Smile Analysis and Enhancement · 10 min read · हिन्दी

सामने के टूटे या घिसे दांत कैसे ठीक कराएं?

सामने के टूटे या घिसे दांतों की रिपेयर दांत के रंग की बॉन्डिंग, विनियर या क्राउन से हो सकती है। सही विकल्प नुकसान और बाइट, यानी ऊपर-नीचे के दांत कैसे मिलते हैं, पर निर्भर है। छोटे खुरदरे किनारे को सिर्फ स्मूद करना काफी हो सकता है। स्माइल में बदलाव की प्लानिंग से पहले क्लिनिक में या वीडियो पर शुरुआती चेकअप जरूरी है। ट्रीटमेंट से पहले क्लिनिक में दांतों, गम्स और मुंह की किसी भी बीमारी की जांच होती है।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-09-20

Key points

  • रिपेयर का विकल्प कारण, नुकसान की गहराई, बचे हुए दांत और बाइट पर निर्भर है।
  • पहले स्माइल चेकअप होता है। लुक सुधारने वाले काम से पहले गम्स की सेहत और मुंह की बीमारी की जांच जरूरी है।
  • छोटे टूटे हिस्से में सिर्फ स्मूदिंग या बॉन्डिंग काफी हो सकती है। पूरे दांत पर कवर जरूरी नहीं होता।
  • हर रिपेयर की सीमाएं हैं और नियमित देखभाल जरूरी है। स्वस्थ दांत को बचाना अहम है।
  • मुंह में बने रहने वाले बदलाव, दर्द, सूजन या निगलने में परेशानी की जांच जरूरी है। सिर्फ लुक सुधारने वाला ट्रीटमेंट काफी नहीं है।

सामने के दांत क्यों टूटते या घिसते हैं?

दांत का छोटा टुकड़ा टूटकर निकल जाए, तो उसे चिप होना कहते हैं। घिसाव में दांत की सतह धीरे-धीरे कम होती है। दोनों से सामने के दांत छोटे, ऊंचे-नीचे या पतले दिख सकते हैं, लेकिन उनकी देखभाल अलग हो सकती है।

दांत कैसा दिखता है, उतना ही जरूरी है नुकसान का कारण जानना। दांत पीसने, एसिड के असर या गलत बाइट को ठीक किए बिना किनारा दोबारा बनाने पर वह फिर टूट सकता है।

  • चोट: गिरने, खेल के दौरान चोट लगने या कोई सख्त चीज काटने से किनारा टूट सकता है।
  • दांत पीसना या भींचना: बार-बार दबाव पड़ने से किनारे घिसकर सपाट हो सकते हैं या रिपेयर टूट सकती है।
  • एसिड का असर: बार-बार एसिड वाले ड्रिंक्स पीने, उल्टी होने या पेट का एसिड मुंह तक आने से इनेमल नरम हो सकता है। इनेमल दांत की सख्त बाहरी परत है।
  • दांत में सड़न या पुरानी रिपेयर: कमजोर हिस्सा सामान्य खाना चबाते समय भी टूट सकता है।
  • बाइट की स्थिति: ऊपर और नीचे के दांत जिस तरह मिलते हैं, उससे कुछ दांतों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ सकता है।

स्माइल चेकअप में क्या देखा जाता है?

स्माइल एनालिसिस में देखा जाता है कि आपके दांत, गम्स, होंठ और बाइट आपस में कैसे काम करते हैं। शुरुआत इस बात से होती है कि आपको क्या परेशानी है और आप क्या बदलना चाहते हैं। फोटो से अपनी बात समझाने में मदद मिल सकती है, लेकिन हर समस्या फोटो में नहीं दिखती।

स्माइल की प्लानिंग से पहले क्लिनिक में या वीडियो पर शुरुआती चेकअप जरूरी है। वीडियो पर संभावित विकल्पों की चर्चा हो सकती है, लेकिन ट्रीटमेंट से पहले क्लिनिक में जांच जरूरी है। लुक सुधारने वाले काम से पहले गम्स की सेहत, दांतों की सड़न और मुंह की किसी भी बीमारी की जांच होती है। जरूरत के हिसाब से पहले उनका इलाज होता है या दूसरे विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है।

सड़न, चोट या दांत के अंदर नुकसान का शक हो, तो डॉक्टर एक्स-रे की सलाह दे सकते हैं। स्कैन, दांतों का मॉडल या ट्रायल शेप से प्रस्तावित बदलाव समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन इससे अंतिम लुक की गारंटी नहीं मिलती।

  • दांतों की लंबाई, आकार, रंग और बोलते या मुस्कुराते समय कितना दांत दिखता है।
  • कितना स्वस्थ दांत बचा है और पुरानी फिलिंग किस हालत में है।
  • गम्स में सूजन, खून आना, गम्स का पीछे हटना और हर दांत के आसपास का सहारा।
  • दरारें, ठंडा-गर्म लगना, हिलते दांत और दांत पीसने के संकेत।
  • चबाते समय दांत कैसे मिलते हैं और एक-दूसरे पर कैसे सरकते हैं।
  • मुंह की अंदरूनी परत में अल्सर यानी छाले, धब्बे, गांठ या दूसरे बदलाव।

दांत का टूटा किनारा कब स्मूदिंग या बॉन्डिंग से ठीक हो सकता है?

बहुत छोटा और ऊपरी टुकड़ा टूटा हो, तो खुरदरे किनारे को स्मूद करना ठीक हो सकता है। डॉक्टर नुकसान और बाइट की जांच करके किनारे को हल्का आकार देते हैं और पॉलिश करते हैं। इसमें दांत का थोड़ा हिस्सा हमेशा के लिए हटता है। इसलिए छोटे हो चुके या ज्यादा घिसे दांत को दोबारा बनाने के लिए यह सही विकल्प नहीं है।

डेंटल बॉन्डिंग में दांत के रंग का रेजिन लगाया जाता है। रेजिन दांत से चिपकने वाला रिपेयर मटेरियल है। पर्याप्त स्वस्थ दांत बचा हो, तो छोटे या मध्यम टूटे हिस्से, कुछ जगह के घिसाव और ऊंचे-नीचे किनारों के लिए यह विकल्प ठीक हो सकता है। कई सीधी-सादी रिपेयर एक ही विजिट में हो सकती हैं।

गहरी टूटन, सड़न, ज्यादा घिसाव या दांत पीसने के तेज दबाव में सिर्फ बॉन्डिंग काफी नहीं हो सकती। इस पर दाग पड़ सकते हैं, चमक कम हो सकती है या हिस्सा टूट सकता है। हालांकि, अक्सर पूरी रिपेयर बदलने के बजाय सिर्फ खराब हिस्से को ठीक किया जा सकता है।

  • पहले डॉक्टर दांत की जांच करते हैं और आपके साथ मिलकर रंग चुनते हैं।
  • दांत की सतह साफ करके तैयार की जाती है और सूखी रखी जाती है, ताकि रिपेयर चिपक सके।
  • रेजिन लगाकर गायब किनारे का आकार बनाया जाता है।
  • एक खास लाइट से मटेरियल सख्त किया जाता है।
  • डॉक्टर बाइट चेक करते हैं, ज्यादा दबाव वाले हिस्से को एडजस्ट करते हैं और रिपेयर की पॉलिश करते हैं।

टूटे या घिसे दांतों पर विनियर कब लग सकते हैं?

विनियर एक पतली परत है, जो मुख्य रूप से दांत की सामने वाली सतह पर लगाई जाती है। किनारा ठीक कराने के साथ दांत का आकार और रंग बदलना हो, तो यह विकल्प हो सकता है। विनियर दांत के रंग के रेजिन या सेरामिक से बनते हैं। सेरामिक दांत के रंग का एक सख्त मटेरियल है।

छोटा टुकड़ा टूटने पर विनियर लगाना जरूरी नहीं है। सड़न का इलाज न हुआ हो, गम्स में सूजन हो, इनेमल कम बचा हो या दांत पीसना कंट्रोल में न हो, तो विनियर सही विकल्प नहीं हो सकते। पहले दूसरी देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। कई तरह के विनियर के लिए कुछ इनेमल हमेशा के लिए हटाना पड़ता है।

  • प्लानिंग: प्रस्तावित आकार पर सहमति बनाएं और पूछें कि ट्रायल से मदद मिलेगी या नहीं।
  • तैयारी: जरूरत हो तो दांत को आकार दिया जाता है। फिर स्कैन या छाप लेकर उसका आकार रिकॉर्ड किया जाता है।
  • विनियर बनाना: सेरामिक विनियर आमतौर पर मुंह के बाहर बनाए जाते हैं। तब तक अस्थायी कवर की जरूरत हो सकती है।
  • फिटिंग: विनियर चिपकाने और पॉलिश करने से पहले उसका लुक, फिटिंग और बाइट चेक की जाती है।
  • सीमाएं: विनियर टूट सकता है, निकल सकता है या उसके किनारों पर समस्या हो सकती है। आगे चलकर उसे बदलना पड़ सकता है। हटाया गया इनेमल दोबारा नहीं उगता।

सामने के दांत में क्राउन या दूसरे ट्रीटमेंट कब जरूरी होते हैं?

क्राउन एक कवर है, जो दांत के दिखाई देने वाले ज्यादातर हिस्से को घेरता है। सामने का दांत बहुत खराब हो या उसमें पहले से बड़ी रिपेयर हो, और छोटी रिपेयर पर्याप्त सहारा न दे सके, तो क्राउन विकल्प हो सकता है। इसमें आमतौर पर बॉन्डिंग या विनियर के मुकाबले दांत को ज्यादा घिसकर आकार देना पड़ता है। इसलिए छोटे टूटे हिस्से के लिए यह आमतौर पर पहला विकल्प नहीं है।

गहरा नुकसान पल्प तक पहुंच सकता है। पल्प दांत के अंदर का नरम हिस्सा है, जिसमें नसें और खून की नलियां होती हैं। ऐसे में दांत को दोबारा बनाने से पहले उसके अंदर ट्रीटमेंट की जरूरत हो सकती है। यह फैसला जांच और टेस्ट से होता है, सिर्फ दांत देखकर नहीं।

कई दांत बहुत घिसे हों, तो सिर्फ सामने के दांत लंबे कर देना काफी नहीं है। पूरी बाइट की जांच जरूरी है। प्लान में दांत सीधे करना, एसिड से हुए घिसाव की देखभाल या आपके दांतों के हिसाब से बना प्रोटेक्टिव गार्ड शामिल हो सकता है। यह दांतों पर पहना जाने वाला बचाव का कवर है।

  • क्राउन से पहले डॉक्टर देखते हैं कि दांत को बचाया जा सकता है या नहीं और उसे पर्याप्त सहारा मिलेगा या नहीं।
  • दांत को आकार देकर स्कैन या छाप ली जाती है। अस्थायी कवर लगाया जा सकता है।
  • आखिरी क्राउन लगाने से पहले उसकी फिटिंग, लुक और बाइट चेक की जाती है।
  • जोखिमों में ठंडा-गर्म लगना, क्राउन का हिस्सा टूटना, किनारे पर सड़न और बाद में दांत के अंदर ट्रीटमेंट की जरूरत शामिल हैं।
  • बहुत गहरी दरार वाले या बहुत कमजोर हो चुके हर दांत को क्राउन से नहीं बचाया जा सकता।

दांत की रिपेयर में दर्द होता है और यह कितने समय चलती है?

हल्की स्मूदिंग या दांत पर मटेरियल जोड़कर की गई बॉन्डिंग में अक्सर कम तकलीफ होती है। आपको कंपन, पानी की फुहार या दबाव महसूस हो सकता है। गहरी रिपेयर या दांत को घिसकर आकार देने के लिए उस जगह को सुन्न करना पड़ सकता है। इस बारे में ट्रीटमेंट से पहले चर्चा होती है।

रिपेयर किया हुआ किनारा शुरू में जीभ या होंठ को अलग महसूस हो सकता है। कुछ दांतों में कुछ समय के लिए ठंडा-गर्म लग सकता है, खासकर ज्यादा तैयारी के बाद। बाइट ऊंची-नीची लगे, दर्द बना रहे या सेंसिटिविटी बढ़े, तो क्लिनिक में जांच कराएं। सिर्फ अपने-आप ठीक होने का इंतजार न करें।

सामने के दांत की रिपेयर कितने समय चलेगी, इसका तय जवाब नहीं है। बॉन्डिंग कई साल चल सकती है, लेकिन सेरामिक के मुकाबले जल्दी पॉलिश या छोटी रिपेयर की जरूरत पड़ सकती है। विनियर और क्राउन के भी चेकअप जरूरी हैं। उन्हें ठीक कराने या बदलने की जरूरत हो सकती है।

रिपेयर की उम्र बचे हुए स्वस्थ दांत, बाइट, दांत पीसने, सफाई और आगे लगने वाली चोट पर निर्भर है। कोई विकल्प हमेशा नहीं चलता। कोई डॉक्टर रंग के बिल्कुल मेल, तय उम्र या लुक की गारंटी नहीं दे सकता।

  • पूछें कि हर विकल्प में कितना स्वस्थ दांत हटाना पड़ेगा।
  • पूछें कि आगे छोटा हिस्सा टूटे, तो क्या सिर्फ उसी हिस्से की रिपेयर हो सकती है।
  • समझें कि आपकी बाइट या दांत पीसने की आदत से आगे की देखभाल पर क्या असर पड़ेगा।

सामने के दांत की रिपेयर के बाद देखभाल कैसे करें?

रोज की देखभाल रिपेयर और उसके नीचे के दांत, दोनों को बचाती है। बॉन्डिंग के किनारों, विनियर और क्राउन के आसपास भी सड़न और गम्स की समस्या हो सकती है। अपनी रिपेयर के आसपास सफाई और फॉलो-अप विजिट के बारे में डॉक्टर की सलाह मानें।

प्रोटेक्टिव गार्ड दांत पीसने से होने वाला नुकसान कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे आदत बंद हो जाए। एसिड से घिसाव का शक हो, तो दांतों की देखभाल के साथ उसके कारण की मेडिकल जांच भी जरूरी हो सकती है।

  • नरम ब्रश से दिन में दो बार हल्के हाथ से ब्रश करें और दांतों के बीच सफाई करें।
  • नाखून काटने, पैकेट खोलने या बहुत सख्त चीजें चबाने के लिए दांतों का इस्तेमाल न करें।
  • सख्त खाने को छोटे, आसानी से खाए जा सकने वाले टुकड़ों में काटें। रिपेयर वाले किनारे से जोर लगाकर न काटें।
  • जिन खेलों या गतिविधियों में मुंह पर चोट का खतरा हो, उनमें सही फिटिंग वाला स्पोर्ट्स माउथगार्ड पहनें। यह दांतों को चोट से बचाने वाला कवर है।
  • फॉलो-अप चेकअप कराएं, ताकि खुरदरे किनारे, घिसाव और शुरुआती सड़न की जांच हो सके।
  • रिपेयर का हिस्सा टूटे, ढीला हो या काटते समय अटके, तो चेकअप कराएं।

दांत टूटने या मुंह में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएं?

दांत का नया टुकड़ा टूटे, तो क्लिनिक में जांच जरूरी है, भले ही दर्द न हो। चोट के बाद जल्द जांच कराएं, खासकर अगर दांत हिल रहा हो, अपनी जगह से खिसक गया हो, बहुत दर्द हो या बीच से खून आ रहा हो। चेहरे पर सूजन, बुखार या बढ़ती हुई दर्दनाक सूजन में भी तुरंत जांच जरूरी है।

दांतों का लुक सुधारने के चक्कर में मुंह के दूसरे चेतावनी वाले संकेतों को नजरअंदाज न करें। ये संकेत हमेशा गंभीर बीमारी का मतलब नहीं होते, लेकिन क्लिनिक में जांच जरूरी है। इन्हें दिखाने के लिए स्माइल अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें।

  • मुंह का अल्सर या छाला जो दो हफ्ते बाद भी न भरे।
  • मुंह या गर्दन में नई गांठ या ऐसी गांठ जो बनी रहे।
  • बिना साफ कारण सुन्नपन या खून आना।
  • मुंह खोलने या निगलने में नई परेशानी, या पहले की परेशानी बढ़ना।
  • तेजी से बढ़ती सूजन, सांस लेने में दिक्कत या अपनी लार भी न निगल पाना: तुरंत इमरजेंसी में जाएं।

सामने के दांत की रिपेयर का खर्च किन बातों पर निर्भर है?

खर्च नुकसान के आकार और गहराई, कितने दांतों की रिपेयर चाहिए और इस्तेमाल होने वाले मटेरियल पर निर्भर है। स्कैन, एक्स-रे, लैब में काम, अस्थायी कवर या पहले सड़न और गम्स की बीमारी के ट्रीटमेंट की जरूरत से भी खर्च बदलता है।

लिखित प्लान मांगें, जिसमें सेहत के लिए जरूरी इलाज और सिर्फ लुक बदलने वाले वैकल्पिक काम अलग हों। इसमें दूसरे विकल्प, आगे की संभावित देखभाल और खर्च में क्या शामिल है, साफ होना चाहिए। जो सही विकल्प सबसे कम दांत हटाकर किया जा सके, उससे ज्यादा स्वस्थ दांत बच सकता है। लेकिन वह आपके लिए सही है या नहीं, यह जांच से तय होगा।

मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर से आने वाले लोगों के लिए विजिट की संख्या और फॉलो-अप के लिए पहुंच पाना भी मायने रखता है। वीडियो पर शुरुआती बातचीत हो सकती है, लेकिन सिर्फ फोटो देखकर अंतिम रिपेयर प्लान तय नहीं किया जा सकता।

  • पूछें कि बताए गए खर्च में ट्रायल शेप, अस्थायी काम और बाइट एडजस्टमेंट शामिल हैं या नहीं।
  • साफ कर लें कि पॉलिश, प्रोटेक्टिव गार्ड और बाद की रिपेयर का खर्च अलग है या नहीं।
  • दांतों की सेहत और लुक से जुड़ी कई परेशानियां हों, तो ट्रीटमेंट अलग-अलग चरणों में कराने पर चर्चा करें।

Questions people ask

सामने के दांत का बहुत छोटा टुकड़ा टूटा हो, तो क्या उसे छोड़ सकते हैं?

कभी-कभी सिर्फ निगरानी रखना या किनारे को हल्का स्मूद करना काफी होता है। पहले डॉक्टर को जांचना चाहिए कि टूटन ऊपरी है, दांत स्वस्थ है और बाइट से आगे नुकसान नहीं हो रहा।

क्या घिसे हुए सामने के दांत फिर लंबे किए जा सकते हैं?

अक्सर उन्हें दोबारा बनाया जा सकता है, लेकिन बढ़ी हुई लंबाई आपकी बाइट और बोलने के तरीके के साथ ठीक बैठनी चाहिए। ज्यादा घिसाव में कई दांतों और उसके असली कारण की जांच जरूरी है।

एक सामने का दांत टूटा है, तो क्या विनियर जरूरी है?

जरूरी नहीं। छोटे टूटे हिस्से के लिए बॉन्डिंग या स्मूदिंग ठीक हो सकती है। विनियर तभी चुना जाता है, जब उसके फायदे के मुकाबले दांत को तैयार करने और आगे की देखभाल की जरूरत सही लगे।

क्या रिपेयर बाकी दांतों जैसी दिखेगी?

डॉक्टर आपके साथ मिलकर रंग और आकार चुनते हैं। काफी मिलता-जुलता नतीजा मिल सकता है, लेकिन बिल्कुल मेल की गारंटी नहीं है, खासकर जब सिर्फ एक सामने का दांत ठीक करना हो।

बॉन्डिंग फिर टूट जाए, तो क्या उसकी रिपेयर हो सकती है?

अक्सर हां। डॉक्टर जांचते हैं कि वह क्यों टूटी और कितना मजबूत दांत व रिपेयर मटेरियल बचा है। बार-बार टूटने पर बाइट या ट्रीटमेंट प्लान को दोबारा जांचना पड़ सकता है।

क्या टूटा दांत घर पर ठीक कर सकते हैं?

दांत को खुद न घिसें और घरेलू गोंद से कुछ न चिपकाएं। इससे दांत या मुंह को नुकसान हो सकता है। उस दांत से सख्त खाना काटने से बचें और क्लिनिक में जांच कराएं।

क्या सामने के दांत की रिपेयर एक विजिट में हो सकती है?

कुछ स्मूदिंग और बॉन्डिंग रिपेयर एक विजिट में हो सकती हैं। सेरामिक विनियर, क्राउन और कई दांतों के ट्रीटमेंट में आमतौर पर ज्यादा प्लानिंग और अतिरिक्त विजिट लगती हैं।

क्या वीडियो कंसल्टेशन से तय हो सकता है कि कौन-सी रिपेयर चाहिए?

इससे परेशानी और संभावित विकल्पों पर चर्चा हो सकती है। अंतिम फैसला करने के लिए क्लिनिक में दांत की मजबूती, गम्स की सेहत और बाइट की जांच जरूरी है। जरूरत हो तो टेस्ट, एक्स-रे या दूसरे स्कैन भी किए जाते हैं।

This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.