Smile Analysis and Enhancement · 10 min read · हिन्दी
स्माइल बेहतर करवाने से पहले और बाद में मुंह और गम्स की देखभाल कैसे करें?
स्माइल बेहतर करवाने से पहले दांतों की हल्के हाथ से सफाई करें, गम्स यानी मसूड़ों का चेकअप कराएं और मुंह की किसी भी बीमारी का पहले ट्रीटमेंट कराएं। बाद में ट्रीटमेंट किए गए दांतों का ध्यान रखें, सावधानी से सफाई जारी रखें और फॉलो-अप चेकअप पर जाएं। स्माइल को लेकर बातचीत सामने बैठकर या वीडियो पर शुरू हो सकती है, लेकिन दिखावट बेहतर करने वाले कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर को सामने से दिखाना जरूरी है।
Written and medically reviewed by
Dr. Bipin R. Upadhyay
BDS · MDS Oral Medicine & Radiology · PhD Scholar · Associate Professor & Head, Department of Dentistry
Last clinically reviewed: 2026-10-06
Key points
- बातचीत सामने बैठकर या वीडियो पर शुरू करें, लेकिन ट्रीटमेंट से पहले सामने से चेकअप जरूर कराएं।
- कॉस्मेटिक काम से पहले गम्स की सेहत जांचें और सड़न या मुंह की बीमारी का ट्रीटमेंट कराएं।
- सेहत, चबाने-बोलने में आराम, आगे की देखभाल और वास्तविक उम्मीदों के आधार पर विकल्प चुनें।
- हल्के हाथ से सफाई और फॉलो-अप चेकअप प्राकृतिक दांतों और कॉस्मेटिक काम, दोनों को बचाने में मदद करते हैं।
- दो हफ्ते से ज्यादा रहने वाला अल्सर, गांठ, सुन्नपन, बिना साफ कारण खून आना या मुंह खोलने अथवा निगलने में परेशानी हो तो सामने से जांच जरूरी है।
स्माइल चेकअप में क्या देखा जाता है?
स्माइल चेकअप में देखा जाता है कि आपके दांत, गम्स, होंठ और चेहरा आपस में कैसे तालमेल रखते हैं। यह भी जांचा जाता है कि आप आराम से काट-चबा सकते हैं, बोल सकते हैं और दांत साफ कर सकते हैं या नहीं। मकसद आपकी परेशानी समझना है, हर किसी की स्माइल को एक जैसा बनाना नहीं।
स्माइल को लेकर बातचीत सामने बैठकर या वीडियो पर शुरू हो सकती है। वीडियो पर आप अपनी उम्मीदें और संभावित विकल्प समझ सकते हैं। लेकिन कॉस्मेटिक काम से पहले गम्स की सेहत, दांतों की सड़न या मुंह की बीमारी जांचने के लिए सामने से किया गया चेकअप जरूरी है। वीडियो उसकी जगह नहीं ले सकता।
- दांत: रंग, शेप, आकार, गैप, टेढ़े-मेढ़े या आपस में चढ़े दांत, दरारें, घिसाव और पहले हुई रिपेयर।
- गम्स: खून आना, सूजन, गम्स की किनारी कहां है और मुस्कुराने पर कितने गम्स दिखते हैं।
- बाइट: ऊपर और नीचे के दांत कैसे मिलते हैं और क्या कुछ दांतों पर ज्यादा दबाव पड़ता है।
- मुंह की सेहत: अल्सर यानी छाले, धब्बे, सूखापन, दर्द और होंठ, जीभ या गाल की अंदरूनी परत में बदलाव।
- आपकी प्राथमिकताएं: आपको किस बात से परेशानी है, क्या वैसा ही रखना चाहते हैं और आगे कितनी देखभाल कर सकते हैं।
स्माइल ट्रीटमेंट से पहले गम्स और मुंह की बीमारी जांचना क्यों जरूरी है?
सेहतमंद गम्स कॉस्मेटिक काम के लिए ज्यादा स्थिर आधार देते हैं। सूजे हुए गम्स से खून आ सकता है और ठीक होते समय उनका शेप बदल सकता है। सूजन ठीक होने से पहले फाइनल कॉस्मेटिक रिपेयर करने पर किनारे ऊंचे-नीचे रह सकते हैं या ऐसी जगह बन सकती है जहां खाना फंसे।
डेंटिस्ट प्लाक यानी दांतों पर जमने वाली चिपचिपी परत और सख्त जमे मैल की जांच करते हैं। वे सड़न, इन्फेक्शन, हिलते दांत और गम्स की बीमारी भी देखते हैं। गम्स की बीमारी दांतों को थामने वाली हड्डी पर असर डाल सकती है। एक्स-रे तभी किया जाता है जब चेकअप में उसकी जरूरत दिखे, हर स्माइल की परेशानी में अपने-आप नहीं।
ऐसा अल्सर या धब्बा जिसका कारण साफ न हो, स्माइल प्लानिंग के दौरान छिपाना या नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। इसके लिए ओरल मेडिसिन की जांच जरूरी हो सकती है। इस क्षेत्र में मुंह की बीमारियों की जांच होती है। कभी-कभी कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले बायोप्सी जरूरी होती है। इसमें प्रभावित हिस्से से छोटा-सा सैंपल लेकर जांच की जाती है।
- गम्स से खून आए तो जांच कराएं, ज्यादा जोर से ब्रश न करें।
- लगातार बदबू, हिलते दांत या खाना फंसना किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।
- मुंह सूखने और बार-बार दांत सड़ने पर दिखावट बदलने से पहले बचाव की देखभाल जरूरी हो सकती है।
- मुंह में कोई नया या बदलता हुआ असामान्य हिस्सा दिखे तो अपनी पसंद से करवाए जाने वाले कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से पहले उसका कारण पता करना जरूरी है।
ट्रीटमेंट से पहले मुंह और दांतों की तैयारी कैसे करें?
ऐसी सफाई की आदत से शुरुआत करें जिसे ट्रीटमेंट के बाद भी जारी रख सकें। मुलायम ब्रिसल वाले ब्रश से हल्के हाथ से सफाई करने से दांतों और गम्स को बचाने में मदद मिलती है। डेंटिस्ट दांतों के बीच सफाई का तरीका दिखा सकते हैं। वे ऐसे साधन चुनने में भी मदद कर सकते हैं जो गम्स को चोट पहुंचाए बिना सही तरह इस्तेमाल हो सकें।
डेंटिस्ट को अपनी बीमारियों, एलर्जी, प्रेग्नेंसी, पहले हुई दांतों की परेशानियों और चल रहे मेडिकल ट्रीटमेंट या सप्लीमेंट के इस्तेमाल के बारे में बताएं। चल रहे ट्रीटमेंट में कोई बदलाव करने से पहले उसे लिखने वाले डॉक्टर से बात करना जरूरी है। तंबाकू, गुटखा, पान या सुपारी के इस्तेमाल और दांत पीसने की आदत के बारे में भी बताएं। इनसे ट्रीटमेंट की सुरक्षा और प्लानिंग पर असर पड़ सकता है।
- फाइनल कॉस्मेटिक काम से पहले गम्स की जरूरी देखभाल और दांतों की सड़न का ट्रीटमेंट पूरा होना चाहिए।
- दांत सफेद करने के लिए खट्टी चीजों, चारकोल या खुरदरे पाउडर वाले घरेलू तरीके न अपनाएं। ये दांतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या गम्स में जलन कर सकते हैं।
- मीठे स्नैक्स, एसिड वाले ड्रिंक्स और मुंह के सूखेपन के बारे में डेंटिस्ट से बात करें, ताकि बचाव की देखभाल आपके जोखिम के हिसाब से हो।
- पुराने डेंटल रिकॉर्ड हों तो साथ लाएं और साफ बताएं कि आप क्या बदलाव चाहते हैं।
- शादी या किसी कार्यक्रम के करीब ट्रीटमेंट बुक करने से पहले ठीक होने के समय और फॉलो-अप चेकअप पर बात करें।
- तंबाकू और सुपारी छोड़ने के लिए मदद मांगें। बिना तंबाकू वाली सुपारी भी इसमें शामिल है।
स्माइल बेहतर करने का प्लान कैसे बनता है?
स्माइल बेहतर करना कोई एक प्रोसीजर नहीं है। इसमें केवल सफाई, छोटी रिपेयर, दांतों को सही जगह लाना या कई चरण शामिल हो सकते हैं। अच्छी बातचीत में कोई कॉस्मेटिक बदलाव न करवाने का विकल्प भी शामिल होता है।
- स्टेप 1 — अपनी उम्मीदें बताएं: आपकी परेशानी रंग, शेप, गैप, टेढ़े-मेढ़े दांत या गम्स की किनारी से जुड़ी है, यह समझाएं।
- स्टेप 2 — मुंह की सेहत जांचें: डेंटिस्ट दांत, गम्स, मुंह की अंदरूनी परत और बाइट जांचते हैं। जरूरत के हिसाब से फोटो, स्कैन, दांतों की छाप या एक्स-रे सुझाए जा सकते हैं।
- स्टेप 3 — मौजूदा समस्याओं का ट्रीटमेंट करें: गम्स की सूजन, सड़न, इन्फेक्शन और मुंह में ऐसे बदलाव जिनका कारण साफ नहीं है, पहले देखे जाते हैं।
- स्टेप 4 — विकल्प समझें: हर विकल्प क्या बदल सकता है, क्या नहीं बदल सकता और क्या दांत का स्वस्थ हिस्सा हटाना पड़ेगा, इस पर बात करें।
- स्टेप 5 — जरूरत हो तो पहले झलक देखें: फोटो, डिजिटल प्रीव्यू या कुछ समय के लिए ट्रायल शेप से बातचीत में मदद मिल सकती है। ये प्लानिंग के साधन हैं, नतीजे का वादा नहीं।
- स्टेप 6 — तय किया गया ट्रीटमेंट कराएं: ट्रीटमेंट कई चरणों में हो सकता है। बीच में आराम, बाइट और सफाई के लिए पहुंच की जांच होती है।
- स्टेप 7 — चेकअप और आगे की देखभाल: फाइनल प्लान में घर पर देखभाल, फॉलो-अप चेकअप और आगे संभव रिपेयर की जानकारी होनी चाहिए।
स्माइल के लिए कौन-से ट्रीटमेंट हैं और उनमें कैसा महसूस होता है?
पहले उस सही विकल्प पर बात करना बेहतर है जिसमें सबसे कम काट-छांट करनी पड़े। दांत का स्वस्थ हिस्सा हटाने पर उसे आम तौर पर वापस नहीं लाया जा सकता। हर प्रोसीजर हर दांत या स्माइल से जुड़ी हर परेशानी के लिए सही नहीं होता।
- क्लिनिक में सफाई: जमा मैल और सतह के दाग हटाने के बाद दांत दोबारा जांचे जाते हैं। जिनकी मुख्य परेशानी दाग हैं, उनके लिए यह सही हो सकता है। कंपन या थोड़ी देर के लिए झनझनाहट महसूस हो सकती है। इससे दांत का अंदरूनी प्राकृतिक रंग नहीं बदलता।
- डेंटिस्ट की निगरानी में व्हाइटनिंग: दांतों का रंग हल्का करने का तरीका चुनने से पहले रंग बदलने का कारण जांचा जाता है। इससे प्राकृतिक दांत हल्के हो सकते हैं, लेकिन पुरानी फिलिंग, क्राउन या दांत के सामने लगने वाली परत यानी विनियर का रंग हल्का नहीं होता। कुछ समय के लिए झनझनाहट और गम्स में जलन हो सकती है।
- बॉन्डिंग: दांत के रंग का मटेरियल उस पर लगाकर शेप दिया जाता है और पॉलिश की जाती है। यह हल्का टूटा कोना, शेप में छोटा बदलाव या कुछ तरह के गैप के लिए सही हो सकता है। इसमें अक्सर दांत की कम घिसाई होती है। लेकिन मटेरियल पर दाग पड़ सकते हैं, उसका टुकड़ा टूट सकता है या रिपेयर की जरूरत पड़ सकती है।
- विनियर या क्राउन: विनियर दांत की सामने की सतह को ढकता है। क्राउन दांत के ज्यादा हिस्से को ढकने वाली कैप है। इनमें प्लानिंग, जरूरत पड़ने पर दांत की शेप बदलना, फिटिंग और बाइट चेकअप शामिल हैं। ये शेप के कुछ बदलावों या खराब दांतों के लिए सही हो सकते हैं, लेकिन स्वस्थ दांतों पर इनकी जरूरत अपने-आप नहीं मान लेनी चाहिए।
- ब्रेसेस या क्लियर अलाइनर: दांतों पर लगे हिस्से या निकालकर पहनने वाली पारदर्शी ट्रे धीरे-धीरे दांतों को सही जगह लाते हैं। बीच-बीच में प्रगति जांची जाती है। गम्स का सहारा ठीक हो तो ये टेढ़े-मेढ़े दांतों या गैप के लिए सही हो सकते हैं। दबाव और कुछ समय तक दर्द या संवेदनशीलता आम है। बाद में आम तौर पर रिटेनर चाहिए होता है। यह दांतों को नई जगह पर बनाए रखने वाला उपकरण है।
- गम्स की शेप बदलना: पहले गम्स का दांतों और सहारा देने वाली हड्डी से संबंध जांचा जाता है। फिर चुने हुए हिस्से की शेप बदली जाती है। यह ऊंचे-नीचे या ज्यादा दिखने वाले गम्स के कुछ ही कारणों में सही होता है। दर्द और सूजन हो सकती है। फाइनल दिखावट कब जांची जा सकती है, यह ठीक होने पर निर्भर करता है।
किसे कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट टालना या दोबारा सोचना चाहिए?
गम्स की बीमारी, बिना ट्रीटमेंट की सड़न, इन्फेक्शन या मुंह में किसी अनजान कारण से बदलाव हो तो आम तौर पर कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट रोका जाता है। ठीक से सफाई न हो पाना, बहुत ज्यादा सूखापन और काबू में न आने वाली दांत पीसने की आदत भी समस्या का जोखिम बढ़ा सकती है। फाइनल प्लान से पहले इन पर ध्यान देना जरूरी है।
बच्चों और किशोरों के लिए अलग तरीका जरूरी हो सकता है, क्योंकि उनके दांत और जबड़े अभी बढ़ रहे होते हैं। प्रेग्नेंसी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में चर्चा करें, ताकि तय हो सके कि अपनी पसंद का कॉस्मेटिक काम कुछ समय टाला जा सकता है या नहीं। इसका मतलब यह नहीं है कि जरूरी डेंटल केयर से बचना चाहिए।
आपकी उम्मीदें भी मायने रखती हैं। किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो से यह नहीं पता चलता कि आपके मुंह के लिए क्या सुरक्षित या संभव है। अगर सुझाए गए बदलाव के लिए दांत का काफी स्वस्थ हिस्सा हटाना पड़े, तो कम काट-छांट वाले विकल्प और लंबे समय के असर के बारे में पूछें।
- केवल व्हाइटनिंग से टेढ़े-मेढ़े दांत, दरारें या असमान शेप ठीक नहीं होती।
- बॉन्डिंग या विनियर से बाइट की हर समस्या को सुरक्षित तरीके से छिपाया नहीं जा सकता।
- गम्स की शेप बदलने से मुस्कुराते समय ज्यादा गम्स दिखने का हर कारण ठीक नहीं होता।
- कॉस्मेटिक रिपेयर अंदर मौजूद गम्स की बीमारी का ट्रीटमेंट नहीं करती और आगे दांत सड़ने से नहीं रोकती।
स्माइल ट्रीटमेंट के बाद मुंह और गम्स का ध्यान कैसे रखें?
बाद की देखभाल इस बात पर निर्भर करती है कि कौन-सा प्रोसीजर हुआ है। क्लिनिक से निकलने से पहले पूछें कि किन हिस्सों को सामान्य तरीके से साफ कर सकते हैं, क्या ट्रीटमेंट वाले हिस्से को बचाकर रखना है और अगला चेकअप कब जरूरी है। गम्स की सर्जरी या कुछ समय के लिए लगाई गई डेंटल रिपेयर के बाद घर की देखभाल के लिखित निर्देश खास तौर पर मदद करते हैं।
जब सामान्य सफाई की अनुमति मिल जाए, तब गम्स की किनारी और दांतों के बीच हल्के हाथ से सफाई जरूरी है। विनियर, क्राउन और बॉन्डिंग के बाद भी सावधानी से सफाई करनी होती है। आसपास के दांत और गम्स में समस्या हो सकती है। दांतों के बीच खुरदरी या बहुत तंग जगह के कारण सफाई रुक रही हो तो जोर न लगाएं, डेंटिस्ट से जांच कराएं।
- मुंह सुन्न हो तो चबाना और गर्म ड्रिंक्स पीना सुरक्षित नहीं हो सकता। इनसे पहले सामान्य एहसास लौटना चाहिए।
- दांतों या गम्स में दर्द हो तो नरम खाना ज्यादा आरामदायक लग सकता है। सख्त चीजें, बर्फ या पैकेट दांतों से काटने पर दांत और रिपेयर खराब हो सकते हैं।
- नई रिपेयर को बार-बार जोर से काटकर जांचने से नुकसान हो सकता है। बाइट ऊंची-नीची लगे तो चेकअप कराएं।
- निकालकर पहनने वाले उपकरणों की सफाई का तरीका डेंटल टीम से सीखें। गर्मी से उनका शेप और फिट बदल सकता है।
- रिटेनर या दांतों को बचाने वाले उपकरण की जरूरत है या नहीं, डेंटिस्ट तय करते हैं और उसकी फिटिंग जांचते हैं।
- तंबाकू और सुपारी से बचें। छोड़ने में मुश्किल हो तो डेंटिस्ट को बताएं, ताकि मदद की व्यवस्था हो सके।
- नतीजा अच्छा दिखे तब भी फॉलो-अप जरूरी है। छोटे टूटे हिस्से, गम्स की सूजन और बाइट की समस्याएं जल्दी पकड़ में आएं तो उन्हें ठीक करना आसान हो सकता है।
स्माइल ट्रीटमेंट का असर कब तक रहता है और खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?
नतीजे हमेशा के लिए नहीं होते और उनकी गारंटी नहीं होती। दाग लौटने पर व्हाइटनिंग का असर कम हो सकता है। बॉन्डिंग में पॉलिश या रिपेयर की जरूरत पड़ सकती है। विनियर और क्राउन भी टूट सकते हैं, ढीले हो सकते हैं या बदलने पड़ सकते हैं। इन्हें बदलने की तारीख पहले से मान लेने के बजाय उनकी हालत जांचना जरूरी है।
सही जगह लाए गए दांत दोबारा खिसक सकते हैं, अगर उन्हें नई जगह पर बनाए रखने का सही प्लान न हो। ठीक होने, सूजन, उम्र बढ़ने या गम्स पीछे हटने से उनकी दिखावट बदल सकती है। गम्स पीछे हटने का मतलब है कि उनकी किनारी खिसकने से दांत का ज्यादा हिस्सा खुलने लगता है। सफाई, खान-पान, दांत पीसना, चबाने का दबाव और फॉलो-अप, सभी असर डालते हैं कि किया गया काम कितने समय तक आरामदायक और उपयोगी रहता है।
जोखिम में झनझनाहट, जलन, छोटे टुकड़े टूटना, रंग मेल न खाना, खाना फंसना और बाइट में असुविधा शामिल हैं। दांत की ऐसी घिसाई जिसे वापस नहीं किया जा सकता, आगे लगातार रिपेयर या उसे ढकने की जरूरत पैदा कर सकती है। सहमति देने से पहले इन सीमाओं पर बात करें, केवल ट्रीटमेंट के बाद नहीं।
- खर्च दांतों की संख्या, ट्रीटमेंट के प्रकार और उसकी जटिलता पर निर्भर करता है।
- गम्स की देखभाल, सड़न का ट्रीटमेंट, जरूरत के अनुसार एक्स-रे या स्कैन और स्पेशलिस्ट की सलाह के लिए अलग चरण हो सकते हैं।
- लैब का काम, कुछ समय के लिए लगाई गई रिपेयर, रिटेनर और सुरक्षा वाले उपकरण कुल खर्च पर असर डाल सकते हैं।
- पूछें कि लिखित खर्च के अनुमान में क्या शामिल है और चेकअप, रिपेयर या आगे बदलने की जरूरत कैसे संभाली जाएगी।
किन लक्षणों में डॉक्टर को सामने से दिखाना जरूरी है?
कुछ प्रोसीजर के बाद हल्का दर्द या छूने पर तकलीफ हो सकती है। लेकिन बढ़ते या बने रहने वाले लक्षणों को सामान्य आदत पड़ने की प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज न करें। दर्द बढ़े, रिपेयर ढीली हो या बाइट गलत लगे तो ट्रीटमेंट करने वाले डेंटिस्ट से संपर्क करें।
मुंबई, ठाणे, अंबरनाथ, बदलापुर या उल्हासनगर में फॉलो-अप ऐसी जगह प्लान करें जहां आप आसानी से पहुंच सकें। वीडियो पर बातचीत से मदद मिल सकती है, लेकिन चेतावनी वाले लक्षणों में सामने से जांच जरूरी है।
- अल्सर या छाला जो दो हफ्ते के भीतर ठीक न हुआ हो।
- गांठ, नया सुन्नपन, बिना साफ कारण खून आना या बना रहने वाला लाल या सफेद धब्बा।
- मुंह खोलने या निगलने में नई या बढ़ती परेशानी।
- बढ़ती सूजन, बुखार, तेज दर्द या दांत अथवा गम्स के आसपास से मवाद या तरल निकलना।
- चेहरे या गर्दन की तेजी से फैलती सूजन, सांस लेने में परेशानी या लार भी न निगल पाना: तुरंत इमरजेंसी केयर लें।
Questions people ask
गम्स से खून आता है तो क्या स्माइल ट्रीटमेंट करवा सकते हैं?
पहले खून आने की जांच जरूरी है। कॉस्मेटिक काम से पहले गम्स की देखभाल और सफाई के तरीके में सुधार की जरूरत हो सकती है। सूजन ठीक होने के बाद गम्स की किनारी की स्थिति दोबारा जांचनी चाहिए।
क्या वीडियो कंसल्टेशन से स्माइल का पूरा प्लान बन सकता है?
इससे बातचीत शुरू हो सकती है और आपकी उम्मीदें समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन ट्रीटमेंट से पहले गम्स, दांत, बाइट और मुंह की अंदरूनी परत की जांच सामने से करना जरूरी है।
ट्रीटमेंट के बाद गम्स दुखें तो क्या ब्रश बंद कर देना चाहिए?
दर्द का मतलब यह नहीं कि पूरे मुंह की सफाई बंद कर दें। ठीक हो रहे हिस्से में सफाई का अलग तरीका जरूरी हो सकता है। डेंटिस्ट सही तरीका दिखा सकते हैं। दर्द बना रहे या बढ़े तो जांच जरूरी है।
क्या व्हाइटनिंग से पुरानी फिलिंग का रंग भी बदलेगा?
नहीं। पुरानी फिलिंग, विनियर और क्राउन प्राकृतिक दांतों की तरह हल्के नहीं होते। सबका रंग मेल खाएगा, ऐसा मानने के बजाय व्हाइटनिंग से पहले रंग के संभावित फर्क पर बात करें।
क्या ट्रीटमेंट के तुरंत बाद सामान्य खाना खा सकते हैं?
यह प्रोसीजर, सुन्नपन और कुछ समय के लिए लगाई गई रिपेयर पर निर्भर करता है। ट्रीटमेंट करने वाले डेंटिस्ट को खाने की सावधानियां समझानी चाहिए। मुंह सुन्न होने पर चबाने से होंठ, गाल या जीभ को चोट लग सकती है।
क्या विनियर लगने के बाद दांतों में सड़न नहीं होगी?
ऐसा नहीं है। नीचे का दांत और किनारों के आसपास के हिस्से अब भी सड़ सकते हैं। सावधानी से सफाई और नियमित डेंटल चेकअप जरूरी रहते हैं।
दांत की नई शेप अजीब लगे तो क्या करें?
नई शेप शुरुआत में अनजानी लग सकती है। लेकिन बोलने में लगातार परेशानी, खाना फंसना, नुकीला किनारा या ऊंची-नीची बाइट हो तो डेंटिस्ट से चेकअप कराएं। खुद से उसे ठीक करने की कोशिश न करें।
दांत स्वस्थ हैं तो क्या कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट जरूरी है?
जरूरी नहीं। दिखावट बदलवाना आपकी पसंद है। कंसल्टेशन से आप छोटा बदलाव, ज्यादा काम वाला प्रोसीजर या अपनी प्राकृतिक स्माइल बनाए रखने के विकल्प समझ सकते हैं।
This page is general information, not a diagnosis. A mouth problem needs to be looked at in person or on video before anyone can tell you what it is.