Smile Analysis and Enhancement · 10 min read · हिन्दी

हॉलीवुड स्माइल क्या है और पर्सनलाइज़्ड स्माइल मेकओवर से कैसे अलग है?

हॉलीवुड स्माइल का मतलब आम तौर पर चमकदार और एक जैसे दिखने वाले दांतों वाली मुस्कान है। यह किसी एक तय डेंटल ट्रीटमेंट का नाम नहीं है। पर्सनलाइज़्ड स्माइल मेकओवर में आपके दांत, चेहरा, बाइट यानी ऊपर-नीचे के दांतों का आपस में मिलना, गम्स की सेहत और आपकी पसंद देखकर प्लान बनता है। दोनों में कुछ बातें एक जैसी हो सकती हैं। लेकिन पर्सनलाइज़्ड प्लान यह मानकर नहीं चलता कि हर किसी को बहुत सफेद दांत या विनीयर यानी दांतों के सामने लगने वाली पतली परतें चाहिए।

Written and medically reviewed by

Dr. Bipin R. Upadhyay

BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry

Last clinically reviewed: 2026-10-30

Key points

  • हॉलीवुड स्माइल एक लुक का नाम है। पर्सनलाइज़्ड मेकओवर का मतलब आपकी जरूरत के हिसाब से प्लान बनाना है।
  • शुरुआत क्लिनिक में या वीडियो पर बातचीत और जांच से करें। इसके बाद जरूरी जांच क्लिनिक में करवाएं।
  • कॉस्मेटिक काम से पहले गम्स की सेहत और मुंह की किसी भी बीमारी की जांच करवाएं।
  • दूसरे विकल्पों, वापस न हो सकने वाले बदलावों, देखभाल और भविष्य में काम बदलने की जरूरत के बारे में पूछें।
  • प्रीव्यू गारंटी नहीं है और किसी भी कॉस्मेटिक नतीजे को बिना देखभाल के बनाए नहीं रखा जा सकता।

हॉलीवुड स्माइल का असल मतलब क्या है?

“हॉलीवुड स्माइल” मार्केटिंग में इस्तेमाल होने वाला एक आम नाम है। इसका मतलब अक्सर सफेद, सीधे और काफी हद तक एक जैसे दिखने वाले दांत होता है। यह कोई मेडिकल डायग्नोसिस या ऐसा तय पैकेज नहीं है जिसमें हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह के स्टेप हों।

पर्सनलाइज़्ड स्माइल मेकओवर किसी एक लुक का नाम नहीं है। इसका मतलब है आपकी जरूरत के हिसाब से देखभाल का प्लान बनाना। हो सकता है आप दांत का छोटा टूटा हिस्सा ठीक करवाना चाहें, गैप पूरी तरह बंद किए बिना थोड़ा कम करना चाहें, या ऐसा हल्का रंग चाहें जो आपको नेचुरल लगे।

ये दोनों तरीके एक-दूसरे के उलट नहीं हैं। किसी को बहुत चमकदार मुस्कान पसंद हो सकती है और फिर भी उसका ट्रीटमेंट उसकी जरूरत के हिसाब से हो सकता है। असली फर्क यह है कि प्लान आपकी सेहत और पसंद से शुरू होता है या पहले से तय किसी लुक से।

  • हॉलीवुड स्माइल: आम तौर पर मनचाहे लुक का नाम।
  • पर्सनलाइज़्ड स्माइल मेकओवर: आपकी अलग से जांच और आपके लिए बनाया गया ट्रीटमेंट प्लान।
  • इनमें से किसी भी नाम से यह तय नहीं होता कि कौन-से ट्रीटमेंट जरूरी हैं।
  • आप छोटा बदलाव, बड़ा बदलाव या लुक बदलने वाला कोई भी ट्रीटमेंट न करवाने का विकल्प चुन सकते हैं।

स्माइल एनालिसिस में क्या-क्या चेक होता है?

स्माइल एनालिसिस यानी मुस्कान की जांच में देखा जाता है कि आपके दांत, गम्स, होंठ और चेहरा साथ में कैसे काम करते और दिखते हैं। इसमें बाइट भी चेक होती है, यानी ऊपर और नीचे के दांत कैसे मिलते हैं। सिर्फ लुक देखकर यह नहीं बताया जा सकता कि कोई बदलाव आरामदायक या सुरक्षित होगा।

स्माइल प्लान बनाने के लिए पहले क्लिनिक में या वीडियो पर बातचीत और शुरुआती जांच जरूरी है। वीडियो पर आप अपनी परेशानी और संभावित विकल्पों पर बात कर सकते हैं। लेकिन उससे दांतों की सड़न, गम्स की बीमारी या बाइट की पूरी जांच नहीं हो सकती। ट्रीटमेंट फाइनल करने से पहले क्लिनिक में जांच जरूरी है।

शुरुआत की स्थिति रिकॉर्ड करने के लिए फोटो, स्कैन या दांतों के नाप लिए जा सकते हैं। एक्स-रे तभी किए जाते हैं जब जांच के बाद उनकी जरूरत लगे, सिर्फ इसलिए नहीं कि वे किसी कॉस्मेटिक पैकेज में शामिल हैं।

  • आपकी परेशानी: आप क्या बदलना चाहते हैं और क्या वैसा ही रखना चाहते हैं।
  • दांतों का रंग, आकार, लंबाई, टूटे किनारे, घिसाव और पहले से हुआ डेंटल काम।
  • दांतों के बीच गैप, भीड़ या एक-दूसरे पर चढ़े दांत और हर दांत की जगह।
  • गम्स की सेहत, उनके किनारों की ऊंचाई और मुस्कुराते समय कितने गम्स दिखते हैं।
  • बोलते और मुस्कुराते समय होंठों की हलचल और दांतों का दिखना।
  • काटते समय दांतों का संपर्क, चबाने में आराम, जबड़े की परेशानी और दांत पीसना।
  • सफाई की आदतें, तंबाकू का इस्तेमाल और आगे के चेकअप के लिए आ पाने की सुविधा।

स्माइल मेकओवर से पहले मुंह की सेहत चेक करना क्यों जरूरी है?

लुक बदलने वाला कॉस्मेटिक काम शुरू करने से पहले गम्स की सेहत और मुंह की किसी भी बीमारी की जांच जरूरी है। सड़न, गम्स की सूजन, हिलते दांत, इन्फेक्शन या मुंह में बिना साफ वजह के हुए बदलाव का पहले ट्रीटमेंट करना पड़ सकता है। दांत को ढक देने से उसके नीचे की हर परेशानी दूर नहीं होती।

बिना साफ वजह के अल्सर यानी छाले, धब्बे, जलन या मुंह के दूसरे लक्षण हों तो ओरल मेडिसिन की जांच की जरूरत हो सकती है। ओरल मेडिसिन में मुंह की बीमारियों और उनसे जुड़े चेहरे के लक्षणों की जांच होती है। कॉस्मेटिक प्लानिंग की वजह से इनकी जांच में देरी नहीं होनी चाहिए।

नीचे दिए किसी भी चेतावनी वाले लक्षण पर जल्द क्लिनिक में जांच करवाएं। इनका मतलब हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होता, लेकिन सिर्फ फोटो देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी या तेजी से बढ़ती सूजन हो तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें।

  • मुंह का ऐसा अल्सर जो दो हफ्ते बाद भी ठीक न हुआ हो।
  • मुंह या गर्दन में नई गांठ या ऐसी गांठ जो बनी रहे।
  • होंठ, ठुड्डी या मुंह के किसी और हिस्से में बिना साफ वजह के सुन्नपन।
  • बिना साफ वजह के खून आना।
  • मुंह खोलने या निगलने में परेशानी।
  • लाल या सफेद धब्बा जो बना रहे।

पर्सनलाइज़्ड स्माइल मेकओवर कैसे होता है?

मेकओवर में सिर्फ एक छोटा काम हो सकता है या कई चरणों में ट्रीटमेंट हो सकता है। हर किसी के लिए एक ही क्रम सही नहीं होता। यह मुंह की सेहत, दांतों की जगह और आपके चुने हुए बदलावों पर निर्भर करता है।

डिजिटल प्रीव्यू यानी स्क्रीन पर संभावित लुक, या कुछ समय के लिए लगाया गया ट्रायल आकार, प्लान समझने में मदद कर सकता है। यह समझाने का तरीका है, नतीजे का वादा नहीं। आपके होंठ, बाइट, दांतों का नेचुरल रंग और ट्रीटमेंट की सीमाएं आखिरी लुक पर असर डाल सकती हैं।

  • स्टेप 1 — अपनी पसंद बताएं। जरूरत हो तो उदाहरण की फोटो लाएं, लेकिन बिल्कुल वैसी कॉपी मांगने के बजाय बताएं कि उसमें आपको क्या पसंद है।
  • स्टेप 2 — मुंह की जांच करवाएं। दांत, गम्स, मुंह की अंदरूनी परत, बाइट और किसी भी लक्षण को चेक किया जाता है।
  • स्टेप 3 — पहले बीमारी पर ध्यान दें। पसंद से करवाए जाने वाले कॉस्मेटिक काम से पहले समस्याओं का ट्रीटमेंट या उन्हें कंट्रोल करना जरूरी है।
  • स्टेप 4 — विकल्प समझें। कुछ न बदलने, छोटे बदलाव और ज्यादा काम वाले विकल्पों पर बात करें।
  • स्टेप 5 — सुझाया गया लुक देखें। दांतों का आकार, रंग और नेचुरल दांत का कितना हिस्सा बदलना पड़ेगा, यह समझें।
  • स्टेप 6 — ट्रीटमेंट के चरण तय करें। कितनी विज़िट लग सकती हैं, ठीक होने में क्या उम्मीद रखें, देखभाल और खर्च किन बातों पर निर्भर होगा, यह पूछें।
  • स्टेप 7 — चुना हुआ ट्रीटमेंट करवाएं। फिटिंग, आराम, लुक और सफाई करने की जगह दोबारा चेक होती है।
  • स्टेप 8 — आगे की जांच और देखभाल जारी रखें। फॉलो-अप पर जाएं। कोई परेशानी हो तो अगले नियमित चेकअप का इंतजार न करें।

स्माइल मेकओवर में कौन-से ट्रीटमेंट हो सकते हैं?

ट्रीटमेंट परेशानी की वजह के हिसाब से होना चाहिए। सिर्फ रंग की समस्या होने पर दांतों को ढकना जरूरी नहीं है। भीड़ वाले दांतों को सीधा दिखाने के लिए घिसने के बजाय उनकी जगह बदलने की जरूरत हो सकती है।

दांत का स्वस्थ हिस्सा बचाना प्लानिंग का जरूरी लक्ष्य है। पूछें कि सुझाए गए काम में मटेरियल जोड़ा जाएगा, दांतों की जगह बदलेगी या दांत का कुछ हिस्सा हटेगा। इन बदलावों के लंबे समय के असर अलग होते हैं।

  • प्रोफेशनल क्लीनिंग: दांतों पर जमी परत और कुछ ऊपरी दाग हटाती है। इससे हर दांत का अंदरूनी रंग नहीं बदलता।
  • दांतों की व्हाइटनिंग: सही क्लिनिकल देखरेख में नेचुरल दांतों का रंग हल्का करती है। पहले से लगे क्राउन और फिलिंग उसी तरह सफेद नहीं होते।
  • बॉन्डिंग: छोटे टूटे हिस्से या गैप जैसी चुनी हुई जगहों पर दांत के रंग का डेंटल मटेरियल जोड़ा जाता है। इस पर दाग लग सकते हैं और यह घिस या टूट सकता है।
  • विनीयर: चुने हुए दांतों के सामने लगाई जाने वाली पतली परतें। कुछ तरह के विनीयर के लिए इनेमल यानी दांत की सख्त बाहरी परत का कुछ हिस्सा हटाना पड़ता है।
  • क्राउन: दांत को चारों ओर से ढकने वाली कैप। कमजोर दांत के लिए यह सही हो सकता है, लेकिन इसमें आम तौर पर विनीयर से ज्यादा दांत घिसना पड़ता है।
  • ब्रेसेस या क्लियर अलाइनर: दांतों को खिसकाकर उनकी जगह सुधारते हैं। बाद में आम तौर पर रिटेनर चाहिए, जो दांतों को नई जगह पर बनाए रखने में मदद करता है।
  • गम्स का ट्रीटमेंट या आकार बदलना: वजह की जांच के बाद गम्स की सेहत या लुक से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए किया जा सकता है।
  • गायब दांत की जगह नया दांत: मुंह और सहारा देने वाले हिस्सों की स्थिति के हिसाब से ब्रिज, इम्प्लांट या निकालकर पहनने वाले दांत का विकल्प हो सकता है।

स्माइल मेकओवर किसके लिए सही है और किसे रुकना चाहिए?

अपनी परेशानी साफ बता सकने वाले और ट्रीटमेंट की सीमाएं समझने वाले वयस्कों के लिए पर्सनलाइज़्ड प्लानिंग मददगार हो सकती है। स्वस्थ दांत और गम्स, दांतों पर संभालने लायक दबाव और नियमित सफाई लंबे समय की देखभाल में मदद करते हैं। कभी-कभी छोटा बदलाव ही काफी होता है।

कुछ लोगों को बीमारी या दूसरी परेशानी ठीक होने तक कॉस्मेटिक काम टालना चाहिए। कुछ को अलग विकल्प चाहिए क्योंकि उनके दांत, गम्स या बाइट सुझाए गए बदलाव को सुरक्षित तरीके से संभाल नहीं सकते। कोई विकल्प सही है या नहीं, यह उस ट्रीटमेंट पर निर्भर करता है, मार्केटिंग के नाम पर नहीं।

बच्चों और किशोरों में बढ़ती उम्र और दांतों के विकास को ध्यान में रखकर प्लान बनता है। ऐसे कॉस्मेटिक बदलावों में खास सावधानी चाहिए जिन्हें वापस नहीं किया जा सकता। किसी सेलिब्रिटी या फिल्टर वाली फोटो जैसा दिखने का दबाव हो तो भी रुककर उम्मीदों पर बात करना जरूरी है।

  • मौजूदा सड़न, गम्स की बीमारी या मुंह में बिना साफ वजह के घाव या बदलाव पर पहले ध्यान देना जरूरी है।
  • बहुत ज्यादा दांत पीसने या गंभीर घिसाव की जांच, आसानी से टूट सकने वाली परतें या मटेरियल लगाने से पहले जरूरी है।
  • कम इनेमल, बड़ी फिलिंग या मुश्किल बाइट में कुछ तरह के विनीयर सही नहीं हो सकते।
  • ठीक से सफाई न कर पाना या देखभाल के लिए क्लिनिक आने में परेशानी होने पर ज्यादा जटिल काम सही नहीं हो सकता।
  • हमेशा रहने वाले, बिना देखभाल के चलने वाले या बिल्कुल सेलिब्रिटी जैसे नतीजे की उम्मीद सही शुरुआत नहीं है।

स्माइल मेकओवर में कैसा महसूस होता है और क्या जोखिम हैं?

शुरुआती जांच में आम तौर पर मुंह देखना, हल्के हाथ से चेक करना, फोटो और कभी-कभी स्कैन या नाप लेना शामिल होता है। अगर मुंह में कुछ रखने पर आसानी से उबकाई आती है, तो स्कैन या नाप लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। घबराहट, जबड़े में दर्द या मुंह खुला रखने में परेशानी हो तो टीम को बताएं।

ट्रीटमेंट में कैसा महसूस होगा, यह किए जाने वाले काम पर निर्भर करता है। दांत खिसकाने से दबाव या दर्द हो सकता है। व्हाइटनिंग या दांत घिसकर तैयार करने से ठंडा-गरम लगने की संवेदनशीलता हो सकती है। गम्स के काम के बाद ठीक होने के दौरान दर्द और सूजन हो सकती है।

ट्रीटमेंट से पहले संभावित तकलीफ और उसे संभालने के तरीकों पर बात करें। दर्द या सूजन बनी रहे, काटते समय कोई दांत ऊंचा लगे या लगी हुई परत या कैप ढीली हो जाए, तो क्लिनिक में जांच जरूरी है।

  • हटाया गया इनेमल वापस नहीं आता। घिसकर तैयार किए गए दांत की फिलिंग या कैप जैसे काम की आगे भी देखभाल करनी पड़ सकती है।
  • विनीयर, बॉन्डिंग और क्राउन टूट, ढीले या घिस सकते हैं और उन्हें बदलना पड़ सकता है।
  • तैयार किए गए दांतों में लंबे समय तक संवेदनशीलता या दांत के अंदर के नरम हिस्से में परेशानी हो सकती है।
  • खराब फिटिंग वाले या मुश्किल से साफ होने वाले किनारों के पास गम्स में जलन और दांत में सड़न हो सकती है।
  • दांत का आकार बदलने से बोलने या काटने में फर्क पड़ सकता है और एडजस्टमेंट की जरूरत हो सकती है।
  • समय के साथ नेचुरल दांत और फिलिंग या क्राउन जैसी चीजों का रंग अलग-अलग तरह से बदल सकता है।
  • स्माइल मेकओवर से जबड़े का दर्द या सिरदर्द ठीक होने की गारंटी नहीं है।

स्माइल मेकओवर कितने समय चलता है और देखभाल कैसे करें?

हॉलीवुड स्माइल कितने समय रहेगी, इसका एक जवाब नहीं है क्योंकि यह एक ट्रीटमेंट नहीं है। व्हाइटनिंग का असर कम हो सकता है, बॉन्डिंग में मरम्मत लग सकती है और विनीयर या क्राउन आगे चलकर बदलने पड़ सकते हैं। दांतों को नई जगह पर बनाए रखने का सही इंतजाम न हो तो वे कुछ हद तक वापस खिसक सकते हैं।

काम कितने समय चलेगा, यह दांतों की शुरुआती स्थिति, बाइट, सफाई, आदतों और किए गए काम पर निर्भर करता है। किसी भी फिलिंग, कैप या दूसरे डेंटल काम को हमेशा चलने वाला नहीं बताना चाहिए। मरम्मत या बदलने के दौरान नीचे के दांत पर और ट्रीटमेंट करना पड़ सकता है।

अपने चुने हुए काम के हिसाब से देखभाल का प्लान मांगें। आगे के चेकअप में सिर्फ मुस्कान की चमक नहीं, बल्कि सेहत और दांतों के ठीक से काम करने को भी चेक करना चाहिए।

  • हल्के हाथ से ब्रश करें और अपने डेंटल काम के लिए सही तरीके से दांतों के बीच सफाई करें।
  • मुंह की सेहत के हिसाब से डॉक्टर के बताए अंतराल पर चेकअप करवाएं।
  • सख्त चीजें काटने, दांतों से पैकेट खोलने या बर्फ चबाने से बचें।
  • आपकी जरूरत के लिए बताया गया हो तो रिटेनर या दांतों की सुरक्षा वाला उपकरण इस्तेमाल करें।
  • तंबाकू और सुपारी वाले प्रोडक्ट, जिनमें गुटखा भी शामिल है, से बचें।
  • बार-बार दाग लगाने वाले खाने-पीने की चीजों पर बात करें। यह न मानें कि हर दाग के लिए दोबारा ट्रीटमेंट जरूरी है।
  • नई संवेदनशीलता, गम्स से खून, खुरदरे किनारे, ढीलापन या बाइट में बदलाव हो तो बताएं।

स्माइल मेकओवर का खर्च किन बातों पर निर्भर है और क्या पूछें?

खर्च जांच में मिली समस्या और तय किए गए काम पर निर्भर करता है, सिर्फ “हॉलीवुड स्माइल” नाम पर नहीं। लिखित में पूछें कि क्या शामिल है, क्या आपकी पसंद पर है और किन बातों से अतिरिक्त खर्च हो सकता है। शुरुआती काम के साथ लंबे समय की देखभाल का खर्च भी मायने रखता है।

अगर आप ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर से मुंबई आते हैं, तो विज़िट की प्लानिंग भी जरूरी है। शुरुआती सवालों के लिए वीडियो पर बात मदद कर सकती है। लेकिन जांच, ट्रीटमेंट और जरूरी एडजस्टमेंट के लिए क्लिनिक आना पड़ेगा।

दांतों का कोई एक रंग, आकार या लंबाई-चौड़ाई का अनुपात हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। अच्छा प्लान अपनी सीमाएं समझाता है, आपकी पसंद का ध्यान रखता है और फैसला लेने का समय देता है। ऐसा काम करवाने की सहमति देने से पहले समझें कि क्या बदलेगा जिसे वापस नहीं किया जा सकता।

  • खर्च की वजहें: कितने दांतों पर काम होगा, ट्रीटमेंट का प्रकार, मटेरियल और लैब का काम।
  • दूसरी वजहें: बीमारी का ट्रीटमेंट, दांतों की जगह बदलना, गायब दांत और काम की जटिलता।
  • आगे के खर्च: चेकअप, मरम्मत, रिटेनर, सुरक्षा वाले उपकरण और भविष्य में बदलना।
  • पूछें: क्या मेरी परेशानी दांत में कम बदलाव करके ठीक हो सकती है?
  • पूछें: कौन-से बदलाव वापस नहीं हो सकते और बदलाव पसंद न आए तो क्या होगा?
  • पूछें: कुछ न करवाने सहित दूसरे विकल्प क्या हैं?
  • पूछें: कौन-से फॉलो-अप शामिल हैं और अचानक कोई परेशानी आए तो उसे कैसे संभाला जाएगा?

Questions people ask

क्या हॉलीवुड स्माइल के लिए विनीयर जरूरी हैं?

नहीं। यह नाम एक लुक बताता है, कोई जरूरी ट्रीटमेंट नहीं। परेशानी के हिसाब से क्लीनिंग, व्हाइटनिंग, बॉन्डिंग, दांतों की जगह बदलना या इनमें से एक से ज्यादा विकल्प चुने जा सकते हैं।

क्या बहुत सफेद दांत करवाए बिना स्माइल मेकओवर हो सकता है?

हां। आप अपने लिए सही लगने वाले रंग और आकार पर बात कर सकते हैं। पर्सनलाइज़्ड प्लान में हर दांत को एक जैसा बनाने के बजाय आपकी नेचुरल पहचान बनाए रखी जा सकती है।

क्या स्वस्थ दांत भी घिसने पड़ेंगे?

जरूरी नहीं। कुछ विकल्पों में दांत का आकार घिसकर बदले बिना मटेरियल जोड़ा जाता है या दांतों की जगह बदली जाती है। विनीयर और क्राउन के लिए दांत का कुछ हिस्सा हटाना पड़ सकता है। इसलिए साफ पूछें कि क्या किया जाएगा और क्यों।

क्या सेल्फी देखकर स्माइल मेकओवर का प्लान बन सकता है?

सेल्फी से बातचीत शुरू हो सकती है, लेकिन छिपी सड़न, गम्स का सहारा या काटते समय दांतों का संपर्क नहीं पता चलता। वीडियो पर शुरुआती प्लानिंग की दिशा समझी जा सकती है। ट्रीटमेंट फाइनल करने से पहले क्लिनिक में जांच जरूरी है।

क्या स्माइल मेकओवर एक विज़िट में हो सकता है?

कुछ छोटे बदलाव एक विज़िट में हो सकते हैं। बीमारी का ट्रीटमेंट, लैब में बनने वाले क्राउन या विनीयर जैसे काम और दांतों की जगह बदलने में कई चरण लग सकते हैं। समय जांच और ट्रीटमेंट की जरूरत के हिसाब से तय होना चाहिए, किसी तय डेडलाइन के हिसाब से नहीं।

क्या डिजिटल स्माइल प्रीव्यू जैसा ही आखिरी नतीजा मिलेगा?

नहीं। प्रीव्यू आपकी पसंद समझने में मदद करता है। दांतों का असली रंग, गम्स की प्रतिक्रिया, होंठों की हलचल, मटेरियल और बाइट की जरूरतों की वजह से आखिरी नतीजा फोटो से अलग हो सकता है।

क्या विनीयर लगने के बाद कैविटी नहीं होती?

ऐसा नहीं है। दांत में फिर भी कैविटी यानी सड़न हो सकती है, विनीयर के किनारों के पास भी। बाहर से दांत चिकने और चमकदार दिखें, तब भी रोज सफाई और डेंटल चेकअप जरूरी हैं।

क्या स्माइल मेकओवर से पहले गम्स से खून आने का ट्रीटमेंट जरूरी है?

हां। खून आने को कॉस्मेटिक काम से छिपाने के बजाय उसकी जांच जरूरी है। पहले गम्स की सेहत और मुंह की दूसरी बीमारियों को चेक करना चाहिए। बिना साफ वजह के खून आए तो क्लिनिक में जांच जरूरी है।

Every smile is different. The right option is decided after an in-person check of your teeth, gums and bite — no online assessment or advance payment needed to book.