Oral Medicine for Doctors · 12 min read · हिन्दी

डेंटिस्ट और फिजिशियन बर्निंग माउथ सिंड्रोम का डायग्नोसिस कैसे करें?

बर्निंग माउथ सिंड्रोम में मुंह के अंदर लगातार जलन या एहसास में बदलाव रहता है, लेकिन सही तरह से जांच करने के बाद भी कोई कारण नहीं मिलता। ICHD-3 के अनुसार, लक्षण रोजाना दो घंटे से ज्यादा और तीन महीने से ज्यादा समय से होने चाहिए। दर्द मुंह की अंदरूनी परत की सतह पर जलन जैसा होना चाहिए। यह परत सामान्य दिखनी चाहिए और क्लिनिकल जांच, जिसमें महसूस करने की क्षमता की जांच भी शामिल है, सामान्य होनी चाहिए। कोई दूसरा डायग्नोसिस इन लक्षणों को बेहतर तरीके से नहीं समझाता हो।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-10-02

Key points

  • किस क्लासिफिकेशन का इस्तेमाल किया है, साफ लिखें। महसूस करने की क्षमता के निष्कर्षों को लेकर ICHD-3 और ICOP में फर्क है।
  • रोजाना दो घंटे से ज्यादा और तीन महीने से ज्यादा जलन डायग्नोसिस की समय-संबंधी शर्त है। यह जांच टालने का कारण नहीं है।
  • केवल मुंह की परत सामान्य दिखने से BMS तय नहीं होता। दांत, मुंह की परत, लार, शरीर और नसों से जुड़े संभावित कारण जांचें।
  • क्लिनिकल सवाल के अनुसार जांच चुनें। रूटीन बायोप्सी और इमेजिंग BMS की पुष्टि नहीं करतीं।
  • BMS का डायग्नोसिस होने के बाद भी नए या बढ़ते चेतावनी के संकेतों की दोबारा जांच जरूरी है।
  • ओरल मेडिसिन या मुंह-चेहरे के दर्द की सेवाओं के जरिए देखभाल तय करें। जरूरत पर मेडिकल और मनोवैज्ञानिक मदद शामिल करें।

बर्निंग माउथ सिंड्रोम के तय डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया क्या हैं?

बर्निंग माउथ सिंड्रोम, यानी BMS, लंबे समय तक रहने वाले मुंह के दर्द की एक तय स्थिति है। जीभ में होने वाले हर दर्द को BMS नहीं कहते। इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेडेक डिसऑर्डर्स के तीसरे एडिशन, यानी ICHD-3, में इसके डायग्नोसिस की साफ चेकलिस्ट दी गई है।

समय की यह शर्त सिंड्रोम की पहचान के लिए है। इससे यह तय नहीं होता कि जांच कब शुरू करनी है। हाल में शुरू हुई जलन में भी मुंह की बीमारी, शरीर से जुड़े कारण और चेतावनी के संकेत जांचना जरूरी है।

  • मुंह में दर्द हो और वह नीचे दी गई समय और दर्द के प्रकार की शर्तें पूरी करता हो।
  • लक्षण रोजाना दो घंटे से ज्यादा रहते हों और तीन महीने से ज्यादा समय से हों।
  • दर्द जलन जैसा हो और म्यूकोसा, यानी मुंह की अंदरूनी परत, की सतह पर महसूस होता हो।
  • मुंह की अंदरूनी परत सामान्य दिखती हो। क्लिनिकल जांच और सेंसरी टेस्टिंग, यानी छूने जैसी चीजों को महसूस करने की क्षमता की जांच, भी सामान्य हो।
  • ICHD-3 का कोई दूसरा डायग्नोसिस इन लक्षणों को बेहतर तरीके से नहीं समझाता हो।
  • मुंह सूखने का एहसास और स्वाद में बदलाव साथ हो सकते हैं, लेकिन डायग्नोसिस के लिए इनमें से कोई भी जरूरी नहीं है।
  • जीभ के दोनों तरफ जलन आम है, लेकिन दोनों तरफ लक्षण होना जरूरी शर्त नहीं है।

BMS के लिए ICHD-3 और ICOP में क्या फर्क है?

इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ ओरोफेशियल पेन के पहले एडिशन, यानी ICOP, में भी मुंह के अंदर रोजाना दो घंटे से ज्यादा और तीन महीने से ज्यादा समय तक जलन या एहसास में बदलाव की शर्त है। इसमें मुंह की अंदरूनी परत सामान्य दिखना और मुंह या शरीर की किसी दूसरी बीमारी से लक्षणों की वजह न मिलना जरूरी है।

एक अहम फर्क महसूस करने की क्षमता की जांच से जुड़ा है। ICHD-3 में सेंसरी टेस्टिंग सहित क्लिनिकल जांच सामान्य होनी चाहिए। ICOP में BMS के ऐसे प्रकार माने गए हैं जिनमें सोमैटोसेंसरी बदलाव हो सकते हैं या नहीं भी हो सकते। इसका मतलब है छूने, तापमान या दर्द को महसूस करने के तरीके में बदलाव।

रिपोर्ट में लिखें कि आप किस क्लासिफिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिसर्च या स्पेशलिस्ट को भेजी जाने वाली जानकारी में यह खास तौर पर जरूरी है। महसूस करने की क्षमता में गड़बड़ी मिलने पर पहले नसों से जुड़े दूसरे कारण जांचें। इसे बिना जांच के BMS का हिस्सा न मान लें।

कुछ लेखों में दूसरी बीमारी के कारण होने वाली जलन को 'सेकेंडरी BMS' कहा जाता है। अगर जांच से उस बीमारी और जलन का संबंध साबित होता है, तो रिकॉर्ड में 'इस बीमारी से जुड़ी मुंह की जलन' लिखना ज्यादा साफ है। जलन समझाने वाले घाव या पोषण की कमी को इडियोपैथिक BMS न मानें। इडियोपैथिक का मतलब है कि कोई कारण नहीं मिला है।

मरीज की हिस्ट्री में कौन-सी बातें BMS के पक्ष या खिलाफ जाती हैं?

पहले मरीज को अपने शब्दों में एहसास बताने दें। शुरुआत में ही 'जलन' शब्द न सुझाएं। दर्द की जगह, शुरुआत, रोज कितनी देर रहता है और कितना लगातार है, यह दर्ज करें। खाने, नींद, दांतों के ट्रीटमेंट और नए ओरल केयर प्रोडक्ट से उसका संबंध पूछें।

दिन में लक्षण बढ़ना या खाते समय थोड़ी देर के लिए कम होना BMS की संभावना को सहारा दे सकता है। लेकिन ये डायग्नोसिस की तय शर्तें नहीं हैं। मेनोपॉज, यानी पीरियड्स का स्थायी रूप से बंद होना, चिंता और नींद की परेशानी को संदर्भ में समझें। इनमें से कोई भी अपने आप डायग्नोसिस तय नहीं करता।

  • पूछें कि लक्षण जीभ, होंठ, तालू, गम्स या कई जगहों पर हैं। एक तरफ हैं या दोनों तरफ, यह भी साफ करें।
  • लगातार जलन को कुछ पल के बिजली के झटके जैसे दर्द, किसी एक दांत के दर्द, निगलते समय दर्द या सिर्फ दिख रहे घाव में दर्द से अलग करें।
  • स्वाद में बदलाव, सूखेपन का एहसास, सूखा खाना खाने में असली दिक्कत, आंखों में सूखापन और लार बनाने वाली ग्रंथियों में बार-बार सूजन के बारे में पूछें।
  • हाल के डेंटल ट्रीटमेंट, चोट, मुंह में लगने वाले उपकरण, सफाई के प्रोडक्ट, काम की जगह के संपर्क और दवाओं में बदलाव की हिस्ट्री लें। बिना आधार इन्हें कारण न मानें।
  • तंबाकू, सुपारी और शराब के इस्तेमाल के बारे में पूछें। भारत में इस्तेमाल होने वाली चबाने की चीजों को भी शामिल करें।
  • जरूरत के अनुसार सीमित डाइट, खून की कमी या खून जाने, डायबिटीज, पेट-आंत की बीमारी और नसों से जुड़े लक्षणों के बारे में पूछें।
  • खाने, वजन, नींद, काम और मानसिक सेहत पर असर दर्ज करें।

मुंह में लगातार जलन हो तो क्लिनिकल जांच कैसे करें?

BMS का पक्का डायग्नोसिस करने से पहले मरीज की क्लिनिक में आमने-सामने जांच जरूरी है। फोटो या ऑनलाइन कंसल्टेशन से टिश्यू का कड़ापन, लार का काम, दांतों के कारण या महसूस करने की क्षमता में बदलाव भरोसेमंद तरीके से नहीं जांचे जा सकते।

सिर्फ दर्द वाली जगह न देखें। पूरे मुंह की क्रम से जांच करें। अगर दांत, लार या नसों से जुड़ा कारण अभी भी संभव है, तो केवल अंदरूनी परत का सामान्य दिखना काफी नहीं है।

  • चेहरे के दोनों तरफ की बनावट, दिखने वाली सूजन और गर्दन के लिम्फ नोड्स, यानी शरीर की रक्षा में मदद करने वाली छोटी गांठों, की जांच करें। मुंह कितना खुलता है और जबड़ा कैसे चलता है, यह देखें।
  • अच्छी रोशनी में होंठ, गाल, गम्स, तालू, जीभ के नीचे की जगह और जीभ की सभी सतहें देखें। जांच के लिए डेंचर, यानी निकालकर लगाए जाने वाले नकली दांत, हटाएं।
  • जहां पहुंचना संभव हो, दर्द वाले टिश्यू और किसी भी घाव को छूकर जांचें। असामान्य कड़ापन, दबाने पर दर्द या अंदर की गांठ देखें।
  • दांत, गम्स और दांतों को सहारा देने वाले टिश्यू, फिलिंग, क्राउन और उपकरण जांचें। बीमारी, नुकीला किनारा, दबाव से चोट या जांच में वही दर्द पैदा करने वाला कारण खोजें।
  • मुंह में जमा लार देखें और जांचें कि अंदरूनी परत सूखी या चिपचिपी तो नहीं है। लार कम बनने का शक हो तो उसकी मात्रा की औपचारिक जांच पर विचार करें।
  • प्रभावित और सामान्य हिस्सों में हल्के स्पर्श तथा जरूरत के अनुसार दूसरे सेंसरी टेस्ट की तुलना करें। बार-बार जांचने पर मिलने वाला दोनों तरफ का फर्क दर्ज करें।
  • जरूरत हो तो सिर और चेहरे से जुड़ी नसों की जांच करें। इसमें जीभ की हरकत और चेहरे पर महसूस करने की क्षमता शामिल है।
  • मिली हुई गड़बड़ियां और जरूरी सामान्य निष्कर्ष, दोनों दर्ज करें। दिखने वाली गड़बड़ियों की फोटो मरीज की सहमति से लें।

मुंह की जलन में BMS के अलावा किन कारणों पर विचार करें?

मकसद ऐसी बीमारी खोजना है जो जलन को सही मायने में समझा सके। केवल जांच में गड़बड़ियां इकट्ठा करना मकसद नहीं है। संयोग से मिली कोई बात अपने आप BMS को खारिज नहीं करती। लेकिन जलन समझाने वाली बीमारी का इलाज न हुआ हो, तो भरोसे से इडियोपैथिक BMS नहीं कहा जा सकता।

मुंह या शरीर की दूसरी बीमारी और लंबे समय का दर्द, दोनों साथ हो सकते हैं। मिले हुए कारण की देखभाल के बाद बची हुई जलन के पैटर्न को फिर से जांचें।

  • मुंह में सूजन या इन्फेक्शन: फंगल इन्फेक्शन, इरोसिव लाइकेन प्लेनस—मुंह की परत में सूजन और सतह पर घाव करने वाली बीमारी—और दूसरे अल्सर या छाले बनाने वाले रोग।
  • जीभ की समस्याएं: जियोग्राफिक टंग, जिसमें चिकने लाल हिस्से जगह बदलते रहते हैं, या दूसरी बीमारी के कारण जीभ की सतह के छोटे उभार कम होना।
  • रगड़, चोट या केमिकल से जलन: उपकरण से चोट, गर्म चीज से जलना, प्रोडक्ट से जलन और बार-बार जीभ रगड़ना।
  • लार से जुड़ी बीमारी: जांच में लार कम मिलना, शरीर की रोगों से लड़ने वाली प्रणाली का लार की ग्रंथियों पर असर या ट्रीटमेंट से सूखापन। केवल सूखा लगना लार कम बनने का सबूत नहीं है।
  • शरीर से जुड़े कारण: एनीमिया, यानी खून की कमी, पोषण की कमी, डायबिटीज और हिस्ट्री से शक होने पर हार्मोन या पेट-आंत की कुछ बीमारियां।
  • कॉन्टैक्ट एलर्जी: किसी चीज के संपर्क और लक्षणों में साफ संबंध या उससे मेल खाते घाव हों तो विचार करें। हर फिलिंग या क्राउन को जिम्मेदार न मानें।
  • नसों से जुड़ा दर्द: चोट के बाद नस का दर्द, न्यूराल्जिया—किसी नस के रास्ते में कुछ पल का तेज दर्द—और महसूस करने की क्षमता की दूसरी परेशानियां।
  • कैंसर या आगे कैंसर बनने की संभावना वाले बदलाव: एक ही जगह लगातार लक्षण, संदिग्ध घाव, कड़ापन, बिना वजह खून आना या महसूस करने की क्षमता कम होने पर विचार करें।
  • दांत का दर्द या दूसरी जगह से महसूस होने वाला दर्द: किसी खास दांत के संकेत, जबड़े के लक्षण और गले की संबंधित शिकायतों को BMS मानने से पहले जांचें।

बर्निंग माउथ सिंड्रोम में कौन-सी जांच करानी चाहिए?

कोई एक ब्लड टेस्ट, स्कैन या बायोप्सी BMS की पुष्टि नहीं करती। जांच हिस्ट्री और क्लिनिकल निष्कर्ष के अनुसार चुनें। बिना वजह बड़ा स्क्रीनिंग पैनल कराने के बजाय हर टेस्ट का कारण दर्ज करें।

लगातार जलन का दूसरा कारण न मिले तो आम तौर पर ब्लड काउंट, शरीर में आयरन के भंडार, संबंधित विटामिन की स्थिति और ब्लड शुगर की जांच पर विचार किया जाता है। हार्मोन, शरीर की रक्षा प्रणाली या दूसरी शारीरिक बीमारियों के टेस्ट तभी बढ़ाएं जब क्लिनिकल निष्कर्ष उनका आधार दें।

रिपोर्ट को पूरे संदर्भ में समझें। हल्की गड़बड़ी मिलने से वह जलन का कारण साबित नहीं हो जाती। सामान्य स्क्रीनिंग रिपोर्ट भी मुंह की परत और नसों की पूरी जांच की जगह नहीं ले सकती।

  • फंगल इन्फेक्शन का क्लिनिकल शक हो या डायग्नोसिस साफ न हो तो सैंपल जांच पर विचार करें। केवल कल्चर पॉजिटिव होने का मतलब बीमारी नहीं है; फंगस बिना बीमारी पैदा किए भी मौजूद हो सकता है।
  • लगातार सूखापन, जांच के निष्कर्ष या लार की ग्रंथियों के लक्षण कम लार बनने की तरफ इशारा करें, तो लार की मात्रा मापें।
  • आंखों के सूखेपन, ग्रंथियों की सूजन और शरीर के दूसरे लक्षणों की जांच संबंधित मेडिकल स्पेशलिस्ट के साथ मिलकर करें।
  • एलर्जी की जांच तभी कराएं जब संपर्क की हिस्ट्री मजबूत हो या निष्कर्ष उससे मेल खाते हों। बिना स्पष्ट कारण व्यापक स्क्रीनिंग भटकाने वाले नतीजे दे सकती है।
  • कुछ चुने हुए मामलों में स्पेशलिस्ट की क्वांटिटेटिव सेंसरी टेस्टिंग मदद कर सकती है। इसमें नियंत्रित स्पर्श, तापमान या दर्द जैसे संकेतों पर प्रतिक्रिया मापी जाती है। यह BMS की पुष्टि का रूटीन टेस्ट नहीं है।
  • संभावित कारण मानकर दिए गए ट्रीटमेंट से आराम मिलने को BMS के तय क्राइटेरिया पूरे होने का सबूत न मानें।

मुंह की जलन में एक्स-रे या स्कैन कब जरूरी है?

BMS जैसा सामान्य लक्षण-पैटर्न हो और जांच में चिंता की बात न हो, तो रूटीन डेंटल या ब्रेन इमेजिंग जरूरी नहीं है। इमेजिंग, यानी एक्स-रे या स्कैन, किसी खास जगह के लक्षण या असामान्य निष्कर्ष से उठे स्पष्ट सवाल का जवाब देने के लिए होनी चाहिए।

एक तरफ लगातार जलन हो तो ध्यान से दोबारा जांच जरूरी है। हालांकि केवल एक तरफ लक्षण होने से किसी अंदरूनी बनावट की बीमारी साबित नहीं होती। जांच में महसूस करने की क्षमता कम मिले, सिर-चेहरे की नसों में गड़बड़ी हो, गांठ हो या एक जगह दर्द बढ़ रहा हो, तो इमेजिंग की जरूरत ज्यादा हो सकती है।

  • जांच में दांत, उसे सहारा देने वाली हड्डी या जबड़े का कारण लगे, तो उसी हिस्से की डेंटल इमेजिंग करें।
  • अंदर की गांठ, गर्दन का संदिग्ध लिम्फ नोड, लार की ग्रंथि की गड़बड़ी या सामान्य दिखने वाली परत के नीचे बीमारी का शक हो, तो स्पेशलिस्ट की सलाह से इमेजिंग कराएं।
  • बिना साफ कारण जांच में महसूस करने की क्षमता बदली मिले या नसों से जुड़े दूसरे संकेत हों, तो न्यूरोलॉजी में रेफर करें। स्पेशलिस्ट तय कर सकता है कि ब्रेन या नसों के रास्ते की इमेजिंग चाहिए या नहीं।
  • कैंसर या अचानक हुई गंभीर नसों से जुड़ी समस्या का शक हो, तो इमेजिंग के इंतजार में जरूरी रेफरल न रोकें।
  • पूरी जांच हो चुकी हो और स्थिति बदली न हो, तो केवल तसल्ली देने के लिए बार-बार स्कैन न कराएं।

मुंह में जलन वाले मरीज की बायोप्सी कब करें?

बायोप्सी में टिश्यू का छोटा सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है। यह BMS का रूटीन टेस्ट नहीं है, क्योंकि टिश्यू में ऐसा कोई स्थापित रूटीन निष्कर्ष नहीं है जो इस सिंड्रोम की पुष्टि करे।

जांच में ऐसा घाव या बदलाव मिले जिसका कारण पता करना जरूरी हो, तो बायोप्सी सही विकल्प हो सकती है। सैंपल की जगह और तरीका संदिग्ध बीमारी के अनुसार चुनें। आम तौर पर इसमें ओरल मेडिसिन या मुंह, चेहरे और जबड़े की सर्जरी के स्पेशलिस्ट की मदद ली जाती है।

सिर्फ यह साबित करने के लिए सामान्य परत की बायोप्सी न करें कि जलन असली है। दूसरी तरफ, पहले से BMS का डायग्नोसिस होने के कारण किसी संदिग्ध घाव को नजरअंदाज भी न करें।

  • दो हफ्ते से ज्यादा समय से न भरने वाले अल्सर की जल्द आमने-सामने जांच और बायोप्सी पर विचार जरूरी है।
  • लगातार बने बिना साफ कारण के लाल, सफेद, मिले-जुले रंग वाले, सतह से छिले हुए या दूसरे असामान्य टिश्यू की स्पेशलिस्ट जांच जरूरी है।
  • गांठ, असामान्य कड़ापन, बिना वजह खून आना या गर्दन का संदिग्ध लिम्फ नोड हो, तो तुरंत प्राथमिकता के साथ जांच कराएं।
  • छाले बनाने वाली या शरीर की रक्षा प्रणाली से जुड़ी बीमारी का शक हो, तो खास जगह से सैंपल और लैब में खास तरीके से संभालना जरूरी हो सकता है। सैंपल लेने से पहले तालमेल करें।
  • गांठ, सुन्नपन या एक जगह बढ़ता दर्द हो, तो सतह सामान्य दिखने के बावजूद अंदर की बीमारी हो सकती है।

मुंह की जलन वाले मरीज को कब और किस स्पेशलिस्ट के पास रेफर करें?

रेफरल कितनी जल्दी चाहिए, यह जांच के निष्कर्ष तय करते हैं, BMS की तीन महीने की शर्त नहीं। किस समस्या का शक है और कितनी जल्दी जांच चाहिए, यह साफ लिखें। ऐसी जगह रेफर करना सुनिश्चित करें जहां मरीज की आमने-सामने जांच हो सके।

मुंबई और आसपास ओरल मेडिसिन, यानी मुंह की बीमारियों की पहचान और बिना सर्जरी वाली देखभाल, की सेवाएं डेंटल टीचिंग हॉस्पिटल, हॉस्पिटल के डेंटल विभाग या स्पेशलिस्ट क्लिनिक में मिल सकती हैं। डॉ. बिपिन आर. उपाध्याय स्पेशल डेंटल ओपीडी, के.जे. सोमैया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सायन, मुंबई और रीजनेबल स्माइल डेंटल क्लिनिक, अंबरनाथ में प्रैक्टिस करते हैं।

  • अभी इमरजेंसी जांच: सांस लेने में दिक्कत, अपनी लार भी न निगल पाना, तेजी से बढ़ती सूजन, न रुकने वाला खून या अचानक कमजोरी अथवा महसूस करने की क्षमता घटना जैसे नसों से जुड़े लक्षण। मरीज को इमरजेंसी विभाग भेजें।
  • कैंसर के शक में तुरंत प्राथमिकता वाला रेफरल: दो हफ्ते से ज्यादा का अल्सर, संदिग्ध गांठ, बिना वजह खून, लगातार बिना वजह सुन्नपन या मुंह खोलने अथवा निगलने में बढ़ती दिक्कत। उपलब्ध सेवाओं के अनुसार जल्द ओरल मेडिसिन, मुंह-जबड़े की सर्जरी या ईएनटी, यानी कान-नाक-गला, अथवा सिर-गर्दन की कैंसर सेवा में रेफर करें। BMS की समय वाली शर्त पूरी होने का इंतजार न करें।
  • नसों की जल्द जांच: जांच में लगातार महसूस करने की क्षमता कम हो, एक तरफ लक्षण बढ़ रहे हों या सिर-चेहरे की नसों में गड़बड़ी हो, लेकिन इमरजेंसी के संकेत न हों। न्यूरोलॉजी में रेफर करें और जरूरत पर ओरल मेडिसिन को शामिल करें।
  • ओरल मेडिसिन में शुरुआती रेफरल: पहली जांच के बाद भी लगातार जलन का कारण न मिले, मुंह की परत के निष्कर्ष साफ न हों, रिपोर्ट आपस में मेल न खाती हों या रोज के काम पर काफी असर हो। तीन महीने से पहले भी रेफर कर सकते हैं।
  • मेडिकल रेफरल: शरीर से जुड़ी संबंधित गड़बड़ी, जांच में लार कम मिलने के साथ दूसरे शारीरिक लक्षण, पोषण की चिंता या हार्मोन संबंधी संकेत हों। जनरल मेडिसिन और संबंधित स्पेशलिस्ट के साथ देखभाल तय करें।
  • ओरोफेशियल पेन, यानी मुंह और चेहरे के दर्द, या कई विशेषज्ञों वाली पेन सेवा में रेफरल: जांच से BMS का डायग्नोसिस समर्थित हो, लेकिन रोजमर्रा के काम में काफी परेशानी जारी हो या कई तरह के दर्द साथ हों।
  • रेफरल में लक्षणों का समय, दर्द की जगहों का नक्शा, क्लिनिकल और सेंसरी निष्कर्ष, संबंधित संपर्क या आदतें, जांच रिपोर्ट और रेफरल का खास सवाल शामिल करें।

BMS का डायग्नोसिस होने के बाद देखभाल कैसे होती है?

समझाएं कि मुंह की परत स्वस्थ दिखने पर भी दर्द असली है। BMS में शरीर के दर्द के संकेतों को समझने और संभालने के तरीके में बदलाव माना जाता है। इसे काल्पनिक कहकर न टालें और केवल चिंता होने के आधार पर डायग्नोसिस न करें।

देखभाल आम तौर पर ओरल मेडिसिन या मुंह-चेहरे के दर्द के डॉक्टर की देखरेख में होती है। मकसद लक्षण कम करना, खाना और नींद बेहतर करना तथा रोज के काम में मदद देना है। पूरी तरह ठीक होने का वादा नहीं करना चाहिए।

मरीज को साफ बताएं कि किन बदलावों पर दोबारा जांच चाहिए। कोई नया अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना वजह खून या मुंह खोलने अथवा निगलने में दिक्कत हो, तो फिर से जांच जरूरी है। इसे अपने आप पुराने BMS का हिस्सा न मानें।

  • जानकारी और खुद देखभाल में मदद: इलाज कर रहे डेंटिस्ट या ओरल मेडिसिन डॉक्टर से। इसमें मरीज में पहचानी गई जलन बढ़ाने वाली चीजों से बचना शामिल है।
  • साबित हुई दूसरी बीमारी की देखभाल: संबंधित डेंटल या मेडिकल डॉक्टर से।
  • दर्द संभालने के मनोवैज्ञानिक तरीके: प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट या पेन टीम से। इसका मतलब यह नहीं कि लक्षण बनाए हुए हैं।
  • लक्षण और दर्द के संकेतों को नियंत्रित करने वाला डॉक्टर द्वारा तय ट्रीटमेंट: व्यक्तिगत जांच के बाद अनुभवी ओरल मेडिसिन या पेन स्पेशलिस्ट विचार कर सकता है।
  • साथ के सूखेपन, नींद की परेशानी और दूसरी दर्द की समस्याओं की देखभाल: संबंधित सेवाओं के साथ मिलकर करें।
  • दांतों का कारण साबित न हो, तो केवल बिना साफ कारण की जलन के लिए ऐसा डेंटल ट्रीटमेंट न करें जिसे वापस न बदला जा सके। सही हालत की फिलिंग या क्राउन भी न हटाएं।

BMS के डायग्नोसिस की इस गाइड के स्रोत क्या हैं?

डायग्नोसिस की परिभाषा के मुख्य स्रोत ICHD-3 और ICOP हैं। ये बीमारियों के क्लासिफिकेशन के दस्तावेज हैं, पूरी जांच या ट्रीटमेंट की गाइडलाइन नहीं। इनमें हर मरीज के लिए एक ही लैब पैनल जरूरी नहीं बताया गया है।

जांच, चुने हुए टेस्ट और रेफरल का यह तरीका जलन समझाने वाली दूसरी बीमारी खोजने और चेतावनी के संकेतों पर कार्रवाई करने पर आधारित है। रेफरल की व्यवस्था स्थानीय कैंसर-संदेह और इमरजेंसी सेवाओं के अनुसार होनी चाहिए। पूरे देश के लिए एक ही प्रशासनिक समय-सीमा मानकर न चलें।

  • इंटरनेशनल हेडेक सोसाइटी। इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेडेक डिसऑर्डर्स, तीसरा एडिशन: सेक्शन 13.11, बर्निंग माउथ सिंड्रोम।
  • इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ ओरोफेशियल पेन, पहला एडिशन। Cephalalgia, 2020: बर्निंग माउथ सिंड्रोम की श्रेणी और महसूस करने की क्षमता पर आधारित इसके प्रकार।
  • अंतिम डायग्नोसिस दर्ज करते समय इस्तेमाल किए गए क्लासिफिकेशन का नाम लिखें। तय क्राइटेरिया को सहारा देने वाले क्लिनिकल पैटर्न और स्थानीय जरूरत के अनुसार चुनी गई जांचों से अलग रखें।

Questions people ask

क्या तीन महीने से पहले BMS का पक्का डायग्नोसिस कर सकते हैं?

यहां बताए गए पूरे समय-संबंधी क्राइटेरिया के अनुसार नहीं। रिकॉर्ड में बिना साफ कारण की मुंह की जलन लिखें, संभावित कारण जांचें और जरूरत पर रेफर करें। मरीज को जांच के लिए तीन महीने इंतजार नहीं करना चाहिए।

क्या जीभ सामान्य दिखने से BMS की पुष्टि हो जाती है?

नहीं। पूरे मुंह, दांतों और उन्हें सहारा देने वाले टिश्यू, लार के काम और महसूस करने की क्षमता की जांच जरूरी है। मुंह या शरीर से जुड़े दूसरे संभावित कारणों पर भी विचार करना चाहिए।

क्या BMS में हमेशा जीभ के दोनों तरफ जलन होती है?

नहीं। दोनों तरफ लक्षण आम हैं, लेकिन जरूरी नहीं। एक तरफ लगातार लक्षण हों तो ज्यादा ध्यान से जांच करें। खास तौर पर जब वे बढ़ रहे हों या जांच में सुन्नपन भी मिले।

क्या BMS के साथ मुंह सूख सकता है?

हां। पर्याप्त लार होने पर भी BMS में सूखेपन का एहसास हो सकता है। लेकिन जांच में लार की मात्रा कम मिले, तो उसकी अलग जांच जरूरी है। वह जलन का दूसरा कारण भी हो सकता है।

कौन-सा ब्लड टेस्ट बर्निंग माउथ सिंड्रोम साबित करता है?

कोई नहीं। ब्लड टेस्ट खून, पोषण या शरीर के भोजन से ऊर्जा बनाने जैसे कामों की गड़बड़ियां पहचान सकते हैं। ये दूसरे कारण खोजने या बाहर करने में मदद करते हैं, BMS की पुष्टि नहीं करते।

क्या महसूस करने की क्षमता कम होने पर BMS नहीं हो सकता?

यह ICHD-3 की सामान्य क्लिनिकल सेंसरी जांच वाली शर्त से मेल नहीं खाता। ICOP में महसूस करने की क्षमता के आधार पर अलग प्रकार माने गए हैं। लेकिन बिना साफ कारण यह क्षमता कम हो, तो पहले नसों या अंदरूनी बनावट की दूसरी समस्या की जांच जरूरी है।

क्या हर मरीज की बायोप्सी या स्कैन कराना चाहिए?

नहीं। बायोप्सी टिश्यू की गड़बड़ी जांचती है। इमेजिंग दांत, अंदर के टिश्यू या नसों की संदिग्ध समस्या के लिए होती है। बाकी सब सामान्य हो और लक्षण BMS जैसे हों, तो इनमें से कोई भी उसकी रूटीन पुष्टि नहीं करता।

जनरल डेंटिस्ट को ओरल मेडिसिन में कब रेफर करना चाहिए?

पहली जांच के बाद भी लगातार जलन का कारण न मिले, निष्कर्ष साफ न हों या रोज के काम प्रभावित हों, तो रेफर करें। संदिग्ध घाव, गांठ, खून, सुन्नपन या निगलने में दिक्कत होने पर रूटीन BMS अपॉइंटमेंट के बजाय तुरंत प्राथमिकता वाला रेफरल जरूरी है।

This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.