Smile Analysis and Enhancement · 10 min read · हिन्दी
मुंबई में स्माइल मेकओवर का खर्च कितना है और क्या शामिल होता है?
मुंबई में स्माइल मेकओवर का खर्च आपके दांतों और गम्स यानी मसूड़ों की सेहत, आपके मनचाहे बदलाव, चुने गए ट्रीटमेंट और बाद की देखभाल पर निर्भर करता है। ऐसा कोई तय पैकेज नहीं है जो सबके लिए सही हो। स्माइल प्लान बनाने से पहले सामने मिलकर या वीडियो पर शुरुआती सलाह जरूरी है। दांतों का लुक बदलने वाला कॉस्मेटिक काम शुरू करने से पहले क्लिनिक में मुंह की जांच जरूरी है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-09-20
Key points
- खर्च मुंह की सेहत, कितना और किस तरह का काम चाहिए, उसकी जटिलता और आगे की देखभाल पर निर्भर करता है।
- शुरुआती सलाह सामने मिलकर या वीडियो पर हो सकती है। कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले क्लिनिक में जांच जरूरी है।
- लुक बदलने वाले काम से पहले गम्स की सेहत और मुंह की बीमारी की जांच जरूरी है।
- क्या शामिल है, क्या अलग है, दूसरे विकल्प क्या हैं और आगे क्या देखभाल चाहिए—यह सब लिखित में पूछें।
- नतीजों की सीमाएं होती हैं। कुछ ट्रीटमेंट स्वस्थ दांत के हिस्से को हमेशा के लिए बदल देते हैं।
स्माइल मेकओवर क्या होता है?
स्माइल मेकओवर में दांतों और गम्स का लुक बदलने के लिए एक या कई ट्रीटमेंट का प्लान बनाया जाता है। इसमें दांतों का रंग, शेप, बीच की जगह, पोजिशन या गायब दांतों पर काम हो सकता है। किसी को छोटा-सा बदलाव चाहिए होता है, तो किसी का ट्रीटमेंट कई चरणों में होता है।
यह कोई एक प्रक्रिया या तय पैकेज नहीं है। प्लान में आपकी पसंद, मुंह की सेहत, बाइट यानी ऊपर-नीचे के दांत कैसे मिलते हैं, और आगे देखभाल करने की आपकी तैयारी शामिल होनी चाहिए। कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट न करवाना भी एक सही विकल्प है।
प्लान बनाते समय सिर्फ लुक नहीं देखा जाता। दांतों से खाना चबाना और बोलना भी आराम से होना चाहिए। कॉस्मेटिक काम से पहले गम्स और मुंह की किसी बीमारी की जांच की जाती है। जिन समस्याओं को देखभाल चाहिए, उनका पहले इलाज होता है।
- दांतों के रंग की समस्या और टेढ़े दांतों के लिए अलग-अलग तरीका जरूरी हो सकता है।
- दांत का छोटा हिस्सा टूटा हो, तो बड़े ट्रीटमेंट के बजाय छोटी रिपेयर काफी हो सकती है।
- दांत गायब हों या घिसने से बाइट बदल गई हो, तो पूरी डेंटल जांच की जरूरत हो सकती है।
- मुस्कान के दोनों तरफ थोड़ा प्राकृतिक फर्क हो, तो उसे ठीक करवाना हमेशा जरूरी नहीं है।
स्माइल एनालिसिस में क्या देखा जाता है?
स्माइल एनालिसिस में दांत, गम्स, होंठ और इनका एक साथ दिखने वाला लुक ध्यान से देखा जाता है। डॉक्टर पूछते हैं कि आपको क्या परेशान करता है और कौन-से बदलाव सबसे जरूरी लगते हैं। फोटो से बात समझने में मदद मिल सकती है, लेकिन जांच में पता चलने वाली हर बात फोटो में नहीं दिखती।
स्माइल प्लान से पहले सामने मिलकर या वीडियो पर शुरुआती सलाह जरूरी है। वीडियो पर आपकी उम्मीदें और अगले संभावित कदम समझे जा सकते हैं। लेकिन इससे दांतों में छिपी सड़न, गम्स का सहारा या काटते समय हर दांत का मिलना भरोसेमंद तरीके से नहीं जांचा जा सकता।
कॉस्मेटिक काम से पहले क्लिनिक में जांच जरूरी है। जांच के आधार पर जरूरत हो, तभी एक्स-रे या दूसरे रिकॉर्ड सुझाए जा सकते हैं। ये हर किसी के लिए अपने-आप जरूरी नहीं होते।
- दांत: रंग, शेप, आकार, बीच की जगह, दांतों का एक-दूसरे पर चढ़ना, टूटे किनारे, घिसाव और पुरानी रिपेयर।
- गम्स: खून आना, सूजन, गम्स का पीछे हटना और मुस्कुराते समय कितना गम्स दिखता है।
- बाइट: ऊपर और नीचे के दांत कैसे मिलते हैं और दांत पीसने के निशान हैं या नहीं।
- चेहरा और होंठ: आराम की स्थिति में, बोलते समय और मुस्कुराते समय कितने दांत दिखते हैं।
- मुंह की सेहत: सड़न, अल्सर यानी छाले, लाल या सफेद पैच, गांठ और दूसरे बदलाव।
- उम्मीदें: आप क्या बदलना चाहते हैं, किन बदलावों से बचना चाहते हैं और किन सीमाओं को स्वीकार कर सकते हैं।
मुंबई में स्माइल मेकओवर का खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?
आमतौर पर खर्च इस बात से ज्यादा तय होता है कि कितना और किस तरह का काम चाहिए, न कि सिर्फ ‘स्माइल मेकओवर’ नाम से। चमकदार मुस्कान चाहने वाले दो लोगों को बहुत अलग देखभाल की जरूरत हो सकती है। एक के दांतों पर सिर्फ ऊपरी दाग हो सकते हैं, जबकि दूसरे के दांत घिसे हों, पुरानी रिपेयर हो या गम्स की बीमारी हो।
अच्छे खर्च के अनुमान में सिर्फ शुरुआती ट्रीटमेंट नहीं, बल्कि आगे की देखभाल भी समझाई जाती है। जांच के बाद हर काम का अलग खर्च लिखित में मांगें। अगर किसी नई समस्या का पता चलने पर प्लान बदल सकता है, तो पूछें कि आगे बढ़ने से पहले उस बदलाव पर आपसे कैसे बात की जाएगी।
- कितने दांतों पर काम होगा: एक दांत की रिपेयर और कई दांतों में बदलाव का खर्च अलग होगा।
- शुरुआती सेहत: सड़न, गम्स की समस्या या खराब दांतों का पहले इलाज जरूरी हो सकता है।
- ट्रीटमेंट का विकल्प: व्हाइटनिंग यानी दांतों का रंग हल्का करना, बॉन्डिंग यानी दांत के रंग के मटेरियल से रिपेयर, दांतों की पोजिशन बदलना और लैब में बनी चीजें लगाना—इन सबमें अलग काम होता है।
- काम कितना जटिल है: बाइट की समस्या, गायब दांत और ज्यादा घिसाव में अतिरिक्त प्लानिंग लग सकती है।
- मटेरियल और लैब का काम: आपके लिए खास तौर पर बनी चीजें, स्कैन और ट्रायल के चरण खर्च को प्रभावित करते हैं।
- डॉक्टरों की टीम: कुछ प्लान में अलग-अलग तरह का डेंटल काम करने वाले डॉक्टरों की राय जरूरी हो सकती है।
- आगे की देखभाल: पॉलिशिंग, रिपेयर, चीजें बदलवाने या नया रिटेनर बनवाने का खर्च हो सकता है। रिटेनर दांतों को नई पोजिशन में रखने वाला उपकरण है।
- आना-जाना और अपॉइंटमेंट: ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर से बार-बार आने पर सफर का खर्च भी बजट में जोड़ें।
स्माइल मेकओवर के खर्च में क्या शामिल होता है और क्या पूछें?
हर जगह शामिल चीजों की एक जैसी लिस्ट नहीं होती। लिखित प्लान में जांच, सेहत के लिए जरूरी इलाज, कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट और बाद के चेकअप अलग-अलग होने चाहिए। यह न मानें कि बातचीत में बताई गई हर चीज एक ही अनुमान में शामिल है।
डिजिटल प्रीव्यू यानी स्क्रीन पर दिखाया गया संभावित लुक और मॉक-अप यानी दांत के प्रस्तावित शेप का अस्थायी ट्रायल, प्लान समझने में मदद कर सकते हैं। ये बताते हैं कि क्या करने का इरादा है, न कि नतीजे की गारंटी देते हैं। पूछें कि आपके मामले में इनकी जरूरत है या नहीं और क्या इनका खर्च शामिल है।
- कंसल्टेशन: क्या इसमें स्माइल एनालिसिस और दूसरे विकल्पों पर चर्चा शामिल है?
- रिकॉर्ड: फोटो, स्कैन, दांतों के नाप या जरूरत के एक्स-रे का खर्च शामिल है या अलग?
- पहले जरूरी इलाज: क्या सफाई, गम्स की देखभाल और सड़न के इलाज का खर्च अलग लिखा है?
- मुख्य ट्रीटमेंट: किन दांतों पर कौन-सा काम शामिल है?
- ट्रायल और अस्थायी काम: क्या मॉक-अप या अस्थायी कवर चाहिए और इनका खर्च शामिल है?
- लैब का काम: आपके लिए खास तौर पर कौन-सी चीजें बनेंगी?
- बाद के चेकअप: कौन-से तय चेकअप, बाइट की जांच और छोटे एडजस्टमेंट शामिल हैं?
- लंबे समय की देखभाल: क्या रिटेनर, दांतों की सुरक्षा के उपकरण, रिपेयर और आगे चीजें बदलवाने का खर्च अलग है?
दांतों की अलग-अलग समस्याओं के लिए कौन-से ट्रीटमेंट हैं?
ट्रीटमेंट समस्या की वजह के हिसाब से होना चाहिए। जहां संभव हो, दांत का स्वस्थ हिस्सा बचाना चाहिए। ज्यादा बड़ा काम हमेशा ज्यादा सही नहीं होता। कई विकल्प ठीक हो सकते हैं, लेकिन हर विकल्प की अपनी सीमाएं होती हैं।
- सफाई और पॉलिशिंग से दांतों पर जमा परत और कुछ ऊपरी दाग हटते हैं। इससे मुस्कान साफ दिख सकती है, लेकिन दांतों का प्राकृतिक अंदरूनी रंग या पोजिशन नहीं बदलती।
- डॉक्टर की देखरेख में व्हाइटनिंग से प्राकृतिक दांतों का रंग हल्का होता है। इससे पुरानी फिलिंग, विनियर या क्राउन का रंग हल्का नहीं होता, इसलिए रंग में फर्क रह सकता है। फिलिंग दांत में भरा गया मटेरियल है, विनियर सामने लगने वाला पतला कवर है और क्राउन दांत को चारों ओर से ढकने वाला कवर है। व्हाइटनिंग सही है या नहीं, यह रंग बदलने की वजह और मुंह की सेहत पर निर्भर करता है।
- बॉन्डिंग में दांत के रंग का डेंटल मटेरियल जोड़कर छोटे टूटे हिस्से ठीक किए जाते हैं या शेप बदला जाता है। इसमें अक्सर प्राकृतिक दांत का काफी हिस्सा बच जाता है, लेकिन मटेरियल पर दाग लग सकते हैं या वह घिस और टूट सकता है।
- विनियर दांतों के सामने लगाए जाने वाले पतले कवर हैं। इनसे शेप और रंग बदल सकते हैं, लेकिन कई तरह के विनियर लगाने के लिए दांत की सतह का कुछ हिस्सा हटाना पड़ता है। यह बदलाव वापस पहले जैसा नहीं किया जा सकता।
- क्राउन दांत को चारों ओर से ढकते हैं। काफी खराब हो चुके दांतों में इन पर विचार किया जा सकता है। लेकिन इनके लिए दांत को ज्यादा घिसकर तैयार करना पड़ता है। स्वस्थ दांतों के लिए ये सामान्य विकल्प नहीं हैं।
- ब्रेसेस या क्लियर अलाइनर दांतों की पोजिशन बदलते हैं। क्लियर अलाइनर पारदर्शी ट्रे जैसे उपकरण होते हैं। दांत एक-दूसरे पर चढ़े हों या बीच में जगह हो, तो ये उपयोगी हो सकते हैं। नियमित निगरानी और बाद में नई पोजिशन बनाए रखने के लिए रिटेनर जरूरी होता है।
- कुछ चुने हुए मामलों में गम्स का शेप बदला जा सकता है। इससे पहले गम्स और हड्डी के सहारे की ध्यान से जांच जरूरी है। यह हर मुस्कान के लिए सही नहीं है।
- गायब दांत की जगह ब्रिज, निकालकर साफ किए जा सकने वाले नकली दांत या इम्प्लांट के सहारे दांत लगाया जा सकता है। ब्रिज पास के दांतों या इम्प्लांट के सहारे खाली जगह भरता है। इम्प्लांट जबड़े की हड्डी में लगाया जाने वाला सहारा है। हर विकल्प की अलग जांच जरूरी है। इसे सिर्फ लुक बदलने वाला छोटा काम नहीं मानना चाहिए।
स्माइल मेकओवर कैसे होता है और कैसा महसूस होता है?
ट्रीटमेंट का क्रम आपकी जरूरतों पर निर्भर करता है। छोटी रिपेयर में कम विजिट लग सकती हैं। दांतों की पोजिशन बदलने या कई ट्रीटमेंट साथ करने में काफी ज्यादा समय लग सकता है। शादी या किसी कार्यक्रम की तारीख के लिए सुरक्षित प्लानिंग से समझौता नहीं करना चाहिए।
अगर आपको डर लगता है या पहले डेंटल ट्रीटमेंट का अनुभव मुश्किल रहा है, तो डॉक्टर को बताएं। आराम देने के तरीके प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं और इन्हें पहले समझाया जाना चाहिए। दर्द, लगातार ठंडा-गरम लगना या बाइट में परेशानी को सामान्य मानकर सहने के बजाय चेकअप करवाएं।
- पहली बातचीत: अपनी परेशानी, सेहत की जानकारी और उम्मीदें बताएं। इसकी शुरुआत सामने मिलकर या वीडियो पर हो सकती है।
- मुंह की जांच: दांत, गम्स, बाइट और मुंह की अंदरूनी परत देखी जाती है। जरूरत हो तो अतिरिक्त रिकॉर्ड लिए जाते हैं।
- पहले सेहत का ध्यान: कॉस्मेटिक काम से पहले मौजूद सड़न, गम्स की बीमारी या मुंह के किसी शक वाले बदलाव की जांच और जरूरी देखभाल होती है।
- मिलकर प्लान बनाना: छोटे बदलाव या कोई ट्रीटमेंट न करवाने सहित सही विकल्पों, खर्च और सीमाओं पर बात होती है।
- जरूरत हो तो प्रीव्यू: फोटो, डिजिटल डिजाइन या अस्थायी ट्रायल पर चर्चा की जाती है। ये अंतिम लुक की गारंटी नहीं देते।
- ट्रीटमेंट: सफाई के दौरान खुरचने जैसा महसूस हो सकता है या झनझनाहट हो सकती है। व्हाइटनिंग से कुछ समय के लिए ठंडा-गरम लग सकता है। दांतों की पोजिशन बदलने पर दबाव या दर्द हो सकता है। गम्स की प्रक्रिया के बाद भरने के दौरान तकलीफ हो सकती है।
- आखिरी जांच: आराम, बाइट, लुक और सफाई करने की जगह देखी जाती है। बाद की देखभाल और चेकअप की जरूरत तय की जाती है।
स्माइल मेकओवर किसके लिए सही है और कब रुकना चाहिए?
स्माइल मेकओवर तब सही हो सकता है जब मुंह स्वस्थ हो, आपकी परेशानी सुरक्षित तरीके से ठीक की जा सके और उम्मीदें वास्तविक हों। आगे की देखभाल समझना और चुने गए ट्रीटमेंट की सीमाएं स्वीकार करना भी जरूरी है। सिर्फ उम्र से यह तय नहीं होता कि ट्रीटमेंट सही है या नहीं। हालांकि कम उम्र के लोगों में शरीर की बढ़त और दांतों का विकास मायने रखता है।
मुंह में चल रही बीमारी या बिना स्पष्ट वजह का कोई बदलाव हो, तो कॉस्मेटिक काम रोककर पहले उसकी जांच होनी चाहिए। बहुत ज्यादा दांत पीसना, ठीक से सफाई न होना या दांतों को कम सहारा मिलना विकल्प बदल सकता है। इन वजहों से ट्रीटमेंट हमेशा मना नहीं होता, लेकिन प्लानिंग में इनका ध्यान जरूरी है।
अगर लुक की चिंता में दिन का बड़ा हिस्सा निकल जाता है या आप बार-बार बदलाव करवाना चाहते हैं, तो ऐसा ट्रीटमेंट जिसे वापस नहीं बदला जा सकता, जरूरी नहीं कि आपकी परेशानी कम करे। ध्यान से बातचीत और अतिरिक्त मदद, और डेंटल काम करवाने से ज्यादा उपयोगी हो सकती है।
- मुंह का अल्सर दो हफ्ते में न भरे, तो क्लिनिक में जांच करवाएं।
- गांठ, सुन्नपन, बिना वजह खून आना या बना रहने वाला लाल या सफेद पैच हो, तो जल्द जांच जरूरी है।
- मुंह खोलने या निगलने में दिक्कत हो, तो जल्द सामने मिलकर जांच और देखभाल करवाएं।
- तेजी से बढ़ती सूजन, सांस लेने में दिक्कत या लार भी न निगल पाना इमरजेंसी है। तुरंत इमरजेंसी मदद लें।
स्माइल मेकओवर कितने समय चलता है और बाद में क्या देखभाल चाहिए?
हर स्माइल मेकओवर के टिकने का समय एक जैसा नहीं होता। प्राकृतिक दांतों में उम्र के साथ बदलाव आते हैं, गम्स बदल सकते हैं और डेंटल काम घिस सकता है। नतीजे कितने समय टिकेंगे, यह ट्रीटमेंट, दांतों की शुरुआती सेहत, चबाने के दबाव, रोज की सफाई और समय पर चेकअप पर निर्भर करता है।
दाग लौटने पर व्हाइटनिंग का असर कम हो सकता है। बॉन्डिंग को पॉलिश या रिपेयर करवाना पड़ सकता है। विनियर और क्राउन आगे चलकर बदलने पड़ सकते हैं। ब्रेसेस या अलाइनर के बाद दांतों को नई जगह रखने की देखभाल न हो, तो दांत फिर खिसक सकते हैं।
अपनी प्रक्रिया के लिए दिए गए देखभाल के निर्देश मानें। चेकअप कब कराना है और किसी उपकरण का इस्तेमाल कैसे करना है, यह आपकी जरूरत के हिसाब से तय होना चाहिए। किसी और के ट्रीटमेंट की सलाह अपने ऊपर लागू न करें।
- हल्के हाथ से ब्रश करें और दांतों के बीच सफाई करें, ताकि गम्स और फिलिंग या कवर के किनारे सुरक्षित रहें।
- बर्फ चबाने, पेन काटने या दांतों से पैकेट खोलने से बचें।
- प्लान बनाते समय तंबाकू, सुपारी और बार-बार दाग लगाने वाले पेय लेने की आदत पर बात करें।
- अगर आपके लिए रिटेनर या सुरक्षा का उपकरण दिया गया है, तो सलाह के अनुसार पहनें।
- फिलिंग या कवर ढीला हो, नया हिस्सा टूटे, लगातार ठंडा-गरम लगे, गम्स से खून आए या बाइट बदले, तो चेकअप करवाएं।
- ट्रीटमेंट के रिकॉर्ड संभालकर रखें। फैसला लेने से पहले आगे की संभावित देखभाल के बारे में पूछें।
स्माइल मेकओवर की सीमाएं और जोखिम क्या हैं?
स्माइल मेकओवर किसी खास लुक, दोनों तरफ बिल्कुल एक जैसी मुस्कान या आत्मविश्वास बढ़ने की गारंटी नहीं देता। दांतों का रंग, गम्स का स्तर, होंठों की हलचल और पुराना डेंटल काम नतीजे को सीमित कर सकते हैं। फोटो या स्क्रीन का प्रीव्यू रोजमर्रा की रोशनी में दांतों से अलग दिख सकता है।
जोखिम प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं। इनमें ठंडा-गरम लगना, गम्स में जलन, छोटे हिस्से टूटना, रंग न मिलना, फिलिंग या कवर के किनारों पर सड़न और बाइट में परेशानी शामिल हो सकती है। दांत को घिसकर तैयार करने से कभी-कभी उसके अंदर के जीवित हिस्से में जलन या सूजन हो सकती है और आगे इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
जिस काम को वापस नहीं बदला जा सकता, उसके साथ लंबे समय की देखभाल की जिम्मेदारी जुड़ती है। सहमति देने से पहले पूछें कि दांत का कितना स्वस्थ हिस्सा बदलेगा, क्या समस्या हो सकती है और रिपेयर या बदलवाने में क्या करना पड़ेगा। मकसद पूरी जानकारी लेकर फैसला करना है, जल्दबाजी में लुक बदलना नहीं।
- पूछें कि क्या छोटे बदलाव से आपकी मुख्य परेशानी दूर हो सकती है।
- समझें कि कौन-से कदम वापस बदले जा सकते हैं और कौन-से नहीं।
- पहले तय करें कि नई समस्या सामने आने या लुक को लेकर आपकी चिंता होने पर कैसे चर्चा होगी।
- ट्रीटमेंट शुरू होने से पहले लिखित प्लान समझने के लिए समय लें।
Questions people ask
क्या फोटो से स्माइल मेकओवर का खर्च पता चल सकता है?
फोटो से शुरुआती बातचीत में मदद मिल सकती है। लेकिन छिपी सड़न, गम्स का सहारा या पूरी बाइट नहीं दिखती। भरोसेमंद खर्च का अनुमान देने के लिए सही जांच जरूरी है। कॉस्मेटिक काम से पहले क्लिनिक में जांच होनी चाहिए।
क्या स्माइल मेकओवर में दांतों की सफाई शामिल होती है?
अपने-आप शामिल नहीं होती। ट्रीटमेंट से पहले सफाई जरूरी हो सकती है, लेकिन उसका खर्च शामिल है या नहीं, यह लिखित प्लान पर निर्भर करता है। सेहत के लिए जरूरी इलाज और कॉस्मेटिक काम अलग-अलग लिखने को कहें।
क्या अच्छी मुस्कान के लिए विनियर जरूरी हैं?
जरूरी नहीं। सफाई, व्हाइटनिंग, बॉन्डिंग से छोटी रिपेयर या दांतों की पोजिशन बदलने से आपकी परेशानी दूर हो सकती है। विनियर एक विकल्प हैं। स्वस्थ दांत की सतह हटाने से पहले ध्यान से चर्चा जरूरी है।
क्या स्माइल मेकओवर में दर्द होता है?
यह प्रक्रिया पर निर्भर करता है। कुछ समय के लिए ठंडा-गरम लगना, दबाव या दर्द हो सकता है। पूछें कि कितनी तकलीफ हो सकती है और ठीक होने के दौरान क्या महसूस होगा। लक्षण बने रहें या बढ़ें, तो चेकअप करवाएं।
क्या शादी से पहले स्माइल मेकओवर पूरा हो सकता है?
यह मुंह की सेहत और तय बदलावों पर निर्भर करता है। कुछ विकल्पों में कई चरण या ठीक होने का समय जरूरी होता है। जल्दी जांच करवाएं। सिर्फ तारीख तक काम पूरा करने के लिए ऐसा ट्रीटमेंट न चुनें जिसे वापस नहीं बदला जा सकता।
क्या व्हाइटनिंग से क्राउन का रंग बदलेगा?
नहीं। व्हाइटनिंग प्राकृतिक दांतों का रंग बदलती है, पुराने क्राउन, विनियर या फिलिंग का नहीं। ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर को रंग में संभावित फर्क समझाना चाहिए।
क्या स्माइल मेकओवर हमेशा के लिए होता है?
कोई भी नतीजा बिना देखभाल के हमेशा नहीं रहता। दांतों में किए गए कुछ बदलाव वापस नहीं बदले जा सकते, लेकिन लगाए गए मटेरियल या कवर की रिपेयर या उन्हें बदलने की जरूरत हो सकती है। दांत और गम्स भी समय के साथ बदलते हैं।
गम्स से खून आता हो तो क्या स्माइल मेकओवर शुरू कर सकते हैं?
गम्स से खून आए, तो कॉस्मेटिक काम से पहले क्लिनिक में जांच जरूरी है। पहले वजह पता करके उसका इलाज होना चाहिए। अस्वस्थ गम्स आराम, लुक और ट्रीटमेंट के टिकने पर असर डाल सकते हैं।
This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.