Oral Medicine for Doctors · 11 min read · हिन्दी
मुंह में घाव के साथ गर्दन में गांठ हो तो कैसे जांचें?
सबसे पहले देखें कि सांस के रास्ते में रुकावट या फैलता हुआ इन्फेक्शन तो नहीं है। इसके बाद कैंसर के संकेतों के लिए पूरे मुंह और गर्दन की जांच करें। किसी वयस्क की गर्दन में बनी रहने वाली या शक पैदा करने वाली गांठ के लिए जल्द स्पेशलिस्ट जांच, जरूरत के अनुसार स्कैन और टिश्यू की जांच जरूरी है। यह न मानें कि पास के दांत की बीमारी ही गांठ की वजह है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-10-07
Key points
- रूटीन जांच से पहले सांस के रास्ते की रुकावट और गहराई में फैलते इन्फेक्शन को जांचें।
- यह न मानें कि दांत की बीमारी या सामान्य दिखने वाला मुंह का घाव ही वयस्क की गर्दन की गांठ की वजह है।
- संदिग्ध संकेत हों तो पहली मुलाकात में रेफर करें। किसी समय-सीमा के पूरा होने का इंतजार न करें।
- स्कैन और टिश्यू सैंपल एक-दूसरे के पूरक हैं। आगे देखने वाली टीम के साथ तालमेल रखें।
- बिना योजना खुली गर्दन की बायोप्सी के बजाय सुई से जांच को प्राथमिकता दें। बनी रहने वाली तरल भरी गांठ की पूरी जांच करें।
- मरीज रेफरल पर पहुंचा या नहीं, रिपोर्ट आई या नहीं और निदान स्पष्ट हुआ या नहीं, इसका फॉलो-अप रखें।
1. किन संकेतों पर इमरजेंसी या जल्द रेफरल जरूरी है?
पहले तय करें कि मामला कितना अर्जेंट है। उसके बाद देखें कि गांठ लिम्फ नोड यानी शरीर की रक्षा प्रणाली की छोटी ग्रंथि है, लार की ग्रंथि की सूजन है या कोई दूसरी गांठ। मुंह में घाव या बदलाव के साथ गर्दन में गांठ हो तो सामने से जांच जरूरी है। फोटो से टिश्यू का कड़ापन, उसका नीचे के हिस्सों से चिपका होना या गहरी सूजन पता नहीं चलती।
संकेत कैंसर का शक पैदा करें तो पहली मुलाकात में ही सिर और गर्दन के कैंसर की अर्जेंट जांच के लिए रेफर करें। जहां संदिग्ध कैंसर की जल्द जांच की व्यवस्था हो, वहां दो हफ्ते के भीतर जांच कराने की कोशिश करें। लक्षण बढ़ रहे हों तो इससे भी पहले जांच चाहिए। यह कामकाज के लिए एक लक्ष्य है, पूरे भारत में तय समय पर सेवा मिलने की गारंटी नहीं।
- अभी इमरजेंसी जांच: सांस लेने में तकलीफ, सांस में आवाज, लार भी न निगल पाना, जीभ के नीचे या गर्दन में तेजी से बढ़ती सूजन, या पूरे शरीर की गंभीर बीमारी के संकेत। ऐसे इमरजेंसी विभाग भेजें जहां सांस का रास्ता संभालने, ईएनटी यानी कान-नाक-गला और मुंह-जबरड़े की सर्जरी की सुविधा हो।
- उसी दिन अस्पताल में जांच: गर्दन के गहरे हिस्सों में इन्फेक्शन का शक, शरीर में पानी की काफी कमी, या बुखार और मुंह कम खुलने के साथ बढ़ती सूजन। सांस का रास्ता सुरक्षित है या नहीं, इसमें संदेह हो तो इमरजेंसी सेवाएं लें।
- कैंसर के शक में अर्जेंट जांच: मुंह का संदिग्ध घाव और गर्दन की गांठ, सख्त या चिपकी हुई गांठ, गांठ के ऊपर त्वचा पर घाव, या वयस्क की गर्दन में बिना स्पष्ट कारण बनी रहने वाली गांठ।
- खतरे के स्पष्ट संकेत: मुंह का अल्सर यानी घाव जो दो हफ्ते से ज्यादा में न भरे, गांठ, सुन्नपन, बिना वजह खून आना, मुंह खोलने या निगलने में परेशानी। ये संकेत पहले से कैंसर का शक पैदा कर रहे हों तो दो हफ्ते इंतजार न करें।
2. हिस्ट्री में कौन-सी बातें चिंता बढ़ाती हैं?
मुंह का घाव और गर्दन की गांठ कब शुरू हुए, यह अलग-अलग लिखें। पूछें कि पहले क्या दिखा, क्या इनमें से कोई बढ़ रहा है और क्या गांठ का आकार बदलता है या वह पूरी तरह गायब हो जाती है। हाल में नजर आया घाव काफी पहले से मौजूद हो सकता है।
AAO-HNSF की वयस्कों की गर्दन की गांठ वाली गाइडलाइन के अनुसार, इन्फेक्शन की स्पष्ट वजह न हो और गांठ कम-से-कम दो हफ्ते से बिना खास घटे-बढ़े बनी हो, या कितने समय से है यह पता न हो, तो कैंसर का जोखिम बढ़ा हुआ माना जाता है। इस बात को जांच के निष्कर्षों के साथ देखें। इसे रेफरल टालने की वजह न बनाएं।
- आसपास के लक्षण: मुंह में दर्द, निगलते समय दर्द, लगातार गले में परेशानी, आवाज बदलना, कान में बीमारी के बिना एक तरफ कान दर्द, खून आना और जीभ की चाल बदलना।
- पूरे शरीर के लक्षण: बिना वजह वजन घटना, लगातार बुखार, रात में पसीना, थकान या शरीर के दूसरे हिस्सों में लिम्फ नोड बढ़ना।
- आदतें और संपर्क: धूम्रपान या चबाने वाला तंबाकू, सुपारी या गुटखा, शराब, टीबी के मरीज से संपर्क और काम के दौरान होने वाले संबंधित जोखिम।
- पहले की जानकारी: कैंसर, शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कम होना, सिर-गर्दन का पिछला ट्रीटमेंट, हाल का दांत का इन्फेक्शन, चोट और पहले हुई जांचें।
- निजी आदतों और संपर्क से जुड़े सवाल अकेले में और बिना धारणा बनाए पूछें। तंबाकू या शराब का इस्तेमाल न होने से कैंसर की संभावना खत्म नहीं होती।
3. किन बीमारियों की संभावना पर विचार करें?
मुंह और गर्दन की समस्या एक-दूसरे से जुड़ी भी हो सकती हैं और अलग भी। चोट से हुआ मुंह का अल्सर, गर्दन के किसी अलग कैंसर के साथ मौजूद हो सकता है। संक्रमित दांत और मुंह का कैंसर भी साथ हो सकते हैं। दिख रहा मुंह का घाव जरूरी नहीं कि गर्दन की गांठ की वजह हो।
वयस्क की गर्दन के एक तरफ बनी रहने वाली गांठ में मेटास्टेटिक कैंसर की जांच जरूरी है। इसका मतलब है किसी दूसरी जगह से फैला कैंसर। गांठ सिस्टिक यानी तरल भरी दिखे तो इससे यह साबित नहीं होता कि वह शरीर के विकास के दौरान बनी हानिरहित सिस्ट है।
- ओरल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा: मुंह की अंदरूनी परत से शुरू होने वाला कैंसर, जो गर्दन के लिम्फ नोड तक फैल सकता है।
- ओरोफैरिंजियल कैंसर: टॉन्सिल या जीभ के पिछले आधार वाले हिस्से का कैंसर। कभी-कभी इसका संबंध ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी से होता है। असली घाव छोटा या छिपा हो सकता है।
- लिम्फोमा: लिम्फ प्रणाली की कोशिकाओं का कैंसर। इसमें कई लिम्फ नोड बढ़ सकते हैं, पूरे शरीर के लक्षण या मुंह में सूजन हो सकती है।
- दांत या दूसरे इन्फेक्शन: इन्फेक्शन के जवाब में बढ़े लिम्फ नोड, फोड़ा, लार की ग्रंथि का इन्फेक्शन, टीबी या कोई दूसरा लंबे समय का इन्फेक्शन।
- लार या थायरॉइड ग्रंथि की बीमारी: सूजन या ऐसा ट्यूमर जो लिम्फ नोड के बजाय ग्रंथि से शुरू हुआ हो।
- दूसरी वजहें: सूजन वाली बीमारियां, शरीर के विकास के दौरान बनी सिस्ट और त्वचा या दूसरे कैंसर का फैलाव। उम्र, जगह और जांच के अनुसार इन पर विचार करें।
4. जांच किस क्रम में करें?
पहले मरीज की सामान्य हालत, सांस, आवाज, निगलने की क्षमता और शरीर में पानी की कमी देखें। इन्फेक्शन या पूरे शरीर की बीमारी का शक हो तो तापमान और दूसरे जरूरी माप दर्ज करें। फिर चेहरा, त्वचा, मुंह, गले का दिखने वाला हिस्सा और गर्दन की दोनों तरफ जांचें।
अच्छी रोशनी रखें और निकालने वाले नकली दांत हटवाएं। दर्द या मुंह कम खुलने से जांच अधूरी हो तो इसे लिखें। केवल बताए गए घाव के बजाय पूरा मुंह जांचें। मुंह सामान्य दिखने पर भी गले में छिपा कैंसर हो सकता है।
- होंठ, गाल, गम्स, तालू, जीभ की सतहें और जीभ के नीचे का हिस्सा देखें। जीभ के दोनों किनारे और निचली सतह भी जांचें।
- घाव की जगह, माप, रंग, सतह, किनारे, खुला घाव और अपने-आप खून आने की जानकारी लिखें। सहमति से ली गई फोटो तुलना में मदद करती हैं, लेकिन लिखित निष्कर्षों की जगह नहीं लेतीं।
- हल्के हाथ से इंड्यूरेशन यानी टिश्यू का असामान्य कड़ापन और नीचे के हिस्सों से चिपकाव जांचें। जरूरत के अनुसार जीभ के नीचे के हिस्से को दोनों हाथों की मदद से टटोलें।
- जीभ की चाल, छूने का एहसास, निचले होंठ या ठोड़ी का सुन्नपन, मुंह खुलना और सिर से निकलने वाली संबंधित नसों का काम जांचें।
- दांत और गम्स की सही जांच से देखें कि दांत की कोई बीमारी सच में वजह हो सकती है या नहीं। आम दांत की बीमारी को असामान्य गर्दन की गांठ की वजह न मान लें।
- टॉन्सिल, जीभ का आधार, गले के अंदर या आवाज बनने वाले हिस्से की जांच चाहिए तो ईएनटी से लचीले कैमरे वाली जांच करवाएं।
5. गर्दन की गांठ में क्या-क्या दर्ज करें?
हर गांठ की तरफ और गर्दन में उसकी सही जगह दर्ज करें। मापा हुआ आकार, दबाने पर दर्द, कड़ापन, हिलना, ऊपर की त्वचा में बदलाव और कई गांठों का आपस में जुड़ा लगना लिखें। गर्दन के बाकी हिस्से, लार की ग्रंथियां, थायरॉइड और कॉलरबोन यानी गर्दन के नीचे की हड्डी के ऊपर का हिस्सा भी जांचें।
वयस्कों की गर्दन की गांठ वाली गाइडलाइन में चिपकाव, सख्त बनावट, 1.5 सेमी से ज्यादा आकार और ऊपर की त्वचा पर घाव को चिंताजनक माना गया है। छोटे लिम्फ नोड में भी बीमारी हो सकती है। दबाने पर दर्द होने से कैंसर को भरोसे के साथ खारिज नहीं किया जा सकता।
- देखें कि मुंह के घाव वाले हिस्से से लिम्फ का बहाव उस नोड तक पहुंच सकता है या नहीं। लेकिन केवल नोड की जगह से कैंसर की शुरुआत की जगह तय न करें।
- जहां संभव हो, पहचानें कि यह सतह के पास का नोड है, ग्रंथि की सूजन है, बीच की गांठ है या गहरा घाव है।
- दोनों तरफ या कई जगह लिम्फ नोड बढ़े हों तो दर्ज करें। इससे जांच का ध्यान लिम्फोमा, इन्फेक्शन या पूरे शरीर की बीमारी की ओर जा सकता है।
- गर्दन के निचले हिस्से या कॉलरबोन के ऊपर बिना स्पष्ट कारण की गांठ को गंभीरता से लें। जांच मुंह और गले से आगे भी करनी पड़ सकती है।
- गांठ में धड़कन हो या खून की नली से जुड़ी होने का शक हो तो क्लिनिक में सुई से सैंपल न लें और चीरा न लगाएं। स्पेशलिस्ट जांच और सही स्कैन की व्यवस्था करें।
6. अल्ट्रासाउंड, सीटी या एमआरआई कब करवाएं?
स्कैन किसी खास क्लिनिकल सवाल का जवाब पाने के लिए चुनें, केवल गांठ मौजूद होने की पुष्टि के लिए नहीं। इससे गांठ की बनावट, दूसरे नोड, गहराई में फैलाव और सैंपल लेने की जगह समझने में मदद मिलती है। कैंसर की संभावना हो तो स्कैन टिश्यू की जांच का विकल्प नहीं है।
वयस्क की गर्दन की गांठ में कैंसर का जोखिम बढ़ा हो तो AAO-HNSF गाइडलाइन गर्दन की कॉन्ट्रास्ट वाली सीटी या एमआरआई का समर्थन करती है। इनमें तस्वीरों में फर्क अधिक साफ दिखाया जाता है। रेडियोलॉजी और मरीज को आगे देखने वाली टीम के साथ जांच चुनें। जांच न कर पाने की स्वास्थ्य संबंधी वजहों और कैंसर की संभावित शुरुआती जगह का ध्यान रखें। अलग से स्कैन करवाने के इंतजार में रेफरल न रोकें।
- अल्ट्रासाउंड: सतह के पास के नोड, लार या थायरॉइड की गांठ और तस्वीर देखकर सुई से सैंपल लेने में उपयोगी। इससे मुंह या गले की अंदरूनी परत में छिपा कैंसर खारिज नहीं होता।
- सीटी: सवाल के अनुसार गर्दन के गहरे हिस्से, संभावित फोड़े, नोड कहां-कहां हैं और हड्डी पर असर देखने में उपयोगी।
- एमआरआई: जीभ और जीभ के नीचे के मुलायम टिश्यू, हड्डी के अंदर के हिस्से पर असर और नसों के साथ फैलाव के शक में खास उपयोगी।
- दांत के एक्स-रे: दांत की वजह संभव हो तो उपयोगी। कोन-बीम सीटी यानी दांत-जबरड़े का तीन आयामों वाला स्कैन, गर्दन के मुलायम टिश्यू की जांच का विकल्प नहीं है।
- बीमारी का फैलाव जानने के दूसरे स्कैन: आम तौर पर कैंसर टीम तय करती है। इमरजेंसी स्कैन के कारण सांस का रास्ता संभालने या मरीज को दूसरे अस्पताल भेजने में देर नहीं होनी चाहिए।
7. बायोप्सी या सुई से सैंपल कब और कैसे लें?
मुंह के संदिग्ध घाव की जल्द बायोप्सी यानी टिश्यू का सैंपल लेकर जांच जरूरी है। या तुरंत ऐसे डॉक्टर को रेफर करें जो यह कर सके। स्पष्ट रूप से संदिग्ध मुंह के घाव की जांच शुरू करने के लिए गर्दन के सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार न करें। दोनों जांचों में तालमेल रखें, ताकि कम सैंपल मिलने या बेवजह जांच दोहराने से निदान में देर न हो।
इन्सीजनल बायोप्सी में घाव का ऐसा हिस्सा लिया जाता है जो उसकी सही तस्वीर दे सके, और उसे माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है। संदिग्ध अल्सर में आम तौर पर किनारे का जीवित टिश्यू लिया जाता है, केवल बीच का मृत टिश्यू नहीं। सही जगह और गहराई चुनने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर जरूरी है।
बिना स्पष्ट कारण की संदिग्ध गर्दन की गांठ में शुरुआत में खुली सर्जिकल बायोप्सी के बजाय फाइन-नीडल एस्पिरेशन को आम तौर पर प्राथमिकता दी जाती है। इसमें पतली सुई से कोशिकाएं ली जाती हैं। अल्ट्रासाउंड की मदद से सही जगह तक पहुंचना आसान हो सकता है, खासकर तरल या मृत टिश्यू वाले हिस्सों में।
- सुई से लिया सैंपल पर्याप्त न हो या रिपोर्ट चिंता वाली न लगे, फिर भी क्लिनिकल शक बना हो तो जांच खत्म न करें। स्पेशलिस्ट की देखरेख में दोबारा या दूसरे तरीके से सैंपल लें।
- लिम्फोमा का शक हो तो आगे देखने वाली टीम और पैथोलॉजी लैब को बताएं। टिश्यू की अंदरूनी बनावट देखने के लिए कोर बायोप्सी यानी टिश्यू का छोटा ठोस हिस्सा लेना, या स्पेशलिस्ट की योजना से नोड निकालना जरूरी हो सकता है।
- बिना योजना गर्दन की खुली बायोप्सी से बचें। आम तौर पर पहले स्पेशलिस्ट जांच, स्कैन और सुई से जांच होनी चाहिए।
- रोशनी, रंग लगाने या ब्रश से सैंपल लेने वाले सहायक टेस्ट जरूरी टिश्यू बायोप्सी की जगह नहीं ले सकते।
- सैंपल के साथ बायोप्सी की सटीक जगह, घाव का विवरण, नोड के निष्कर्ष, संभावित बीमारियां और संबंधित स्कैन की जानकारी भेजें।
8. कब थोड़े समय बाद दोबारा जांच करना ठीक है?
वजह साफ तौर पर सामान्य और गैर-कैंसर वाली लगे तथा कोई संदिग्ध संकेत न हो, तो तय कम समय में दोबारा जांच उचित हो सकती है। जैसे साफ तौर पर चोट से बना घाव, या पक्के तौर पर पहचाने गए दांत के इन्फेक्शन के साथ दर्द वाला प्रतिक्रियात्मक नोड। वयस्क की बिना स्पष्ट कारण बनी रहने वाली गर्दन की गांठ में यह तरीका ठीक नहीं है।
केवल लक्षण बढ़ने पर लौटने को न कहें। दोबारा जांच की तारीख तय करें। चोट से हुआ माना गया मुंह का अल्सर हो तो कारण दूर करने के बाद दो हफ्ते के भीतर जांच करके भरना सुनिश्चित करें। घाव बना रहे, बिगड़े या बिना स्पष्ट कारण गांठ बची रहे तो आगे की जांच और रेफरल करें।
- दर्द घटने को इस बात का सबूत न मानें कि घाव कैंसर वाला नहीं है।
- दांत की समस्या ठीक होने के बाद भी बने नोड को बार-बार दांत की बीमारी से न जोड़ें।
- संदिग्ध घाव, बढ़ती गांठ, सुन्नपन, खून आना या निगलने की परेशानी हो तो इंतजार करके देखने का तरीका न अपनाएं।
- मरीज के दोबारा आने का भरोसा न हो तो स्पेशलिस्ट को रेफर करने का फैसला जल्दी करें और अपॉइंटमेंट तय होने की पुष्टि करें।
- जरूरत हो तो लंबे समय के इन्फेक्शन की जांच करें। लेकिन जब तक निष्कर्षों की पर्याप्त वजह न मिले, संभावित बीमारियों में कैंसर को भी रखें।
9. मरीज को कब और किस स्पेशलिस्ट के पास भेजें?
मरीज की समस्या और सेवा की असली सुविधाओं के अनुसार रेफरल चुनें। मुंह का संदिग्ध घाव और गर्दन की गांठ हो तो ऐसी सिर-गर्दन कैंसर सेवा को भेजें जो मुंह-गले की परत की जांच, स्कैन, पैथोलॉजी और ट्रीटमेंट की योजना में तालमेल कर सके। अस्पताल के अनुसार पहला संपर्क ईएनटी, सिर-गर्दन कैंसर सर्जरी या मुंह-जबरड़े की सर्जरी विभाग हो सकता है।
ओरल मेडिसिन यानी मुंह की बीमारियों की जांच की स्पेशलिटी, घाव पहचानने, संभावित बीमारियां तय करने और बायोप्सी की योजना में मदद कर सकती है। लेकिन इसका अतिरिक्त अपॉइंटमेंट कैंसर की जांच में देर की वजह नहीं बनना चाहिए। मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर और उल्हासनगर में केवल स्पेशलिटी के नाम पर नहीं, बल्कि जरूरी सुविधाओं और मरीज की पहुंच के आधार पर सेवा चुनें।
- अभी: सांस के रास्ते में रुकावट या फैलते इन्फेक्शन से हालत अस्थिर हो तो जरूरी सुविधाओं वाले इमरजेंसी विभाग भेजें।
- उसी दिन: हालत स्थिर हो लेकिन गर्दन के गहरे इन्फेक्शन का शक हो तो अस्पताल के ईएनटी या मुंह-जबरड़े की सर्जरी विभाग भेजें।
- शक हो तो आज ही शुरू करें: सिर-गर्दन कैंसर का अर्जेंट रेफरल। जहां संभव हो दो हफ्ते के भीतर जांच कराएं। रूटीन दांत के ट्रीटमेंट का इंतजार न करें।
- लिम्फोमा का शक: जल्द हेमेटोलॉजी यानी खून और उससे जुड़ी बीमारियों के विभाग या तालमेल वाली लिम्फ नोड जांच सेवा को भेजें। सैंपल की योजना वही टीम बनाए।
- टीबी या दूसरे लंबे समय के इन्फेक्शन का शक: फिजिशियन या इन्फेक्शन स्पेशलिस्ट की जांच के साथ सही टिश्यू जांच और कैंसर को खारिज करने की प्रक्रिया भी रखें।
10. रेफरल और आगे की देखभाल में क्या शामिल करें?
रेफरल में चिंता सीधे लिखें। उदाहरण: वयस्क की गर्दन में बिना स्पष्ट कारण की गांठ और जीभ के किनारे सख्त अल्सर। शुरुआत और बदलाव का समय, घाव और गांठ का माप, नसों से जुड़े लक्षण, आदतों और संपर्क की हिस्ट्री, सहमति से ली गई फोटो और सभी उपलब्ध रिपोर्ट शामिल करें।
ट्रीटमेंट पक्के निदान पर निर्भर करता है। मुंह या गले के कैंसर में कई स्पेशलिस्ट की कैंसर टीम के जरिए सर्जरी, रेडियोथेरेपी यानी किरणों से ट्रीटमेंट और पूरे शरीर पर काम करने वाला कैंसर ट्रीटमेंट शामिल हो सकता है। लिम्फोमा का ट्रीटमेंट हेमेटोलॉजी टीम करती है। दांत के इन्फेक्शन में उसकी मूल वजह का इलाज जरूरी है। गहराई में फैलाव हो तो अस्पताल में देखभाल चाहिए।
- अर्जेंसी और सांस, निगलने, खून आने या पोषण से जुड़ी चिंता साफ और प्रमुख जगह लिखें।
- कौन-से टेस्ट बाकी हैं और रिपोर्ट देखने तथा मरीज को बताने की जिम्मेदारी किसकी है, यह तय करें।
- सूजन बढ़ने, सांस में तकलीफ, लार न निगल पाने, खून आने या नए सुन्नपन पर तुरंत मदद लेने की स्पष्ट सलाह दें।
- यह पुष्टि करें कि मरीज अपॉइंटमेंट पर पहुंचा और निदान स्पष्ट हुआ। केवल रेफरल भेजने को काम का अंत न मानें।
- निदान या तय ट्रीटमेंट के अनुसार दांतों की मरम्मत और बहाली, पोषण, बोलने-निगलने की मदद और रोजमर्रा की क्षमता वापस पाने की सेवाएं शामिल करें।
11. इस तरीके का आधार कौन-सी गाइडलाइन हैं?
AAO-HNSF की Clinical Practice Guideline: Evaluation of the Neck Mass in Adults, 2017 में Otolaryngology–Head and Neck Surgery में प्रकाशित हुई थी। यह समय और जांच के निष्कर्षों से जोखिम तय करने, सांस के ऊपरी रास्ते की लक्षित जांच, कॉन्ट्रास्ट वाली सीटी या एमआरआई और शुरुआत में खुली बायोप्सी के बजाय फाइन-नीडल एस्पिरेशन का समर्थन करती है। यह वयस्क की तरल भरी गर्दन की गांठ को अपने-आप हानिरहित मानने से भी सावधान करती है।
NICE गाइडलाइन NG12, Suspected cancer: recognition and referral, बिना स्पष्ट कारण के तीन हफ्ते से ज्यादा बने मुंह के अल्सर या लगातार बनी गर्दन की गांठ के लिए संदिग्ध कैंसर रेफरल का समर्थन करती है। यह समय-सीमा मुंह और गर्दन के साथ में संदिग्ध लक्षण होने पर रेफरल टालने की वजह नहीं है। दो हफ्ते से ज्यादा बना मुंह का अल्सर पहले ही सामने से दोबारा जांच की जरूरत बताता है।
American Dental Association की 2017 की प्रमाण-आधारित गाइडलाइन, मुंह के ऐसे बदलावों की जांच पर है जिनमें कैंसर बनने की संभावना हो सकती है। यह संदिग्ध घावों में तुरंत बायोप्सी या स्पेशलिस्ट रेफरल का समर्थन करती है। इसका आधार यह भी स्पष्ट करता है कि पक्की जांच की जगह सहायक टेस्ट पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
ये स्रोत क्लिनिकल फैसलों में मदद करते हैं। ये पूरे भारत के लिए एक समान रेफरल समय-सीमा तय नहीं करते। वयस्कों की गर्दन की गांठ वाली गाइडलाइन बच्चों पर बिना बदलाव लागू न करें। बच्चों की गांठ के लिए उम्र के अनुसार जांच और रेफरल जरूरी है।
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गर्दन की गांठ में दर्द हो तो क्या वह इन्फेक्शन ही है?
नहीं। सही संदर्भ में दबाने पर दर्द सूजन की ओर इशारा करता है, लेकिन इससे कैंसर खारिज नहीं होता। गांठ कितने समय से है, बढ़ रही है या नहीं, उसकी बनावट और मुंह के घाव की जांच करें। बने रहने वाले या संदिग्ध संकेतों में स्पेशलिस्ट जांच जरूरी है।
संदिग्ध मुंह के अल्सर को रेफर करने से पहले दो हफ्ते रुकें?
नहीं। घाव संदिग्ध हो तो पहली जांच में रेफर करें, खासकर गर्दन की गांठ, कड़ापन, खून या सुन्नपन के साथ। दो हफ्ते न भरने वाले घाव की दोबारा जांच की सीमा है, जरूरी इंतजार का समय नहीं।
अल्ट्रासाउंड सामान्य हो तो क्या सिर-गर्दन का कैंसर नहीं है?
नहीं। अल्ट्रासाउंड पहुंच में आने वाली गांठों की बनावट और सैंपल लेने में मदद करता है। इससे नोड की हर बीमारी या मुंह-गले में छिपा शुरुआती कैंसर खारिज नहीं होता। क्लिनिकल शक बना हो तो आगे जांच चाहिए।
पहले मुंह के घाव की बायोप्सी करें या गर्दन की गांठ की?
सबके लिए एक तय क्रम नहीं है। दोनों की जल्द जांच में तालमेल रखें। दिख रहे संदिग्ध मुंह के घाव की इन्सीजनल बायोप्सी जरूरी हो सकती है। गर्दन की गांठ की जांच आम तौर पर सुई से सैंपल लेकर शुरू होती है। एक जांच के कारण दूसरी में देर न हो।
रिपोर्ट में गर्दन की गांठ सिस्टिक आए तो क्या करें?
निदान स्पष्ट होने तक जांच जारी रखें। वयस्कों में कैंसर फैलने से प्रभावित कुछ गर्दन के नोड में तरल होता है। वे हानिरहित सिस्ट जैसे दिख सकते हैं। स्पेशलिस्ट जांच और सही जगह से सैंपल लेना जरूरी है।
फाइन-नीडल एस्पिरेशन की रिपोर्ट नेगेटिव हो तो क्या करें?
देखें कि सैंपल पर्याप्त था या नहीं और रिपोर्ट क्लिनिकल जांच तथा स्कैन से मेल खाती है या नहीं। शक बना हो तो स्पेशलिस्ट की देखरेख में दोबारा जांच, नया सैंपल या दूसरे तरीके से टिश्यू जांच कराएं। केवल नेगेटिव रिपोर्ट पर जांच बंद न करें।
रेफरल से पहले दांत के इन्फेक्शन का ट्रीटमेंट कर सकते हैं?
पक्के तौर पर पहचानी गई दांत की समस्या का ट्रीटमेंट करें। लेकिन मुंह का घाव या गर्दन की गांठ संदिग्ध हो तो साथ-साथ रेफरल भी करें। दांत की बीमारी को ऐसी वजह न बनाएं जिससे संभावित कैंसर की जांच में देर हो।
क्या शुरुआती जांच के लिए टेलीकंसल्टेशन काफी है?
इससे अर्जेंसी समझने और रिपोर्ट देखने में मदद मिल सकती है। लेकिन मुंह के घाव के साथ गर्दन की गांठ की सामने से जांच का विकल्प नहीं है। टटोलकर जांच, मुंह की पूरी अंदरूनी परत देखना और कभी-कभी लचीले कैमरे से गला जांचना जरूरी होता है।
This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.