Oral Medicine for Doctors · 11 min read · हिन्दी

बार-बार मुंह में अल्सर होने पर डॉक्टर दूसरी बीमारियों की जांच कब करें?

मुंह के अल्सर यानी छाले बहुत गंभीर हों, बने रहें, पहली बार बड़े होने के बाद शुरू हों या साथ में पेट-आंत, जननांग, आंख, स्किन या जोड़ों के लक्षण हों, तो शरीर की दूसरी बीमारी की जांच करें। बुखार, वजन घटना या पूरे शरीर की तबीयत खराब रहना भी अहम है। चेकअप में असामान्य बदलाव, पोषण की कमी का जोखिम, कमजोर इम्यूनिटी या अल्सर का अलग पैटर्न जांच की जरूरत बढ़ाता है। कोई अल्सर लगातार बना हो और संदिग्ध लगे, तो सिर्फ रूटीन ब्लड टेस्ट कराने के बजाय उसका तुरंत आकलन जरूरी है।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-10-05

Key points

  • पक्का करें कि हर अल्सर भरता है या नहीं। लगातार बना एक घाव, बार-बार होकर अपने आप भरने वाले अल्सर से अलग जांच की समस्या है।
  • पैटर्न गंभीर या असामान्य हो, शुरुआत बड़े होने के बाद हो, या पोषण, पेट-आंत, सूजन अथवा इम्यूनिटी के संकेत साथ हों, तो शरीर की दूसरी बीमारी जांचें।
  • हर मरीज के लिए एक जैसे सारे टेस्ट कराने के बजाय संकेतों के अनुसार जांच चुनें।
  • संदिग्ध अल्सर में जल्दी स्पेशलिस्ट आकलन जरूरी है, चाहे पहले भी अल्सर होते रहे हों या ब्लड रिपोर्ट नॉर्मल हो।
  • आंख के लक्षण, पूरे शरीर की गंभीर बीमारी और पानी न निगल पाना तत्काल या ज्यादा जल्दी रेफरल मांगते हैं।
  • ओरल मेडिसिन और साथ के संकेतों के अनुसार संबंधित मेडिकल स्पेशलिस्ट के बीच देखभाल का तालमेल रखें।

1. क्या ये बार-बार होने वाले आम छाले हैं या एक ही घाव बना हुआ है?

रिकरंट ऐफ्थस स्टोमैटाइटिस का मतलब है बार-बार दर्द वाले, आम तौर पर कम गहरे मुंह के अल्सर होना, जिनके पीछे शरीर की कोई दूसरी बीमारी पहचानी न गई हो। आम अल्सर गोल या अंडाकार होते हैं। उनकी सतह फीकी और किनारा लाल होता है। ये अक्सर मुंह की नरम, हिलने वाली अंदरूनी परत पर होते हैं, जहां सख्त सुरक्षात्मक परत नहीं होती। जैसे होंठ और गाल के अंदर, जीभ के नीचे या मुंह के निचले हिस्से में।

माइनर ऐफ्थी यानी छोटे ऐफ्थस अल्सर आम तौर पर करीब दो हफ्ते में बिना निशान छोड़े भर जाते हैं। मेजर ऐफ्थी बड़े और गहरे होते हैं। ये ज्यादा समय रह सकते हैं और निशान छोड़ सकते हैं। हर्पेटिफॉर्म ऐफ्थी बहुत छोटे अल्सर के गुच्छों के रूप में होते हैं। यह नाम उनके दिखने के तरीके के लिए है, किसी वायरस की वजह से नहीं।

पहले यह तय करें कि हर अल्सर अगली बार होने से पहले पूरी तरह भरता है या नहीं। एक ही घाव कभी ठीक न हो, तो उसे सिर्फ बार-बार छाले होने की पुरानी हिस्ट्री से नहीं समझाया जा सकता। मरीज से साफ पूछें कि हर बार नया अल्सर होता है या एक ही बने हुए घाव में बार-बार दर्द होता है।

  • आम पैटर्न से मेल: कम उम्र में शुरुआत, अलग-अलग एपिसोड, बीच में पूरी तरह ठीक होना और बाकी सेहत अच्छी रहना।
  • चिंता वाला बदलाव: बड़े होने के बाद शुरुआत, लगातार बढ़ती गंभीरता, लगभग हर समय अल्सर रहना या नई जगहों पर होना।
  • अलग या संदिग्ध बनावट: सख्त तला, टेढ़ा-मेढ़ा उठा हुआ किनारा, नीचे के टिशू से चिपका घाव, गांठ या साथ में लाल या सफेद पैच।
  • लंबे समय तक रहने वाले मेजर ऐफ्था की पहचान भी चेकअप से होनी चाहिए। यह मानकर लगातार बने घाव को नजरअंदाज न करें।

2. किन लक्षणों में तुरंत सामने से चेकअप जरूरी है?

दो हफ्ते से ज्यादा समय तक न भरने वाले अल्सर का सामने से चेकअप जरूरी है। घाव संदिग्ध लगे, तो दो हफ्ते पूरे होने का इंतजार न करें। गांठ, सुन्नपन, बिना साफ वजह खून आना, मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत होने पर भी जल्दी जांच चाहिए।

जांच कितनी जल्दी चाहिए, यह सिर्फ दर्द की तीव्रता से नहीं, साथ के लक्षणों से तय होता है। मुंह के कैंसर में दर्द बहुत कम हो सकता है, जबकि गैर-कैंसर वाले ऐफ्थस अल्सर बहुत दर्द कर सकते हैं। ब्लड टेस्ट नॉर्मल होने से संदिग्ध घाव की चिंता कम नहीं होती।

  • अभी इमरजेंसी जांच: सांस लेने में दिक्कत, पानी या लार भी न निगल पाना, तेजी से बढ़ती सूजन, शरीर में पानी की गंभीर कमी या पूरे शरीर की तबीयत बहुत खराब होना।
  • उसी दिन इमरजेंसी मेडिकल जांच: बुखार के साथ न्यूट्रोपीनिया की जानकारी या शक। न्यूट्रोपीनिया में इन्फेक्शन से लड़ने वाली एक तरह की सफेद ब्लड सेल्स की संख्या कम होती है।
  • उसी दिन आंखों के स्पेशलिस्ट की जांच: बार-बार मुंह के अल्सर के साथ लाल और दर्द वाली आंख, रोशनी से तकलीफ या नजर में बदलाव।
  • जल्दी ओरल मेडिसिन, मुंह-जबलड़े के सर्जन या ईएनटी यानी कान-नाक-गला/सिर-गर्दन स्पेशलिस्ट की जांच: सख्त या चिपका हुआ अल्सर, गर्दन की संदिग्ध लिम्फ नोड यानी इम्यून सिस्टम की ग्रंथि, बढ़ती निगलने की दिक्कत, बिना वजह एहसास में बदलाव या कैंसर का कोई और चेतावनी संकेत।
  • जल्दी डेंटल या ओरल मेडिसिन चेकअप: बिना साफ वजह का कोई भी अल्सर जो दो हफ्ते से ज्यादा बना रहे, चाहे दूसरे खतरे के संकेत न हों। ओरल मेडिसिन मुंह की बीमारियों की जांच और बिना सर्जरी वाले इलाज की स्पेशलिटी है।

3. मरीज की हिस्ट्री में किन बातों से दूसरी बीमारी का शक होता है?

शुरुआत की उम्र, कितनी बार अल्सर होते हैं, उनकी संख्या और जगह, सबसे लंबे समय में भरने वाला अल्सर और भरने के बाद निशान रहना दर्ज करें। पिछले एपिसोड की फोटो बीच-बीच में होने वाले पैटर्न को समझने में मदद कर सकती हैं। लेकिन फोटो छूकर जांचने या मौजूदा अल्सर के चेकअप की जगह नहीं लेतीं।

मुंह के बाहर के लक्षणों के बारे में सीधे पूछें। डेंटल चेकअप के दौरान मरीज खुद से जननांग के अल्सर, मल की आदतों में बदलाव या आंखों के लक्षण न बताएं। डॉक्टर की सलाह से और बिना सलाह इस्तेमाल किए जा रहे ट्रीटमेंट या अन्य चीजें, और हाल के बदलाव दर्ज करें। शरीर की दूसरी बीमारी का ट्रीटमेंट बदलने का फैसला संबंधित डॉक्टर पर छोड़ें।

  • पेट-आंत के संकेत: लगातार दस्त, मल में खून, पेट दर्द, वजन घटना, बिना साफ वजह एनीमिया यानी खून की कमी, या परिवार में सीलिएक बीमारी अथवा आंतों की सूजन वाली बीमारी की हिस्ट्री।
  • सूजन से जुड़ी बीमारी के संकेत: बार-बार जननांग के अल्सर या निशान, लाल दर्द वाली आंखें, स्किन के घाव, जोड़ों में सूजन, खून की नलियों से जुड़ी समस्या या दिमाग-नसों के लक्षण।
  • पोषण से जुड़े संकेत: बहुत सीमित खाना, पर्याप्त भोजन न मिलना, पेट-आंत की पिछली सर्जरी, खाने के पोषक तत्व ठीक से न सोख पाना या लगातार खून की हानि।
  • इम्यूनिटी से जुड़े संकेत: बार-बार या असामान्य इन्फेक्शन, कमजोर इम्यूनिटी, बिना साफ वजह बुखार या ऐसे जोखिम जिनके लिए गोपनीय तरीके से इन्फेक्शन की जांच जरूरी हो।
  • तय अंतराल वाले संकेत: अल्सर के साथ बार-बार लगभग समान अंतराल पर बुखार, गले में दर्द, गर्दन की ग्रंथियों में सूजन या इन्फेक्शन होना।
  • रोजमर्रा पर असर: खाने, पीने, नींद, काम या बच्चे की बढ़त में रुकावट।

4. मुंह के अल्सर का चेकअप किस क्रम में करें?

पहले मरीज की सामान्य हालत, शरीर में पानी की कमी और पूरे शरीर की बीमारी के संकेत देखें। सिर्फ दर्द वाली जगह नहीं, पूरा मुंह जांचें। हर घाव की जगह, आकार, बनावट, किनारा, तला और आसपास की अंदरूनी परत दर्ज करें।

लगातार बने घाव को छूकर इंड्यूरेशन यानी असामान्य सख्ती जांचें। देखें कि वह नीचे के टिशू से चिपका तो नहीं है। जीभ और मुंह के निचले हिस्से को ध्यान से जांचें। फिर गर्दन की लिम्फ नोड्स देखें। नुकीला दांत, किसी डेंटल उपकरण की रगड़ या चोट की दूसरी संभव वजह खोजें।

देखें कि मुंह में कई जगह सतह छिली हुई है, फफोले हैं, गम्स की परत उतर रही है, होंठ सूजे हैं, मुंह के कोनों पर दरारें हैं या अंदरूनी परत की बनावट बदली है। सतह की उथली परत उतरने को इरोजन कहते हैं। इसकी वजह अलग-अलग ऐफ्थस अल्सर से अलग हो सकती है। मुंह के बाहर की जांच मरीज की हिस्ट्री, सहमति और डॉक्टर की ट्रेनिंग व काम के दायरे के अनुसार करें।

  • मुंह कितना खुलता है, निगलने की शिकायत और महसूस करने की क्षमता में कमी दर्ज करें।
  • जरूरत के अनुसार पीलापन, आसानी से नील पड़ना, स्किन पर दाने और जोड़ों की सूजन देखें।
  • बच्चों में पीडियाट्रिक यानी बच्चों के डॉक्टर के आकलन से बढ़त और बार-बार बुखार के पैटर्न की समीक्षा करें।
  • चोट का शक हो, तो स्थानीय वजह दूर करें और घाव भरने का दोबारा चेकअप तय करके दर्ज करें। संदिग्ध संकेत हों, तो रेफरल में देरी न करें।

5. बार-बार मुंह के अल्सर में किन बीमारियों पर विचार करें?

डिफरेंशियल डायग्नोसिस यानी संभावित बीमारियों की सूची अल्सर के पैटर्न और साथ के संकेतों के आधार पर बनाएं। ऐफ्थस जैसे अल्सर कई बीमारियों में होते हैं। सिर्फ उनका दिखना आम तौर पर शरीर की मूल बीमारी नहीं बताता। एक से ज्यादा वजहें साथ भी हो सकती हैं।

मुंह में बार-बार सतह छिलने को हमेशा ऐफ्थस बीमारी न मानें। फफोलों वाली बीमारियों, इन्फेक्शन, स्थानीय चोट और कैंसर की जांच के रास्ते अलग हैं।

  • पोषण की कमी या एनीमिया: सीमित आहार, पीलापन, थकान, जीभ में बदलाव, पोषक तत्व न सोख पाना और खून की हानि पर ध्यान दें।
  • सीलिएक बीमारी: खाने के ग्लूटेन के खिलाफ इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया से छोटी आंत को नुकसान होता है। पेट-आंत के खास लक्षण न होने पर भी मुंह के अल्सर हो सकते हैं।
  • इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज: आंतों में लंबे समय की सूजन वाली बीमारियां, जिनमें क्रोन्स डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस शामिल हैं। होंठों की सूजन, लंबी लकीर जैसे अल्सर या मुंह की परत पर छोटे उभारों वाली पत्थर-जड़ी सड़क जैसी बनावट क्रोन्स डिजीज का शक बढ़ाती है।
  • बेहचेट बीमारी: शरीर के कई हिस्सों में सूजन पैदा करने वाली बीमारी। बार-बार मुंह और जननांग के अल्सर के साथ आंख, स्किन, खून की नलियों या दिमाग-नसों की समस्या हो, तो शक करें। सिर्फ मुंह के अल्सर से इसका डायग्नोसिस नहीं होता।
  • न्यूट्रोपीनिया या खून की दूसरी बीमारियां: साथ में बुखार, इन्फेक्शन, नील पड़ना, पीलापन या ब्लड सेल्स की असामान्य संख्या देखें।
  • कमजोर इम्यूनिटी और इन्फेक्शन: घाव बहुत फैले हुए, गहरे, लगातार बने या असामान्य जगहों पर हों, तो विचार करें।
  • इम्यून सिस्टम से जुड़ी फफोलों वाली बीमारी: कई जगह सतह छिलना, आसानी से फूटने वाले फफोले और सूजे हुए गम्स की परत उतरना इसके संकेत हो सकते हैं।
  • पीरियॉडिक फीवर सिंड्रोम यानी तय पैटर्न में लौटने वाले बुखार की बीमारियां: बच्चों में हर बार मिलते-जुलते बुखार, गले के लक्षण और सूजी ग्रंथियों वाले एपिसोड पर विचार करें।
  • स्थानीय चोट, किसी चीज के संपर्क से प्रतिक्रिया या संपर्क से जुड़े अल्सर: शुरुआत के समय और प्रभावित जगह का संबंध देखें।
  • मुंह का कैंसर: खासकर जब एक घाव बना रहे, सख्त हो जाए या साथ में गर्दन की गांठ अथवा महसूस करने की क्षमता में बदलाव हो।

6. ब्लड टेस्ट और खास जांच कब जरूरी हैं?

लंबे समय से हल्के, सामान्य पैटर्न वाले अल्सर हों और शरीर की दूसरी बीमारी के संकेत न हों, तो हर मरीज में बहुत सारे रूटीन टेस्ट जरूरी नहीं हैं। बड़े होने के बाद शुरुआत, बहुत बार या गंभीर अल्सर, देर से भरना, बुखार या वजन घटना, पोषण की कमी का जोखिम या चेकअप में असामान्य संकेत होने पर जांच ज्यादा उपयोगी है।

शुरुआती जांच में फुल ब्लड काउंट, अलग-अलग सफेद ब्लड सेल्स की गिनती, लाल ब्लड सेल्स के आकार व अन्य माप, सीरम फेरिटिन यानी शरीर के आयरन भंडार का संकेत, और पोषण की कमी से जुड़े एनीमिया की आगे की जांच शामिल हो सकती है। दूसरे पोषक तत्वों की जांच आहार की हिस्ट्री, पोषक तत्व सोखने की समस्या के जोखिम और ब्लड काउंट के पैटर्न के आधार पर चुनें। शरीर में सूजन का शक हो, तो सूजन के ब्लड मार्कर मदद कर सकते हैं, लेकिन उनसे अकेले डायग्नोसिस नहीं होता।

शुरुआती टेस्ट नॉर्मल होने से सीलिएक, इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज या बेहचेट बीमारी खारिज नहीं होती। जांच किसी खास क्लिनिकल सवाल का जवाब देने के लिए होनी चाहिए। बिना दिशा के इम्यून सिस्टम या इन्फेक्शन के सारे टेस्ट न कराएं।

  • सीलिएक बीमारी का शक: सीलिएक एंटीबॉडी टेस्ट के साथ टोटल इम्यूनोग्लोबुलिन ए की जांच कराएं। यह इम्यून सिस्टम की एक तरह की एंटीबॉडी है। इसकी कमी हो, तो उचित वैकल्पिक टेस्ट चुनें। आम तौर पर टेस्ट उस समय होना चाहिए जब मरीज के खाने में ग्लूटेन शामिल हो।
  • पेट-आंत के लक्षण: फिजिशियन या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट यानी पेट-आंत के स्पेशलिस्ट से आकलन करवाएं। मल में सूजन की जांच आगे के टेस्ट की जरूरत तय करने में मदद कर सकती है।
  • तय अंतराल पर बुखार या इन्फेक्शन: एक बार का नॉर्मल ब्लड काउंट घटते-बढ़ते न्यूट्रोपीनिया को पकड़ नहीं सकता। आगे के आकलन के लिए फिजिशियन या हीमैटोलॉजिस्ट यानी खून की बीमारियों के स्पेशलिस्ट की सलाह लें।
  • कमजोर इम्यूनिटी का शक: संकेतों के अनुसार खास टेस्ट कराएं। जरूरत हो, तो सहमति और सही काउंसलिंग के साथ एचआईवी टेस्ट भी शामिल करें।
  • बेहचेट बीमारी का शक: क्लिनिकल आकलन और स्पेशलिस्ट रेफरल को प्राथमिकता दें। इसकी पुष्टि करने वाला कोई एक ब्लड टेस्ट नहीं है।
  • बिना साफ वजह ब्लड काउंट असामान्य हो: उसकी वजह जांचें। सिर्फ मुंह की सूजन का असर मानकर न छोड़ें।

7. मुंह के अल्सर की बायोप्सी कब करें?

आम पैटर्न वाले और अपने आप भरने वाले ऐफ्थस अल्सर में सामान्यतः बायोप्सी की जरूरत नहीं होती। बायोप्सी में टिशू का छोटा नमूना लेकर जांचते हैं। ऐसे अल्सर की माइक्रोस्कोप जांच में अक्सर कोई खास पहचान वाला बदलाव नहीं मिलता। इससे सामान्य ऐफ्थस अल्सर और शरीर की सभी दूसरी वजहों में भरोसेमंद फर्क नहीं किया जा सकता।

अल्सर लगातार बना हो और वजह स्पष्ट न हो, सख्त हो, अनियमित हो, नीचे चिपका हो या असामान्य जगह पर हो, तो बायोप्सी के लिए स्पेशलिस्ट आकलन कराएं। साथ में गांठ, एहसास में बदलाव, संदिग्ध लिम्फ नोड्स या पास की अंदरूनी परत में बदलाव हो, तब भी यही जरूरी है। पोषण या सूजन के टेस्ट की रिपोर्ट के इंतजार में रेफरल न रोकें।

आम टिशू जांच के लिए स्पेशलिस्ट अक्सर अल्सर के ऐसे किनारे से नमूना लेते हैं जिसमें पास की सही-सलामत परत भी हो। सिर्फ बीच के मरे हुए टिशू का नमूना पर्याप्त नहीं हो सकता। इम्यून सिस्टम से जुड़ी फफोलों वाली बीमारी का शक हो, तो घाव के पास के टिशू से डायरेक्ट इम्यूनोफ्लोरेसेंस के लिए अलग नमूना चाहिए हो सकता है। यह टिशू में जमा इम्यून पदार्थों की जांच है। नमूने की जगह और उसे रखने व भेजने का तरीका संबंधित लैब से पक्का करें।

  • पैथोलॉजी जांच के अनुरोध में घाव कितने समय से है, संभावित डायग्नोसिस, शरीर के दूसरे अहम लक्षण और पिछले टेस्ट के नतीजे लिखें।
  • ग्रैन्युलोमैटस बीमारी का शक हो, जिसमें सूजन वाली सेल्स व्यवस्थित गुच्छे बनाती हैं, या असामान्य इन्फेक्शन का शक हो, तो टिशू की अतिरिक्त जांच जरूरी हो सकती है।
  • बायोप्सी में कोई खास वजह न मिलने पर भी क्लिनिकल चिंता बनी रहे, तो चेकअप और पैथोलॉजी रिपोर्ट की संयुक्त समीक्षा कराएं। दोबारा नमूना लेने पर विचार करें।
  • एक घाव की रिपोर्ट गैर-कैंसर वाली होने से दूसरी जगह के लगातार बने घाव की वजह स्पष्ट नहीं होती।

8. मुंह के अल्सर में एक्स-रे या स्कैन कब जरूरी है?

बिना जटिलता वाले बार-बार होने वाले ऐफ्थस अल्सर में रूटीन इमेजिंग यानी एक्स-रे या स्कैन की जरूरत नहीं होती। डेंटल एक्स-रे या कोन-बीम सीटी, जो दांत और जबड़े की तीन आयामी तस्वीर बनाती है, ऐफ्थस बीमारी की पहचान या उसके पीछे की शारीरिक बीमारियों की स्क्रीनिंग नहीं करती।

जांच में कोई अलग बनावट-संबंधी समस्या का सवाल उठे, तब इमेजिंग करें। जैसे दांत का इन्फेक्शन, जबड़े की सूजन, हड्डी तक असर का शक, गहरी गांठ या बिना साफ वजह महसूस करने की क्षमता में बदलाव। कैंसर का शक या गर्दन की चिंताजनक लिम्फ नोड्स हों, तो स्पेशलिस्ट के निर्देश में टिशू जांच के साथ इमेजिंग चाहिए। स्कैन बायोप्सी की जगह नहीं है।

  • दांत से जुड़ा स्थानीय संकेत: सही डेंटल इमेजिंग तभी चुनें जब उससे देखभाल का फैसला बदलेगा।
  • गर्दन की लगातार बनी लिम्फ नोड: स्पेशलिस्ट आकलन में अल्ट्रासाउंड और टिशू सैंपल शामिल हो सकते हैं।
  • गहराई तक फैलाव, हड्डी पर असर या सिर-गर्दन की गांठ: आगे देखभाल करने वाली टीम शरीर के अंदर की परतदार तस्वीर देने वाला उचित स्कैन चुनेगी।
  • आंत की बीमारी का शक: पेट-आंत के स्पेशलिस्ट तय करेंगे कि कैमरे से अंदर देखने वाली जांच, यानी एंडोस्कोपी, या पेट की इमेजिंग चाहिए या नहीं।

9. मरीज को कब और किस स्पेशलिस्ट के पास भेजें?

रेफरल में चिंता की वजह और कितनी जल्दी जांच चाहिए, दोनों स्पष्ट लिखें। उपलब्ध हों, तो घाव की फोटो, चेकअप के नतीजे, ब्लड रिपोर्ट, अल्सर की समयरेखा और शरीर के दूसरे संबंधित लक्षण भेजें। जरूरी रेफरल मिलने की पुष्टि करें। मरीज को साफ बताएं कि हालत बिगड़ने पर क्या करना है।

मुंबई, ठाणे और आसपास के इलाकों में कई अंगों से जुड़ी समस्या होने पर ऐसा सेंटर चुनें जहां ओरल मेडिसिन, टिशू जांच और मेडिकल स्पेशलिस्ट उपलब्ध हों। आखिर में कौन-सी स्पेशलिटी देखेगी, इस अनिश्चितता से इमरजेंसी या संदिग्ध कैंसर की जांच में देरी न होने दें।

  • अभी इमरजेंसी विभाग: सांस के रास्ते से जुड़े लक्षण, पर्याप्त पानी न ले पाना, पूरे शरीर की गंभीर बीमारी या बुखार के साथ सफेद ब्लड सेल्स की काफी कमी का शक।
  • उसी दिन आंखों के स्पेशलिस्ट: लाल दर्द वाली आंख, रोशनी से तकलीफ या नजर में बदलाव। सीधे स्पेशलिस्ट न मिले, तो इमरजेंसी आई सर्विस का इस्तेमाल करें।
  • जल्दी ओरल मेडिसिन, मुंह-जबलड़े के सर्जन या ईएनटी/सिर-गर्दन सेवा: संदिग्ध लगातार बना अल्सर, गांठ, बिना वजह खून आना, सुन्नपन, मुंह कम खुलना या बढ़ती निगलने की दिक्कत।
  • जल्दी ओरल मेडिसिन: अलग पैटर्न वाले, गंभीर, निशान छोड़ने वाले या लगभग लगातार रहने वाले अल्सर; डायग्नोसिस स्पष्ट न होना; या मुंह की परत की इम्यून-संबंधी बीमारी का शक।
  • अगले अल्सर एपिसोड का इंतजार किए बिना फिजिशियन या पेट-आंत स्पेशलिस्ट: पेट-आंत के लक्षण, वजन घटना, बिना साफ वजह पोषण से जुड़ा एनीमिया, पॉजिटिव सीलिएक टेस्ट या आंतों की सूजन वाली बीमारी का शक।
  • जल्दी रूमेटोलॉजी यानी जोड़ों व इम्यून-संबंधी सूजन के स्पेशलिस्ट या इंटरनल मेडिसिन: मुंह के बार-बार अल्सर के साथ जननांग, स्किन, जोड़ों या कई अंगों की सूजन के संकेत। आंख, खून की नलियों या दिमाग-नसों के अचानक लक्षण में इमरजेंसी जांच चाहिए।
  • जरूरत के अनुसार तुरंत हीमैटोलॉजी: बिना साफ वजह ब्लड सेल्स की संख्या काफी कम होना, जिसे साइटोपीनिया कहते हैं, या बोन मैरो यानी हड्डी के अंदर खून की सेल्स बनाने वाले हिस्से की बीमारी का शक। बुखार या पूरे शरीर की तबीयत खराब होने पर उसी दिन अस्पताल में देखभाल चाहिए हो सकती है।
  • बच्चों के डॉक्टर: बच्चे में बार-बार बुखार का पैटर्न, बढ़त प्रभावित होना या शरीर की दूसरी बीमारी का शक।

10. ट्रीटमेंट और फॉलो-अप में किन बातों का ध्यान रखें?

देखभाल वजह पर निर्भर करती है। बिना जटिलता वाली ऐफ्थस बीमारी में डॉक्टर की निगरानी में लक्षणों से राहत, स्थानीय सूजन कम करने वाली देखभाल, चोट या रगड़ घटाना और पोषण का सहारा जरूरी हो सकता है। गंभीर बीमारी में ट्रीटमेंट बढ़ाने से पहले ओरल मेडिसिन आकलन चाहिए।

पोषण की कमी की पुष्टि हो, तो उसे ठीक करने के साथ उसकी वजह भी जांचें। यह काम इलाज कर रहे फिजिशियन और जरूरत हो तो डायटीशियन की मदद से करें। आंत की बीमारी, खून की बीमारी और कई अंगों की सूजन में संबंधित स्पेशलिस्ट की निगरानी में बीमारी को कंट्रोल करना जरूरी है। इम्यून सिस्टम से जुड़ी मुंह की परत की बीमारी में अक्सर ओरल मेडिसिन और स्किन स्पेशलिस्ट की संयुक्त देखभाल चाहिए।

फॉलो-अप में घाव भरना, नए घाव, खाना-पीना, वजन और शरीर में उभरते नए लक्षण देखें। एक जगह लगातार बने घाव को बार-बार अल्सर होने के पूरे पैटर्न से अलग जांचें। दर्ज करें कि बाकी रिपोर्ट कौन देखेगा और किन हालात में मरीज को तय समय से पहले सामने से चेकअप कराना है।

  • लक्षणों में सुधार को डायग्नोसिस की पुष्टि न मानें।
  • अल्सर लगातार रहने लगे, दिखने में बदले या साथ में शरीर के दूसरे लक्षण जुड़ें, तो आगे का आकलन और रेफरल करें।
  • पहले की जांच नॉर्मल होने के बावजूद पैटर्न बदले, तो दोबारा चेकअप जरूरी है।

11. इस तरीके को कौन-सी गाइडलाइन्स का आधार मिलता है?

NICE की NG12 गाइडलाइन, जो संदिग्ध कैंसर की पहचान और रेफरल पर है, बिना साफ वजह तीन हफ्ते से ज्यादा रहने वाले मुंह के अल्सर के लिए संदिग्ध-कैंसर जांच के रास्ते की सलाह देती है। यहां दो हफ्ते पर चेकअप की बात पहले सुरक्षा-जांच के लिए है। इसका मतलब यह नहीं कि NICE अल्सर की अवधि दो हफ्ते बताता है। संदिग्ध संकेत हों, तो पहले रेफरल करना सही है।

सीलिएक बीमारी की पहचान, आकलन और देखभाल पर NICE की NG20 गाइडलाइन में गंभीर या लगातार मुंह के अल्सर भी सीलिएक टेस्ट कराने की वजहों में शामिल हैं। यह खाने में ग्लूटेन जारी रहते हुए जांच और एंटीबॉडी टेस्ट चुनते समय इम्यूनोग्लोबुलिन ए की कमी का ध्यान रखने का समर्थन करती है।

बेहचेट सिंड्रोम पर EULAR की सिफारिशें प्रभावित अंगों के अनुसार अलग-अलग स्पेशलिस्ट की मिलकर देखभाल का समर्थन करती हैं। बीमारी को वर्गों में रखने वाले मानदंड पहचान में मदद कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अकेले डायग्नोसिस की चेकलिस्ट न मानें। इन बातों को भारत की स्थानीय रेफरल व्यवस्था के हिसाब से लागू करें। यह न मानें कि यूके की तय समय-सीमा वाले रास्ते यहां भी उपलब्ध होंगे।

  • स्रोत का आधार: संदिग्ध मुंह के कैंसर की पहचान और रेफरल के लिए NICE NG12।
  • स्रोत का आधार: संकेतों के अनुसार सीलिएक जांच के लिए NICE NG20।
  • स्रोत का आधार: प्रभावित अंगों के अनुसार बेहचेट की स्पेशलिस्ट देखभाल के लिए EULAR की सिफारिशें।
  • कोई एक गाइडलाइन बार-बार मुंह के अल्सर वाले हर मरीज के लिए एक जैसा जांच पैनल तय नहीं करती।

Questions people ask

क्या बार-बार मुंह के अल्सर वाले हर मरीज को ब्लड टेस्ट चाहिए?

नहीं। हल्के, सामान्य पैटर्न वाले अल्सर पूरी तरह भर जाते हों और दूसरी बीमारी के संकेत न हों, तो लैब जांच जरूरी नहीं हो सकती। बड़े होने के बाद शुरुआत, गंभीर या बहुत बार होने वाले अल्सर, पोषण की कमी का जोखिम, शरीर के दूसरे लक्षण या असामान्य चेकअप में संकेतों के अनुसार टेस्ट जरूरी हैं।

क्या मुंह के बार-बार अल्सर सीलिएक बीमारी का अकेला संकेत हो सकते हैं?

पेट-आंत के साफ लक्षणों के बिना भी ये हो सकते हैं। गंभीर या लगातार अल्सर, बिना साफ वजह एनीमिया, पोषण की कमी या परिवार में संबंधित हिस्ट्री हो, तो सीलिएक टेस्ट की जरूरत बढ़ती है। पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर पुष्टि के लिए सही मेडिकल जांच का रास्ता अपनाना जरूरी है।

बार-बार मुंह के अल्सर में बेहचेट बीमारी का शक कब करें?

जब मुंह के बार-बार अल्सर के साथ जननांग के अल्सर, आंख की सूजन, खास तरह के स्किन बदलाव या खून की नलियों, दिमाग-नसों अथवा जोड़ों की समस्या हो, तो विचार करें। सिर्फ मुंह के अल्सर पर्याप्त नहीं हैं। आंख में नया दर्द, रोशनी से तकलीफ या नजर में बदलाव होने पर उसी दिन आंखों के स्पेशलिस्ट की जांच जरूरी है।

ब्लड टेस्ट नॉर्मल हों, तो क्या दूसरी बीमारी का शक खत्म हो जाता है?

नहीं। सूजन से जुड़ी कुछ बीमारियों में रूटीन रिपोर्ट नॉर्मल हो सकती हैं। बीच-बीच में बदलने वाले ब्लड काउंट भी छूट सकते हैं। क्लिनिकल चिंता बनी हो, तो खास वजह के अनुसार दोबारा आकलन या रेफरल करें। सिर्फ शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर आश्वस्त न करें।

क्या बड़े अल्सर को मेजर ऐफ्था मान सकते हैं?

नहीं। मेजर ऐफ्थी लंबे समय रह सकते हैं और निशान छोड़ सकते हैं। फिर भी बड़े या गहरे अल्सर में कैंसर, इन्फेक्शन और इम्यून-संबंधी बीमारी का आकलन चाहिए। सख्ती, नीचे के टिशू से चिपकना, एहसास में बदलाव या बिना साफ वजह लगातार बने रहने पर स्पेशलिस्ट जांच जरूरी है।

क्या आम पैटर्न वाले बार-बार ऐफ्थस अल्सर की बायोप्सी करनी चाहिए?

आम तौर पर नहीं। लगातार बने, अलग पैटर्न वाले या संदिग्ध घाव और दूसरी बीमारी के शक में बायोप्सी ज्यादा उपयोगी है। सामान्य ऐफ्था की टिशू जांच में अक्सर कोई खास पहचान वाला बदलाव नहीं मिलता। यह अकेले शरीर की दूसरी बीमारी से संबंध को खारिज नहीं करती।

क्या बार-बार मुंह के अल्सर में स्कैन काम आता है?

रूटीन तौर पर नहीं। इमेजिंग तब करते हैं जब दांत की बीमारी, हड्डी पर असर, गहरी गांठ या गर्दन की चिंताजनक लिम्फ नोड्स जैसी अलग चिंता हो। कैंसर के शक में सिर्फ स्कैन नहीं, स्पेशलिस्ट आकलन और टिशू से डायग्नोसिस जरूरी है।

क्या रेफरल के लिए अल्सर के तीन हफ्ते पूरे होने का इंतजार करें?

नहीं। बिना साफ वजह दो हफ्ते से ज्यादा न भरने वाले अल्सर का सामने से चेकअप करें। संदिग्ध संकेत हों, तो उससे पहले रेफर करें। इमरजेंसी लक्षणों और आंख के चेतावनी संकेतों में तुरंत या उसी दिन जांच के अलग रास्ते हैं। ब्लड टेस्ट के कारण जरूरी रेफरल में देरी नहीं होनी चाहिए।

This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.