मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग, यानी एमआरआई की सलाह देती है। यह चुंबकीय तकनीक से अंदर की विस्तृत तस्वीरें बनाती है। सिर्फ लक्षणों से किसी दूसरी बीमारी के कारण होने वाले न्यूराल्जिया को खारिज नहीं किया जा सकता। स्थानीय व्यवस्था के अनुसार न्यूरोलॉजी और रेडियोलॉजी की मदद से एमआरआई कराएं, ताकि ट्राइजेमिनल नर्व के रास्ते और दिमाग के संबंधित हिस्सों को देखा जा सके।
खून की नली और ट्राइजेमिनल नर्व का छूना भर निदान की पुष्टि नहीं करता। रिपोर्ट समझते समय लक्षणों के साथ यह भी देखें कि नस का आकार बदला है या दूसरी बनावट में बदलाव है। एमआरआई से गांठ या नस की सुरक्षात्मक परत की बीमारी जैसी वजहें भी मिल सकती हैं।
महसूस करने की क्षमता लगातार घट रही हो, सिर की किसी दूसरी नस का काम प्रभावित हो या गांठ का शक हो तो इमेजिंग जल्दी कराएं। एमआरआई सुरक्षित न हो या उपलब्ध न हो तो न्यूरोलॉजी और रेडियोलॉजी से विकल्पों पर बात करें। सामान्य डेंटल स्कैन को सब ठीक होने का प्रमाण न मानें।
- डेंटल इमेजिंग का सवाल है: क्या दांत या जबड़े की कोई समस्या दर्द को समझाती है?
- एमआरआई ट्राइजेमिनल नर्व के रास्ते और नसों से जुड़ी संभावित अंदरूनी वजहों की जांच करती है।
- तय समय पर होने वाली इमेजिंग का इंतजार करते हुए जरूरी स्पेशलिस्ट रेफरल में देर न करें।
- सामान्य डेंटल एक्स-रे को न्यूराल्जिया का प्रमाण न मानें।
बायोप्सी की जरूरत कब होती है?
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का निदान बायोप्सी से नहीं होता। बायोप्सी में टिश्यू का छोटा नमूना लेकर जांच की जाती है। सामान्य लक्षण वाले मामले में मुंह के सामान्य हिस्से या नस का रूटीन नमूना लेने की जरूरत नहीं होती। बायोप्सी तब काम आती है जब चेकअप या इमेजिंग में मुंह की परत, मुलायम हिस्से या जबड़े में कोई संदिग्ध घाव या गांठ दिखे।
दो हफ्ते से ज्यादा समय तक न भरने वाला अल्सर, गांठ, बिना स्पष्ट वजह खून आना, टिश्यू का सख्त होना, बढ़ता सुन्नपन या मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो तो सामने से जांच जरूरी है। मरीज बिजली के झटके जैसा दर्द भी बता रहा हो, तब भी इन संकेतों को नजरअंदाज न करें।
मुंह के संदिग्ध घाव को जल्द ओरल मेडिसिन या ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में रेफर करें। ओरल मेडिसिन मुंह की बीमारियों की जांच और बिना सर्जरी वाली देखभाल से जुड़ी शाखा है। ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी मुंह, जबड़े और चेहरे की सर्जरी की शाखा है। ये सेवाएं जांच और बायोप्सी की योजना बना सकती हैं। गर्दन की संदिग्ध गांठ या सांस के ऊपरी रास्ते में घाव के लिए कान-नाक-गला या सिर-गर्दन कैंसर सेवा की जरूरत हो सकती है। गहरे घाव या खून की नलियों से जुड़े होने की आशंका वाले घाव का नमूना लेने से पहले उचित जांच जरूरी है।
- जरूरत होने पर घाव की बायोप्सी करें, सिर्फ दर्द की शिकायत के आधार पर नहीं।
- घाव पहले से संदिग्ध दिख रहा हो तो रेफर करने के लिए दो हफ्ते का इंतजार न करें।
- जबड़े में बिना स्पष्ट वजह की खराबी और साथ में एहसास में बदलाव हो तो स्पेशलिस्ट से इमेजिंग की समीक्षा और मिलकर टिश्यू की जांच की योजना जरूरी है।
मरीज को कब और किस स्पेशलिस्ट के पास रेफर करें?
रेफरल कितनी जल्दी चाहिए, यह नसों के संकेत, इन्फेक्शन, कैंसर के चेतावनी संकेत और मरीज के खाने-पीने की क्षमता पर निर्भर करता है। नीचे दिए स्तर व्यावहारिक रूप से प्राथमिकता तय करने के लिए हैं। ये हर जगह लागू होने वाली अपॉइंटमेंट समय-सारणी नहीं हैं। कितनी जल्दी जांच चाहिए, यह साफ लिखें। हालत बिगड़ने की संभावना हो तो डॉक्टर आपस में सीधे बात करें।
- अभी इमरजेंसी जांच: सांस के रास्ते में दिक्कत, लार न निगल पाना, चेहरे या गर्दन में तेजी से फैलती सूजन, पूरे शरीर पर असर वाली गंभीर बीमारी या अचानक शरीर के किसी हिस्से की नसों के काम में गड़बड़ी। उचित मेडिकल और सर्जिकल सहायता वाले इमरजेंसी विभाग भेजें।
- उसी दिन जरूरी जांच: दर्द से पर्याप्त पानी न पी पाना, शरीर में पानी की कमी का शक, तेजी से बढ़ते नसों के संकेत या खून की नलियों की सूजन के शक के साथ नजर की परेशानी। हालत के अनुसार इमरजेंसी या तत्काल मेडिकल सेवा लें।
- कैंसर के शक में जरूरी रेफरल: दो हफ्ते से ज्यादा बना अल्सर, बिना स्पष्ट वजह गांठ या खून आना, बढ़ता सुन्नपन, या लगातार मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत। जगह के अनुसार ओरल मेडिसिन, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी या सिर-गर्दन सेवा में रेफर करें।
- जल्दी न्यूरोलॉजी जांच: न्यूराल्जिया जैसे अटैक के साथ एहसास कम होना, दोनों तरफ लक्षण, दूसरी नसों के संकेत या किसी अंदरूनी बीमारी का शक। रूटीन डेंटल ट्रीटमेंट पूरा होने का इंतजार न करें।
- जल्द न्यूरोलॉजी ओपीडी रेफरल: ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का सामान्य पैटर्न हो, लेकिन इमरजेंसी संकेत न हों। निदान की जांच और एमआरआई की योजना के लिए भेजें। दांत की वजह को लेकर संदेह हो तो ओरल मेडिसिन मदद कर सकती है।
- डेंटल या एंडोडॉन्टिक रेफरल: दांत की वजह के मेल खाते प्रमाण हों और आगे जांच या ट्रीटमेंट चाहिए। एंडोडॉन्टिक्स दांत के पल्प और जड़ के आसपास के टिश्यू से जुड़ी शाखा है।
- ओरल मेडिसिन या अलग-अलग स्पेशलिस्ट वाली फेशियल पेन सेवा: दांत के इलाके में लगातार अस्पष्ट दर्द, मिले-जुले पैटर्न, बार-बार असफल डेंटल ट्रीटमेंट या जांच के अनिश्चित नतीजे।
ट्रीटमेंट के कौन-से विकल्प समझाएं?
दांत की बीमारी की पुष्टि हो तो सही डेंटिस्ट या डेंटल स्पेशलिस्ट उस मिली हुई वजह का ट्रीटमेंट करे। विकल्पों में दांत की मरम्मत, पल्प या जड़ का ट्रीटमेंट, गम्स और सहारा देने वाले टिश्यू की देखभाल या सर्जरी शामिल हो सकती है। बिना स्पष्ट वजह के चेहरे के दर्द में ऐसा डेंटल ट्रीटमेंट निदान आजमाने के लिए न करें जिसे वापस नहीं किया जा सकता।
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में समझाएं कि आमतौर पर पहले स्पेशलिस्ट की निगरानी में मेडिकल ट्रीटमेंट पर विचार होता है। न्यूरोलॉजी इसकी देखरेख करे। निदान में संदेह या दर्द ठीक से कंट्रोल न होने पर दोबारा आकलन होना चाहिए। सिर्फ ट्रीटमेंट से आराम मिलने से निदान की पुष्टि नहीं होती।
मेडिकल ट्रीटमेंट असर न करे या मरीज उसे सहन न कर पाए तो ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का अनुभव रखने वाली न्यूरोसर्जरी सेवा में रेफर करना उचित है। यह दिमाग और नसों की सर्जरी की शाखा है। विकल्पों में नस पर दबाव कम करने की सर्जरी या दर्द के संकेतों को बदलने वाली चुनी हुई प्रक्रियाएं हो सकती हैं। स्पेशलिस्ट बताए कि कौन-सा विकल्प किसके लिए है, क्या नतीजे अपेक्षित हैं और क्या जोखिम हैं।
जबड़े की मांसपेशियों की समस्या या लगातार गैर-डेंटल दर्द में फिजियोथेरेपी, आदतों में बदलाव और अलग-अलग स्पेशलिस्ट की दर्द संभालने में मदद शामिल हो सकती है। इनका निदान और देखभाल अलग रास्ते से होता है। ये संदिग्ध घाव या नसों की गड़बड़ी की जांच का विकल्प नहीं हैं।
रेफरल लेटर और दोबारा जांच की सलाह में क्या लिखें?
अच्छे रेफरल में सिर्फ 'दांत का दर्द' या 'न्यूराल्जिया' लिखने के बजाय दर्द का पैटर्न बताया जाता है। अभी किस निदान का शक है, दूसरी संभव वजहें क्या हैं और इतनी जल्दी जांच क्यों चाहिए, यह लिखें।
मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर और उल्हासनगर में सेवा चुनते समय देखें कि वहां जरूरी सुविधा है या नहीं: डेंटल जांच, नसों की जांच, बायोप्सी या इमरजेंसी केयर। फोन या ऑनलाइन बातचीत से देखभाल का तालमेल बन सकता है, लेकिन जरूरी मुंह और नसों की सामने से जांच की जगह यह नहीं ले सकती।
- किस तरफ दर्द है, किस नस के इलाके में है, हर अटैक कितनी देर रहता है, ट्रिगर क्या हैं और बीच में दर्द है या नहीं, लिखें।
- हर संबंधित दांत की जांच, तुलना वाले टेस्ट, इमेजिंग रिपोर्ट और पिछले ट्रीटमेंट के नतीजे शामिल करें।
- महसूस करने की क्षमता, नसों के दूसरे संकेत, मुंह के घाव और गर्दन की जांच दर्ज करें।
- खाने, पीने और रोजमर्रा के कामों पर असर तथा हालत में किसी भी गिरावट का वर्णन करें।
- तय करें कि जांच की रिपोर्ट कौन देखेगा और पुष्टि करें कि रेफरल संबंधित सेवा तक पहुंचा है।
- सूजन, बुखार, नया सुन्नपन, कमजोरी, खून आना या निगलने में दिक्कत होने पर तुरंत दोबारा जांच कराने की साफ सलाह दें।
यह तरीका किन मेडिकल गाइडलाइन पर आधारित है?
इंटरनेशनल हेडेक सोसाइटी के इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेडेक डिसऑर्डर्स, तीसरे संस्करण के सेक्शन 13.1.1 में ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के क्लिनिकल मानदंड दिए हैं। इनमें एक तरफ थोड़ी देर के तेज अटैक, ट्राइजेमिनल नर्व के इलाके में दर्द और सामान्यतः दर्द न देने वाले ट्रिगर शामिल हैं। यह स्रोत अटैक की अवधि में बदलाव और साथ में लगातार दर्द होने की संभावना भी मानता है।
यूरोपियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया गाइडलाइन, जो 2019 में यूरोपियन जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुई, निदान की जांच में एमआरआई का समर्थन करती है। यह सिर्फ खून की नली और नस के संपर्क को निदान की पुष्टि मानने से सावधान करती है। मेडिकल ट्रीटमेंट से पर्याप्त कंट्रोल न मिले या उसे सहन करना मुश्किल हो तो स्पेशलिस्ट द्वारा सर्जरी पर विचार करने का भी समर्थन करती है।
ये स्रोत न्यूराल्जिया की पहचान और जांच में मदद करते हैं। दांत के टेस्ट, घाव की जांच और रेफरल की जल्दी तय करते समय चेकअप के नतीजे और स्थानीय व्यवस्था भी ध्यान में रखें।
- इंटरनेशनल हेडेक सोसाइटी: आईसीएचडी-3, 13.1.1 ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया — https://ichd-3.org/13-painful-cranial-neuropathies-and-other-facial-pains/13-1-trigeminal-neuralgia/
- यूरोपियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया गाइडलाइन, 2019 — https://doi.org/10.1111/ene.13950
Questions people ask
क्या ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया सिर्फ एक दांत का दर्द लग सकता है?
हां। ऊपर या नीचे के जबड़े वाली नस की शाखा के अटैक एक दांत में महसूस हो सकते हैं। उस जगह की डेंटल जांच जरूरी है, लेकिन दांत का ट्रीटमेंट करने से पहले लक्षणों से मेल खाती दांत की वजह का प्रमाण चाहिए।
चबाने पर दर्द हो तो क्या वजह दांत ही है?
नहीं। चबाने से न्यूराल्जिया, दांत की दरार, जड़ के आसपास की सूजन या जबड़े की मांसपेशियों का दर्द शुरू हो सकता है। अटैक की अवधि, हल्के छूने से दर्द और चेकअप के नतीजे इनमें फर्क करने में मदद करते हैं।
दांत का एक्स-रे सामान्य हो तो क्या दांत की बीमारी नहीं है?
नहीं। पल्प की सूजन और कुछ दरारें रूटीन एक्स-रे में नहीं दिखतीं। इमेजिंग को हिस्ट्री, चेकअप और दांत के जरूरी टेस्ट के साथ समझें।
क्या ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में लगातार दर्द भी रह सकता है?
हां। कुछ मरीजों में खास ट्रिगर वाले अटैक के साथ बीच में लगातार दर्द भी रहता है। ऐसे अटैक के बिना लगातार दर्द हो तो दूसरी संभव वजहों की व्यापक जांच जरूरी है।
क्या ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया में सुन्नपन सामान्य है?
महसूस करने की क्षमता स्पष्ट रूप से कम होना चेतावनी का संकेत है। इसकी अंदरूनी वजह की जांच चाहिए। नया या बढ़ता सुन्नपन हो तो सामने से चेकअप और जल्दी आगे की जांच जरूरी है।
लक्षण बिल्कुल सामान्य पैटर्न के हों, तब भी एमआरआई चाहिए?
हां। यूरोपियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की गाइडलाइन निदान की जांच में एमआरआई का समर्थन करती है। सामान्य पैटर्न की हिस्ट्री और सामान्य चेकअप से किसी दूसरी अंदरूनी बीमारी की संभावना भरोसेमंद तरीके से खत्म नहीं होती।
न्यूरोलॉजिस्ट के पास भेजने से पहले रूट कैनाल आजमाएं?
दांत की बीमारी के समर्थित निदान के बिना नहीं। ऐसा ट्रीटमेंट जिसे वापस नहीं किया जा सकता, निदान आजमाने के लिए नहीं करना चाहिए। न्यूराल्जिया का शक हो तो स्पेशलिस्ट की जांच जरूरी है। साथ में कोई वास्तविक दांत की बीमारी हो तो उसे अलग संभालें।
ओरल मेडिसिन डॉक्टर को दिखाएं या न्यूरोलॉजिस्ट को?
न्यूरोलॉजी संदिग्ध न्यूराल्जिया और नसों से जुड़ी वजहों की जांच करती है। ओरल मेडिसिन दांत, मुंह की परत और चेहरे के दर्द की दूसरी समस्याओं में फर्क करने में मदद करती है। संकेत मिले-जुले या अनिश्चित हों तो दोनों की जांच साथ चलना उपयोगी है।
This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.