Oral Medicine for Doctors · 12 min read · हिन्दी

दंत चिकित्सकों के लिए मुंह के कैंसर की जांच का प्रोटोकॉल

मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच (oral cancer screening) के प्रोटोकॉल में जोखिम का आकलन, क्रम से देखकर और छूकर परीक्षण, निष्कर्षों का रिकॉर्ड और विशेषज्ञ के पास भेजने की स्पष्ट प्रक्रिया शामिल हैं। संदिग्ध घाव या बदलावों का जल्द विशेषज्ञ मूल्यांकन और जरूरत होने पर ऊतक का नमूना लेकर जांच (tissue biopsy) जरूरी है। सहायक जांचों से कैंसर न होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। लगातार बना छाला, गांठ, सुन्नपन, बिना स्पष्ट कारण खून आना या मुंह खोलने अथवा निगलने में कठिनाई होने पर प्रत्यक्ष परीक्षण जरूरी है।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-09-24

Key points

  • बिना लक्षण वाले मरीजों की स्क्रीनिंग को लक्षणों का कारण पहचानने वाले मूल्यांकन से अलग रखें।
  • गर्दन सहित क्रम से देखकर और छूकर परीक्षण करें।
  • संदिग्ध निष्कर्षों में जल्द बायोप्सी या रेफरल जरूरी है। किसी तय समय-सीमा का इंतजार न करें।
  • इमेजिंग और सहायक जांचें जरूरी ऊतक निदान की जगह नहीं ले सकतीं।
  • समय पर दोबारा जांच के निर्देश दर्ज करें, ऊतक जांच और चिकित्सकीय निष्कर्षों का मेल सुनिश्चित करें और रेफरल के बाद देखभाल पूरी होने की पुष्टि करें।

मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच में क्या शामिल है?

स्क्रीनिंग में बिना लक्षण वाले लोगों में बीमारी के संकेत खोजे जाते हैं। जब मरीज लगातार बने छाले, सूजन, खून आने या संवेदना में बदलाव की बात बताता है, तो यह केवल स्क्रीनिंग नहीं रहती। यह बीमारी का कारण पहचानने के लिए मूल्यांकन (diagnostic assessment) बन जाता है। स्क्रीनिंग में कोई असामान्यता न मिलने पर भी लगातार बने लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पारंपरिक परीक्षण (conventional examination) में पर्याप्त रोशनी में मुंह के ऊतकों को देखना और पहुंच में आने वाले ऊतकों तथा आसपास की लसीका ग्रंथियों (lymph nodes) को छूकर जांचना शामिल है। लसीका ग्रंथियां शरीर की रोग-रक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। इस परीक्षण से आगे जांच की जरूरत वाले बदलाव पहचाने जा सकते हैं। लेकिन इससे तय नहीं होता कि कोई घाव कैंसर है या नहीं। लिए गए ऊतक के नमूने की सूक्ष्मदर्शी जांच, यानी ऊतक-विकृति जांच (histopathology), से ऊतक का निदान होता है।

यह शैक्षिक प्रक्रिया चिकित्सकीय निर्णय लेने में मदद करती है। यह किसी खास मरीज का निदान नहीं है और न ही स्थानीय कैंसर रेफरल व्यवस्था का विकल्प है।

  • मुंह की जांच से पहले जोखिम और लक्षणों का आकलन करें।
  • केवल उस घाव को न जांचें जिसके लिए मरीज आया है। क्रम से देखकर और छूकर पूरे क्षेत्र की जांच करें।
  • निष्कर्ष दर्ज करें, तय करें कि कितनी जल्दी कार्रवाई जरूरी है और आगे की निगरानी की जिम्मेदारी स्पष्ट करें।
  • समझाएं कि मुंह की जांच सामान्य दिखने पर भी कम पहुंच वाले क्षेत्रों में बीमारी होने की संभावना खत्म नहीं होती। इनमें मुंह के पीछे गले का हिस्सा, यानी मुख-ग्रसनी (oropharynx), भी शामिल है।

मरीज के इतिहास की कौन-सी बातें बीमारी के संदेह को बदलती हैं?

तंबाकू और सुपारी के बारे में अलग-अलग पूछें। मरीज सुपारी, पान मसाला या पान के सेवन को इस जांच से जुड़ी जानकारी नहीं मान सकते। सुपारी बिना तंबाकू के भी कैंसर पैदा कर सकती है। उत्पाद में क्या-क्या है, यह पता हो तो दर्ज करें।

जोखिम कारक संदेह का स्तर बदलते हैं, लेकिन निदान तय नहीं करते। मुंह का कैंसर उन लोगों में भी हो सकता है जिनमें कोई पहचाना गया जोखिम वाला सेवन नहीं है। कम उम्र के आधार पर किसी संदिग्ध घाव के मूल्यांकन में देरी नहीं होनी चाहिए।

  • सेवन का इतिहास: धूम्रपान वाला और बिना धुएं वाला तंबाकू, सुपारी, शराब, कितनी बार और कितने समय से सेवन हो रहा है, मुंह में रखने की जगह और पहले छोड़ने के प्रयास।
  • लक्षण: शुरुआत, लगातार बने रहना, बढ़ना, दर्द, खून आना, सुन्नपन, निगलने में कठिनाई, आवाज में बदलाव, कान का दर्द और मुंह कम खुलना।
  • पुरानी बीमारी: मुंह का कैंसर, मुंह की ऐसी अवस्था जिसमें कैंसर का जोखिम बढ़ा हो (oral potentially malignant disorder), पिछली बायोप्सी के निष्कर्ष और सिर-गर्दन का उपचार।
  • चिकित्सकीय संदर्भ: शरीर की रोग-रक्षा क्षमता कम होना (immunosuppression), शरीर की अन्य संबंधित बीमारियां, दवाएं और बिना स्पष्ट कारण वजन घटना।
  • स्थानीय कारण: नुकीले दांत, नकली दांत, हाल का दंत उपचार और संदिग्ध जलन या चोट के कारण को दूर करने के बाद घाव में बदलाव।
  • काम करने की क्षमता में बदलाव: जीभ की गति बदलना, चबाने में कठिनाई, गर्दन में सूजन या बिना स्पष्ट कारण किसी दांत का नया हिलना।

हर बार एक ही क्रम में परीक्षण कैसे करें?

पर्याप्त रोशनी रखें, निकाले जा सकने वाले कृत्रिम दांत या उपकरण हटाएं और मरीज को परीक्षण समझाएं। एक तय क्रम अपनाने से कोई हिस्सा छूटने की संभावना कम होती है। केवल देखकर जांचना पर्याप्त नहीं है। गहराई में कड़ापन या गर्दन की गांठ, सतह के रूप से ज्यादा चिंताजनक हो सकती है।

दर्द या मुंह कम खुलने जैसी किसी भी सीमा को दर्ज करें। अधूरे परीक्षण को सामान्य न लिखें। जिन हिस्सों का परीक्षण नहीं हो सका, उनके उचित मूल्यांकन की व्यवस्था करें।

  • मुंह के बाहर का परीक्षण (extraoral assessment): चेहरे के दोनों पक्षों की समानता, होंठ, त्वचा में बदलाव और दिखने वाली सूजन देखें। जबड़ा खुलने और संबंधित संवेदना या मांसपेशियों की गति में बदलाव जांचें।
  • गर्दन का परीक्षण: गर्दन, ठुड्डी के नीचे और निचले जबड़े के नीचे की लसीका ग्रंथियों को छूकर जांचें। जगह, अनुमानित आकार, दबाने पर दर्द, हिलने की क्षमता और कड़ापन दर्ज करें।
  • आगे के ऊतक: होंठों का लाल भाग (lip vermilion), होंठों की अंदरूनी सतह, होंठ और मसूड़े के बीच की तह (labial sulci) तथा दोनों गालों की अंदरूनी परत (buccal mucosa) जांचें।
  • दांतों के आसपास के ऊतक: मसूड़े, दांतों को सहारा देने वाली हड्डी के ऊपर का उभरा हिस्सा (alveolar ridges), आखिरी दाढ़ के पीछे के क्षेत्र (retromolar regions) और नकली दांतों के नीचे के ऊतक देखें।
  • जीभ: ऊपर, दोनों किनारों और नीचे की सतह देखें। जहां तक पहुंच हो, पीछे के दोनों किनारे भी जांचें। जीभ की गति जांचें और असामान्य हिस्सों को छूकर देखें।
  • मुंह का तल और तालु: जीभ के नीचे का हिस्सा, कठोर तालु और मुलायम तालु देखें। मुंह के अंदर और बाहर उंगलियां रखकर दोनों हाथों से जांच (bimanual palpation) करने से मुंह के तल और निचले जबड़े के नीचे के क्षेत्र का आकलन होता है।
  • गले का दिखने वाला भाग: टॉन्सिल और पहुंच में आने वाली मुख-ग्रसनी देखें। ध्यान रखें कि गले के लगातार लक्षणों में विशेषज्ञ द्वारा कैमरे वाले उपकरण से अंदर की जांच (endoscopic examination) जरूरी हो सकती है।
  • रिकॉर्ड: जगह, लंबाई-चौड़ाई, रंग, सतह, किनारे, खुला घाव, कड़ापन और नीचे के ऊतक से चिपकाव दर्ज करें। संभव हो तो सहमति लेकर माप दर्शाने वाले पैमाने के साथ फोटो लें।

किन संभावित निदानों पर विचार करना चाहिए?

विभेदक निदान (differential diagnosis) का मतलब किसी निष्कर्ष के संभावित कारणों की सूची है। यह जांच टालने का कारण नहीं है। मुंह की सतही परत की कोशिकाओं से होने वाला कैंसर, यानी मुख का स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (oral squamous cell carcinoma), चोट, सूजन या संक्रमण जैसा दिख सकता है।

मुंह की संभावित कैंसर-जोखिम वाली अवस्था एक ऐसी चिकित्सकीय स्थिति है जिसमें मुंह के कैंसर का जोखिम बढ़ा होता है। केवल उसके रूप से भरोसेमंद तरीके से यह तय नहीं हो सकता कि सतही परत की कोशिकाओं का असामान्य विकास, यानी एपिथीलियल डिस्प्लेसिया (epithelial dysplasia), मौजूद है या नहीं।

  • लगातार बना छाला: चोट, बार-बार होने वाले सामान्य दर्दनाक छाले (recurrent aphthous disease), संक्रमण, रोग-रक्षा प्रणाली से जुड़ी बीमारी, दवा से हुई चोट या कैंसर। एक ही जगह लगातार बना छाला, पहले से परिचित ऐसे बार-बार होने वाले छालों से अलग है जो पूरी तरह भर जाते हैं।
  • सफेद बदलाव: रगड़ से बदलाव, कैंडिडा फंगस का संक्रमण (candidiasis), लाइकेन जैसी सूजन की बीमारी (lichenoid disease) या ल्यूकोप्लाकिया (leukoplakia)। ल्यूकोप्लाकिया मुख्य रूप से सफेद चकत्ता होता है, जिसका निदान अन्य पहचाने गए कारणों को अलग करने के बाद किया जाता है।
  • लाल या मिले-जुले रंग का बदलाव: सूजन, कैंडिडा संक्रमण, चोट, एरिथ्रोप्लाकिया (erythroplakia) या एरिथ्रोल्यूकोप्लाकिया (erythroleukoplakia)। अंतिम दो शब्द ऐसे लाल या लाल-सफेद बदलाव बताते हैं जिनका कोई अन्य कारण स्पष्ट नहीं होता। इनका सावधानी से मूल्यांकन जरूरी है।
  • मुंह कम खुलना: दांत या मांसपेशियों के कारण, निशान बनकर ऊतक सिकुड़ना, ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (oral submucous fibrosis) या कैंसर। ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस में मुंह की अंदरूनी परत कड़ी होती है और उसमें रेशेदार निशान बनते हैं। इसका सुपारी के सेवन से मजबूत संबंध है।
  • मुंह की अंदरूनी परत के नीचे गांठ (submucosal lump): लार ग्रंथि की समस्या, द्रव भरी थैली (cyst), जलन या चोट की प्रतिक्रिया में बनी वृद्धि (reactive growth), लसीका तंत्र का कैंसर (lymphoma) या कोई अन्य ट्यूमर।
  • रंगद्रव्य वाला या रक्त वाहिकाओं जैसा दिखने वाला बदलाव: अलग निदान प्रक्रिया पर विचार करें। खून बहने के जोखिम के कारण कुछ बदलावों में ऊतक का नमूना लेने से पहले विशेषज्ञ मूल्यांकन जरूरी होता है।

किन निष्कर्षों में केवल निगरानी के बजाय तत्काल मूल्यांकन जरूरी है?

दो सप्ताह से अधिक समय तक न भरने वाले छाले का प्रत्यक्ष परीक्षण जरूरी है। आगे जांच या रेफरल का निर्णय भी दर्ज होना चाहिए। घाव का रूप संदिग्ध हो तो तुरंत कार्रवाई जरूरी है, भले ही उसे दो सप्ताह से कम समय हुआ हो। केवल अवधि के आधार पर तात्कालिकता तय करना सुरक्षित नहीं है।

असामान्य कड़ापन को इंड्यूरेशन (induration) कहते हैं। नीचे के ऊतक के मुकाबले कम हिलने या चिपके होने को फिक्सेशन (fixation) कहते हैं। दोनों ही चिंता बढ़ाते हैं, खासकर जब साथ में खुला घाव, गर्दन में लगातार बनी लसीका ग्रंथि की गांठ या बढ़ते लक्षण हों।

  • जल्द विशेषज्ञ मूल्यांकन: बिना स्पष्ट कारण गांठ, सुन्नपन, बिना स्पष्ट कारण खून आना या मुंह खोलने अथवा निगलने में कठिनाई।
  • अन्य चिंताजनक निष्कर्ष: छाले के अनियमित या मुड़े हुए उभरे किनारे, लाल या लाल-सफेद बदलाव, लगातार आकार बढ़ना, जीभ का चिपककर कम हिलना या दांत निकालने की जगह का बिना स्पष्ट कारण न भरना।
  • तुरंत आपातकालीन मूल्यांकन: सांस के रास्ते में रुकावट, लार भी न निगल पाना या अधिक खून बहना जो रुक नहीं रहा हो।
  • कम समय में दोबारा परीक्षण तभी उचित है जब बदलाव देखने में चिंताजनक न लगे और उसका कोई विश्वसनीय, दूर किया जा सकने वाला कारण हो। दोबारा जांच की निश्चित तारीख दर्ज करें, आम तौर पर दो सप्ताह के भीतर।
  • दोबारा जांच में घाव बना रहे, बढ़े या निदान स्पष्ट न हो, तो बायोप्सी या रेफरल करें। बार-बार केवल निगरानी या बिना पक्के निदान के अनुमान पर उपचार के चक्र न चलाएं।

बायोप्सी कब जरूरी है और इसे कौन करे?

परीक्षण में मुंह की अंदरूनी परत का कोई बदलाव संदिग्ध लगे, तो बायोप्सी या इसे कर सकने वाले चिकित्सक के पास तुरंत रेफरल जरूरी है। देखने में साधारण लगने वाला बदलाव भी लगातार बना रहे, या संभावित कैंसर-जोखिम वाली अवस्था को अलग न किया जा सके, तो ऊतक की जांच उचित है। फोटो या सहायक जांच इस निर्णय का विकल्प नहीं है।

इन्सीजनल बायोप्सी (incisional biopsy) में घाव के एक हिस्से का नमूना लिया जाता है। एक्सीजनल बायोप्सी (excisional biopsy) में पूरा घाव हटाया जाता है। कैंसर का संदेह होने पर आम तौर पर योजना बनाकर एक हिस्से का नमूना लेना चाहिए। बिना योजना पूरा घाव हटाने से अंतिम मूल्यांकन जटिल हो सकता है। चुनाव घाव के आकार, जगह, पहुंच, रक्त वाहिकाओं की मौजूदगी और प्रक्रिया करने वाले की दक्षता पर निर्भर करता है।

नमूना चिंताजनक ऊतक का सही प्रतिनिधित्व करे। मिले-जुले बदलाव वाले घाव में एक से अधिक नमूने जरूरी हो सकते हैं। केवल मृत ऊतक (necrotic tissue) लेने से ऐसा नतीजा आ सकता है जिससे उपयोगी जानकारी न मिले। प्रक्रिया की विस्तृत तकनीक निगरानी में प्रशिक्षण और स्थानीय प्रक्रिया-प्रोटोकॉल के अंतर्गत सीखी जानी चाहिए।

  • पहुंच कठिन हो, खून बहने का जोखिम स्पष्ट न हो, गहराई में बीमारी का संदेह हो या उचित प्रक्रिया और ऊतक जांच की सहायता उपलब्ध न हो, तो रेफर करें।
  • ऊतक जांच विशेषज्ञ (pathologist) को सटीक जगह, परीक्षण में दिखा रूप, अवधि, संभावित निदान, संबंधित सेवन का इतिहास और पुराने परिणाम दें।
  • परीक्षण और ऊतक जांच के नतीजे मेल न खाएं तो इस अंतर को सुलझाएं। घाव संदिग्ध बना हो तो गैर-कैंसर वाला या निदान न दे पाने वाला परिणाम मामला बंद करने का आधार नहीं है।
  • गर्दन की गांठ का नमूना लेने की प्रक्रिया विशेषज्ञ सेवा के साथ मिलकर तय करें। शुरुआत में गर्दन को चीरा लगाकर खुली बायोप्सी करने के बजाय आम तौर पर सुई से नमूना लिया जाता है।

शरीर के अंदर की तस्वीरों वाली जांच कब उपयोगी है?

मुंह का परीक्षण अन्यथा सामान्य हो तो इमेजिंग (imaging), यानी शरीर के अंदर की तस्वीरों से जांच, नियमित स्क्रीनिंग का हिस्सा नहीं है। इससे शुरुआती सतही कैंसर न होने की भरोसेमंद पुष्टि भी नहीं हो सकती। पहुंच में आने वाली अंदरूनी परत का बदलाव संदिग्ध हो, तो इमेजिंग के कारण बायोप्सी या रेफरल में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

गहराई में फैलाव, हड्डी तक बीमारी पहुंचने, गर्दन में गांठ या बिना स्पष्ट कारण संवेदना घटने का संदेह हो, तो इमेजिंग उपयोगी होती है। बीमारी कितनी फैली है, यह जानने के लिए भी इसकी जरूरत हो सकती है। विशेषज्ञ टीम चिकित्सकीय सवाल और मरीज से जुड़े कारकों के अनुसार जांच चुनती है।

  • दांतों के एक्स-रे (dental radiographs) से दांत के संभावित कारण या पास की हड्डी में बदलाव जांचे जा सकते हैं। लेकिन सामान्य नतीजा मुंह की अंदरूनी परत में कैंसर की संभावना खत्म नहीं करता।
  • ध्वनि तरंगों से जांच, यानी अल्ट्रासाउंड (ultrasound), से कुछ सतही गांठों और गर्दन की लसीका ग्रंथियों का आकलन किया जा सकता है। तस्वीर की मदद से सुई द्वारा नमूना लेने में भी यह सहायक है।
  • कॉन्ट्रास्ट वाली सीटी (contrast-enhanced CT; computed tomography) में तस्वीर स्पष्ट करने वाले पदार्थ और एक्स-रे से अंदरूनी चित्र बनते हैं। इससे मूल प्रभावित क्षेत्र, गर्दन और हड्डी तक बीमारी पहुंचने का आकलन हो सकता है।
  • एमआरआई (MRI; magnetic resonance imaging) चुंबकीय क्षेत्र से तस्वीरें बनाती है। इससे मुलायम ऊतकों में फैलाव, जीभ या मुंह के तल में बीमारी और नसों के रास्ते फैलाव के संदेह को स्पष्ट किया जा सकता है।
  • पीईटी-सीटी (PET-CT) ऊतकों की चयापचय गतिविधि और शरीर की बनावट की संयुक्त तस्वीरें देती है। इसका चुनिंदा उपयोग विशेषज्ञ कैंसर मूल्यांकन में होता है, नियमित दंत स्क्रीनिंग में नहीं।

क्या सहायक जांचें स्क्रीनिंग की प्रक्रिया बेहतर बनाती हैं?

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन (American Dental Association; ADA) की गाइडलाइन पारंपरिक परीक्षण और संदिग्ध बदलावों में बायोप्सी या रेफरल को प्राथमिकता देती है। ऊतकों की प्राकृतिक चमक जांचने वाले उपकरण (autofluorescence devices), ऊतक से प्रकाश के परावर्तन की प्रणालियां (tissue reflectance systems) और जीवित ऊतक को रंगकर जांचना (vital staining), मरीज को कैंसर न होने का भरोसा देने या जरूरी बायोप्सी टालने के लिए इस्तेमाल नहीं होने चाहिए।

ब्रश से कोशिकाओं की जांच (brush cytology) में इकट्ठी की गई सतही कोशिकाएं देखी जाती हैं। यह ऊतक की सूक्ष्मदर्शी जांच के बराबर नहीं है और गहरे ऊतकों में घुसपैठ का भरोसेमंद आकलन नहीं कर सकती। मरीज बायोप्सी से मना करे या बायोप्सी उपलब्ध न हो, तो इसके किसी सीमित उपयोग में कमियां स्पष्ट बताना जरूरी है। साथ ही अंतिम निदान तक पहुंचने की सक्रिय व्यवस्था होनी चाहिए।

  • सहायक जांच का नकारात्मक परिणाम परीक्षण में मिले संदिग्ध बदलाव को खारिज नहीं करता।
  • सकारात्मक परिणाम से कैंसर की पुष्टि नहीं होती। फिर भी उचित मूल्यांकन जरूरी है।
  • लार में बीमारी के जैविक संकेतकों की नियमित जांच (salivary biomarker testing) इस प्रक्रिया का स्थापित विकल्प नहीं है।
  • मुंह में एचपीवी की जांच (oral HPV testing) मुंह के कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग जांच नहीं है। ह्यूमन पैपिलोमावायरस (human papillomavirus; HPV) एक वायरस है जिसका खास संबंध मुख-ग्रसनी के कुछ कैंसर से है। ये मुंह के भीतर होने वाले अधिकांश कैंसर से अलग हैं।

मरीज को कब और कहां रेफर करना चाहिए?

मुंह की अंदरूनी परत का संदिग्ध बदलाव होने पर स्थानीय उपलब्धता और तात्कालिकता के अनुसार मुख-रोग चिकित्सा (oral medicine), मुंह और जबड़े की सर्जरी (oral and maxillofacial surgery) या स्थापित सिर-गर्दन कैंसर सेवा में रेफर करें। आसपास के ऊतकों में घुसपैठ करने वाले कैंसर (invasive cancer) का मजबूत संदेह हो, तो ऐसी सेवा चुनें जो ऊतक निदान, इमेजिंग और कई विशेषज्ञों की देखभाल का समन्वय कर सके। अलग-अलग चरणों में बार-बार देरी नहीं होनी चाहिए।

गले के लगातार लक्षण, टॉन्सिल के आकार में असमानता, आवाज में बदलाव या मुंह में स्पष्ट कारण के बिना गर्दन की गांठ में कान, नाक और गला विशेषज्ञ (ENT) का मूल्यांकन खास तौर पर उपयोगी है। मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ और आसपास के क्षेत्रों में केवल सामान्य रेफरल निर्देश देने के बजाय संबंधित सेवा का नाम और पक्का अपॉइंटमेंट अधिक उपयोगी हैं।

  • लक्षणों की अवधि, घाव के माप, परीक्षण के निष्कर्ष, सहमति से लिए गए फोटो, जोखिम का इतिहास और चिकित्सकीय चिंता शामिल करें।
  • पुरानी ऊतक जांच और इमेजिंग रिपोर्ट संलग्न करें। नमूना लेने की जगह और जांच की तारीखें भी दें।
  • स्पष्ट करें कि बायोप्सी हो चुकी है, लंबित है या उसके लिए समन्वय जरूरी है।
  • मरीज को बताएं कि रेफरल असामान्यता की जांच के लिए है। केवल रेफरल होने का मतलब कैंसर होना नहीं है।
  • रेफरल प्राप्त हुआ या नहीं, मरीज पहुंचा या नहीं, परिणाम और आगे की देखभाल पर नजर रखें। अपॉइंटमेंट छूटने पर की गई कार्रवाई दर्ज करें।

निगरानी और समय पर दोबारा जांच की सुरक्षा व्यवस्था कैसी हो?

हर मरीज या हर संभावित कैंसर-जोखिम वाली अवस्था के लिए दोबारा बुलाने का एक ही प्रमाण-आधारित अंतराल उपयुक्त नहीं है। आगे की निगरानी परीक्षण के निष्कर्षों, ऊतक जांच, पुराने कैंसर, सेवन के इतिहास, उपचार और मरीज के नियमित आने की संभावना पर निर्भर करती है। पुष्टि हुई अवस्थाओं में विशेषज्ञ की व्यक्तिगत योजना जरूरी है।

दोबारा जांच में उसी शारीरिक जगह की पुराने माप और फोटो से तुलना करें। नया लालपन, खुला घाव, मोटापन, कड़ापन, दर्द या काम करने की क्षमता में बदलाव होने पर दोबारा बायोप्सी जरूरी हो सकती है। यह पहले का परिणाम आश्वस्त करने वाला होने पर भी लागू होता है।

  • समझाएं कि दो सप्ताह से अधिक समय तक न भरने वाले किसी भी छाले का प्रत्यक्ष मूल्यांकन जरूरी है।
  • अन्य चेतावनी संकेत साफ बताएं: गांठ, सुन्नपन, बिना स्पष्ट कारण खून आना और मुंह खोलने या निगलने में कठिनाई।
  • मरीज से नियमित अपॉइंटमेंट तक इंतजार करने को कहने के बजाय जरूरत पड़ने पर पहले जांच कराने के लिए संपर्क का तरीका दें।
  • तंबाकू और सुपारी छोड़ने के लिए व्यवस्थित सहायता तथा शराब से जुड़े जोखिम पर उचित परामर्श दें।
  • केवल किए गए परीक्षणों की संख्या न देखें। रेफरल पूरा होने, ऊतक जांच का परिणाम आने में लगने वाले समय, अनसुलझे घावों और देर से हो रही दोबारा जांच की भी समीक्षा करें।

कौन-सी गाइडलाइन इस दृष्टिकोण का समर्थन करती हैं?

मुंह की संभावित कैंसर-जोखिम वाली अवस्थाओं के मूल्यांकन पर ADA की 2017 की प्रमाण-आधारित चिकित्सकीय गाइडलाइन मरीज का अद्यतन इतिहास लेने और पारंपरिक रूप से देखकर तथा छूकर परीक्षण करने का समर्थन करती है। संदिग्ध बदलावों में यह तुरंत बायोप्सी या विशेषज्ञ रेफरल की सलाह देती है। इसकी सिफारिशें इस प्रक्रिया के विकल्प के रूप में सहायक उपकरणों के नियमित उपयोग का समर्थन नहीं करतीं।

NICE गाइडलाइन NG12, ‘संदिग्ध कैंसर: पहचान और रेफरल’ (Suspected cancer: recognition and referral), में मुंह के कैंसर रेफरल के मानदंडों में तीन सप्ताह से अधिक बना बिना स्पष्ट कारण का छाला और गर्दन में लगातार बनी अस्पष्ट कारण वाली गांठ शामिल हैं। इसमें मुंह या होंठ की गांठ तथा चिंताजनक लाल या लाल-सफेद चकत्तों के लिए तत्काल दंत मूल्यांकन का भी उल्लेख है। ब्रिटेन की ये समय-सीमाएं रेफरल के मानक हैं। पहले से संदिग्ध घाव में ये इंतजार करने की अनुमति नहीं हैं।

यूएस प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स (US Preventive Services Task Force; USPSTF) की मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग संबंधी सिफारिश के अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में बिना लक्षण वाले वयस्कों की स्क्रीनिंग के लाभ और नुकसान के संतुलन का आकलन करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। इसका दायरा यह साबित नहीं करता कि दंत परीक्षण प्रभावी नहीं है। यह लक्षणों की जांच पर भी लागू नहीं होता।

ये स्रोत अलग-अलग परिस्थितियों और सवालों को संबोधित करते हैं। इस प्रक्रिया में दो सप्ताह के भीतर दोबारा जांच का नियम समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की सुरक्षा सीमा है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी गाइडलाइन एक ही अंतराल अपनाती हैं। किसी प्रैक्टिस में प्रोटोकॉल अपनाते समय स्रोतों के वर्तमान संस्करण और भारत की स्थानीय रेफरल व्यवस्था जांचें।

  • ADA स्रोत: मुंह की संभावित कैंसर-जोखिम वाली अवस्थाओं के मूल्यांकन के लिए प्रमाण-आधारित चिकित्सकीय गाइडलाइन (Evidence-based clinical practice guideline for the evaluation of potentially malignant disorders in the oral cavity), जर्नल ऑफ द अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन, 2017।
  • NICE स्रोत: NG12, संदिग्ध कैंसर: पहचान और रेफरल — https://www.nice.org.uk/guidance/ng12
  • USPSTF स्रोत: मुंह का कैंसर: स्क्रीनिंग संबंधी सिफारिश वक्तव्य (Oral Cancer: Screening recommendation statement)।

Questions people ask

क्या दंत चिकित्सकों को तंबाकू का सेवन न करने वाले मरीजों की भी जांच करनी चाहिए?

हां। तंबाकू या सुपारी का सेवन न होने से मुंह के कैंसर की संभावना खत्म नहीं होती। मुंह का पारंपरिक परीक्षण फिर भी जरूरी है। सेवन का इतिहास परामर्श और चिकित्सकीय संदेह का स्तर तय करने में मदद करता है।

क्या हर छाले की तुरंत बायोप्सी जरूरी है?

नहीं। स्पष्ट रूप से साधारण दिखने वाले बदलाव का विश्वसनीय और दूर किया जा सकने वाला कारण हो, तो कम समय में दोबारा जांच की जा सकती है। यह योजना दर्ज होनी चाहिए। संदिग्ध विशेषताएं हों तो किसी तय अवधि का इंतजार किए बिना जल्द बायोप्सी या रेफरल जरूरी है।

छाला कैंसर जैसा दिखे तो क्या दो सप्ताह इंतजार करना चाहिए?

नहीं। दो सप्ताह की सीमा लगातार बने घाव में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए है। यह जरूरी निगरानी अवधि नहीं है। कड़ापन, नीचे के ऊतक से चिपकाव, चिंताजनक रंग बदलाव, गर्दन की गांठ या बढ़ते लक्षणों में जल्द आगे की जांच जरूरी है।

क्या नुकीला दांत मिलने पर लगातार बने छाले की चिंता खत्म हो जाती है?

नहीं। रगड़ या दबाव से चोट एक संभावित कारण है, लेकिन इसके साथ गंभीर बीमारी भी हो सकती है। संदिग्ध कारण दर्ज करें और सुनिश्चित करें कि घाव भर रहा है। घाव बना रहे या उसका रूप संदिग्ध हो, तो आगे मूल्यांकन जरूरी है।

क्या सामान्य पैनोरमिक एक्स-रे से आश्वस्त हो सकते हैं?

पूरे जबड़े और दांतों की तस्वीर वाला पैनोरमिक एक्स-रे (panoramic radiograph) दांतों और हड्डी से जुड़े कुछ सवालों में मदद कर सकता है। लेकिन यह मुंह की अंदरूनी परत के शुरुआती कैंसर की संभावना खत्म नहीं कर सकता। बायोप्सी और रेफरल के निर्णय परीक्षण के निष्कर्षों पर निर्भर करते हैं, सामान्य पैनोरमिक तस्वीर पर नहीं।

बायोप्सी में कैंसर न मिले लेकिन घाव फिर भी संदिग्ध दिखे तो क्या करें?

दोबारा जांचें कि चिकित्सकीय निष्कर्ष और ऊतक जांच का परिणाम मेल खाते हैं या नहीं। नमूने की जगह और पर्याप्तता की पुष्टि करें। ऊतक जांच विशेषज्ञ से निष्कर्षों पर चर्चा करें। जरूरत होने पर विशेषज्ञ मूल्यांकन या दोबारा नमूना लेने की व्यवस्था करें। बनी हुई चिकित्सकीय चिंता को खारिज न करें।

क्या फोटो या दूरस्थ परामर्श प्रत्यक्ष परीक्षण की जगह ले सकते हैं?

नहीं। ये तात्कालिकता तय करने और रेफरल की जानकारी पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कड़ापन, नीचे के ऊतक से चिपकाव, गहराई में फैलाव या गर्दन की लसीका ग्रंथियों का भरोसेमंद आकलन नहीं कर सकते। लगातार बने या संदिग्ध निष्कर्षों में प्रत्यक्ष परीक्षण जरूरी है।

रेफरल के बाद आगे की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए?

जिम्मेदारी स्पष्ट सहमति से तय और दर्ज होनी चाहिए। देखभाल का हस्तांतरण पक्का होने तक रेफर करने वाली प्रैक्टिस के पास मरीज के पहुंचने, लंबित परिणामों और अनसुलझी चिंताओं पर नजर रखने की प्रक्रिया होनी चाहिए। केवल रेफरल कर देने से देखभाल पूरी मान लेना उचित नहीं है।

This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.